General Competition | Science | Physics (भौतिक विज्ञान) | उष्मा

उष्मा (Heat) उष्मा एक प्रकार का ऊर्जा है जिसे उष्मीय ऊर्जा कहते हैं । उष्मा ही ऐसी चीज है जिससे गर्मी और ठंडेपन का अनुभव होता है ।

General Competition | Science | Physics (भौतिक विज्ञान) | उष्मा

General Competition | Science | Physics (भौतिक विज्ञान) | उष्मा

  • उष्मा (Heat) उष्मा एक प्रकार का ऊर्जा है जिसे उष्मीय ऊर्जा कहते हैं । उष्मा ही ऐसी चीज है जिससे गर्मी और ठंडेपन का अनुभव होता है ।
    • आधुनिक गतिज सिद्धान्त ( Kinetic theory) के अनुसार पदार्थ के अणुओं की गति को ही उष्मा का कारण माना जाता है। अणुओं की गति तेज होने पर वस्तु की उष्मीय ऊर्जा बढ़ जाती है तथा अणुओं की गति कम होने पर वस्तु की उष्मीय ऊर्जा घट जाती है। अत: उष्मा एक प्रकार की ऊर्जा है जिसका अस्तित्व वस्तुओं के अणुओं की गति के कारण है ।
  • ताप (Temperature)= उष्मा की प्रवाह की दिशा बताने हेतु जिस मूल राशि की आवश्यकता होती है उसे ताप कहते हैं । ताप तत्पता या शीतलता की आपेक्षिक माप या सूचक होता है।
    • जिस तरह द्रव ऊँचे तल से नीचे तल की ओर बहता है, गैस ऊचे दाब से नीचे दाब की ओर बहती है ठीक उसी -तरह उष्मा भी अधिक ताप वाली वस्तु से कम ताप वाली वस्तु की ओर बहती हैं।
उष्मा और ताप में अंतर
  1. किसी वस्तु में उष्मा देने पर उसका ताप बढ़ता है और उष्मा निकालने पर उसका ताप घटता है।
  2. भिन्न-भिन्न वस्तुओं में उष्मा की मात्रा भिन्न-भिन्न रहने पर भी सभी का ताप एक समान हो सकता है।
  3. अगर दो वस्तु में ऊष्मा की मात्रा समान है तो यह जरूरी नहीं है कि उसका ताप समान हो, उसका ताप अलग-अलग भी हो सकता है।
  4. अगर दो वस्तु एक-दूसरे के सम्पर्क में हों तो ऊष्मा के बहाव का पता उनके ताप के ज्ञान से लगाया जाता है।
  • तापमापी (Thermometer)- जिस उपकरण से ताप का मापन किया जाता है उसे तापमापी या थर्मामीटर कहते हैं । विभिन्न प्रकार के थर्मामीटर-
    1. द्रव तापमापी - द्रव तापमापी का सिद्धान्त तापमान परिवर्तन के साथ द्रव के आयतन में परिवर्त्तन पर आधारित होता है । द्रव तापमापी प्रायः दो प्रकार के होते हैं-
      1. Alcohal Thermometer- इस तापमापी में Alcohal (एथिल एल्कोहॉल) का इस्तेमाल होता है। इस तापमापी का प्रयोग अति ठंडे क्षेत्रों में होता है क्योंकि एल्कोहॉल का गलनांक या हिमांक अत्यंत निम्न (- 144°C) होता है।
      2. Mercury Thermometer - इस तापमापी से प्रायः मानव शरीर का ताप मापा जाता है । इस तापमापी को क्लीनिकल थर्मामीटर भी कहते हैं।
    2. गैस तापमापी— इस तापमानी में गैस का इस्तेमाल होता है। यह दो प्रकार के होते हैं-
      1. स्थिर आयतन गैस तापमापी - यह तापमापी चार्ल्स के नियम (Pa Tif V - cons.) पर कार्य करता है ।
        • इस तापमानी में हाइड्रोजन गैस के स्थिर आयतन का दाब मापकर ताप का पता लगाया जाता है। हाइड्रोजन गैस तापमानी से लगभग - 200°C से 500°C तक का ताप मापन किया जाता है। 500°C से ऊपर के ताप मापना हो तो नाइट्रोजन गैस का प्रयोग होता है। वहीं - 200°C से नीचे के ताप मापने हेतु हीलियम गैस का प्रयोग होता है।
      2. नियत दाब गैस थर्मामीटर - यह थर्मामीटर गे-लुसाक का नियम (Va Tif P = cons.) पर कर्य करता है ।
    3. प्लेटिनम प्रतिरोध तापमापी - किसी धातु का विद्युत प्रतिरोध ताप बढ़ने से बढ़ जाता है । इसी सिद्धान्त का प्रयोग कर इस थर्मामीटर को बनाया जाता है जिनमें प्लेटिनम धातु का इस्तेमाल किया जाता है इस थर्मामीटर से 1000°C तक का ताप मापा जा सकता है।
    4. ताप युग्म तापमापी (Thermocouple Thermometor )- यह थर्मामीटर "सीबेक प्रभाव" के सिद्धान्त पर कार्य करता है इससे - 200°C से 1600°C तक का ताप मापा जा सकता है।
      • सीबेक प्रभाव – जब दो भिन्न-भिन्न धातु युग्मों (ऐंटिमनी - विस्मथ या लोहा - ताँबा ) के तार को जोड़कर बंद परिपथ बनाते हैं और दोनों संधियों (जोड़) को भिन्न-भिन्न ताप पर रखते हैं तो परिपथ में विद्युत धारा प्रवाहित होने लगती है । इस प्रभाव को सीबेक प्रभाव कहते हैं तथा उत्पन्न विद्युत धारा को ताप विद्युत धारा कहते हैं ।
    5. Total Radiation Pyrometer - यह थर्मामीटर स्टीफन के नियम पर कार्य करता है। इस थर्मामीटर से अत्यधिक उच्च ताप की माप की जाती है। इसके द्वारा लगभग 800°C - 3000°C तक के ताप को मापा जा सकता है ।
      • स्टीफन का नियम - उच्च ताप वाली वस्तु के प्रति एकांक पृष्ठ क्षेत्रफल से प्रति सेकेंड उत्सर्जित विकिरण की मात्रा उसके परमताप के चतुर्थ घात के समानुपाती होता है।
        E α T4
      • यह थर्मामीटर उच्च तप्त वाली वस्तु से उत्सर्जित विकिरण के आधार पर ही उसका ताप मापता है।
    6. Optical Pyrometer— यह थर्मामीटर भी अत्यधिक उच्च तापमान को मापने हेतु प्रयोग किया जाता है। इसके द्वारा 800°C से 2700°C तक का ताप मापा जा सकता है यह थर्मामीटर "वीन के विकिरण संबंधि विस्थापन नियम पर कार्य” करता है।
      • वीन का सिद्धान्त- तप्त वस्तु से उत्सर्जित विकिरण में सर्वाधिक ऊर्जा वाले विकिरण का तरंग दैर्ध्य तथा वस्तु के परमताप का गुणनफल हमेशा नियत रहता है । 
        λ × T = constant
तापमान के पैमाने (Scales of Thermometer)
  • किसी भी तापमान मापन हेतु दो नियत बिंदु (Fixed Point) लेना आवश्यक होता है और यह नियत बिंदु को सदैव समान ताप पर होने वाली भौतिक परिघटना से संबंधित किया जाना जरूरी होता है।
