General Competition | Science | Chemistry (रसायन विज्ञान) | धातुएँ और उनके महत्वपूर्ण यौगिक
आधुनिक काल में किसी देश की उन्नति एवं समृद्धि का अनुमान वहाँ होनेवाली धातुओं के खपत के आधार पर किया जाता है।

General Competition | Science | Chemistry (रसायन विज्ञान) | धातुएँ और उनके महत्वपूर्ण यौगिक
- आधुनिक काल में किसी देश की उन्नति एवं समृद्धि का अनुमान वहाँ होनेवाली धातुओं के खपत के आधार पर किया जाता है।
- अभी तक 114 से अधिक तत्व का आविष्कार हो चुका है, जिनमें करीब 79% धातु 16% अधातु तथा 5% उपधातु है।
- धातु तथा अधातु के बीच कोई स्पष्ट विभाजन रेखा नहीं, कुछ गुणों के आधार हम धातु तथा अधातु के बीच अंतर कर पाते हैं।
- धातु के परमाणु के वाह्यतम कक्षा में प्रायः 1, 2 या 3 ही इलेक्ट्रॉन होते हैं।
Example- Na, Mg, Al, Ca, ZnNote :- हाइड्रोजन तथा हिलियम के वाह्यतम कक्षा में क्रमश: 1 तथा 2 इलेक्ट्रॉन होते परन्तु ये धातु नहीं है।
- धातु की सतह में एक विशेष प्रकार की चमक होते हैं, जिसे Metallic Custure (धात्विक चमक) कहते हैं। इस प्रकार की चमक केवल धातु में ही पायी जाती है ।
Note:— ग्रेफाइट तथा आयोडीन (I2) अधातु है परन्तु इनकी सतह में धातु के तरह चमक होती है।
- धातुओं को हथौरे से पीटकर पतली चादर बनायी जा सकती है। धातु में पाये जाने वाले इस गुण को Malleability (अधानवर्द्धनीय) कहते हैं।
- धातुओं में तन्यता (Ductility) का गुण पाया जाता है।
- धातु उष्मा तथा विद्युत का सुचालक होता है।
- Ag (चाँदि) उष्मा का सर्वश्रेष्ठ सुचालक है इसके बाद Cu (कॉपर) का स्थान है।
- Pb (लेड) तथा Hg (मर्करी) उष्मा का सबसे कम चालक है।
- धातु की विद्युत चालकता का घटता क्रम-
Ag > Cu > Au > Al > W. Hg > Fe
- लेड (Pb) धातु अपवाद है जो विद्युत का कुचालक है।
- धातु प्रायः कठोर होते है परन्तु सभी धातु की कठोरता एक समान नहीं होती है।
- Na (सोडियम) तथा k (पोटेशियम ) इतने Soft होते हैं कि इसे आसानी से चाकू से काट सकते हैं।
- धातु के द्रवणांक (Melting Point) तथा क्वथनांक (Boiling Point) तथा क्वथनांक (Boiling Point) का मान उच्च होते हैं।
- धातु विद्युत धनात्मक होते हैं क्योंकि धातु electron को त्याग करने की प्रवृत्ति रखते हैं ।
1. सभी धातु ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर ऑक्साइड बनाते हैं।
2. धातु जल के साथ अभिक्रिया कर H2 gas मुक्त करते हैं।
3. धातु अम्ल के साथ अभिक्रिया कर H2 gas मुक्त करता है।
4. कोई अधिक क्रियाशील धातु अपने से कम क्रियाशील धातु के लवण के विलयन से कम क्रियाशील धातु के लवण के विलयन से कम क्रियाशील धातु को विस्थापित कर सकती है।
Metallurgy (धात्विकी)
- धातु को उसके अयस्क से अलग करने की विधि धात्विकी कहलाता है ।
- अयस्क के साथ उपस्थित अशुद्धि Gangue (गैंग ) कहलाता है।
- प्रमुख गैंग - सिलिका (SiO2) तथा चूना पत्थर (CaCO3) है ।
- अयस्क के अशुद्धि को हटाने हेतु अयस्क में बाहर से मिलाये गये पदार्थ Flux (फ्लस्क) कहलाता है।
- अयस्क के अशुद्धि के साथ फ्लस्क अभिक्रिया कर एक द्रवणशील हल्का पदार्थ बनाता है जिसे Slag (स्लैग) कहते हैं।
अशुद्धि + फ्लस्क → स्लैगउदाहरण:- SiO2 + CaO → CaSiO3
- स्लैग द्रवित धातु से हल्का होने के कारण धातु के ऊपर तैरता रहता है जिसे हटा लिया जाता है।
- अयस्को से धातु को प्राप्त करने की विधि जटिल है जो निम्न चार चरणों में पूरा होता है।
- अयस्को का सांद्रण (Fnrichment of ore)
- अयस्क जो भू-पर्पटी से प्राप्त होते कई अशुद्धि (गंग) रहता है जिसे हटाना अनिवार्य है । अयस्को को साफ करने के कई विधि हैं-
- Hydraulic Washing (द्रवचालीत घुलाई) - इसी विधि से प्राय: ऑक्साइड अयस्क का सांद्रण किया जाता है। यह विधि अयस्क के कण के घनत्व तथा गैंग के घनत्व पर निर्भर करता है । प्रायः गैंग कण अयस्क के कण से हल्के होते हैं । उदा० - लेड, टीन, लोहा के अयस्क इसी विधि द्वारा सांद्रीत होते हैं।
- Froth Floatation Process (फेन प्लवन विधि) - यह विधि से सल्फाइड अयस्क का सांद्रण किया जाता है। इस विधि में पानी के टैंक का इस्तेमाल होता है तथा पानी में फेन (झाग ) उत्पन्न करने हेतु पाइन का तेल डाला जाता है। सल्फाइड अयस्क के टुकड़े फैन के साथ पानी टंकी के ऊपर आ जाते हैं तथा अशुद्धि नीचे बैठ जाती है। उदा०- कॉपर पाइराइट, जिंक ब्लैड (Zns), गैलेना (Pbs) इसी विधि से सांद्रीत होता है।
