General Competition | Science | Chemistry (रसायन विज्ञान) | अधातु और उनका महत्वपूर्ण यौगिक

प्रकृति में 22 ऐसे तत्व हैं जो धातु के समान व्यवहार नहीं करते हैं जिनके कारण इन्हें अधातु माना जाता है।

General Competition | Science | Chemistry (रसायन विज्ञान) | अधातु और उनका महत्वपूर्ण यौगिक

General Competition | Science | Chemistry (रसायन विज्ञान) | अधातु और उनका महत्वपूर्ण यौगिक

  • प्रकृति में 22 ऐसे तत्व हैं जो धातु के समान व्यवहार नहीं करते हैं जिनके कारण इन्हें अधातु माना जाता है।
  • कमरे के ताप पर अधिकांश धातु या तो ठोस हैं अथवा गैस । Br (ब्रोमीन) एक मात्र अधातु है जो द्रव के रूप में पाया जाता है ।
    • प्रमुख गैसीय अधातुः - छः अक्रिय गैस, F (फ्लोरीन ), CI (क्लोरीन ), नाइट्रोजन (N), ऑक्सीजन, (O) हाइड्रोजन (H)।
    • प्रमुख ठोस अधातुः- B (विस्मय), C (कार्बन), Si (सीलीकन), P (फॉस्फोरस), As (आर्सेनिक), S (सल्फर), 1 (आयोडीन)।
Physical Properties of Non-Metals: (अधातु के भौतिक गुण)
  1. अधातु के सतह पर कोई चमक नहीं होती है। ग्रेफाइट तथा आयोडीन इसका अपवाद है जिसमें धातु के तरह चमक पाया जाता है ।
  2. अधातु न तो अघातवर्ध्य होते हैं, न ही तन्य । चोट मारने पर अधातु चकनाचूर हो जाता है।
  3. अधातु उष्मा तथा विद्युत के कुचालक होते हैं ।
    • H (हाइड्रोजन) अधातु है परन्तु यह उष्मा का सुचालक है।
    • ग्रेफाइट अधातु है परन्तु यह विद्युत का सुचालक है।
  4. अधातु प्रायः कठोर नहीं होते हैं, ये नरमक होते हैं। हीरा अपवाद हैं जो अधातु होते हैं बहुत कठोर होता है।
  5. अधातु के द्रवणांक (Melting Point) तथा क्वथनांक (Boiling Point) बहुत ही कम होते हैं।
  6. अधातु में इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋण आवेशित आयन बनाने की प्रवृत्ति पायी जाती है।
Chemical Properties of Non-Metal (अधातु के रसायनिक गुण)
  1. अधातु ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर ऑक्साइड बनाता है-
    C + O2 → CO2
    S + O2 → SO2 
    • अधातु के ऑक्साइड प्रायः अम्लीय होते है। कार्बन मोनोक्साइड (CO) तथा नाइट्रीक ऑक्साइड (N2O) दो ऐसे ऑक्साइड हैं जो न तो अम्लीय हैं न ही क्षारीय ।
  2. धातु के तरह अधातु तनु अम्ल के साथ अभिक्रिया कर H2 gas नहीं . बनाता है।
    C + 2 H2SO4 → CO2 + 2SO2 + 2H2O
  3. अधातु क्लोरीन के साथ अभिक्रिया कर क्लोराइड बनाता है। अधातु के क्लोराइड वाष्पशील प्रकृति के होते हैं-
    2S + Cl2 → S2Cl2
                                  (Disulphar dichloride)
  4. अधातु हाइड्रोजन के साथ अभिक्रिया कर कई महत्वपूर्ण हाइड्राइड का निर्माण करते हैं।
    N2 + 3H2 → 2NH3
    H2 + S → H2S
    2H2 + O2 → 2H2O

प्रमुख अधातु

1. हाइड्रोजन (H2)
  • हाइड्रोजन का आविष्कार 1766 में हेनरी कैंवेडिश ने किया था तथा इसका नामकरण लवासिये ने किया था ।
  • हाइड्रोजन रंगहीन, गंधहीन, स्वादहीन तथा एक उदासीन गैस है। हाइड्रोजन सभी ज्ञात तत्वों में सबसे हल्की है। हल्की होने के कारण यह पृथ्वी के वायुमंडल में न के बराबर पायी जाती है ।
  • हाइड्रोजन के गुण वर्ग-1 के क्षारधातु तथा वर्ग -17 दोनों जगह स्थान दिया गया है जिसके कारण आज भी आवर्त्त सारणी में हाइड्रोजन का स्थान विवादित है ।
  • हाइड्रोजन द्विपरमाणुक (H2) अणु है। हाइड्रोजन परमाणु के नाभिक में सिर्फ 1 प्रोटॉन रहता है, न्यूट्रॉन नहीं और इसकी कक्षा में सिर्फ 1 इलेक्ट्रॉन रहता है।
  • प्रयोगशाला में दानेदार जस्ता तथा तनु सल्फ्यूरिक अम्ल की प्रतिक्रिया से H2 gas बनाया जाता है ।
    Zn + H2SO4 → ZnSO4 + H2
    इस अभिक्रिया में शुद्ध जस्ता का इस्तेमाल नहीं किया जाता है क्योंकि शुद्ध जस्ता H2SO4 बहुत ही धीमी गति से अभिक्रिया करता है और न ही सांद्र H2SO4 का इस्तेमाल होता है, सांद्र H2SO4 के प्रयोग से H2 gas के जगह SO2 गैस बनने लगता है।
  • हाइड्रोजन गैस बनाने की अद्योगिक विधिः-
    1. जब 998°C पर लाल तत्य कोक पर अति तत्प भाफ प्रवाहित किया जाता है तो जल गैस बनता है। बाद में जल गैस से H2 gas अलग कर लिया जाता है ।

    2. अतितप्त भाफ को 1023 - 073K ताप पर गर्म लोहे के ऊपर प्रवाहित किया जाता है तो लौह ऑकसाइड तथा H2 gas बनता है। यह विधि लेन की विधि कहलाता है।
      3Fe + 4 H2O → Fe3O4 + H2
    3.  जल का विद्युत अपघटन करने पर H2 gas कैथोड पर तथा O2 gas एनोड पर मुक्त हो जाता है।
  • तेल का हाइड्रोजिनीकरणः- मूँगफली या नारियल के तेल जैसे वनस्पति तेल से होकर निकेल उत्प्रेरक की उपस्थिति में 473K ताप पर हाइड्रोजन गैस प्रवाहित किया जाता है तो तेल ठोस वसा के रूप में परिवर्तित हो जाता है । इस विधि से असंतृप्त वसा संतृप्त वसा में परिवर्तित हो जाता है । 