    • लगभग सभी पैमाने में lower fixed point में पानी के बर्फ में बदलने के ताप तथा Higher Fixed Point के रूप में उबलते जल का ताप को कुल मान देकर निर्धारित किया जाता है। तापमान के विभिन्न स्केल निम्न है -
      1. Centrigrade or Celeius Scales- इसको फ्रांस के वैज्ञानिक सेल्सीयस ने बनाया था । इसका Lower Point Fixed Point 0°C तथा Higher Point Fixed Point 100°C होता है तथा दोनों Fixed Point की दूरी 100 बराबर भागों में बटाँ होता है ।
      2. Fahrenheit Scale - इसको इंग्लैंड के वैज्ञानिक फेरनहाईट ने बनाया था। इसका Lower Fixed Point 32°F तथा Higher Fixed Point 212°F होता है तथा इनके बीच की दूरी 180 बराबर भागों में बटाँ होता है। डॉक्टरी थर्मामीटर प्रायः फेरनहाईट स्केल में ही होता है ।
      3. केल्वीन स्केल- इसका Lower Fixed Point 273.15K होता है तथा Higher Fixed Point 373.15K होता है एवं दोनों बिंदु को बीच का भाग 100 बराबर भागों में बटाँ होता हैं इस स्केल का ताप का परम स्केल भी कहते हैं । 
  • Celcius, Fahrenheit तथा Kelvin Scales के बीच संबंध-

    • - 40°C ऐसा तापक्रम है जहाँ डिग्री सेंटीग्रेड और फॉरेनहाइट का पाठ्यांक एक ही होता है |
    • मानव शरीर का सामान्य ताप 36.9°C या 98.6°F या 310K होता है ।
  • त्रिक बिंदु (Triple Point) - किसी पदार्थ का त्रिक बिंदु वह ताप होता है जिसपर पदार्थ की तीनों अवस्था (ठोस, द्रव, गैस) 
  • एक साथ संतुलन में रहती है। पानी का त्रिक बिंदु 273.16K होता है I

उष्मीय प्रसार (Thermal Expansion )

  • उष्मा पाकर वस्तु का अपने आकार में बढ़ जाना ही उष्मीय प्रसार कहलाता है । उष्मीय प्रसार ठोस में सबसे कम तथा गैस में सबसे अधिक होता है। ठोस को गर्म करने पर उसकी लंबाई तथा आयतन दोनों में परिवर्त्तन होता है परंतु द्रव एवं गैस में केवल आयतन के परिवर्तन होता है ।
  • समान मात्रा में उष्मा दिये जाने पर भिन्न-भिन्न पदार्थों का प्रसार भिन्न-भिन्न अनुपात में होता है । किस पदार्थ में कितना प्रसार होगा यह प्रसार गुणांक पर निर्भर करता है। 
  1. रेखीय प्रसार गुणांक– 1°C तापमान बढ़ाने पर किसी वस्तु की एकांक लंबाई में होने वाली वृद्धि को रेखीय प्रसार गुणांक (α) कहते हैं ।

    प्रमुख पदार्थ का रेखीय प्रसार गुणांक-
    (i) ताँबा – 1.7 × 10-5K-1
    (ii) पीतल - 1.8 × 10-5K-1
    (iii) लोहा - 1.2 × 10-5K-1
    (iv) ऐलुमिनियम – 2.3 × 10-5K-1 
    (v) चाँदी - 1 9 × 10-5 K-1
    (vi) सीसा - 0.29 × 10-5K-1
  2. क्षेत्रीय प्रसार गुणांक– 1°C ताप को बढ़ाने पर किसी वस्तु के एकांक क्षेत्रफल में होने वाली वृद्धि को क्षेत्रीय प्रसार गुणांक (β) कहा जाता है।

  3. आयतन प्रसार गुणांक- 1°C ताप को बढ़ाने पर किसी वस्तु के एकांक आयतन में होने वाली वृद्धि को आयतन प्रसार गुणांक (ϒ) कहा जाता है। 

    • प्रमुख पदार्थ का आयतन प्रसार गुणांक -
      1. इनवार - 0.27 × 10-5 K-1
      2. पैराफीन - 58.8 × 10-5 K-1
      3. पानी - 20.7 × 10-5 K-1
      4. पारा - 18.2 × 10-5 K-1
      5. पाइरेक्स काँच - 1 × 10-5 K-1
      6. साधारण काँच - 2.5 × 10-5 K-1
  • विभिन्न प्रसार गुणांक का आपस में संबंध-

उष्मीय प्रसार के उदाहरण
  1. रेल की पटरियाँ बिछाते समय बीच के जोड़ पर कुछ खाली जगह छोड़ दी जाती है । इसका कारण है कि पटरियाँ लोहे (इस्पात) की बनी होती है तथा गर्म होने पर फैलती है।
  2. काँच की बोतल में जब कॉर्क फॅस जाती है तो बोतल की गर्दन को थोड़ा गर्म करते हैं जिससे गर्दन ढ़ीली हो जाती है तथा कॉर्क आसानी से बाहर निकल जाते हैं।
  3. वलय (Ring) को गर्म करने पर वह प्रसारित होकर फैल जाएगी इसी सिद्धान्त का उपयोग लकड़ी के पहिये पर लोहे के हाल चढ़ाने में किया जाता है ।
  4. लोहे के पुल बनाते समय गर्डरो को केवल एक सिरे पर कसते हैं उनके दूसरे सिरे को ठोस बेलन पर रख देते हैं ताकि . ताप बढ़ने तथा घटने से वे स्वतंत्रापूर्वक फैल एवं सिकुड़ सके ।
  5. मोटे काँच के गिलास में खौलता जल डालने पर गिलास चटक जाता है। इसका कारण यह है कि गर्म जल डालने पर काँच की दिवारों की अंदर की सतह तुरंत गर्म होकर बढ़ जाती है जबकि काँच के कुचालक होने पर बाहर की सतह उतनी ही बनी रहती है अतः अंदर एवं बाहर के प्रसार अलग-अलग होने के कारण गिलास चटक जाता है I
  6. जब दो भिन्न धातु की पट्टी जिनके तापीय प्रसार गुणांक अलग-अलग है, को एक साथ जोड़कर गर्म करने पर असमान प्रसार के कारण वे मुड़ जाएगी। ज्यादा फैलने वाली धातु की पट्टी उत्तलाकार सतह पर होगी और कम फैलने वाली धातु की पट्टी अवतलाकार सतह पर होगा।
  7. यदि किसी धनाभ के भीतर एक मोलाकार छिद्र है तो गर्म करने पर धनाभ के साथ गोलाकार छिंद्र का भी " यानि छिद्र बड़ा हो जाएगा।
    • गर्म करने पर तापीय प्रसार होने से आयतन बढ़ता है जिससे वस्तु का घनत्व घटता है वही तापमान कम होने पर आयतन घटता है और घनत्व बढ़ जाता है।
जल का असमान्य प्रसार
  • सामान्यतः पदार्थों को गर्म करने पर उनमें प्रसार होता है, तथा ठंडा करने पर उसमें संकुचन होता है परन्तु इसके अपवाद है- जल ।
  • जल को ठंडा करने पर 4°C तक तो उसका संकुचन होता है जिससे आयतन घटता है और घनत्व बढ़ता है परंतु 4°C से नीचे और ठंडा करने पर आयतन बढ़ने लगता है और घनत्व घटने लगता है । जब 0°C पर जल बर्फ बनता है तो उसका आयतन बढ़ जाता है, घनत्व घट जाता है ।