- Chemical Saparation- इस विधि का इस्तेमाल तब होता है जब अयस्क के धातु तथा अशुद्धि के रसायनिक गुण भिन्न होते हैं। उदा०— वॉक्साइड (Al2O3.2H2O) का सांद्रण इसी विधि से होता है।
- अयस्क जो भू-पर्पटी से प्राप्त होते कई अशुद्धि (गंग) रहता है जिसे हटाना अनिवार्य है । अयस्को को साफ करने के कई विधि हैं-
- सांद्रीत अयस्क को धातु के ऑक्साइड में परिवर्तित करना होता है। ऑक्साइड में बदलने के लिए दो विधि प्रचलित है-
- Calcination (निस्तापन ) - अयस्क को वायु की सीमित मात्रा अथवा वायु के अनुपस्थिति में उसके द्रवणांक से कम ताप पर गर्म करके ऑक्साइड में बदलने की प्रक्रिया निस्तापन कहलाता है।
- निस्तापन विधि द्वारा प्रायः कर्बोनेट तथा हाइड्रेट अयस्क को उसके ऑक्साइड में बदला जाता है।
- Roasting (भर्जन ) - जब अयस्क को वायु की पर्याप्त मात्रा में तेजी से गर्म कर धातु को ऑक्साइड में बदला जाता है तो उसे भर्जन कहते हैं।
- भर्जन द्वारा सल्फाइड अयस्क को उसके ऑक्साइड में बदला जाता है।
- Calcination (निस्तापन ) - अयस्क को वायु की सीमित मात्रा अथवा वायु के अनुपस्थिति में उसके द्रवणांक से कम ताप पर गर्म करके ऑक्साइड में बदलने की प्रक्रिया निस्तापन कहलाता है।
- धातु के ऑक्साइड को अपचयन (Reduction) द्वारा धातु में बदला जाता है । Reduction की तीन विधि प्रचलित है।
- Reduction by heat - जो धातु कम अभिक्रियाशील होते हैं उनके ऑक्साइड को सिर्फ गर्म करने पर धातु प्राप्त हो जाते हैं।
- Chemical Reduction - मध्यम अभिक्रिया शील धातु (Fe, Zn, Pb, Cu) के ऑक्साइड को कार्बन या ऐलुमिनियम के साथ गर्म करके Reduction किया जाता है।
- विद्युत द्वारा अवकरण- अधिक क्रियाशील धातु (Na, K, mg Ca, Al) की विद्युतीय अपचयन किया जाता है।
- विद्युतीय अपचयन करने पर धातु कैथोड पर तथा गैसीय पदार्थ एनोड पर प्राप्त होते हैं।
- Reduction by heat - जो धातु कम अभिक्रियाशील होते हैं उनके ऑक्साइड को सिर्फ गर्म करने पर धातु प्राप्त हो जाते हैं।
- Reduction से प्राप्त धातु की पूर्णतः शुद्ध नहीं होते हैं अतः पुनः शुद्ध करने के लिए धातु का Refining करना पड़ता है कि जिनके प्रमुख विधि निम्न है -
- Liquasion (परिसमापन ) - इस विधि से ऐसे धातु को शुद्ध किया जाता है जिसका गलनांक कम होता है। उदा० - टिन (Sn), लेड ( Pb ), विस्मथ (Bi)
- Distillation (आसवन) - इस विधि द्वारा वाष्पशील धातुओं को शुद्ध किया जाता है । उदा० - मरकरी (Hg), जिंक (Zn )
- Electrolytic Refining - यह विधि धातु धातु को शुद्ध करने की सबसे अच्छी विधि है। कॉपर, जिंक, टिन, निकेल, सिल्वर, गोल्ड जैसे धातु इसी विधि द्वारा प्रायः शुद्ध किये जाते हैं।
- इस विधि में विद्युत अपघटनी सेल का इस्तेमाल होता है जिसमें Electrolyte का जलीय विलयन रहता है। सेल में अशुद्ध धातु का प्लेट एनोड का तथ शुद्ध धातु का प्लेट को कैथोड बनाया जाता है।
- उपर्युक्त सभी प्रक्रिया के बाद 99% शुद्ध धातु प्राप्त होते हैं।
प्रमुख धातु एवं उनके प्रमुख यौगिक
- वर्ग संख्या - 1
- परमाणु संख्या - 11
- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास- 2, 8, 1
- आवर्त्त संख्या - 3
- परमाणु द्रव्यमान - 22.9898
- घनत्व - 0.97 g / cm3
- सोडियम वर्ग 1 के क्षारीय धातु है यह वायु के ऑक्सीजन से काफी तीव्र अभिक्रिया कर जलने लगता है जिसके कारण इसे किरोसीन तेल में डुबाकर अथवा निर्वात् में रखा जाता है।
- सोडियम मुलायम तथा चांदि के तरह सफेद होता है। सोडियम धातु तुन्सेन बर्नर के ज्वाला के साथ सुनहरा पीला रंग देता है।
- Na धातु की प्राप्ति मुख्यतः NaOH तथा NaCl से विद्युत अपघटन विधि द्वारा होता है।
- प्रमुख यौगक:-
- NaCl (सोडियम क्लोराइड या साधारण नमक )
- सोडियम हॉइड्रॅक्साइड तथा हाइड्रोजक्लोरीक अम्ल की अभिक्रिया से NaCl की प्राप्ति होती है।
NaOH + HCl → NaCl + H2O
- भारत में 95% सोडियम क्लोराइड (नमक) समुद्री जल के वाष्पीकरण से प्राप्त होता है। वाष्पीकरण से प्राप्त NaCl में अशुद्धि के रूप में Na2SO4. MgCl2, MgSO4. CaCO3 लवण पाये जाते हैं ।
- सेंधा नमक (काला नमक) जमीन खोदकर खदानों से प्राप्त होता है। इस नमक में अशुद्धि के रूप में लाल चिकनी मिट्टी मिला रहता है जिसके कारण इसका रंग भूरा होता है ।
- साधारण नमक में KIO3 या KI मिलाकर आयोडीन युक्त नमक बनाये जाते हैं ।
- NaCl (साधारण नमक) का उपयोग खाने में, परिरक्षक के रूप में तथा साबुन बनाने में होता है।