  • हाइड्रोजन का अधिधारणः- प्लैटिनम तथा पैलेडियम जैसे धातु अपने आयतन का लगभग 1000 गुणा अधिक हाइड्रोजन को अवशोषित करने की क्षमता रखता है। इस प्रक्रिया को हाइड्रोजन का अधिधारण कहते हैं तथा अवशोषित हाइड्रोजन को अधिधारित हाइड्रोजन कहते हैं। पुनः धातु को गर्म करके हाइड्रोजन गैस बाहर निकाल लिया जाता है। अधिधारित हाइड्रोजन सामान्य हाइड्रोजन की तुलना में अधिक क्रियाशील रहता है।
  • हाइड्रोजन का उपयोग ईंधन के रूप में सकता है क्योंकि-
    1. हाइड्रोजन का उष्मीय मान सभी ज्ञात ईंधन में सबसे ज्यादा है। यह पेट्रोल के तुलना में 3 गुणा अधिक ऊर्जा दे सकता है ।
    2. हाइड्रोजन के दहन से हानिकारक गैस नहीं बनता है बल्कि जल बनता है I
      H2 + ½O2 → H2O + ऊर्जा
    3. हाइड्रोजन का सबसे बड़ा स्त्रोत जल है जो कि नवीकरणीय ऊर्जा के स्त्रोत हैं इस क्षेत्र में निरंतर अनुसंधान हो रहा है ताकि ईधन के रूप में हाइड्रोजन का इस्तेमाल हो सके जिसके कारण हाइड्रोजन को भविष्य का ईधन कहते हैं।
  • ईधन के रूप में हाइड्रोजन के इस्तेमाल में सबसे बड़ी समस्या हाइड्रोजन के भंडारण में है क्योंकि हाइड्रोजन ज्वलनशील गैस है और वायु के ऑक्सीजन के साथ यह विस्फोटक मिश्रण बनाता है ।

जल (H2O)

  • जल हाइड्रोजन का प्रमुख यौगिक है। ऑक्सीजन के बाद पृथ्वी पर जीवन के लिए सबसे जरूरी पदार्थ जल है । मानव शरीर के लिए सबसे जरूरी पदार्थ जल है। मानव शरीर का भी दो-तिहाई भाग जल से ही बना है ।
  • जल का हिमांक, क्वथनांक, काफी उच्च होते हैं इसका कारण है कि जल के अणु के बीच H - बंधन पाया जाता है ।
  • अन्य द्रवों के तुलना में जल की विशिष्ट उष्मा, उष्मीय चालकता, पृष्ठ तनाव उच्च होते हैं यही कारण है कि शरीर का ताप तथा जलवायु अनुकूल बने रहते हैं ।
  • जल को विश्वव्यापी विलायक माना जाता है क्योंकि जल का Dielectric Constant बहुत उच्च ( लगभग 80 ) होता है ।
  • जल का अणु की आकृति V आकार का होता है तथा बंधन कोण का मान 105° होता है।
  • जल का घनत्व 4°C पर अधिकतम होता है इसके निम्न कारण हैं-
    - जब जल को 0°C से गर्म करते हैं तो जल के H-बंधन टूटते हैं इस कारण जल के अणु परस्पर निकट आते हैं और घनत्व बढ़ने लगता है और 4°C पर अधिकतम हो जाता है। 4°C से ताप बढ़ने पर H - बंधन टूटने के कारण द्रव प्रसार होने से उसके आयतन में वृद्धि आयतन में होने वाली कमी से ज्यादा प्रभावकारी हो जाता है और घनत्व घटने लगता है।
    Note:-4°C ताप जल का घनत्व अधिकतम तथा आयतन न्यूनतम हो जाता है।
  • कठोर एवं मृदु जलः– वर्षा का जल शुद्ध होता है, शुद्ध जल को मृदु जल ( Soft water) कहते हैं। जब जल में कैल्शीयम, मैग्नीशियम जैसे लवण घुलते हैं तो इस जल को कठोर जल (Hard water) कहते हैं। जल की कठोरता दो प्रकार की होती है।
    1. अस्थायी कठोरता:- जल की कठोरता कैल्शीयम तथा मैग्नीशियम के बाइकर्बोनेट के कारण होता है तो इसे अस्थायी कठोरता है। अस्थायी कठोरता सिर्फ जल को उबाल देने से दूर हो जाता है।
      • अस्थायी कठोरता दूर करने हेतु क्लार्क विधि भी अपनाया जाता है जिसमें बिना बुझा हुआ चूना (CaO) का उपयोग होता है।
    2. स्थायी कठोरता:- जल की कठोरता जब कैल्शीयम मैग्नीशियम के क्लोराइड और सल्फेट के कारण होता है तो इसे स्थायी कठोरता कहते हैं ।
  • स्थायी कठोरता दूर करने हेतु सोडा - विधि केलगॉन विधि, परमुटिट विधि अपनाया जाता है।
  • सोडा विधि में सोडियम कार्बोनेट, केलगॉन विधि में सोडियम हेक्सामेटा फॉस्फेट [Na (Na4P6O18)] तथा परमुटिट विधि में जियोलाइट का उपयोग होता है।
2. सिलीनकॉन (Si)
  • पृथ्वी पर ऑक्सीजन के बाद सर्वाधिक उपलब्ध तत्व सिलिकॉन ही है ।
    भू-पर्पटी पर उपलब्ध विभिन्न धातुओं की प्रतिशतता-
    ऑक्सीजन- 46.71% 
    सिलिकन - 27.69%
    ऐलुमिनियम - 8.07%
    लोहा - 5.05%
  • सिलिका- सिलिकन हाई ऑक्साइड (SiO2) को ही सिलिका कहा जाता है। सिलिका प्रकृति में क्वार्ट्ज खनिज के रूप में पाया जाता है। क्वार्ट्ज के चूर्णीत रूप को ही बालू या रेत कहते हैं ।
  • सिलिकन के यौगिक सिलिकन कर्बाइड (SiC) को कृत्रिम हीरा या कार्बोरेण्डम कहा जाता है । सिलिकन कमठड भी हीरा के समान अत्यंत कठोर होता है।
  • सिलिकन अर्थचालक होते हैं जिसके कारण इसका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग तथा कम्प्यूटर उद्योग में व्यापक रूप से होता है।
  • SiO44- युक्त खनिज को सिलिकेट कहते हैं। प्रकृति में कई सिलिकेट खनिज पाये जाते हैं जिनमें फेल्डस्पार, जियोलाइट, अबरख (Mica) एस्वेस्टस मुख्य है। मानव द्वारा निर्मित दो महत्वपूर्ण सिलिकेट काँच तथा सीमेंट है।
3. कार्बन (C)
वर्ग संख्या- 14
परमाणु संख्या - 6
घनत्व - 2.25g/cm3
आवर्त्त संख्या- 2
परमाणु द्रव्यमान - 12.0115
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास- 2, 4
  • कार्बन पृथ्वी पर का एक अद्वितीय तत्व है जैव जगत में जितने भी यौगिक पाये जाते हैं उनमें कार्बन अवश्य पाये जाते हैं। 
  • कार्बन रवेदार (Crystalline) तथा वेरेवेदार (amorphous ) दोनों ही रूप में पाया जाता है कार्बन के विभिन्न रूप को जिनके रसायनिक गुण समान तथा भौतिक गुण में अन्तर रहता है, कार्बन के अपरूप कहलाता | कार्बन के प्रमुख अपरूप-