ऊष्मा के मात्रक
  • उष्मा का SI मात्रक जूल है। इसके अतिरिक्त उष्मा का I मात्रक कैलोरी है। उष्मा के विभिन्न मात्रक के बीच संबंध-
    1 कैलोरी = 4.2 जूल
    1 किलो कैलोरी 103 कैलोरी = 4200 जूल
    1 ब्रिटिश थर्मल = 252 कैलोरी
    1 थर्म = 105 ब्रिटिश थर्मल 
विशिष्ट उष्माधारित (Specific Heat Capacity )
  • किसी पदार्थ के 1 किलोग्राम द्रव्यमान का ताप 1K या 1°C से बढ़ाने के लिये आवश्यक उष्मा को उस पदार्थ की विशिष्ट उष्माधारिता कहते हैं ।
    • विशिष्ट उष्मा धारिता का मात्रक जूल प्रति किलोग्राम प्रति केल्वीन (J kg-2 k-1 ) है तथा इसकी विमा [L2T-2K-1 ] है |
  • प्रमुख की विशिष्ट उष्मा धारिता का मान Jkg-1 K-1 में

  • पानी की विशिष्ट उष्मा धारिता अधिक होती है यही कारण है कि अन्य पदार्थों के मुकाबले पानी धीरे-धीरे गर्म तथा धीरे-धीरे ठंडा होता है।
  • उष्मा धारिता (Heat Capacity)- किसी वस्तु के किसी भी द्रव्यमान के नमूने का ताप IK या I°C से बढ़ाने हेतु लगे उष्मा की मात्रा को उस वस्तु की उष्मा धारिता कहते हैं। इसका मात्रक जूल प्रति केल्वीन (Jk-1) है।
    • उष्मा का परिणाम मापने हेतु जिस बरतन का उपयोग किया जाता है उसे कैलोरीमीटर कहते हैं। कैलोरीमीटर का निर्माण ताँबे से किया जाता है ।
न्यूनटन का शीतलन नियम
  • जब वस्तु को गर्म कर उसे उसे माध्यम रखते हैं जिसका ताप वस्तु के ताप से कम है तो वस्तु धीरे-धीरे ठंडा होने लगता है। वस्तु का ठंडा होने के संबंध में न्यूटन ने एक नियम दिया जो न्यूटन का शीतलन नियम कहलाता है।
  • न्यूटन का शीतलन नियम- वस्तु के उष्मांक्षय की दर (ठंडा होने) वस्तु के ताप तथा वस्तु के घेरने वाले माध्यम के ताप का अनुक्रमानुपाती होता है यह नियम तब लागू होता है, जब ताप का अन्तर बहुत कम हो ।
  • वस्तु के उष्माहानि की दर वस्तु की खुली सतह के क्षेत्रफल और सतह की प्रकृति पर भी निर्भर करती है। शीतलन की दर वस्तु स्तु की सतह के क्षेत्रफल के बढ़ने पर बढ़ती है और घटने पर घटती है।
  • एक गर्म वस्तु द्वारा 90°C से 80°C तक ठंडा होने में लगा समय उसके 40°C से 30°C तक ठंडा होने में लगा समय से कम होगा।
अवस्था. परिवर्त्तन (Change of State)
  • किसी ताप पर किसी पदार्थ का एक अवस्था से दूसरे में परिवर्तन होना अवस्था परिवर्तन कहलाता है।
  • गलनांक (Melting Point) - वह निश्चित ताप जिसपर कोई ठोस द्रव में बदलता है, पदार्थ का गलनांक कहलाता है ।
  • हिमांक (Freezing Point) - वह ताप बिंदु जिस पर पदार्थ का द्रव अवस्था ठोस में परिवर्तित होता है हिमांक कहलाता है। प्रायः हिमांक एवं गलनांक एक ही ताप बिंदु होते हैं और इनपर ठोस और द्रव परस्पर तापीय साम्य पर होते हैं ।
  • गलनांक एवं हिमांक को प्रभावित करने वाला कारक-
    1. वैसे पदार्थ जिसमें उष्मा देने से प्रसारित होता है इनका गलनांक दाब बढ़ाने से बढ़ता है ।
    2. कुछ पदार्थ (जैसे- बर्फ, ढला हुआ लोहा, एण्टीमनी स्मिथ, पीतल आदि) को ऊष्मा देने पर इनमें संकुचन होता है, ऐसे पदार्थ का गलनांक दाब बढ़ाने से घटता है।
    3. अशुद्धि मिलाने पर गलनांक एवं हिमांक कम हो जाते हैं।
क्वथनांक (Boiling Point) तथा संघनन (Condensation)-
  • वह निश्चित ताप जिस पर पदार्थ की द्रव अवस्था गैस अवस्था में परिवर्तित होती है क्वथनांक कहलाता है । क्वथनांक वही ताप बिंदु है जिस पर उसी पदार्थ की गैस अवस्था द्रव अवस्था में परिवर्तित होती है, यह प्रक्रिया संघनन कहलाता है। क्वथनांक तथा संघनन बिंदु एक ही ताप बिंदु है और इस ताप पर पदार्थ के द्रव तथा गैस तापीय साम्य में होते हैं।
  • क्वथनांक को प्रभावित करने वाला कारक-
    1. दाब बढ़ाने से क्वथनांक का मान बढ़ जाता है ।
    2. अशुद्धि मिलाने पर भी क्वथनांक का मान बढ़ जाता है ।
गुप्त उष्मा (Latent heat)
  • जब पदार्थ का अवस्था परिवर्तन होता है । (गलनांक, क्वथनांक के समय) तो पदार्थ को दी गई उष्मा उसका ताप को नहीं बढ़ता है, यह उष्मा पदार्थ के अवस्था बदलने में ही खर्च हो जाता है। यह उष्मा गुप्त उष्मा कहलाता है। अतः किसी वस्तु ,I गुप्त उष्मा, उष्मा का वह परिमाण है जो बिना ताप बदले उसे एक अवस्था से दूसरी अवस्था में बदलने के लिये आवश्यक है ।
गलन की गुप्त उष्मा (Lateut Heat of -Fusion) :
  • गलनांक पर किसी ठोस का 1kg द्रव्यमान बिना ताप बदले ठोस से द्रव में बदलने के लिये आवश्यक उष्मा के परिमाण को गलन की गुप्त ऊष्मा कहते हैं। गलन के परिमाण को गलन की गुप्त ऊष्मा कहते हैं । गलन की गुप्त उष्मा का SI मात्रक जूल / किलोग्राम (Jkg-1) है।
  • बर्फ की गलन की गुप्त ऊष्मा का मान 336 × 103 J kg-1 है। इसका अर्थ है 1 kg बर्फ को 0°C पर ही पानी में बदलने हेतु 336 × 103 जूल उष्मा लगेगी ठीक इसके विपरित 0°C पर 1kg पानी जब बर्फ बनेगा तो 336 × 103 J उष्मा त्याग करेगा ।
  • चाँदी की गलन की गुप्त उष्मा का मान 102 × 103 J kg-1 है तथा सोना के गलन के गुप्त उष्मा का मान. 64.4 × 103 Jkg-1 है।
वाष्पण की गुप्त उष्मा (Latent Heat of Vaporization)
  • क्वथनांक पर किसी द्रव का 1 kg द्रव्यमान बिना ताप बदले द्रव से वाष्प में बदलने के आवश्यक उष्मा का परिमाण वाष्पण की गुप्त उष्मा कहलाता है, इसका भी मात्रक J kg-1 है। 