- सोडियम हॉइड्रॅक्साइड तथा हाइड्रोजक्लोरीक अम्ल की अभिक्रिया से NaCl की प्राप्ति होती है।
- NaOH (सोडियम हाइड्रॉक्साइड या कॉस्टीक सोडा)-
- NaOH का निर्माण क्लोर-ऐल्कली विधि के द्वारा होता है ।
- NaOH का उपयोग साबुन तथा Detergent बनाने में अभिकर्मक ( reagent) के रूप में होता है ।
- NaHCO3
- NaHCO3 को सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट या सोडियम बाइकार्बोनेट या खाने वाला सोडा को कहा जाता है।
- NaHCO3 का निर्माण अमोनिया - सोडा - विधि द्वारा होता है। इस यौगिक का जलीय विलयन क्षारीय होता है ।
- बेंकिन पाउडर NaHCO3 तथा टार्टरिक अम्ल का मिश्रण है। जब बेकिंग पाउडर को गीला आटा या पावरोटी के साथ मिलाकर गर्म किया जाता है तो CO2 गैस बनता जो केक को मुलायम तथा स्पंजी बना देता है ।
- अगर बेकिंग पाउडर में टार्टरिक अम्ल नहीं हो तो केक कड़वा हो जाएगा ।
- NaHCO3 का उपयोग पेट की अम्लीयता दूर करने में ऐंटासिड के रूप में होता है।
- NaHCO3 का उपयोग अग्नीशामक यंत्र में होता है। अग्नीशामक यंत्र में NaHCO3 तथा H2SO4 रहता है जो अभिक्रिया CO2 उत्पन्न करता है जिससे आग बुझ जाती है।
- भोजन को खास्ता बनाने के हेतु अथवा जल्द खाना पकाने हेतु भी कभी-कभी NaHCO3 का इस्तेमाल होता है।
- Na2CO3 . 10H2O
- Na2CO3 . 10H2O को सोडियम कार्बोनेट या धोने का सोडा कहा जाता है।
- Na2CO3 का निर्माण अमोनिया सोडा विधि या साल्वे विधि द्वारा किया जाता है।
- Na2CO3 का जलीय विलयन क्षारीय होता है।
- Na2CO3 . 10H2O को तीव्रता से गर्म करने पर इसका जल निकल जाता है तथा अर्नाद्र सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3) बनता है जिसे सोडाऐश कहते हैं।
- Efflorescence (उत्फुल्लन ) - Na2CO3 . 10H2O को हवा में खुला छोड़ने में यह जल का त्याग कर सोडियम कार्बोनेट मोनोहाइड्रेट का चूर्ण बनाता है जिसे उत्फुल्लन कहते हैं ।
- Na2CO3 का उपयोग कपड़ा धोने में प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप में होता है।
- Na2CO3 का उपयोग कांच, कागज साबुन उद्योग में भी किया जाता है।
- जल का स्थायी खारापन दूर करने में भी Na2CO3 का प्रयोग होता है।
- Na2B4O7.10H2O
- इसे सोडियम टेट्राबोरेट या बोरेक्स कहते हैं ।
- बोरेक्स का इस्तेमाल कॉच उत्पादन में खाद्य-पदार्थों के संरक्षण में, साबुन बनाने में बर्तनों के कलई करने तथा उसकी चमक बढ़ाने में किया जाता है ।
- Na2O2 (सोडियम पर ऑक्साइड) का इस्तेमाल बंद जगह के वायु को साफ करने में किया जाता है। यह CO2 या CO से अभिक्रिया कर O2 बनाता है।
2Na2O2 + 2CO2 → 2 Na2Co3 + O2
- NaCl (सोडियम क्लोराइड या साधारण नमक )
- मैग्नीशियम के प्रमुख अयस्क - मैग्नेसाइट (MgCO3), डोलोमाइट (MgCO3. CaCO3), कार्नेलाइट (KCI.MgCl2.6H2O) है। जिनमें मैग्नीशियम का निष्कर्षण मुख्य रूप से कार्नेलाइट से किया जाता है।
- पौधे का महत्वपूर्ण अवयव क्लोरोफील मैग्नीशियम युक्त होता है ।
- फ्लैश बल्वों में मैग्नीशियम के तार का उपयोग होता है। नाइट्रोजन गैस में मैग्नीशियम तार रखकर फ्लैश बल्व का इस्तेमाल होता है।
- प्रमुख यौगिक :-
- Mg2 (OH)– इसे मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड या मिल्क ऑफ मैग्नीशिया कहते हैं क्योंकि यह जल में घुलकर दूध जैसा दिखता है। इसका उपयोग पेट की अम्लीयता दूर करने हेतु ऐंटासीड के रूप में होता है ।
- MgSO4 . 7H2O (मैग्नीशियम सल्फेट) - इसे इप्सम साल्ट कहते हैं। इसका इस्तेमाल कपास उद्योग, साबुन तथा पेन्ट उद्योग में होता है।
- भू-पर्पटी र ऐलुमिनियम धातु सबसे अधिक पायी जाती है।
- प्रारंभ ऐलुमिनियम धातु का निश्कर्षण ऐलुमिनियम क्लोराइड से किया जाता था ।
AlCl + 3Na → Al + 3NaCl
- ऐलुमिनियम क्लोराइड से ऐलुमिनियम का निष्कर्षण बहुत ही खर्चीली थी जिसके कारण 19वी शदी से पहले ऐलुमिनियम सोना से भी ज्यादा महंगी धातु थी ।
- ऐलुमिनियम निष्कर्षण की सस्ती विधि का खोज 1886 ई. में अमेरिका के मार्कहाल तथा फ्रांस के हेराउल्ट ने की जिसके बाद ऐलुमिनियिम के मूल्य 90% तक कम हो गये ।
- वर्त्तमान समय में मनुष्य द्वारा उपयोग में लाया जाने वाला दूसरा सबसे अधिक धातु Al है।
- ऐलुमिनियम प्रमुख अयस्क— बॉक्साइड (Al2O3.2H2O) कोरंडम (Al2O3) क्रायोलाइट (Na3AlF6) है। ऐलुमिनियम का निष्कर्षण मुख्य रूप से बॉक्साइट से किया जाता है।