  • हीरा (Diamond) - हीरे की संरचना नियमित चतुष्फलक होती है। इसी संरचना के कारण हीरे के द्रव्णांक तथा क्वथनांक उच्च होते हैं। हीरा में C-C बंधन लंबाई 154 pm होती है। हीरा कठोर होता है क्योंकि इसमें C-C बंधन शक्ति काफी मजबूत होती है।
    • हीरा में कोई मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं पाया जाता है जिसके कारण हीरा ताप तथा विद्युत का कुचालक होता है। हीरा के भार का मापन कैरेट में किया जाता है।
    • ग्रेफाइट: - ग्रेफाइट की संरचना षट्कोणीय जालक ( hexagonal lattice) की तरह होती है। ग्रेफाइट की सतह एक दूसरे से कमजोर बल द्वारा बंधी रहती है तथा एक-दूसरे के ऊपर फसील सकती है। इसी कारण ग्रेफाइट मुलायम और स्नेहक होता है।
    • ग्रेफाइट के संरचना में तीन संयोजी इलेक्ट्रॉन ही बंधन में भाग लेते हैं चौथा इलेक्ट्रॉन मुक्त रहता है यही कारण है कि ग्रेफाइट उष्मा और विद्युत का सुचालक होता है ।
  • ग्रेफाइट का उपयोग:- पेंसिल बनाने में, शुष्क सेल के एनोड बनाने में तथा स्नेहक के रूप में होता है ।
  • फुलेरीनः– फुलेरीन कार्बन के 60 परमाणु से मिलकर बना होता है। इसका खोज अमेरिका के इंजीनियर बकमिंस्टर फलर ने किया था अतः, इसे बकमिंस्टर फुलेरीन भी कहा जाता है। इसे Bucky Ball भी कहते हैं क्योंकि संरचना फुटबॉल के समान होती है।
    • ग्रेफाइट को जब अक्रिय हिलियम की उपस्थिति में विद्युत में गर्म किया जाता है तो फुलेरीन का निर्माण होता है। 
    • फुलेरीन पोटाशियम से अभिक्रिया कर पोटाशियम बकाइड का निर्माण करता है जो 18°C पर एक Super condcutor (अतिचालक) है।
      C60 + 3K → K3C60
  • चारकोल - सीमित वायु में लकड़ी या हड्डी को तीव्रता से गर्म करने पर चारकोल या अस्थि चारकोल का निर्माण होता है। चारकोल में कार्बन की मात्रा काफी अधिक होती है। इसका इस्तेमाल औद्योगिक ईंधन के रूप में बारूद बनाने में किया जाता है ।
    • अस्थि चारकोल का इस्तेमाल चीनी को रंगविहीन करने में किया जाता है।
  • कोक- उच्च कोटि के कोयले के भंजन - आसवन करने पर कोक का निर्माण होता है। कोक में 85 - 90% तक कार्बन रहता है । यह एक अच्छा ईधन है ।
    • भंजन आसवन (Destructive Distillation) सीमित वायु में किसी पदार्थ को तीव्रता से गर्म करने के प्रक्रिया को भंजन आसवन कहते हैं।
CO (कार्बन मोनोक्साइड)
  • CO गैस रंगहीन, स्वादहीन एवं विषैली गैस है। यह जल में अत्यन्त अल्प विलेय है। यह एक अच्छा अवकारक है।
  • कार्बन या कार्बन युक्त ईधन को हवा के अपर्याप्त मात्रा में जलाने पर CO गैस बनता है ।
    2C + O2 → 2CO
  • CO एक अत्यंत बिषैली गैस है। इस गैस की गंध लेने पर यह रक्त के हिमोग्लोबिन से मिलकर कर्बोक्सी हिमोग्लोबीन नामक एक लाल पदार्थ बनाता है जिससे रक्त में ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता समाप्त हो जाती है फलतः व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।
CO2 (कार्बन-डाई-ऑक्साइड) -
  • कार्बन या कार्बन युक्त ईंधन को वायु की पर्याप्त मात्रा में जलाने पर CO2 गैस बनता है। वायु की अपर्याप्त मात्रा रहने पर CO2 गैस के जगह CO गैस बनता है।
  • प्रयोगशाला में संगमरमर पर तनु HCI की अभिक्रिया से CO2 गैस बनता है—
    CaCO3 + 2HCl → CaCl2 + H2O + CO2
  • औद्योगिक रूप से CO2 का उत्पादन चूना पत्थर को जलाकर किया जाता है।
    CaCO3 → CaO + CO2
  • CO2 रंगहीन, स्वादहीन गैस यह विषैली नहीं होती है I
  • जल में यह कम विलेय है परन्तु दाब बढ़ाने पर जल में इसकी विलेयता बढ़ जाती है। सोडावाटर (शीतल पेय पदार्थ) में अधिक दाब पर CO2 गैस धुली रहती है।
  • CO2 गैस को जल में घुलाने पर इसके कुछ अणु जल से अभिक्रिया करके कार्बोनिक अम्ल (H2CO3) बना हैं।
    CO2 + H2O → H2CO3
  • CO2 बिषैली नहीं है। परन्तु जीवाश्म ईंधन के अधिक उपयोग, सीमेंट निर्माण में अत्यधिक CaCO3 के दहन से वायुमंडल में CO2 की मात्रा काफी बढ़ गयी है जिससे वायुमंडल के ताप में वृद्धि हो रही तथा इससे global warming का खतरा उत्पन्न हो गया है । 
  • शुष्क बर्फ (Dry Ice ) - 0°C और 40 atm CO2 गैस रंगहीन द्रव में परिणत हो जाता है । द्रव CO2 का वाष्पण करने पर इसका कुछ भाग बर्फ जैसे सफेद ठोस रूप मे जम जाता है जिसे शुष्क बर्फ या ड्रिकोल्ड कहते हैं । शुष्क बर्फ हवा में बिना पिघले ही वाष्प बन जाता है।
4. N2 (नाइट्रोजन) 
वर्ग संख्या - 15
परमाणु संख्या - 7
आवर्त्त संख्या- 2
परमाणु द्रव्यमान- 14
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास - 2, 5
  • नाइट्रोजन गैस वायुमंडल में सबसे अधिक मात्रा (लगभग 78%) में पायी जाने वाली गैस है। हल्की होने के कारण यह वायुमंडल के ऊपरी परत में पायी जाती है। वायुमंडल में नाइट्रोजन की उपस्थिति ज्वलन कम करता है। इस गैस के खोज का श्रेय रदरफोर्ड को है ।
  • जब सान्द्र अमोनिया विलयन को क्लोरीन से अभिक्रिया कराया जाता है तो N2 gas की प्राप्ति होती है-