  • पानी के वाष्पण के गुप्त उष्मा का मान 2260 × 103 J kg-1 है। इसका अर्थ है 100°C ताप 1 kg पानी को वाष्प में बदलने हेतु 2260 × 103 जूल उष्मा देना पड़ेगा ठीक इसके विपरित 100°C ताप पर i kg वाष्प को पानी में बदलने हेतु 2260 × 103 जूल उष्मा का त्याग करेगी।
वाष्पीकरण (Vaporisation)
  • द्रव से वाष्प में परिणत होने की प्रक्रिया वाष्पीकरण कहलाता है। वाष्पीकरण दो प्रकार से होता है। (i) वाष्पण (Evaporation) तथा (ii) क्वथन (Boiling) I
    1. वाष्पण- द्रव का ऊपरी पृष्ठ का वाष्प में परिणत होना ही वाष्पण कहलाता है । वाष्पण की क्रिया निम्न बातों पर निर्भर करता है-
      • द्रव के खुले पृष्ठ का क्षेत्रफल अधिक होने पर वाष्पण की क्रिया अधिक होती है।
      • द्रव का ताप जितना अधिक होता वाष्पण की क्रिया उतनी ही अधिक होती है।
      • द्रव का क्वथनांक जितना ही कम होता है उसका वाष्पण उतना ही अधिक होता है ।
      • द्रव के पृष्ठ के ऊपर की वायु की गति तेज है तो वाष्पण भी तेजी से होता है ।
      • द्रव के खुले पृष्ठ पर वायु का दाब जितना कम होगा वाष्पण उतनी तेजी से होगी। यही कारण है कि निर्वात में वाष्पण की क्रिया सबसे अधिक तेजी से होता है ।
      • यदि द्रव के खुले पृष्ठ पर वाष्प इकट्ठा हो रहा है तो द्रव के पृष्ठ के ऊपर वाष्प का दाब बढ़ेगा जिससे वाष्पण की क्रिया धीमी पड़ जाएगी।
    2. क्वथन– जब किसी द्रव को गर्म किया जाता है तो एक निश्चित ताप पर द्रव के पूरे भाग में वाष्प बनने लगता है। इस क्रिया को क्वथन कहते हैं तथा जिस ताप पर ऐसी क्रिया होती है उसे क्वथनांक कहते हैं । क्वथन निम्न बातों पर निर्भर करता है-
      • द्रव के वाष्प पर दाब का मान बढ़ने से द्रव का क्वथनांक बढ़ता है।
      • द्रव में अशुद्धि रहने से द्रव का क्वथनांक बढ़ जाता है।
वाष्पण (Evaporation)
  1. मिट्टी के घड़े रंध्रमय होती है जिससे घड़ा में भरा पानी ऊपरी पृष्ठ तक आ जाता है। यह पानी वाष्पित होता रहता है और वाष्पीत होने के लिये उष्मा भीतर के पानी से लेता है जिससे भीतर का पानी ठंडा रहता है।
  2. वाष्प बनने के लिए पसीना शरीर से ही आवश्यक ऊष्मा लेता है। शरीर के उष्मा कम होने से हमें ठंडक का अनुभव होता है। पंखे चलाने से वाष्पण की दर बढ़ जाती है जिससे और भी शीतलता का अनुभव होता है।
  3. ईथर या स्पिरिट को हथेली पर रखने से ठंडक का अनुभव होता है, इसका कारण भी वाष्पण है ।
  4. द्रव को ठंडा करने हेतु खुले पृष्ठ वाले वर्त्तन में रखा जाता है और पंखा चला दिया जाता है जिसे वाष्पण की दर बढ़ जाती है और द्रव शीघ्र ठंडा हो जाता है।
  5. कमरे को ठंडा करने हेतु दरवाजे, खिड़की पर खास प्रकार के ट्टी लगाकर उस पर पानी छिड़कते हैं। यह पानी वाष्पीत होने के लिए कमरे में अन्दर के हवा से उष्मा लेता है और हवा को ठंडी कर देता है ।
  • क्रांतिक ताप (Critical Temperature)- किसी गैस या वाष्प का क्रांतिक ताप वह ताप है जिसके ऊपर किसी भी ताप पर उस गैस या वाष्प को द्रवित नहीं किया जा सकता है चाहे उस पर कितना ही दाब क्यों न आरोपित किया जाय।
    • क्रांतिक ताप से नीचे के ताप पर गैस या वाष्प पर दाब आरोपित कर उसे द्रवित किया जा सकता है। CO2 का क्रांतिक दाब 31°C है।
  • क्रांतिक दाब (Critical Pressure)- क्रांतिक ताप पर कोई गैस जिस न्यूनतम दाब से द्रवित होता है, उस दाब को क्रांतिक दाब कहते हैं। CO2 का क्रांतिक दाब 73 atm है ।
  • क्रांतिक आयतन (Critical Volume)- क्रांतिक ताप एवं क्रांतिक दाब पर किसी गैस के एक किलोग्राम के द्रव्यमान का आयतन उस गैस का क्रांतिक आयतन कहलाता है।
    Note:- गैस और वाष्प में कोई निश्चित भेद नहीं है। सामान्यतः गैस क लिए वाष्प या वाष्प के लिये गैस शब्द का इस्तेमाल होता है।
उष्मा का संचरण (Gransmission o Heat)
  • ताप के अंतर रखने के कारण उष्मा का एक वस्तु से दूसरे वस्तु में स्थानांतरण ही उष्मा का संरचरण कहलाता है। उष्मा का संरचरण की तीन विधि है - 1. चालन (Conduction), 2. संवहन, 3. विकिरण ।
    1. चालन (Conduction )- इस विधि से पदार्थ के कण (अणु) अपना स्थान बदले उष्मा को दूसरे कण तक पहुँचा देते हैं। ठोस पदार्थ चालन विधि के द्वारा ही गर्म होते हैं ।
      • ठोस के अणु एक स्थान से दूसरे स्थान पर गति करने के लिए स्वतंत्र नहीं होते हैं अतः ठोस में उष्मा स्थानांतरण केवल चालन विधि द्वारा होता है।
    2. संवहन (Convection ) - इस विधि में पदार्थ के कण स्वंय स्थान बदलकर गर्म क्षेत्र से ठंडे क्षेत्र की ओर चलकर उष्मा को दूसरे कण तक पहुँचाते हैं। द्रव तथा गैसीय पदार्थ इसी विधि से गर्म होते हैं।
      • द्रव एवं गैस को जब गर्म किया जाता तो गर्म क्षेत्र वाला कण ठंडे क्षेत्र में तथा ठंडे क्षेत्र गर्म क्षेत्र की ओर आता है। इस कारण द्रव एवं गैस में एक प्रकार की धारा बन जाती है जिसे संवहन धारा (Convection Current) कहते हैं। इसी संवहन धारा के कारण गैस का द्रव माध्यम गर्म होता है ।
      • द्रव एवं गैस के अतिरिक्त संवहन धारा प्रकृति में भी पाये जाते हैं- स्थलीय वायु, समुद्री वायु, व्यापारिक वायु सभी संवहन धारा के उदाहरण हैं ।
      • धातु में मुक्त इलेक्ट्रॉन पाये जाते हैं जो गति करने हेतु स्वतंत्र होता है अतः धातु में उष्मा का स्थानांतरण चालन तथा संवहन दोनों ही विधि से होता है।
    3. विकिरण (Radiation )- जब उष्मा का स्थानांतरण बिना किसी माध्यम के ही होता है तो इस विधि को विकिरण कहते हैं ।