- बॉक्साइट अयस्क को पहले बायर विधि द्वारा शुद्ध किया जाता है। शुद्ध बॉक्साइड को ऐलुमिना या हाइड्रेटेट ऐलुमिना भी कहते हैं। इसके बाद ऐलुमिना का विद्युत अपघटन द्वारा Al प्राप्त होता है।
- ऐलुमिना के विद्युत अपघटन में ऐलुमिना के साथ क्रायोलाइट तथा फ्लुओस्पार (CaF2) मिला देते हैं। जिससे ऐलमिना का गलनांक घट जाता है। विद्युत अपघटन में AI कैथोड पर तथा एनोड पर O2 गैस मुक्त हो जाता है।
- ऐलुमिनियम को वायु में खुला छोड़ने पर इसकी सतह पर ऐलुमिनियम ऑक्साइड की परत जम जाती है। यह ऑक्साइड परत नीचे के धातु को और अधिक संक्षारित नहीं होने देती है इसलिए ऐलुमिनियम धातु में जंग नहीं लगता है।
- प्रमुख यौगिक:-
- Al(OH)3 — ऐलुमिनियम हाइड्रॉक्साइड का प्रयोग जलरोधी एवं अग्नीरोधी कपड़ा तैयार करने में किया जाता है।
- Al4C3 - ऐलुमिनियम कर्बाइड का प्रयोग औद्योगिक स्तर पर मीथेन गैस बनाने में किया जाता I
Al4C3 + 12H2O→ 4Al(OH)3 + 3CH4
- फीटकरी या पोटश एलम- इसका रसायनिक सूत्र - K2SO4. Al2 (SO4)3
- कैल्शीयम का प्रमुख अयस्क - कैल्शीयम कार्बोनेट (CaCO3), फ्लुओरस्पार (CaF2), फॉस्फोराइट (Ca3(PO4)2 कैल्शीयम क्लोराइड (CaCl2) है ।
- कैल्शीयम धातु का निष्कर्षण मुख्य रूप से कैल्शीयम क्लोराइड (CaCl2) या फ्लुओरस्पार (CaF2) से विद्युत अपघटन विधि द्वारा किया जाता है ।
- मानव शरीर में लगभग 1200 gram कैल्शीयम पाया जाता है जिसका 99% भाग हड्डी तथा दाँत में पाये जाते हैं ।
- Ca को ऑक्सीजन में जलाने पर इसके ज्वाला का रंग ईट की तरह लाल होता है |
- मुख यौगिक:-
- CaO- इसे कैल्शीयम ऑक्साइड, कलीचूना Quick - lime या बिना बुझा हुआ चूना कहते हैं।
- CaCO3 को गर्म करके व्यापारिक रूप से CaO का निर्माण किया जाता है।
- CaO का उपयोग Drying agent (शुष्क कारक) के रूप में, सीमेंट बनाने में, ब्लीचिंग पाउडर बनाने में किया जाता है ।
- Ca(OH)2- इसे कैल्शीयम हाइड्रॉक्साइड या बुझा हुआ चूना कहते हैं। CaO की प्रतिक्रिया H2O से कराने पर Ca(OH)2 बनता है ।
- जब Ca(OH)2 में CO2 गैस प्रवाहित किया जाता है तो चूना-जल दूधिया हो जाता है तथा CaCO3 बनता है।
Ca(OH)2 + CO2 → CaCO3 + H2O
- Ca(OH)2 का उपयोग मकान को सफेदी करने में, चीनी के शुद्धिकरण में किया जाता है ।
- जब Ca(OH)2 में CO2 गैस प्रवाहित किया जाता है तो चूना-जल दूधिया हो जाता है तथा CaCO3 बनता है।
- CaCO3- कैल्शीयम कार्बो का इस्तेमाल संगमरमर के रूप में CO2 गैस बनाने हेतु प्रयोगशाला में इस्तेमाल होता है ।
- लोहे के निष्कर्षण में Flux के रूप में CaCO3 का इस्तेमाल होता है ।
- CaCO3 का इस्तेमाल दंतमंजन बनान में भी होता है ।
- विरंजक चूर्ण (Ca(OCICI)
- बूझे हुए चूना (Ca(OH)2) को 40°C तक गर्म कर उसपर Cl2 गैस प्रवाहित करने पर विरंजक चूर्ण (Bleaching Powder) बनता है ।
Ca(OH)2 + Cl2 → Ca(OCI) Cl + H2O
- विरंजक चूर्ण का इस्तेमाल किटाणुनाशक के रूप में, कागज और कपड़ों के विरंजन में, क्लोरीन तथा क्लोरोफॉर्म बनाने में किया जाता है।
- ब्लीचिंग पाउडर को खुला छोड़ने पर इसका विरंजन गुण समाप्त हो जाता है क्योंकि वायुमंडल से यह CO2 तथा आर्द्रता ग्रहण कर Cl2 निकाल देता है ।
- बूझे हुए चूना (Ca(OH)2) को 40°C तक गर्म कर उसपर Cl2 गैस प्रवाहित करने पर विरंजक चूर्ण (Bleaching Powder) बनता है ।
- प्लास्टर ऑफ पेरिस-
- प्लास्टर ऑफ पेरिस का सूत्र (CaSO4)2. H2O या CaSO4. 1½ H2O है इसे कैल्शीयम सल्फेट हमोहाइड्रेट भी कहते हैं।
- जिप्सम (CaSO4.2H2O) को 120°C तक सावधानी पूर्वक गर्म करने पर प्लास्टर ऑफ पेरिस बनता है पुनः प्लास्टर ऑफ पेरिस में जल मिलाने पर वह जिप्सम में परिणत हो जाता है ।
- प्लास्टर ऑफ पेरिस का इस्तेमाल मूर्ति बनाने में, शल्य चिकित्सा में टूटी हुई हड्डी को जोड़ने मे किया जाता है।
- CaO- इसे कैल्शीयम ऑक्साइड, कलीचूना Quick - lime या बिना बुझा हुआ चूना कहते हैं।
- मैगनीज का प्रमुख अयस्क MnO2 (पाइरोलुसाईट ) है जिससे मैगनीज का निष्कर्षण किया जाता है । मैंगनीज के दूसरा अयस्क मैंगनाइट (Mn2O3.H2O) है।
- मानव शरीर में सबसे कम मात्रा में पाया जाने वाला तत्व Mn ही है।
- प्रमुख यौगिक-
- KMnO4 (पोटाशियम परमैग्नेट )
- KMnO4 का उत्पादन पाइरोलुसाईट से किया जाता है। इसका रंग Purple (गुलाबी) होता है।
- KMnO4 को अधिक गर्म करने पर यह KMnO4 में बदल जाता है।
- KMnO4 का प्रयोग प्रयोगशाला में अभिकर्मक रूप में, ऑक्सीकारक में तथा कीटनाशक, जलशुद्धिकरण में होता है।