    इस अभिक्रिया में अमोनिया की मात्रा बहुत अधिक होनी चाहिए अन्यथा NCl3 का निर्माण होने लगता है। NCl3 (नाइट्रोजन ट्राईक्लोराइड) नाइट्रोजन का एक विस्फोटक यौगिक है ।
  • उच्च ताप पर (लगभग 5000°C) नाइट्रोजन ऑक्सीजन से संयोग कर नाइट्रीक ऑक्साइड बनाता है।
    N2 + O2 → 2NO
    आकाश में बिजली चमकने पर NO का निर्माण होता है।
  • नाइट्रोजन काफी कठिनाई से द्रवित होता है । यह 33.5 atm दाब तथा 126K ताप पर द्रवीत हो जाता है । द्रवित नाइट्रोजन को 63K ठंडा करने पर ठोस बर्फ में बदल जाता है ।
  • नाइट्रोजन का उपयेग निम्न क्षेत्रों में होता है- 1. निष्क्रिय वातावरण उत्पन्न करने में, 2. इलेक्ट्रीक बल्व भरने में, . हाइटेम्परेचर थर्मामीटर के निर्माण में, 4. द्रव N2 का प्रयोग जैविक पदार्थों, तथा खाद्य सामग्री के लिये प्रशीतक के रूप में होता है, 5. N2 का उपयोग क्रायोसर्जरी में भी होता है ।
NH3 (अमोनिया)—
  • अमोनिया निर्माण हैबर विधि के द्वारा किया जाता है। हैबर विधि से अमोनिया निर्माण निम्न तरह से होता है-
    N2 + 3H2 → 2NH3 + 24000 कैलोरी
    यह अभिक्रिया उष्माक्षेपी तथा उत्क्रमणीय होता है।
  • हैबर विधि में निम्न ताप तथ उच्च दाब का होन आवश्यक है। अभिक्रिया के लिए अनुकूलतम ताप 773K तथा दाब 200am होता है।
  • हैबर विधि में उत्प्रेरक के रूप में निम्न में कोई एक का इस्तेमाल होता है-
    1. मॉलिक्डेनम की सूक्ष्म मात्रा युक्त लोहे का चूर्ण ।
    2. सोडा, सिलिका युक्त फेरिक ऑकसाइड 
    3. निकेल का चूर्ण
NH3 में निम्न गुण पाये जाते है-
  • यह रंगहीन तथा तीव्रगंध होने वाली गैस है ।
  • NH3 का जलीय विलयन क्षारीय होता है। I
  • NH3 हवा से हल्की होती है तथा यह जल में अत्यधिक विलेय है।
  • अमोनिया को असानी से द्रवित किया जा सकता है।
  • अमोनिया न तो स्वंग जलती है न ही दूसरे पदार्थ के जलने में सहायक होती है। ऑक्सीजन की अधिकता में यह पीली लॉ के साथ जलता है
  • अमोनिया का उपयोग नाइट्रोजनी उर्वरक जैसे - यूरिया के निर्माण में तथा प्रशीतक के तौर पर इस्तेमाल होता है। 
N2O (नाइट्रस ऑक्साइड)
  • प्रयोगशाला में NaNO3 या NH4CI को गर्म कर N2O का निर्माण होता है ।
    NH4NO3 → N2O + 2H2
  • N2O को हँसानेवाली गैस कहते हैं। इस गैस को सूँघते ही आदमी हँसते-हँसते मर जाता है।
HNO3 (नाइट्रीक अम्ल)
  • प्रयोगशाला में पोटाशियम नाइट्रेट या सोडियम नाइट्रेट की अभिक्रिया सल्फ्यूरिक अम्ल से कराने पर नाइट्रीक अम्ल बनाया जाता है।
    KNO3 + H2SO4 → KHSO4 + HNO3
    NaNO3 + H2SO4 → NaHSO4 + HNO3
  • पोटाशियम नाइट्रेट (KNO3) को साल्टपीटर तथा सोडियम नाइट्रेट को चिलीसाल्टपीटर भी कहते हैं।
  • HNO3 का निर्माण अद्योगिक स्तर पर ओस्टवाल्ड विधि के द्वारा होता है इस विधि में अमोनिया का उपयोग होता है । ओस्टवाल विधि में उत्प्रेरक के रूप में प्लैटिनम चूर्ण का उपयोग होता है I
  • शुद्ध नाइट्रीक अम्ल एक रंगहीन द्रव है। प्रकाश की उपस्थिति में अपघटित होता रहता है जिसके कारण इससे धूम ( Fumes) निकलने रहते हैं तथा इसमें तीव्र गंध होती है ।
HNO3 का उपयोग-
  1. इसका उपयोग मुख्य रूप से उर्वरक तथा विस्फोटक पदार्थ बनाने होता है।
  2. प्रयोगशाला में इसका उपयोग अभिकर्मक के रूप में होता है ।
  3. सिल्वर तथा गोल्ड धातु के शुद्धिकरण में HNO3 का इस्तेमाल होता है ।
  4. HNO3 का उपयोग विभिन्न धातु के नाइट्रेट बनाने में होता है जो फोटोग्राफी, रंगाई, छपाई आदि के काम आता है।
  5. HNO3 का उपयोग औषधि, इत्र, रंग, कृत्रिम रेशम बनाने में भी होता है ।
सघूम नाइट्रीक अम्ल (Fuming HNO3)
- सघूम नाइट्रीक अम्ल में HNO3 की प्रतिशतता 98% होती है तथा इसमें अधिक मात्रा में नाइट्रोजन परऑक्साइड घुली रहती है। नाइट्रोजन परऑक्साइड घुले होने के कारण इससे धूम ( Fumes) निकलते रहते हैं जिसके कारण इसे सक्षूम नाइट्रीक अम्ल कहते हैं ।
5. P4 (फॉस्फोरस)
वर्ग संख्या - 15
परमाणु संख्या - 15
घनत्व- 1.82 g/cm3
आवर्त्त संख्या - 3
परमाणु द्रव्यमान- 90.974
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास - 2, 8, 5
  • फॉस्फोरस दो ग्रीक शब्द फॉस तथा फोरस से बना है। फॉस का अर्थ होता है- प्रकाश, फोरस का अर्थ होता है धारण करने वाला। फॉस्फोरस का अर्थ होता है- प्रकाश धारण करने वाला ।
  • फॉस्फोरस अपरूपता प्रदर्शित करता है। फॉस्फोरस के मुख्य तीन अपरूप हैं-
    1. लाल फॉस्फोरस
    2. श्वेत फॉस्फोरस
    3. काला फॉस्फोरस 
श्वेत फॉस्फरस (P4)
  • श्वेत फॉस्फोरस, पारभासी तथा मोम के तरह ठोस होता है। यह विषैला होता है। श्वेत फॉस्फोरस जल में अविलेय है परन्तु CO2 में विलेय है। अंधकार में यह दीप्त (प्रकाशमान) होता है।
  • श्वेत फॉस्फोरस अत्यंत क्रियाशील होता है जिसके कारण इसे जल के अंदर सुरक्षित रखा जाता है। श्वेत फॉस्फोरस में लहसून की तरह गंध होती है।
लाल फॉस्फरेस (Red P4)
  • श्वेत फॉस्फोरस को आयोडीन (I2) या किसी अक्रिय गैस की उपस्थिति में लगभग 513K ताप पर गर्म करने पर लाल फॉस्फोरस बनता है। लाल फॉस्फोरस, श्वेत फॉस्फोरस से कम क्रियाशील है ।
  • लाल फॉस्फोरस गंधहीन, अविषैला तथा जल में अविलेय है।
  • दियासलाई उद्योग में पहले श्वेत फॉस्फोरस का उपयोग होता है। श्वेत फॉस्फोरस बिषैला होता है अतः अब दियासलाई उद्योग में लाल फॉस्फोरस का उपयोग किया जाता है।
  • फॉस्फोरस का उपयोग विस्फोटक बनाने में तथा चूहा मारने वाली दवा बनाने में किया जाता है I
फॉस्फीन (PH3)
  • श्वेत फॉस्फोरस को सान्द्र कॉस्टीक सोडा (NaOH) के साथ गर्म करने पर फॉस्फीन बनता है।