      • पृथ्वी पर सूर्य का उष्मा विकिरण विधि से ही पहुँचता है । विकिरण द्वारा उष्मा का संचरण निर्वात् में भी हो सकता है।
      • विकिरण विधि द्वारा उष्मा का संरचरण प्रकाश की तरह विद्युत-चुबंकीय तरंग की रूप में होता है ।
      • चालन तथा संवहन द्वारा उष्मा धीरे-धीरे संचरित होता है लेकिन विकिरण द्वारा उष्मा का संरचरण प्रकाश की चाल से होता है ।
      • विकिरण द्वारा उष्मा संचरण का मार्ग सरल रैखिक होता है जबकि चालन एवं संवहन विधि में उष्मा का संचरण टेढ़े-मेढ़े मार्ग से भी संभव है।
ऊष्मा चालकता (Thermal Conductivity)
  • सुचालक एवं कुचालक पदार्थों की भिन्नता का अध्ययन करने हेतु जिस भौतिक राशि की आवश्यकता होती है, उसे उष्मा चालकता कहते हैं या चालन विधि से उष्मा संचरित होने का गुण ही उष्मा चालकता कहलाता है ।
  • पदार्थ के उष्मा चालकता का मान जितना अधिक होता है उस पदार्थ में उष्मा का आदान-प्रदान उतने ही सुगमता से होता है।
  • SI मात्रक में उष्मा चालकता की परिभाषा किसी पदार्थ का उष्मा चालकता, उष्मा का वह परिमाण है जो स्थायी अवस्था में उस पदार्थ के एक वर्गमीटर क्षेत्रफल तथा । मीटर लंबी छड़ से प्रति सेकंड प्रवाहित होती है यदि छड़ के दोनों सिरों के बीच तापांतर 1 K हो तथा उष्मा का संचरण छड़ के सिरों के लंबवत हो ।
  • उष्मा चालकता का SI मात्रक वाट प्रति मीटर प्रति केल्विन (Wm-1 k-1 ) है तथा इसकी विमा (MLT-3 K-1 )
विकिरण (Radiation)
  • विकिरण शब्द का उपयोग दो अर्थ में होता है एक विकिरण उष्मा स्थानांतरण की विधि है और दूसरा विकिरण से तात्पर्य विकिरण ऊर्जा से है ।
  • विकिरण ऊर्जा (Radiant energy)- जब किसी वस्तु को गर्म कर निर्वात् में रखा जाता है तो उष्मा का पारा होता है, और यह क्षय विकिरण विधि से ही होता है क्योंकि निर्वात् में चालन या संवहन संभव नहीं है। अतः गर्म वस्तु के पृष्ठ से वस्तु के ताप के कारण जो ऊर्जा विकरित होती है, उसे विकिरण ऊर्जा कहते हैं। विकिरण ऊर्जा विद्युत चुंबकीय तरंग के रूप. तथा इसी रूप में संचरित होती है। -पुष्पा भी विकिरण ऊर्जा का का एक रूपे हैं।
  • निम्न ताप पर विकिरण की दर अल्प होती है ज्यों-ज्यों ताप बढ़ता जाता है विकिरण की दर तीव्र रूप से बढ़ती जाती है I
बोलोमीटर (Bolometer)
  • बोलोमीटर ऐसा उपकरण है जिसके द्वारा विकिरण ऊर्जा को मापा जाता है। इसकी खोज एस. पी. लैंगले ने 1881 ई. में किया था | बोलोमीटर दो प्रकार के होते हैं ।
    1. Surface Bolometer— इस बोलोमीटर का व्यवहार सम्पूर्ण विकिरण की माप के लिए किया जाता है।
    2. Linear Bolometer- इस बोलो मीटर का इस्तेमाल काली वस्तु (Black Body) द्वारा उत्सर्जित या अवशोषित विकिरण ऊर्जा के माप के लिए होता है।
किरचॉफ का नियम
  • किरचॉफ के नियम के अनुसार किसी निश्चित ताप पर किसी दी गई तरंगदैर्ध्य के लिए सभी वस्तु की उत्सर्जन क्षमता तथा अवशोषण क्षमता का अनुपात एक ही होता है ।
  • किरचॉफ के नियम का सीधा अर्थ यह है विकिरण का अच्छा अवशोषण करता है अवशोषक अच्छे उत्सर्जक भी होते हैं। यदि कोई वस्तु किसी तरंगदैर्ध्य वह उसी तरंगदैर्ध्य के विकिरण का अच्छा उत्सर्जन भी करेगा ।
  • उत्सर्जन क्षमता- किसी निश्चित ताप पर किसी पृष्ठ की उत्सर्जन क्षमता उसके प्रति एकांक क्षेत्रफल द्वारा प्रति सेकंड उत्सर्जित विकिरण ऊर्जा के कुल परिमाण बराबर होता है। इसे संकेत द्वारा निरूपित किया जाता है। इसका SI मात्रक Jm-5 S-1 या Wm-2 है।
  • अवशोषण क्षमता– किसी पृष्ठ द्वारा किसी समय में अवशोषित विकिरण ऊर्जा का परिमाण तथा उतने ही समय में उस पृष्ठ पर आपतित कुल विकिरण ऊर्जा के परिमाण के अनुपात को अवशोषण क्षमता कहते हैं इसे a से सूचित किया जाता है। चूँकि a ऊर्जा के मात्रा का अनुपात है अतः इसका कोई मात्रक नहीं होता है ।
  • कृष्ण पिंड (Black Body ) - यदि किसी वस्तु पर आपतित अनी तरंगदैर्ध्य के विकिरण पूर्णतः वस्तु द्वारा अवशोषित हो जाए तथा आपतित विकिरण का कोई भी भाग न तो परावर्तित हो और न संचरित हो ऐसी वस्तु को आदर्श कृष्ण पिंड ( Perfect Black Body) कहा जाता है।
  • कोई भी वस्तु पूर्ण कृष्ण पिंड नहीं हो सकता है। कुछ सीमा तक दीप कालिख (काजल), प्लैटिनम के कालिख से लेपित सतह को कृष्ण पिंड माना जा सकता है परंतु ये भी 1% विकिरण को परावर्तित कर देती है ।
  • आदर्श कृष्ण पिंड एक पूर्ण अवशोषक के साथ एक पूर्ण विकिरक भी कहा जाता अतः आदर्श कृष्ण पिंड को जब ऊँचे ताप तक गर्म किया जाता है तो यह सभी संभव तरंगदैर्ध्य के विकिरण को उत्सर्जित करता है। पूर्ण कृष्ण पिंड के अवशोषी क्षमता का मान 1 होता है ।
थर्मस फ्लास्क (Thermos Flask)
  • थर्मस फ्लास्क एक ऐसा पात्र है जिसमें बहुत देर तक गर्म वस्तु गर्म तथा ठंडी वस्तु ठंडी रहती है। इसका आविष्कार डेवार नामक वैज्ञानिक ने किया था ।
  • थर्मस फ्लास्क में उष्मा का तीनों विधि द्वारा स्थानांतरण न्यूनतम होने के कारण गर्म वस्तु बहुत देर तक गर्म तथा ठडी वस्तु बहुत देर तक ठंडी रहती है।
उष्मागतिकी (Thermodynamics)
  • भौतिकी की वह शाखा जिसमें उष्मा एवं यांत्रिक ऊर्जा के बीच संबंध तथा उनेक परस्पर पर रूपांतरण का अध्ययन किया जाता है उष्मा गतिकी कहलाता है।