- MnO2- मैगनीज डाईऑक्साइड का प्रयोग शुष्कसेल में विध्रुवक के रूप में होता है।
- विध्रुवक - शुष्क सेल के एनोड पर H2gas के जमने की प्रक्रिया ध्रुवण कहलाती है। MnO2 के द्वारा H2 gas के जमने की प्रक्रिया ध्रुवण कहलाती है। MnO2 का ऑक्सीकरण हो जाता है। यह प्रक्रिया विधुवण कहलाती है।
- KMnO4 (पोटाशियम परमैग्नेट )
- मानव द्वारा उपयोग में लायी जानी वाली सर्वाधिक धातु लोहा है । भू-पर्पटी में प्रचुर मात्रा में पायी जानी वाली यह दूसरी धातु है।
- भू–पर्पटी पर लोहा से ज्यादा ऐलुमिनियम पाया जाता है। फिर भी लोहा सस्ता है तथा ऐलुमिनियम महँगा क्योंकि लोहा के तुलना ऐलुमिनियम का निष्कर्षण अत्यधिक खर्चीली है।
- लोहा के प्रमुख अयस्क:- 1. हैमाटाइट (Fe2O3), 2. मैग्नेटाइट (Fe3O4), 3. सीडेराइट (FeCO3) है। लोहा का निष्कर्षण मुख्य रूपये हेमाटाईट अयस्क से किया जाता है ।
- हेमाटाइट अयस्क का अपचयन वात्या भट्टी (Glast Furnace) में किया जाता है । वात्या भट्ठी में कोक तथा चूना पत्थर का इस्तेमाल Flux के रूप में किया जाता है ।
- वात्या भट्ठी एक बार प्रारंभ होता तो लगातार 10 वर्षों तक प्रारंभ ही रहता है।
- वात्या भट्ठी से प्राप्त लोहा बहुत ही कठोर और भंगुर होता है। इसमें अशुद्धि के रूप में 2.5-4% कार्बन पाया जाता है। इस लोहा को ढलवाँ लोहा (Castiron) या कच्चा लोहा कहते हैं।
- जिस लोहे में कार्बन की मात्रा 0.1% -0.25% तक होती है उसे पिटवाँ लोहा कहा जाता है।
- लोहे के धातु का संक्षारण बहुत अधिक होता है। नमी तथा ऑक्सीजन की उपस्थिति में लोहे के ऊपर भूरे रंग एक आवरण बनता जिसे जंग कहते हैं। जंग का रसायनिक सूत्र - Fe2O3.H2O (हाइड्रेटेट आयरन ऑक्साइड) है। जंग लगने से लोहे का भार बढ़ जाता है।
- FeSO4.7H2O— फेरस सल्फेट को हरा कसीस (Green Vitriol) कहते हैं । फेरस सल्फेट का उपयोग स्याही बनाने तथा एनेमिया रोग के उपचार में होता है ।
- FeCl3— फेरिक क्लोराइड का इस्तेमाल रक्त स्त्राव रोकने में किया जाता है।
- FeS—– आयरन सल्फाइड को झूठ सोना या बेवकूफों का सोना कहा जाता है।
- FeSO4 (NH4)2 SO4.6H2O को मोहर लवण कहा जाता है। इसका उपयोग नीली रंग के स्याही बनाने, प्रयोगशाला में अवकारक के रूप में होता है।
- कॉपर के प्रमुख अयस्क— मैलेकाइट (CuCO3.Cu(OH)2), कैल्कोसाइट (Cu2S) कॉपर पायराइट (CuFeS2) है। कॉपर का निष्कर्षण मुख्य रूप से कॉपर पायराइट से किया जाता है।
- गंधक को तांबा का शत्रु तत्व कहा जाता है क्योंकि गंधक तांबा के धातुई गुण को नष्ट कर देता है ।
- ऐसी मान्यता है कि मानव इतिहास सबसे पहला उपयोग में लायी जानी वाली धातु कॉपर ही था ।
- तांबा का व्यापक रूप से उपयोग विद्युत तार बनाने में ताड़ित चालक बनाने में, कैलोरी मीटर बनाने में होता है ।
- प्रमुख यौगिक:-
- CuSO4.5H2O— कॉपर सल्फेट को नीला थोथा (Blue Viterol) या तूतीया कहा जाता है । यह जहरीला होता है जिसके कारण इसका उपयोग फँफूदी नाशी या कवक नाशी तथा शैवाल को नष्ट करने में होता है।
- क्यूप्रीक क्लोराइड का इस्तेमाल डीकॉन विधि द्वारा क्लोरीन गैस बनाने में उत्प्रेरक के रूप में होता है।
- जस्ता धातु का निष्कर्षण जिंक ब्लैड अयस्क से किया जाता है।
- प्रमुख यौगिक:-
- ZnSO4 . 7H2O ( जिंक सल्फेट)- इसका उपयोग रंगाई तथा Calico Printing में किया जाता है।
- ZnO (जिंक ऑक्साइड) - जिंक ऑक्साइड को फिलॉस्फर ऊल कहते हैं इसका उपयोग मलहम, क्रीम तथा कृत्रिम दाँत बनाने में किया जाता है।
- लिथोपोन - ZnS तथा BaSO4 मिश्रण को लियोपोन कहते हैं इसका उपयोग रंगाई के काम में होता है ।
- ZnS ( जिंक सल्फाइड) में स्फुरदीप्ती का गुण पाया जाता है जिसके कारण ZnS का प्रयोग सफुरदीप्ती पर्दा बनाने में होता है।
- Zn3P2 - (जिंक फस्फॉइड) — Zn3P2 का उपयोग चूहा - विष बनाने में होता है।
- ZnCl2 ( जिंक क्लोराइड ) - जिंक क्लोराइड का इस्तेमाल लकडत्री को कीड़ो तथा दीमक से बचाने हेतु लकड़ी पर लेप लगाने में कया जाता है।
- लोहे को संक्षारण से बचाने हेतु लोहे पर Zn की परत चढ़ाया जाता है। यह प्रक्रिया गैल्वेनाइजिंग या यशदलेपन कहलाता है ।
- चांदि का निष्कर्षण अर्जेण्टाइट अयस्क से मैक् आर्थर साइनाइड विधि द्वारा किया जाता है।
- चांदि का उपयोग व्यापक रूप से आभूषण बनाने में तथा दांतों के छिद्र को भरने में किया जाता है ।
- चांदि के आभूषण वायु के सल्फर से प्रतिक्रिया कर सिल्वर सल्फाइड बनाता है जिसके कारण चांदि के आभूषण या बर्तन कुछ समय बाद काले पर जाते हैं।