    P4 + 3NaOH + 3H2O → 2NaH2PO2 + PH3
  • फॉस्फीन रंगहीन होता है तथा इससे सड़ी मछली जैसी गंध आती है। यह बहुत ही बिषैला गैस इसका इस्तेमाल युद्ध में किया जाता है।
6. O2 (ऑक्सीजन)
वर्ग संख्या - 16
परमाणु संख्या - 4
घनत्व- 1.32
आवर्त्त संख्या- 2
परमाणु द्रव्यमान- 16
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास-
फॉस्फोरस
  • पृथ्वी पर सभी तत्वों के अपेक्षा ऑक्सीजन सबसे अधिक उपलब्ध है। भू-पर्पटी के द्रव्यमान के करीब 46.6% भाग ऑक्सीजन द्वारा निर्मित है। शुष्क वायु में आयतन के विचार से 21% O2 पाया जाता है।
  • ऑक्सीजन को प्राण वायु कहा जाता है जिसके खोज का श्रेय प्रीस्टले तथा शीले को है । लेवासिये ने इस गैस का नामांकरण ऑक्सीजन किया था ।
  • प्रयोगशाला में पोटाशियम क्लोरेट को 615K ताप पर मैंगनीज डाइ ऑक्साइड की उपस्थिति में ऑक्सीजन गैस बनायी जाती है।
    2KCIO3 + [MnO2] → 2KCl + 3O2 + [MnO2]
  • जल का विद्युत अपघटन करने पर H2 गैस कैथोड पर तथा Oएनोड पर प्राप्त होता है।
  • औद्योगिक स्तर O2 वायु से प्राप्त की जाती है। पहले वायु से CO2 तथा जलवाष्प को हटाया जाता है। शेष गैस को द्रवित कर आंशिक आसवन द्वारा N2 तथा O2 गैस प्राप्त किया जाता है I
  • ऑक्सीजन में अनुचुम्बकीय गुण पया जाता है। यह रंगहीन तथा गंधहीन होता है ।
  • ऑक्सीजन का उपयोग-
    1. गंभीर मरीजो को कृत्रिम श्वास देने हेतु अस्पताल में ऑक्सीजन गैस का उपयोग होता है। अस्पताल में कृत्रिम श्वास हेतु ऑक्सीजन तथा हिलियम गैस का प्रयोग होता है।
    2. कृत्रिम विधि से जल बनाने में O2 का प्रयोग किया जाता है।
    3. ऑक्सी-ऐसीटिलीन बेल्डींग के रूप में O2 का प्रयोग होता है । O2 का उपयोग ऑक्सीकारक के रूप में भी किया जाता है ।
    4. ऑक्सीजन को डायनामाइट में मिलाकर पत्थर की खाने में विघटन हेतु प्रयुक्त किया जाता है।
  • तत्व ऑक्साइड से संयोगकर ऑक्साइड बनाते हैं । ऑक्साइड अम्लीय क्षारीय या उदासीन होते हैं।
  • CO, N2O, NO, NO2 तथा SiO2 कम ताप पर उदासीन ऑक्साइड है परन्तु उच्च ताप पर अम्लीय ।
ओजोन (O3)
  • ओजोन ऑक्सीजन का एक अपरूप है। यह काफी क्रियशील है जिसके कारण यह लंबे समय तक वातावरण में नहीं रहता है । यह 20 km की ऊँचाई पर सूर्य की प्रकाश की उपस्थिति में वायुमंडलीय O2 से होती है ।
  • O3 (ओजोन) सड़ी मछली जैसी गंधवाली गैस है। द्रव अवस्था में इसका रंग गहरा नीला होता । ओजोन हवा से भारी है। यह जल में अल्प मात्रा में विलेय है तथा तारपीन के तेल में अधिक मात्रा में विलेय है। ठोस अवस्था में इसका रंग बैंगनी होता है। O3 को 250°C तक गर्म करने पर यह O2 में बदल जाता है ।
O3 का उपयोग-
  1. इसका उपयोग विरंजन के रूप में तेल मोम स्टार्च तथा कपड़ों के रंगों का विरंजन करने में किया जाता है ।
  2. इसका उपयोग किटाणु नाशक के रूप में किया जाता है।
  3. जल तथा वायु को शुद्ध करने में भी इसका प्रयोग किया जाता है।
  4. अनेक कार्बनिक यौगिकों के ऑक्सीकरण तथा अपघटन में भी इसका प्रयोग किया जाता है।
  5. इसका उपयोग सिल्क, कपूर तथा पोटाशियम परमैंगनेट के बनाने में भी किया जाता है। 
  • वायुमंडल का ओजोन परत सूर्य से आने वाली पाराबैगनी किरणों को रोकता है परन्तु क्लोरोफ्लोरो कार्बन (CFCI3) के कारण ओजोन परत का क्षरण हो रहा है।
7. S8 (सल्फर)
वर्ग संख्या - 16
परमाणु संख्या - 16
घनत्व - 2g g/cm3
आवर्त्त संख्या - 3
परमाणु द्रव्यमान - 32.06
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास - 2, 8, 6
फॉस्फोरस
  • सल्फर अधिकांशतः ज्वालामुखी पहाड़ों के पास पायी जाती है। सल्फर मुख्य रूप से अमेरिका, इटली, फ्रांस, रूस, जापान में पायी जाती है। कुछ स्थानों पर सल्फर जल में पायी जाती है। जैसे बद्रीनाथ में स्थित गर्म पानी के कुण्ड में सल्फर उपस्थित है। सल्फर युक्त जल में स्नान करने से कई प्रकार के चर्म रोग दूर होते हैं ।
SO2 (सल्फर डाई ऑक्साइड)
  • सल्फर को वायु (O2) में जलाने पर SO2 gas बनता है। SO2 गैस ज्वालामुखी से निकलने वाली मुख्य गैस है। SO2 गैस एक प्रदूषक गैस है जिसके प्रभाव से अम्ल वर्षा होती है तथा पेड़ की पत्तियाँ काली होकर झड़ जाती है।
  • SO2 गैस तीखी गंध वाली गैस है। 2 atm दाब पर यह गैस द्रवित हो जाता है। यह गैस जल में अतिविलेय है। जल में घुलकर यह सल्फ्यूरस अम्ल (H2SO3) बनाता है ।
  • SO2 गैस का उपयोग शर्करा (चीनी), तथा पेट्रोलियम के शोधन में, ऊन तथा रेशम के विरंजन में, तथा परिरक्षक के रूप में होता है।
  • द्रव SO2 का उपयोग विलयक के रूप में किया जाता है।
H2SO4 (सल्फ्यूरिक अम्ल)
  • किसी भी देश के रसायन उद्योग के प्रगति का अनुमान, देश में उत्पादित होने वाले H2SO4 के द्वारा लगाया जाता है। H2SO4 को रसायनों का सम्राट कहा जाता है।
  • सल्फ्यूरीक अम्ल तेल (Oily) जैसा रंगहीन द्रव है। यह एक तीव्र अम्ल है अगर यह त्वचा पर गिर जाये तो वहाँ दर्दनाक फोफले बन जाते हैं ।
  • सल्फरिक अम्ल का निर्माण सम्पर्क विधि (Contact Process) के द्वारा किया जाता है । सम्पर्क विधि में Pt तथा V2O, का उपयोग उत्प्रेरक के रूप में किया जाता है |
  • H2SO4 का उपयोग उर्वरक तथा विस्फोटक बनाने में होता है। H2SO4 प्रयोगशाला में काम आनेवाला प्रमुख अभिकर्मक है। H2SO4 का उपयोग पेट्रोलियम शोधन में उपमार्जक उद्योग में तथा संचालक बैटरी में होता है । 
  • सधूम्र सल्फ्यूरिक अम्ल - सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल SO3 गैस को अवशोषित कर सधूम्र (Fuming ) सल्फ्यूरिक अम्ल बनाता है।