  • सर्वप्रथम जूल ने अपने प्रयोग द्वारा उष्मा एवं कार्य के बीच संबंध स्थापित किया तथा यह भी सिद्ध किया की यांत्रिक ऊर्जा के अलावे रसायनिक तथा विद्युत ऊर्जा को भी उष्मा में बदला जा सकता है। जूल के अनुसार अगर W यांत्रिक कार्य से H उष्मा उत्पन्न होती है तो
            W ∝ H
    या     W = JH
            J को नियतांक या उष्मा का यांत्रिक तुल्यांक कहते हैं।
  • उष्मागतिकी का शून्यवाँ नियम - यदि दो वस्तु तीसरी वस्तु से अलग-अलग तापीय साम्य की अवस्था में हो तो वह दोनों वस्तु भी आपस में तापीय साम्य की अवस्था में होगी।
  • तापीय साम्य (Thermal Equilibrium)– जब भिन्न ताप वाली दो वस्तु को संपर्क में लाते हैं तो उष्मा का प्रवाह अधिक ताप से कम ताप की ओर होता है और तब तक होता है जब तक दोनों का ताप बराबर न हो जाए। जब वस्तु का ताप समान हो जाता है तो उसी स्थिति में तापीय साम्य कहा जाता है I
  • उष्मागति का पहला नियम- उष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा-संरक्षण नियम का ही एक रूप है जिसको शब्दों में इस प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है- यदि कार्य कर सकने वाले किसी निकाय द्वारा यदि उष्मा अवशोषित हो तो अवशोषित उष्मा का परिमाण निकाय द्वारा किये गये वाह्य कार्य एवं उसकी आंतरिक उर्जा में वृद्धि के योग के बराबर होते हैं ।
    dQ = du + dw
    dQ = दिया गया ऊष्मा
    dU = आन्तरिक ऊर्जा में वृद्धि 
    dW = निकाय द्वारा किया गया बाह्य कार्य
  • उष्मा गति की दूसरा नियम - उष्मागतिकी का दूसरा नियम इस तथ्य को स्पष्ट करता है कि किस दिशा उष्मीय ऊर्जा का स्थानांतरण होता है। इस नियम को दो तरीके से व्यक्त किया जाता है-
    1. क्लाउसियस कथन- विना किसी बाहरी ऊर्जा के स्त्रोत से कियी यन्त्र द्वारा ठंडी वस्तु से गर्म वस्तु में उष्मा का स्थानांतरण असम्भव है ।
    2. केल्वीन का कथन— सबसे ठंडे वातावरण में किसी वस्तु को इस वातावरण के ताप से कम ताप तक ठंडा करके यांत्रिक कार्य प्राप्त करना असंभव है ।
  • ऊष्मागतिकी का तीसरा नियम- इस नियम का प्रतिपादन नर्स्ट नामक वैज्ञानिक ने किया था । इस नियम के अनुसार- परमशून्य ताप कभी भी प्राप्त नहीं किया जा सकता है।

अभ्यास प्रश्न

1. भिन्न-भिन्न व्यास के ताँबे के दो गोलों को भट्ठी से बाहर निकाला जाता है और समान दशा में दोनों को ठण्डा होने दिया जाता है, तो निम्न में से कौन सही है ?
(a) बड़े गोला के अपेक्षा छोटा गोला जल्दी ठण्डा होगा
(b) बड़ा गोला जल्दी ठण्डा होगा
(c) दोनों गोला समानदर से ठण्डा होगा
(d) छोटा गोला का ताप पहले गिरेगा और तब फिर बढ़ना शुरू होगा।
2. तप्त वस्तु से ऊष्मा की क्षति निर्भर करती है-
(a) केवल वस्तु के ताप पर
(b) केवल वातावरण के ताप पर
(c) वस्तु तथा उसके बगल के वातावरण के तापान्तर पर
(d) उपर्युक्त में कोई सही नहीं है
3. जल का कुछ द्रव्यमान और बर्फ का कुछ द्रव्यमान जो 0°C पर है उन्हें एक साथ मिला दिया जाता है तो ताप 
(a) गिरेगा
(b) बढ़ेगा
(c) अपरिवर्तित रहेगा 
(d) जल तथा बर्फ के सापेक्षिक द्रव्यमान पर निर्भर करेगा
4. बर्फ का ताप 0°C से 4°C तक लाया जाता है। बर्फ पिघलने से जो पानी बनता है उसका घनत्व-
(a) बढ़ता जाएगा
(b) घटना जाएगा
(c) अपरिवर्तित रहेगा
(d) न घटेगा, न ही बढ़ेगा
5. पानी का ताप 4°C से बढ़ाया जाता है। इसका घनत्व -
(a) बढ़ता जाएगा
(b) घटता जाएगा
(c) अपरिवर्तित रहेगा
(d) न ही बढ़ेगा, न ही घटेगा
6. आपको दो प्याले में चाय दी गई है, एक अपने लिए दूसरा आपके मित्र के लिए। आपको अपने मित्र के लिए कुछ समय तक प्रतीक्षा करनी है तो आप निम्न में से कौन-सा विकल्प आजमाएंगे ?
(a) चाय में चीनी डालकर मित्र की प्रतीक्षा करेंगे
(b) बिना चीनी डालकर मित्र की प्रतीक्षा करेंगे
(c) उपर्युक्त दोनों विकल्प हो सकता है इससे कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा
(d) कोई भी विकल्प उपर्युक्त नहीं है
7. वह ताप जिस पर बर्फ, पानी और इसका वाष्प संतुलन में रहे हैं, कहा जाता है-
(a) हिमांक
(b) क्वथनांक
(c) क्रांतिक बिन्दु
(d) त्रिक बिंदु
8. निम्न ताप मापने हेतु तापमापीय पदार्थ के रूप में सबसे उपर्युक्त गैस है-
(a) ऑक्सीजन
(b) टिलीयम
(c) नाइट्रोजन
(d) हाइड्रोजन
9. नियम आयतन थर्मामीटर जिस नियम पर कार्य करता है,वह है-
(a) पास्कल का नियम 
(b) वॉयल का नियम 
(c) आर्कमिडीज का नियम 
(d) चार्ल्स का नियम
10. जल को 0°C से 50°C तक गर्म किया जाता है तो इसका आयतन-
(a) बढ़ता है
(b) घटता है
(c) अपरिवर्तित रहता है
(d) पहले घटता है, फिर बढ़ता है
11. ताँबे की प्लेट में एक वृत्ताकार छिद्र है, ताँबे की प्लेट गर्म करने पर छिद्र का व्यास-
(a) सदैव घटता है
(b) सदैव बढ़ता है
(c) सदैव समान रहता है
(d) इनमें से कोई नहीं
12. धातु से बनी ठोस गेंद में एक कोटर (Cavity) है, गेंद को गर्म करने पर कोटर का आयतन -
(a) बढ़ता है
(b) घटता है
(c) अपरिवर्तित रहता है
(d) इसका आकार बदल जाता है
13. द्रवण के समय वस्तु का ताप-
(a) नियत रहता है
(b) बढ़ता है
(c) घटता है
(d) इनमें से कोई नहीं
14. सिर दर्द से परेशान आदमी को बाम से आराम पहुँचता है क्योंकि-
(a) इसमें ठण्डक उत्पन्न करनेवाला एक अवयव होता है।
(b) यह वाष्पीशील होता है
(c) इसका ताप मनुष्य के शरीर के ताप से कम होता है
(d) यह ठण्डा होता है,
15. वस्तु को गर्म करने पर उसके अणुओं-
(a) की चाल बढ़ जाएगी
(b) की ऊर्जा कम हो जाएगी
(c) का भार बढ़ जाएगा
(d) का भार घट जाएगा.