- प्रमुख यौगिकः—
- AgCH सिल्वर क्लोराइड को हॉर्न सिल्वर भी कहते हैं इसका उपयोग फोटोक्रोमिक काँच बनाने में किया जाता है ।
- AgBr - सिल्वर ब्रोमाइड का उपयोग फोटोग्राफीक प्लेट बनाने में होता है ।
- AgI - सिल्वर आयोडाइड का उपयोग कृत्रिम वर्षा कराने में होता है।
- AgNO3- सिल्वर नाइट्रेट का उपयोग मतदान की स्याही बनाने में होता है। AgNO3 को लूनर कॉस्टिक भी कहते हैं ।
- सोना का निष्कर्षण मुख्य रूप से केलावेराइट तथा सिल्वेनाइट अयस्क से किया जाता है। I
- सोना को धातुओं का राजा कहा जाता है। यह सबसे अधावर्ध्य और तन्य धातु है ।
- शुद्ध सोना 24 कैरेट का होता है जो बहुत ही मुलायम होता है। आभूषण बनाने हेतु प्रायः 22 कैरेट सोना का इस्तेमाल होता है ।
- सोना के यौगिक - AuCl3 (ऑरिक क्लोराइड) का उपयोग सर्फ विषरोधी सूई बनाने में होता है।
- पारा का निष्कर्षण सिनेबार (HgS) अयस्क से किया जाता है। पारा एक मात्र धातु है जो द्रव अवस्था में पायी जाती है। चांदि के समान चमकदार होने के कारण पारा को Quick Silver भी कहा जाता है।
- पारा को चर्बी अथवा चीनी के साथ मिलाकर खूब जोर-जोर से हिलाने पर पारा भूरे रंग के चूर्ण में बदल जाता है। इस प्रक्रिया पारा का मृत की करण (Deadth of Mercury) कहते है ।
- पारा सभी धातु के साथ मिलकर अमलगम बनाता है। पारा लोहा के साथ मिलकर अमलगम नहीं बनाता है, इस कारण पारा का भंडार लोहे के बने पात्र में किया जाता है ।
- पारा के प्रमुख यौगिकः-
- Hg2Cl2 (मरक्यूरस क्लोराइड ) - मरक्यूरस क्लोराइड का उपयोग बैटरी के इलेक्ट्रोड बनाने में होता है।
- HgCl2 (मरक्यूरिक क्लोराइड ) - मरक्यूरिक क्लोराइड को कोरोसीव सब्लिमेंट भी कहा जाता है। HgCl2 एक भयंकर विष है। इस यौगिक का इस्तेमाल कीटाणुनाशक तथा सर्जीकल उपकरण को साफ करने में किया जाता है।
- Hgs (मरक्यूरिक सल्फाइड) - मरक्यूरिक सल्फाइड लाल रंग का होता है। इसका उपयोग सिन्दूर बनाने में किया जाता है।
- सीसा का निष्कर्षण मुख्य रूप से गैलना (PbS) अयस्क किया जाता है। गैलना में लगभग 86% अधिक लेड पाया जाता है।
- सीसा सर्वाधिक स्थायी धातु है । यह ताप तथा विद्युत का कुचालक |
- धातु-जगत में सीसा तथा जस्ता को जुड़वाँ धातु कहा जाता है, क्योंकि दोनों भू-पटल पर प्रायः साथ-साथ पाये जाते हैं।
- रेडियो एक्टीव पदार्थ को सीसा से बने पात्र में रखा जाता है क्योंकि सीसा रेडियो एक्टीव विकिरण को अवशोषित करता है ।
- सीसा के प्रमुख यौगिकः-
- Pb(OH)2 (लेड हाइड्रॉक्साइड) - सीसा सामान्य जल के साथ कोई प्रतिक्रिया नहीं करता है, परन्तु सीसा ऑक्सीजन युक्त जल से प्रतिक्रिया कर Pb(OH)2 बनाता है जो बिषैला होता है। इस कारण से पीने वाले जल के पाइप सीसा के नहीं बनाये जाते हैं।
- PbO (लेड ऑक्साइड) - लेड ऑक्साइड को लिथार्ज कहा जाता । PbO का उपयोग सीसा संचालक सेल के निर्माण में रबड़ उद्योग में, काँच उद्योग में होता है।
- PbO2 (लेड-डाइआक्साइड) - लेड डाईऑक्साइड का उपयोग दिया सलाई उद्योग में होता है।
- Pb3O3 (ट्राइप्लम्बिक टेट्रऑक्साइड) - Pb3O4 को Red lead कहा जाता है इसका उपयोग लाल रंग के पेन्ट बनाने में किया जाता है ।
- दो या अधिक धातु अथवा एक धातु एवं एक अधातु के समांगी मिश्रण को मिश्रधातु कहते हैं।
- मिश्रधातु अपने अवयवी धातु के तुलना में कठोर होते हैं, परन्तु मिश्रधातु की अधातवर्द्धनीयता तथा तन्यता धातु के तुलना में कम होता है ।
- मिश्रधातु का द्रवणांक तथा विद्युत चालकता अवयवी धातु के तुलना में कम होता है।
- मिश्रधातु संक्षारण - अवरोधक होते हैं।
- मिश्रधातु का अगर एक अवयव पारा है तो उसे अमलगम कहते हैं।
प्रमुख मिश्रधातु
- इस्पात मुख्यतः रूप लोहा तथा कार्बन का मिश्रधातु इस्पात का निर्माण बेसेमर विधि द्वारा किया जाता है।
- इस्पात में कार्बन की मात्रा की मात्रा 0.1 से 1.5 तक होती है ।
- कठोर इस्पात में कार्बन की मात्रा 0.5 से 1.5 तक होता है। कठोर इस्पात को अगर 1123K ताप पर गर्म कर ठंडा जल में कुछ देर डूबा देते हैं तो इस्पात और ज्यादा कठोर हो जाता है इस विधि को शमन विधि ( quenching) कहते हैं ।
- अगर शमित इस्पात को पुनः गर्म कर धीरे-धीरे ठंडा होने देते हैं तो इस्पात लचीला तथा कम भंगुर हो जाता है। इस विधि को टेम्परी (Tempering) कहते हैं ।
- अगर इस्पत को रक्त-तत्प लाल कर पुनः धीरे-धीरे ठंडा करते हैं तो इस विधि को अनीलीकरण (annealing) कहते हैं । अनीलीकरण के बाद इस्पात काफी Soft (मृदु) जाता है।