8. हैलोजन (Halogens)
आवर्त्त साणी के वर्ग 17 में पाँच तत्व हैं- फ्लोरीन (9), क्लोरीन (17), ब्रोमीन (35), आयोडीन (53) तथा ऐस्टेटीन (At - 85) इन्हें हैलोजन के नाम से जाना जाता है ।
हैलोजन (Halogens) में Halos का अर्थ है- समुद्री लवण तथा gens का अर्थ पैदा करना, अतः Halogens का शाब्दीक अर्थ है लवण पैदा करने वाला।
  • वर्ग-17 के तत्व अत्यधिक विद्युत ऋणात्मक होते हैं जिनके कारण ये ततव में लवण बनाने की प्रवृत्ति अधिक होता है तथा इनके लवण समुद्रों में पाये जाते हैं । यही कारण है कि वर्ग-17 के तत्व को Halogens कहा जाता है।
  • ऐस्टेटीन (At - 89) एक रेडियो एक्टीव तत्व है। यह भू पर्पटी पर सबसे कम मात्रा में पाये जाने वाला तत्व है।
  • हैलोजन तत्वों में फ्लूओटीन (F) तथा क्लोरीन (CI) गैस है, ब्रोमीन द्रव है और आयोडीन ठोस है। ऐस्टेरीन रेडियो एक्टीव है।
  • सभी हैलोजन रंगीन होते हैं ।
  • F के गुण
    1. F हैलोजन तत्वों में सबसे ज्यादा भक्रियाशील है
    2. फ्लोरीन अक्रिय तत्व नीनॉन के A भी अभिक्रिया कर कई यौगिक का निर्माण करता है ।
    3. फ्लोरीन हाइड्रोजन के साथ साथ कर HF (हाइड्रोफ्लोरीक अम्ल) बनाता है। HF का नलीय विलयन एक प्रबल अम्ल है। इसका उपयोग कॉच पर लिखने हेतु किया जाता है । इस अम्ल में कांच घुल भी जाता है ।
  • Cl के गुण 
    1. क्लोरीन की खोज शीले ने 1774 ई० में किया था तथा 1810 डेवो ने यह सिॠ किया कि यह एक तत्व है तथा इसका नाम क्लोरीन रखा ।
    2. क्लोरीन का निर्माण डेकॉन विधि द्वारा किया जाता है। इस विधि में हाइड्रोजन क्लोराइड (HCI) गैस को क्यूप्रीक क्लोराइड (CuCl2) उत्प्रेरक की उपस्थिति में ऑक्सीजन द्वारा अक्सीकृत करते हैं जिससे CI गैस बनता है ।