16. किसी वस्तु का ताप किसका सूचक है ?
(a) उसके अणुओं की कुछ ऊर्जा का
(b) उसके अणुओं की औसत ऊर्जा सत् ऊर्जा का
(c) उसके अणुओं के कुल वेग का
(d) उसके अणुओं के औसत गतिज ऊर्जा का
17. वस्तु का ताप सूचित करता है कि सम्पर्क करने पर ऊष्मा-
(a) उस वस्तु में अपेक्षाकृत अधिक ताप पर की वस्तु में प्रवाहित होगी ।
(b) अपेक्षाकृत कम ताप की वस्तु में उस वस्तु से प्रवाहित होगी ।
(c) उस वस्तु से पृथ्वी में प्रवाहित होगी ।
(d) पृथ्वी से उस वस्तु में प्रवाहित होगी ।
18. किसी वस्तु के ताप में वृद्धि का अर्थ है कि वस्तु की - 
(a) गतिज ऊर्जा बढ़ गई है
(b) स्थितिज ऊर्जा बढ़ गई है
(c) यांत्रिक ऊर्जा बढ़ गई है
(d) ऊष्मीय ऊर्जा बढ़ गई है
19. जब किसी वस्तु को ठंडा किया जाता है तब उसके अणुओं- 
(a) की ऊर्जा बढ़ जाती है 
(b) की चाल घट जाती है
(c) का द्रव्यमान बढ़ जाता है
(d) का भार बढ़ जाता है
20. ऊष्मा (Heat) एक प्रकार की ऊर्जा है जिसे कार्य में बदला जा सकता है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण सबसे पहले किसने दिया 
(a) डेवी
(b) रमफोर्ड
(c) सेल्सियस
(d) फारेनहाइट
21. किस वैज्ञानिक ने सर्वप्रथम बर्फ के दो टुकड़ों को आपस में पिसकर पिघला दिया ?
(a) रमफोर्ड
(b) जूल 
(c) डेवी
(d) सेल्सियस
22. जब कभी कार्य ऊष्मा में बदलता है या ऊर्जा कार्य में बदलती है तो किये गये कार्य व उत्पन्न ऊष्मा का अनुपात एक स्थिरांक होता है जिसे ऊष्मा का यांत्रिक तुल्यांक कहते हैं। इसका मान होता है-
(a) 4186 जूल /किलो कैलोरी
(b) 4.186 जूल / कैलोरी
(c) 4.186 × 107 अर्ग / कैलोरी
(d) उपर्युक्त सभी
23. जब कुछ पानी का लगातार मंथन (Churning) किया जाता है तब तब उसका ताप बढ़ जाता है। इस क्रिया में- 
(a) ऊष्मा ऊर्जा का रूपान्तरण ऊष्मीण ऊर्जा में होता है।
(b) ऊष्मीय ऊर्जा का रूपान्तरण ऊष्मा में होता है ।
(c) यांत्रिक ऊर्जा का रूपान्तरण ऊष्मीय ऊर्जा में होता है।
(d) ऊष्मीय ऊर्जा का रूपान्तरण यांत्रिक ऊर्जा में होता है।
24. वाष्प इंजन में उबले हुए जल का तापमान किस कारण से उच्च हो सकता है ?
(a) जल में विलीन पदार्थ होते हैं
(b) बॉयलर के अंदर निम्न दाब होता है
(c) बॉयलर के अंदर उच्च दाब होता है
(d) अग्नि अत्यधिक उच्च तापमान पर होती है
25. शीतकाल हैंडपम्प का पानी गर्म होता है, क्योंकि-
(a) शीतकाल में हमारा शरीर ठंडा होता है, अतः जल गर्म प्रतीत होता है
(b) पृथ्वी के भीतर तापमान वायुमंडल के तापमान से अधिक होता है।
(c) पम्पिंग क्रिया से घर्षण पैदा होता है, जिससे जल गर्म हो जाता है
(d) भीतर से जल बाहर निकलता है और परिवेश से ऊष्मा का अवशोषण कर लेता है
26. जलप्रपात के अधस्तल पर जल का तापमान ऊपर की अपेक्षा अधिक होने का कारण है-
(a) अधस्तल पर जल की स्थितिज ऊर्जा अधिक होती है
(b) अधरतल पर पृष्ठ ऊष्मा उपलब्ध कराता है
(c) गिर रहे जल की गतिज ऊर्जा ऊष्मा में बदल जाती है
(d) गिरता हुआ जल परिवेश से उष्मा का शोषण कर लेता है
27. गर्मियों में ताप 46°C हो जाने पर भी ऊँट गर्मी से राहत महसूस करता है-
(a) रेगिस्तानी पौधों की छाया में बैठकर
(b) अपने शरीर के ताप को 42°C तक बढ़ाकर
(c) अपने शरीर में पानी का संचय करके
(d) उपर्युक्त में कोई नहीं
28. बर्फ पर दाब बढ़ाने से उसका गलनांक (m.p.)-
(a ) घट जायेगा
(b) बढ़ जायेगा 
(c) अपरिवर्तित रहेगा
(d) शून्य हो जायेगा
29. गैस तापमानी, द्रव तापमापियों की तुलना में ज्यादा संवेदी होते हैं, क्योंकि गैस- 
(a) की विशिष्ट ऊष्मा अधिक होती है
(b) का प्रसार गुणांक अधिक होता है
(c) हल्की होती है
(d) की विशिष्ट ऊष्मा कम होती है।
30. ताप युग्म तापमानी (Thermo Couple Thermometer) किस सिद्धान्त पर आधारित है ? 
(a) सीब्रेक के प्रभाव पर
(b) जूल के प्रभाव पर
(c) पेल्टियर के प्रभाव पर
(d) इनमें से कोई नहीं
31. पूर्ण विकिरण उत्तापमानी (Total Radiation Pyrometer) किस सिद्धान्त पर आधारित है ?
(a) सीबेक के प्रभाव पर
(b) पेल्टियर के प्रभाव पर
(c) स्टीफन के नियम पर
(d) जूल के प्रभाव पर
32. दूर की वस्तुओं जैसे सूर्य आदि का ताप किस तापमापी के द्वारा मापा जाता है ?
(a) ताप युग्म तापमानी द्वारा
(b) प्लेटिनम प्रतिरोध तापमानी द्वारा
(c) पूर्ण विकिरण उत्तापमानी द्वारा
(d) इनमें से कोई नहीं
33. ठंडे देशों में पारा के स्थान पर ऐल्कोहॉल को तापमापी द्रव के रूप में वरीयता दी जाती है, क्योंकि-
(a) ऐल्कोहॉल का द्रवांक निम्नतर होता है।
(b) ऐल्कोहॉल ऊष्मा का बेहतर संचालक होता है।
(c) ऐल्कोहॉल पारा से अधिक सस्ता होता है।
(d) ऐल्कोहॉल का विश्व उत्पादन पारा से अधिक होता है। 
34. सूर्य का ताप मापा जाता है-
(a) प्लैटिनम तापमानी द्वारा
(b) गैस तापमानी द्वारा
(c) पाइरोमीटर तापमानी द्वारा
(d) वाष्पन दाब तापमानी
35. निम्नलिखित तापमापियों में से किसे पायरोमीटर कहा जाता है ?