- विभिन्न प्रकार के इस्पातः-
- मैग्नीज इस्पातः- इस इस्पात में 7-20% तक मैंगनीज होता है। यह इस्पात अत्यंत ही कठोर होता है, इसका इस्तेमाल हेलमेट बनाने में, पत्थर काटने वाले यंत्र बनाने में किया जाता है I
- क्रोमियम एवं निकैल इस्पातः- इस इस्पात क्रोमियम अथवा निकैल अथवा दोनों के कुछ प्रतिशत भाग विद्यमान रहते हैं। इस इस्पात का उपयोग हवाई जहाज, मोटर कार, बाइसाइकिल के पूर्जे बनाने में किया जाता है।
- अगर इस्पत में 36% निकैल होता है तो इस इस्पात से वैज्ञानिक उपकरा बनाये जाते हैं।
- अगर इस्पात में 46% निकैल है तो इस इस्पात से लैम्प बल्व तथा रेडियो बाल्व बनाये जाते हैं।
- कोबाल्ट इस्पातः– इस इस्पात में 35% तक कोबाल्ट पाया जाता है। इस प्रकार के इस्पात का इस्तेमाल विद्युत चुंबक बनाने में किया जाता है।
- सिलिका इस्पातः- इस इस्पात में 35% तक सिलिका होता है। इस इस्पात का उपयोग ट्रासफॉर्मर तथा विद्युत चुंबक बनाने में किया जाता है।
- 15% सिलका युक्त इस्पात अम्ल प्रतिरोधी होता है जिसके कारण इस इस्पात से अम्ल के परिवहन तथा ढुलाई हेतु बॉक्स बनाये जाते हैं।
- टंगस्टन इस्पातः- इस इस्पात में 15-20% टंगस्टन, कुछ में वैनेडियम तथा 5% क्रोमियम होता है। इस इस्पात से उच्च वेग से चलने वाला मशीन, drilling tools (छेद करने वाला उपकरण) बनाये जाते हैं।
- जंगरोधी इस्पातः- जंगरोधी इस्पात में 18% क्रोमियम एवं निकैल होता है। इस इस्पात में जंग नहीं लगता है, इससे विभिन्न प्रकार के घरेलू बर्त्तन बनाये जाते हैं।
- पीतल कॉपर तथा जिंक का मिश्र धातु है। यह अघातवधर्यनीय, मजबूत एवं संक्षारण प्ररितोधी होता है। इससे वर्त्तन, स्क्रू नट-बोल्ट बनाये जाते हैं।
- कांसा कॉपर तथा टीन का मिश्रधातु है। यह अत्यंत शक्तिशाली तथा संक्षारण प्रतिरोधी होता है। इसका उपयोग मूर्ति, सिक्का, पदक, आदि के निर्माण में किया जाता है।
- डूरैलूमिन मुख्य रूप से ऐलुमिनियम तथा कॉपर का मिश्रधातु है तथा अल्प मात्रा में इसमें मैग्नीशियम और मैगनीज मिले होते हैं। यह हल्का शक्तिशाली एवं संक्षारण प्रतिरोधी होता है। इसका उपयोग वायुयान तथा प्रेशर कुकर बनाने में होता है ।
- यह ऐलुमिनियम तथा मैग्नीशिय का मिश्र धातु है । यह अत्यंत हल्का तथा कठोर होता है। तराजू जैसे हल्के तथा मजबूत उपकरण मैग्नेलियम से बनाये जाते हैं।
- जर्मन सिल्वर तांबा, जस्ता तथा निकेल का मिश्रधातु है । इस मिश्रधातु का निर्माण पहली बार जर्मनी में हुआ था एवं ह दिखने में हू - बहू चांदि जैसा लगता है जिसके कारण इसे जर्मन सिल्वर कहते हैं ।
- एल्निको मिश्रधातु की खोज जापान के मिसिमा (Mishima) ने किया था। इस मिश्रधातु में 57% लोहा, 29% निकेल तथा 14% एल्यूमिनियम होता है। इस मिश्रधातु का उपयोग स्थायी चुंबक बनाने में किया जाता है।
- आधुनिक समय में स्थायी चुंबक का निर्माण टीनकोनल मिश्रधातु में टिटेनियम, कोबाल्ट निकेल तथा ऐल्युमिनियम रहता है ।
- सोल्डर टीन तथा सीसा का मिश्रधातु है । इसका उपयोग विद्युत फ्यूज बनाने में किया जाता है।
सीमेंट (Cement )
- सीमेंट धूसर रंग का चूर्ण है। इसको जब जल के साथ मिश्रित करके छोड़ देते हैं तो कुछ ही घंटों में यह शक्तिशाली ठोस रूप में बदल जाता है ।
- सीमेंट का पता सबसे पहले इंग्लैण्ड निवासी जोसेफ आस्पडिन (Joseph Aspdin) ने लगाया था तथा उन्होंने इसका नाम पोर्टलैण्ड ३ सीमेंट रखा, क्योंकि यह सीमेंट पोर्टलैण्ड में मिलने वाले चूना पत्थर से काफी मिलता था ।
- औद्योगिक रूप से तैयार होने वाले सीमेंट में निम्न अवयव पाये जाते हैं-
CaO - 60-70%SiO2 - 20-25%Al2O3 - 5-10%Fe2O3 - 2-3%
- सीमेंट बनाने में कच्चा पदार्थ के रूप चूना पत्थर तथा चिकनी मिट्टी का इस्तेमाल किया जाता है। चूना पत्थर से कैल्शीयम ऑक्साइड (CaO) तथा चिकनी मिट्टी से सिलिका (SiO2), ऐलुमिना (Al2O3) तथा फेरिक ऑक्साइड (Fe2O3) की प्राप्ति होती है ।
- सीमेंट बनाने में चूना-पत्थर तथा चिकनी मिट्टी को बारीक चूर्ण बनाकर 3 : 1 के अनुपात में लिया जाता है और इस मिश्रण को भट्ठी में 1773K ताप पर गर्म किया जाता है फलस्वरूप सीमेंट का निर्माण होता है।
- सीमेंट में तुरंत जमकर ठोस बन जाने का गुण होता है। सीमेंट के जमने की प्रक्रिया को धीमी करने हेतु सीमेंट में 2–5% तक जिप्सम (CuSO4.2H2O) मिलाया जाता है।
- कंक्रीट (Concrete)- सीमेंट, बालू तथा पत्थर के टुकड़े के मिश्रण को कंक्रीट कहते हैं। इसका इस्तेमाल इमारत, पुल, बांध बनाने में किया जाता है।