    3. क्लोरीन एक तीव्र विरंजक है I यह गीले फूल, पत्तियों आदि का रंग उड़ा देता है I सर्वाधिक विरंजक अभिकर्मक के रूप में क्लोरीन का इस्तेमाल होता है ।
    4. क्लोरीन का उपयोग कीटाणुनाशक रूप में पेयजल के शुद्धिकरण में किया जाता है। 
    5. क्लोरीन गैस का इस्तेमाल फॉस्जीन तथा मस्टर्ड गैस बनाने में किया जाता है। दोनों ही गैस अत्यंत बिषैली है मस्टर्ड गैस का इस्तेमाल प्रथम विश्व युद्ध में भी किया गया था।
  • आयोडीन मानव शरीर के लिये आवश्यक तत्व है इसकी कमी घेंघा रोग होता है।
  • लेमेनेरिया समुद्री घास में प्रकृतिक रूप से आयोडीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
  • आयोडीन तथा ईथाईल एल्कोहल (C2H5OH) के मिश्रण को टिंचर आयोडीन कहते हैं, इसका इस्तेमाल जीवाणुनाशी के रूप में होता हैं ।
  • ऑसू गैस के लिये प्रयोग किये जाने वाले हथगोलो में अधिकतर क्लोरोएसीटोफिनोन नामक रसायन का उपयोग किया जाता है। इसके ब्रोमो एसीटोन तथा क्लोरो पिकटीन आदि रसायनिक पदार्थों का भी इस्तेमाल किया जाता है।
    आसू गैस- C10H5ClN2
  • सामान्य रूप से पुलिस भीड़ को तितर-बितर करने हेतु अमोनिया गैस का इस्तेमाल करता है । अमोनिया गैस भी तीव्र जलन पैदा करता है, परन्तु यह गैस पानी में घुलनशील होता है अतः पानी से धो लेने पर अमोनिया गैस का असर खत्म हो जाता है।
  • हैलोजन आपस में अभिक्रिया कर जिस यौगिक का निर्माण करता है उसे इन्टर हैलोजन यौगिक कहते हैं । इन्टर हैलोजन यौगिक में सहसयोंजन बंध पाये जाते हैं ।

                 

9. अक्रिय गैस या उत्कृष्ट गैस
  • आवर्त्त सारणी के वर्ग 18 में छ: तत्व हैं- हीलियम (He-2), निऑन (Ne-10), ऑर्गन (Ar - 18), क्रिप्टॉन (Kr-36), नेनॉन (Xe- 54) तथा रेडॉन (Rn - 86 ), इन्हें अक्रिय गैस कहा जाता है ।
  • यह सभी छः तत्व गैस अवस्था में पाये जाते हैं तथा रसायनिक दृष्टि से अक्रियाशील होते तथा केवल विशेष परिस्थितियों में ही रसायनिक अभिक्रिया में भाग लेते हैं ।
  • रेडॉन (Rn) को छोड़कर सभी गैस अल्प मात्रा वायुमंडल में पायी जाती है । वायुमंडल 1% मात्रा में अक्रिय गैस पाया जाता है जिसमें सबसे अधिक आर्गन (Ar ) पाये जाते हैं I
  • रेडॉन एक रेडियो एक्टीव तत्व भी है।
  • सभी अक्रिय गैस के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पूर्ण होते हैं अर्थात् इनके इनके सभी आर्बिटल पूर्णतः भरे होते हैं यही कारण है कि यह रसायनिक अभिक्रिया में भाग नहीं लेते हैं I
  • सभी अक्रिय गैस एक परमाणुक होता है अर्थात इनके एक अणु में केवल एक परमाणु होता है। सभी अक्रिय गैस रंगहीन, गंधहीन तथा स्वादहीन होता है तथा जल में अत्यधिक विलेय होते हैं ।
  • अक्रिय गैस रसायनिक अभिक्रिया में भाग नहीं लेते हैं परन्तु जेनॉन- फ्लोरीन के साथ मिलकर कुछ यौगिक का निर्माण करता है।
            Xe + F2 → XeF2
                                      जेनॉन डाईफ्लोराइड
हीलियम का उपयोग :
  1. हीलियम हाइड्रोजन के बाद सबसे हल्की गैस है। हल्की होने के कारण यह गुब्बारों, मौसम संबंधि कार्य में, तथा वायुयान के टायर भरने में काम आता है।
  2. हीलियम मात्र 4K ताप पर द्रवित हो जाता है अतः 4K से कम ताप उत्पन्न करने हेतु हीलियम का उपयोग होता है ।
  3. धातुओं को जोड़ने की प्रक्रिया में अक्रिय वातावरण उत्पन्न करने हेतु He का इस्तेमाल होता है।
निऑन का उपयोग :
  • निऑन गैस में निम्न दाब पर विद्युत प्रवाहित करने पर यह सिंदूर जैसे लाल रंग में चमकता है जिसके कारण इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के लैम्प, बल्व, ट्यूब लाईट, वायुयान को संकेत देने में तथा विज्ञापन के क्षेत्रों में किया जाता है।
ऑगर्न का उपयोग :
  1. विद्युत बल्व में आर्गन गैस ही भरी जाती है ऐसा करने से बल्व के तन्तु का आयु बढ़ जाता है। हीलियम के तरह इसका भी इस्तेमाल है। अक्रिय वातावरण उत्पन्न करने में किया जाता है । 
  2. ऑर्गन को नियोजन तथा मरकरी वाष्प के साथ मिलाकर विभिन्न प्रकार के आकर्षक रंग वाले ट्यूब लाईट में किया जाता है।
क्रिप्टॉन तथा नेनॉन का प्रयोग :
  1. ये गैस बहुत ही सूक्ष्म मात्रा में प्राप्त है जिसके कारण इसका ज्यादा उपयोग नहीं हो पाता फिर भी अगर विद्युत बल्व में ऑर्गन के जगह इस गैस का उपयोग किया जाए तो बल्व की आयु और बढ़ जायेगी ।
  2. आधुनिक फोटोग्राफी उपकरणों में Flash (दीप्ति) उत्पन्न करने हेतु इनका (क्रिप्टॉन या नेनॉन या दोनों) उपयोग होता है।
  • रेडॉन का उपयोग कैंसर के इलाज में तथा रेडियोएक्टीव शोध कार्यों में होता है ।