(a) ताप विद्युत तापमानी
(b) विकिरण तापमापी
(c) गैस तापमानी
(d) द्रव तापमानी
36. केल्विन मान से मानव शरीर का सामान्य ताप है-
(a) 280
(b) 290
(c) 300
(d) 310
37. कौन-सा तापमान सेंटिग्रेड और फारेनहाइट दोनों तापक्रमों में एकसमान है ?
(a) 40°
(b) 100°
(c) - 100°
(d) -40°
38. न्यूनतम सम्भव ताप है-
(a) -273°C
(b) 0°C
(c) -300°C
(d) 1°C
39. फारेनहाइट स्केल पर किसी वस्तु का ताप 212°F सेल्सियस पैमाने पर उस वस्तु का ताप होगा-
(a ) - 32°C
(b) 40°C
(c) 100°C
(d) 112°C
40. सेल्सियस पैमाने का 0°C फारेनहाइट स्केल के कितने डिग्री के बराबर होगा ?
(a) 5°
(b) 32°
(c) 64°
(d) 273°
41. मानव शरीर का सामान्य तापक्रम 98.4°F है। इसके बराबर °C में तापक्रम है-
(a) 40.16
(b) 36.89
(c) 35.72
(d) 32.36
42. फारेनहाइट मापक्रम पर सामान्य वायुमण्डलीय दाब पर उबलते पानी का ताप होता है-
(a) 32°F
(b) 100°F
(c) 180°F
(d) 212°F
43. दिल्ली में जल का क्वथनांक 100°C है तो मसूरी में जल का तापमान क्या होगा ? 
(a) 100°C
(b) 100°C से कम
(c) 100°C से अधिक
(d) सभी असत्य है
44. एक मनुष्य का तापक्रम 60°C है, तो उसका तापक्रम फारेनहाइट में क्या होगा ?
(a) 140°F
(b) 120°F
(c) 130°F
(d) 98°F
45. किसी मनुष्य के शरीर का सामान्य तापक्रम होता है- 
(a) 98°F
(b) 98°C
(c) 68°F
(d) 66°F 
46. तप्त जल के थैलों में जल का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि-
(a) यह सरलता से मिल जाता है।
(b) यह सस्ता है और हानिकारक नहीं है
(c) इसकी विशिष्ट ऊष्मा अधिक है
(d) जल को गर्म करना आसान है
47. धातु की चायदानियों में लकड़ी के हैंडल क्यों लगे होते हैं ?
(a) लकड़ी ऊष्मा की कुचालक होती है।
(b) इससे बिजली का शॉक नहीं लगता है
(c) इससे पात्र सुन्दर लगता है
(d) इसमें स्वच्छता होती है।
48. जब गर्म पानी को मोटे कांच के गिलास के ऊपर छिड़का जाता है तो वह टूट जाता है। इसका क्या कारण है ? 
(a) अचानक ही गिलास विस्तारित हो जाता है।
(b) अचानक ही गिलास संकुचित हो जाता है।
(c) जल वार्षपत हो जाता है। 
(d) गिलास रसायनिक रूप से जल के साथ प्रतिकृत होता है ।
49. जब बर्फ को 0°C से 10°C तक गर्म किया जाता है, तो जल की आयतन-
(a) इकसार रूप से बढ़ती है
(b) इकसार रूप से कम होती है
(c) पहले बढ़ती है और उसके बाद कम होती है
(d) पहले कम होती है और उसके बाद बढ़ती है।
50. यदि जल को 10°C से 0°C तक ठंडा किया जाए तो -
(a) जल का आयतन 4°C तक तो कम होगा फिर बढ़ेगा
(b) जल का घनत्व लगातार बढ़ेगा और 4°C पर अधिकतम हो जाएगा।
(c) जल का आयतन लगातार घटेगा और 4°C पर न्यूनतम हो जाएगा।
(d) जल का घनत्व 4°C तक घटेगा फिर बढ़ेगा ।
51. साइकिल के ट्यूब अधिकांशतया गर्मियों में क्यों फटते हैं ? 
(a) गर्मी के कारण ट्यूब फट जाता है।
(b) गर्मी के कारण रबड़ बहुत कमजोर हो जाता है।
(c) गर्मी के कारण रबड़ कड़ा हो जाता है और हवा को जगह देने के लिए फैलती नहीं है।
(d) उपर्युक्त में कोई नहीं
52. शीशे की छड़ जब भाप में रखी जाती है, इसकी लम्बाई बढ़ जाती है परन्तु इसकी चौड़ाई-
(a) अप्रभावित रहती है
(b) घटती है 
(c) बढ़ती है
(d) अव्यवस्थित होती है
53. लोलक घड़ियाँ गर्मियों में सुस्त हो जाती है ?
(a) गर्मियों के दिन लम्बे होने के कारण
(b) कुण्डली में घर्षण के कारण
(c) लोलक की लम्बाई बढ़ जाती है जिससे इकाई दोलन में लगा हुआ समय बढ़ जाता है ।
(d) गर्मी में लोलक का भार बढ़ जाता है।
54. अत्यधिक शीत ऋतु में पहाड़ों पर पानी की पाइपलाइनें फट जाती है। इसका कारण है-
(a) पाइप ठण्डक से सिकुड़ जाता है।
(b) पाइप में पानी जमने पर सिकुड़ जाता है।
(c) पाइप में पानी जमने पर फैल जाता है।
(d) पाइप ठंडक पाकर बढ़ जाते हैं.
55. दो रेल पटरियों के मध्य जो पर एक छोटा सा स्थान क्यों छोड़ जाता है ?
(a) क्योंकि ऐसे स्थान छोड्ने से कुछ लागत बचेगी
(b) क्योंकि धातु गर्म करने पर फैलती तथा ठंडी होने पर संकुचित होती है।
(c) आवश्यक गुरूत्व बल उत्पन्न करने के लिए
(d) इनमें से कोई नहीं
56. किसी झील की सतह का पानी बस जमने की वाला है। लके झील अधः स्थल में जल का क्या तापमान होगा ?
(a) 0°C
(b) 1°C
(c) 2°C
(d) 4°C
57. शीतकाल में जब ठंड से जल जम जाता है, तब मछलियाँ और अन्य जलीय जीव-
(a) जीवित रह सकते हैं, क्योंकि जल का केवल ऊपरी परत ही जमता है
(b) अन्य गर्म स्थानों पर चले जाते हैं
(c) सुरक्षित जीवित रह सकते हैं, क्योंकि उनमें ठंड बर्दाश्त करने की अंतनिर्मित प्रणाली होती है
(d) मर जाते हैं।
58. ऊष्मा के संचरण (Transmissio of heat) की विधि है - 
(a) चालन (Conduction)
(b) संवहन (Convection)
(c) विकिरण (Radiation)
(d) उपर्युक्त सभी
59. ऊष्मा के संचरण की किस विधि में पदार्थ के अणु एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्वयं नहीं जाते ?
(a) चालन
(b) संवहन
(c) विकिरण
(d) उपर्युक्त सभी
60. द्रवों तथा गैसों में ऊष्मा का स्थानान्तरण निम्नलिखित में से किस विधि द्वारा होता है ?
(a) चालन
(b) संवहन
(c) विकिरण
(d) इनमें से कोई नहीं
61. विद्युत् केतली में पानी गर्म होता है-
(a) चालन के कारण
(b) संवहन के कारण
(c) विकिरण के कारण
(d) इनमें से सभी 
हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे ..
  • Telegram ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here
  • Facebook पर फॉलो करे – Click Here
  • Facebook ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here
  • Google News ज्वाइन करे – Click Here