- प्रबलित कंक्रीट सीमेंट (Reinforced concrete cement or R.C.C.) जब इस्पात की छड़ को गीले कंक्रीट में डाला जाता है, तो जैसे-जैसे कंक्रीट जमता है, यह अत्यंत प्रबल और कठोर हो जाता है, जिसे R. C. C. का इस्तेमाल गटर, पाइप, मजबूत दिवार बनाने में किया जाता है।
कांच (Glass)
- कांच का निर्माण सर्वप्रथम मिस्र में हुआ था। इस आधार पर यह भी कहा जाता है कि रसायन विज्ञान का प्रारंभ भी मिस्र से हुआ।
- काँच एक प्रकार अक्रिस्टलीय ठोस मिश्रण है। सामान्य कांच का रसायनिक सूत्र - Na2O. CaO.6SiO2 होता है।
- कांच बनाने हेतु सबसे पहले सोडियम कर्बोनेट, कैल्शीयम कार्बोनेट तथा बालू के मिश्रण का चूर्ण बनाया जाता है। इस मिश्रण को बै कहते हैं।
- पुनः बैच में क्यूलेट (अर्द्धनिर्मित कांच के टुकड़े) मिलाते हैं ताकि बैच का गलनांक घट जाये ।
- इसके बाद बैच और क्यूलेट के मिश्रण को भट्टी में 1673K ताप पर गर्म करते हैं जिससे भट्ठी में निम्न रसायनिक अभिक्रिया होती है ।
- कांच सोडियम सिलिकेट तथा कैल्शीयम सिलिकेट का ही मिश्रण है ।
- भट्ठी से कांच द्रवरूप में निकलता है जिसे अगर तीव्र गति से ठंडा किया जाए तो कांच भंगुर हो जाता है और धीमी गति से ठंडा किया जाए तो कांच अपारदर्शी हो जाता है। अतः भट्ठी से निकेल द्रव कांच को मध्यम गति से ठंडा किया जाता है। यह विधि अनीलीकरण (Annealing) कहलाता है। अनीलीकृत काँच को अतिशितित द्रव भी कहते हैं।
- कांच के विभिन्न प्रकारः-
- सोडा कांच— इसे मृदु कांच भी कहते हैं । यह कांच सोडा क्षार, बालू और चूना पत्थर से बनाया जाता है। सोडा कांच निम्न कोटी का सस्ता कांच है। यह भंगुर होता है तथा तापमान में एकाएक परिवर्तन से इसमें दरारे आ जाती है।
- कठोर कांच- कठोर कांच पोटाशियम कार्बोनेट एवं चूना पत्थर से बनाया जाता है। यह कांच अम्ल प्रतिरोधी होता है। फिल्ट कांच इसी श्रेणी का कांच है।
- सीसा क्रिस्टल कांच - इस प्रकार कांच पोटाशियम कार्बोनेट, लेड ऑक्साइड और बालू से बनाया जाता है। इस कांच का अपवर्त्तनांक ऊँचा होता है, जिससे यह काफी झिलमिलाहट उत्पन्न करता है। मंहगे कांच के उपकरण में यही कांच होता है I
- पाइरेक्स काँच - यह कांच बालू, चूना, बोरेक्स और क्षार कार्बोनेट के मिश्रण से बनाया जाता है। इस कांच को बोरोसिलिकेट कांच भी कहते हैं। यह कांच रसायनिक पदार्थों से प्रायः अभिक्रिया नहीं करता है और अधिक ताप को भी सहन कर सकता है। इस कांच से प्रयोगशाला के उपकरण फॉर्मास्यूटिकल पात्र बनाये जाते हैं ।
- प्रकाशीय कांच - इस कांच को इस प्रकार से बनाया जाता है कि कांच में जरा सा भी विकृति अथवा त्रुटि न रहे। इस कांच से सूक्ष्मदर्शी, दूरदर्शी कैमरा, चश्मा के लेंस बनाये जाते हैं।
- क्रुक्स कांच से धूप चश्मा का लेंस तथा क्राउन कांच से चश्मा का लेंस बनाया जाता है ।
- फोटोक्रोमिक कांच- यह कांच सिल्वर ब्रोमाइड की उपस्थिति के कारण धूप में स्वतः काला हो जाता है। धूप चश्मे बनाने में इस्तेमाल होता है।
- सुरक्षा कांच (Safety Glass ) - यह कांच में कांच के दो परत के बीच एक पारदर्शी प्लैस्टीक की परत होती है । साधारण अघात से इस कांच पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इस कांच से bullet proof समान बनाये जाते हैं।
- रेशा कांच (Glass Fibres ) – Glass Fibre बनाने हेतु द्रवित कांच को प्लैटिनम धातु के बने पात्र में डाला जाता है। प्लैटिनम धातु के पात्र अतिसूक्ष्म छिद्र बने होते हैं, इसी छिद्र से द्रवित कांच को तीव्र गति से खींचा जाता है जिससे Gass Fibre बनत है। Glass - Fibres को कांच की रूई भी कहते है, यह उष्मा रोधी होता है। इस कांच का उपयोग उष्मा रोधी के रूप में ऑप्टिकलफाईबर बनाने में होता है।
- रंगीन कांच - कांच में विभिन्न प्रकार के धातु के ऑक्साइड मिलाकर विभिन्न रंगों के कांच बनाये जाते हैं। कांच में रंग देने वाले प्रमुख धातु के ऑकसाइड-
फेरिक ऑक्साइड भूरा कांच क्रोमिक ऑक्साइड हरा कांच मैंगनीज - डाइऑक्साइड लाल कांच कोबाल्ट ऑक्साइड नीला कांच
- रंगीन कांच का उपयोग कृत्रिम रत्न, खिड़की का शीशा तथा अन्य सजावटी समान बनाये जाते हैं।
अभ्यास प्रश्न
- Telegram ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here
- Facebook पर फॉलो करे – Click Here
- Facebook ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here
- Google News ज्वाइन करे – Click Here