अभ्यास प्रश्न

1. ऐसे तत्व अधातु कहलाते हैं-
(a) जो धातु के समान व्यवहार नहीं करते हैं
(b) जो इलेक्ट्रॉन को ग्रहण कर ऋणायन बनाते हैं
(c) जो इलेक्ट्रॉन को त्याग कर धनायन बनाते हैं
(d) a तथा b दोनों
2. अधातुओं में धातु के समान चमक नहीं होती है, क्योंकि-
(a) अधातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं होते हैं
(b) अधातुओं में बहुत कम मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं
(c) अधातु ठोस नहीं होते हैं
(d) अधातु प्रकाश के प्रति निष्क्रिय होते हैं
3. अधातुओं के संबंध में निम्नलिखित में कौन-सा एक सही नहीं है-
(a) अधातु न तो आघातवर्ध्य और न ही तन्य होते हैं
(b) अधातु उष्मा के कुचालक होते हैं तथा यह विद्युत के भी कुचालक होते हैं
(c) अधातुओं का घनत्व, धातुओं के तुलना में ज्यादा होता है
(d) अधातुओं को जब धातु से प्रहार किया जाता है तो इससे किसी प्रकार की ध्वनि नहीं होता है
4. अधातु प्रायः कठोर नहीं होते हैं, परन्तु डायमंड अधातु होते हुए भी बहुत कठोर है, इसका कारण है-
(a) इसमें मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं पाये जाते हैं
(b) इसका एक प्लेन दूसरे प्लेन पर नहीं फिसल सकता है
(c) इसके परमाणुओं के बीच के बन्धन काफी शिथिल होते हैं
(d) इसमें लैटिश संरचना नहीं पायी जाती है
5. अधातुएँ क्यों विद्युत का चालन नहीं करती है ?
(a) इनमें धातुओं की भाँति मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं पाये जाते हैं।
(b) इनमें धातुओं की भाँति मुक्त इलेक्ट्रॉन पाये जाते हैं
(c) इनमें धातुओं की भाँति कोर इलेक्ट्रॉन नहीं पाये जाते हैं।
(d) इनमें धातुओं की भाँति कोर इलेक्ट्रॉन पाये जाते हैं
6. निम्नलिखित में किस पदार्थ के साथ अधातु की रसायनिक अभिक्रिया नहीं होती है ?
(a) ऑक्सीजन
(b) क्लोरीन
(c) जल
(d) अम्ल
7. अधातुएँ किसके समान आचरण करती है ?
(a) ऑक्सीकारक 
(b) अवकारक
(c) क्षारीय
(d) इनमें से कोई नहीं
8. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
1. अधातुएँ ऑक्सीजन के साथ संयोग कर अम्लीय ऑक्साइड बनाती है।
2. अधातुएँ कभी-भी क्षारीय ऑक्साइड नहीं बनाती है।
उपर्युक्त में कौन-सा/से कथन सही / हैं ?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 तथा 2 दोनों
(d) न तो 1 न ही 2
9. निम्नलिखित में कौन अधातु है ?
(a) Fe
(b) Cu
(c) Al
(d) CI
10. निम्नलिखित में कौन-सा एक सही नहीं है ?
(a) धातु और अधातु परस्पर अभिक्रिया करके आयनिक यौगिक का निर्माण करती है।
(b) अधातु और अधातु परस्पर अभिक्रिया करके सहसंयोजी यौगिक का निर्माण करती है।
(c) धातुएँ आपस में अभिक्रिया कर उपसहसंयोजी यौगिक का करती है
(d) इनमें से सभी
11.  निम्नलिखित में किसका द्रवणांक तथा क्वथनांक सर्वाधिक है ?
(a) फॉस्फोरस
(b) सल्फर 
(c) ऑक्सीजन
(d) ग्रेफाइट
12. निम्नलिखित में कौन न तो अम्लीय है और न ही क्षारीय ?
(a) कार्बन मोनोक्साइड (CO)
(b) नाइट्रस ऑक्साइड (N2O)
(c) नाइट्रिक ऑक्साइड (NO)
(d) इनमें से सभी
13. निम्नलिखित में से कौन गैस जल में घुलकर अम्लीय विलयन बनाती है ?
(a) कार्बन डाइऑक्साइड
(b) ऑक्सीजन
(c) हाइड्रोजन
(d) नाइट्रोजन
14. निम्नलिखित में से कौन-सा एक विद्युत ऋणात्मक तत्व ?
(a) मैग्नीशियम 
(b) क्लोरीन
(c) सोडियम
(d) पोटैशियम
15. कथन (A) : अधातुओं को इलेक्ट्रोनिगेटिव तत्व की संज्ञा दी जाती है।
कारण (R) : अधातुएँ इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ऋण आवेशित आयन बना सकती है।
(a) A और R दोनों सही है तथा R, A का सही स्पष्टीकरण है।
(b) A और R दोनों सही है किन्तु R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
(c) A सही है किन्तु R गलत है
(d) A गलत है किन्तु R सही है है
16. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
1. हाइड्रोजन का आविष्कार हेनरी कैवेंडिस ने किया था ।
2. हाइड्रोजन का नामकरण हेनरी बेसेमर ने किया।
3. हाइड्रोजन एक परमाणुक अणु है।
उपर्युक्त में कौन-सा/से कथन सही है/हैं
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3
17. हाइड्रोजन निम्नलिखित में से किससे समानता रखता है ? 
(a) क्षार धातु
(b) हैलोजन तत्व
(c) a तथा b दोनों
(d) क्षारीय मृदा धातु.
18. प्रयोगशाला में दानेदार जस्ता और तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के बीच अभिक्रिया कराने पर कौन-सी गैस उत्पन्न होती है ?
(a) हाइड्रोजन
(b) सल्फर डाइऑक्साइड
(c) कार्बन मोनोक्साइड
(d) ऑक्सीजन 
19. जब जस्ते की प्रतिक्रिया तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के बदले सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल से कराया जाता है, तो कौन-सी गैस उत्पन्न P होती है ?
(a) हाइड्रोजन 
(b) सल्फर डाइऑक्साइड
(c) कार्बन डाइऑक्साइड
(d) नाइट्रोजन
20. प्रयोगशाला में हाइड्रोजन गैस बनाने हेतु शुद्ध जस्ता का उपयोग नहीं किया जाता है। क्यों ?
(a) शुद्ध जस्ता तनु H2SO4 से अभिक्रिया नहीं करता है
(b) शुद्ध जस्ता तनु H2SO4 से अभिक्रिया काफी मंद गति से करता है
(c) शुद्ध जस्ता तनु H2SO4 से अभिक्रिया काफी तीव्र गति से करता है
(d) इनमें से कोई नहीं
21. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
1. सबसे हल्का तत्व हाइड्रोजन है
2. सबसे हल्की गैस हाइड्रोजन है
उपर्युक्त में कौन-सा /से कथन सही है/हैं ?
(a) केवल 
(b) केवल 2
1 (c) 1 तथा 2
(d) न तो 1 न ही 2
22. हाइड्रोजन के संबंध में निम्न में कौन-सा एक सही नहीं हैं ?
(a) यह रंगहीन, गंधहीन एवं स्वादहीन गैस है
(b) यह सबसे हल्का पदार्थ है
(c) यह एक उदासीन गैस है
(d) यह जल में अत्यधिक विलेय है
23. हाइड्रोजन को वायु में जलाने पर-
(a) जल का निर्माण होता है।
(b) कार्बन डाइऑक्साइड का निर्माण होता है
(c) नहीं जलता है क्योंकि हाइड्रोजन अदहनशील गैस है
(d) नाइट्रोजन का निर्माण होता है।
24. हाइड्रोजन के ऑक्साइड की प्रकृति होती है-
(a) अम्लीय
(b) क्षारीय
(c) उदासीन
(d) इनमें से कोई नहीं
25. अतितप्त भाप को गर्म लौह- चूर्ण से अभिक्रिया कराने पर प्राप्त होता है-
(a) हाइड्रोजन गैस
(b) ऑक्सीजन गैस
(c) नाइट्रोजन गैस
(d) इनमें से सभी
26. लाल तत्प कोक के ऊपर अति तप्त भाप प्रवाहित करने पर प्राप्त होता है-
(a) प्रोड्यूसर गैस
(b) जल गैस
(c) हाइड्रोजन गैस 
(d) ऑक्सीजन गैस
27. सोडियम कर्मट को गर्म करने पर कौन - सा गैस उत्पन्न होता है ?
(a) हाइड्रोजन 
(b) नाइट्रोजन
(c) ऑक्सीजन
(d) क्लोरिन
28. तेलों के हाइड्रोजनीकरण में किस गैस का उपयोग किया जाता है ?
(a) कार्बन डाइऑक्साइड 
(b) कार्बन मोनोक्साइड
(c) नाइट्रोजन
(d) हाइड्रोजन
29. तेलों के हाइड्रोजनीकरण के फलस्वरूप-
(a) खाद्य तेल, खाद्य वसा में परिवर्तित हो जाते हैं
(b) वनस्पति तेल, वनस्पति घी में परिवर्तित हो जाते हैं
(c) असंतृप्त वसा, संतृप्त वसा में परिवर्तित हो जाते हैं।
(d) इनमें से सभी
30. निम्नलिखित में से हाइड्रोजन के बड़े खंडों को कौन अवशोषित करेगा ?
(a) प्लैटिनम
(b) पैलेडियम
(c) कोलॉयडी पैलेडियम
(d) इनमें से सभी
31. पैलेडियम तथा प्लैटिनम के समान धातुएँ विशेष परिस्थितियों में हाइड्रोजन का बहुत अधिक आयतन अवशोषित कर लेती है । धातु द्वारा अवशोषित हाइड्रोजन क्या कहलाता है ?
(a) अवशोषित हाइड्रोजन
(b) अधिधारित हाइड्रोजन
(c) परमाणवीय हाइड्रोजन
(d) क्रियाशील हाइड्रोजन
32. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए तथा सही कथन का चयन नीचे दिये गये कूट की सहायता से कीजिए ?
1. प्लैटिनम एवं पैलेडियम जैसी कुछ धातुएँ हाइड्रोजन के पर्याप्त मात्रा को अधिधारित (occlusion) कर सकती है।
2. इन धातुओं को सिर्फ गर्म कर देने पर ही अधिधारित हाइड्रोजन बाहर निकल जाती है। 
3. अधिधारित हाइड्रोजन साधारण हाइड्रोजन के तुलना में कम क्रियाशील होते हैं।
कूट :
(a) 1 और 2
(b) केवल 1
(c) 2 और 3 
(d) केवल 2
33. भविष्य का ईंधन किसे कहते हैं ?
(a) हाइड्रोजन
(b) नाइट्रोजन
(c) जल गैस
(d) सौर विकिरण
34. हाइड्रोजन को भविष्य का ईंधन क्यों कहा जाता है
(a) हाइड्रोजन का उष्मीय मान सबसे अधिक होने के कारण कम हाइड्रोजन के खपत से ही अत्यधिक ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है।
(b) हाइड्रोजन के वायु में जलने से उत्पाद के रूप सिर्फ जल बनता है अतः हाइड्रोजन के जलने से पर्यावरण में किसी प्रकार के प्रदूषण फैलने की आशंका नहीं रहती है। 
(c) हाइड्रोजन गैस का सबसे बड़ा स्त्रोत जल है जो एक नवीकरणीय प्राकृतिक संसाधन है।
(d) इनमें से सभी
35. हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन है परन्तु वर्त्तमान में इसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने में सर्वाधिक कठिनाई किस रूप में व्याप्त है ? 
(a) हाइड्रोजन का उत्पादन
(b) हाइड्रोजन का भंडारण
(c) हाइड्रोजन का ज्वलन ताप
(d) हाइड्रोजन का गैसीय अवस्था
36. जल एक उत्कृष्ट विलायक है, क्योंकि इसके अणु-
(a) उदासीन है
(b) हल्के भार वाले हैं
(c) अध्रुवीय है
(d) अत्यधिक ध्रुवीय है
37. निम्नलिखित में कौन-सा एक सही नहीं है ?
(a) 0°C पर द्रव जल का घनत्व बर्फ के घनत्व से अधिक होता है।
(b) 4°C पर जल का घनत्व अधिकतम होता है।
(c) 4°C पर जल का आयतन अधिकतम होता है
(d) इनमें से कोई नहीं
38. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए-
1. जल का आचरण द्विधर्मी होता है यह अम्ल तथा क्षार दोनों के समान व्यवहार करता है।
2. जल ऑक्सीकारक तथा अवकारक दोनों के समान व्यवहार करता है।
उपर्युक्त में कौन-सा/से कथन सही है/हैं ?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 तथा 2 दोनों
(d) न तो 1 न ही 2
39. वह जल जो साबुन के साथ असानी से झाग नहीं देता है, उसे क्या कहते हैं ?
(a) कठोर जल
(b) मृदु जल
(c) भारी जल
(d) इनमें से कोई नहीं
40. जल में अस्थायी कठोरता किसके उपस्थिति के कारण आती है ?
(a) कैल्शियम और मैग्नीशियम के क्लोराइड
(b) कैल्शियम और मैग्नीशियम के सल्फेट
(c) कैल्शियम और मैग्नीनिशयम के बाइकार्बोनेट
(d) इनमें से कोई नहीं
41. जल के अस्थायी कठोरता को किस प्रकार दूर किया जा सकता है ?
(a) जल को उबाल कर
(b) क्लार्क विधि द्वारा 
(c) केलगॉन विधि द्वारा
(d) a तथा b दोनों
42. जल के स्थायी कठोरता किस प्रकार दूर किया जाता है ?
(a) सोडा विधि द्वारा 
(b) केलगॉन विधि द्वारा
(c) परमुटिट विधि द्वारा
(d) इनमें से सभी
43. निम्नलिखित में से किस विधि द्वारा जल की अस्थायी और स्थायी दोनों प्रकार की कठोरताएँ दूर हो जाती है ?
(a) केलगॉन विधि
(b) परमुटिट विधि
(c) सोडा विधि
(d) आयन विनिमय विधि
44. हाइड्रोजन के कितने समस्थानिक होते हैं ?
(a) 3
(b) 4
(c) 5
(d) 6
45. हाइड्रोजन के किस समस्थानिक को भारी हाइड्रोजन भी कहते हैं ?
(a) प्रोटियम
(b) डयूटोरियम
(c) ट्राइटियम
(d) इनमें से कोई नहीं
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