General Competition | Science | Chemistry (रसायन विज्ञान) | तत्वों का आवधिक वर्गीकरण
सर्वप्रथम तत्वों का वर्गीकरण Lavoisier ने धातु तथा अधातु के रूप में किया था परन्तु यह वर्गीकरण ज्यादा दिनों तक मान्य नहीं रहा ।

General Competition | Science | Chemistry (रसायन विज्ञान) | तत्वों का आवधिक वर्गीकरण
- अब तक 114 तत्वों की खोज हो चुकी है तथा इन तत्वों के संयोग से लाखों यौगिक का निर्माण हो चुका है अतः यह जानना आवश्यक हो गया है कि ये तत्व किस प्रकार अभिक्रिया करते हैं और उनका गुण किस बात पर निर्भर करता है और यही आवश्यकता तत्व के आवर्ती वर्गीकरण को जन्म दिया ।
- सर्वप्रथम तत्वों का वर्गीकरण Lavoisier ने धातु तथा अधातु के रूप में किया था परन्तु यह वर्गीकरण ज्यादा दिनों तक मान्य नहीं रहा ।
डोबरेनर (Dobereiner) का त्रिक नियम
- इस नियम का प्रतिपादन जर्मन के वैज्ञानिक जॉन डोबरेनर ने किया था। उन्होंने रसायनिक दृष्टि से समान तत्वों को तीन-तीन समूह में विभक्त किया और त्रियक नियम की घोषणा की।
- डोबरेनर का त्रिक नियम- त्रियक के तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान के क्रम में सजाने पर मध्यवर्ती तत्व का परमाणु द्रव्यमान शेष दो तत्वों के परमाणु द्रव्यमान का औसत होता है।
उदा०-
- कैल्शीयम (40) स्ट्रॉशियम ( 87.5) बेरियम ( 137 )
इस समूह में कैल्शियम तथा बेरियम के परमाणु द्रव्यमान का औसत लगभग में स्ट्राँशियम के बराबर होते हैं।
- लिथियम (7), सोडियम ( 23 ), पोटैशियम (39), लिथियम तथा पोटैशियम के परमाणु द्रव्यमान का औसत सोडियम के बराबर है।
- क्लोरीन (35.5), ब्रोमीन ( 80 ), आयोडीन (127)
- कैल्शीयम (40) स्ट्रॉशियम ( 87.5) बेरियम ( 137 )
- डोबरेनर का त्रिक नियम सभी तत्वों पर लागू नहीं होता है अतः वर्गीकरण का यह नियम मान्य नहीं हो पाया।
- डोबरेनर का त्रिक नियम- त्रियक के तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान के क्रम में सजाने पर मध्यवर्ती तत्व का परमाणु द्रव्यमान शेष दो तत्वों के परमाणु द्रव्यमान का औसत होता है।
- अंग्रेज रसायनज्ञ जॉन न्यूलैंड ने अपने समय तक के सभी तत्वों को परमाणु द्रव्यमान में सजाकर अष्टक नियम दिया जो निम्न प्रकार है-
- यदि तत्वों को उनके बढ़ते परमाणु द्रव्यमान के क्रम में सजाया जाए तो किसी भी तत्व से प्रारंभ करने पर आठवें तत्व का गुण पहले तत्व के गुण के समान होते हैं, ठीक उसी तरह जिस तरह संगीत का आठवाँ स्वर पहले के समान ।
- न्यूलैंड का अष्टक नियम सिर्फ हल्के तत्व कैल्शीयम तक ही लागू होता है बाद के तत्वों पर नहीं अतः यह नियम भी मान्य नहीं हो पाया।
- तत्वों के वर्गीकरण का पहला सफल प्रयास मेडलीव ने किया। मेंडलीव ने तत्वों के वर्गीकरण की नई प्रणाली विकसित की जो परमाणु द्रव्यमान पर आधारित था ।
- मेंडलीव का आवर्त नियम- तत्वों के भौतिक एवं रसायनिक गुण उनके परमाणु द्रव्यमान के आवर्त्त फलन होते हैं, या यदि तत्वों को बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमान के क्रम सजाया जाए तो एक निश्चित संख्या बाद समान गुण वाले तत्व आते हैं।
- मेडलीव के समय कुल 63 तत्व ज्ञात थे मेडलीव ने 1871 में अपने आवर्त्त नियम का उपयोग कर तत्वों की एक सारणी बनायी जो मेंडलीव के आवर्त सारणी कहलाता है ।
- मेडलीव को आवर्त सारणी के जनक कहते हैं ।
- मेंडलीव के आवर्त सारणी के उदग्र स्तंभ को वर्ग कहते हैं जिसकी संख्या 9 है। 9 वर्ग को रोमन में 0 से VIII तक नाम दिया गया 10 तथा वर्ग VIII को छोड़कर सभी वर्ग को दो उपवर्ग A तथा B में बाँटा गया है I
- मेंडलीव के आवर्त सारणी के प्रमुख वर्ग एवं उनके समान्य नाम-
वर्ग सामान्य नाम I A क्षारधातु II A क्षारीय मृदा धातु VI A चालकोजन VII A हैलोजन्स O अक्रिय गैस I B मुद्रा धा VIII प्लैटिनम धातु III B लँथेनाइड्स III B ऐक्टिनाइड्स
- मेंडलीव के आवर्त सारणी के प्रमुख वर्ग एवं उनके समान्य नाम-
- मेडलीव के आवर्त सारणी के क्षैतिज कतार आवर्त्त कहलाता है । सारणी में 1 से लेकर 7 तक कुल 7 आवर्त्त है।
- मेंडलीव के आवर्त्त सारणी अध्ययन में काफी सुविधाजनक है। किसी एक वर्ग या उपवर्ग के एक तत्वों के गुणों का अध्ययन कर उस वर्ग या उपवर्ग के अन्य तत्वों के गुणों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
- मेंडलीव ने कुछ तत्वों की भविष्यवाणी कर उनके लिए आवर्त्त सारणी में स्थान रिक्त छोड़ दिये थे जो बाद में सही साबित हुआ ।
- मेंडलीव के समय कुछ तत्व के परमाणु द्रव्यमान गलत निकाले गये थे। किंतु मेंडलीव ने आवर्त्त सारणी में उस तत्व के अन्य गुणों को ध्यान में रखकर उन्हें उचित स्थान पर रखा। बाद में इसी आवर्त्त सारणी के आधार पर उन तत्वों के ठीक-ठीक परमाणु द्रव्यमान ज्ञात किये गये ।
- आवर्त सारणी के किसी वर्ग विशेष के सभी तत्वों की संयोजकता एक ही होती है और आवर्त्त में यह क्रमिक रूप से परिवर्तित होता है।
- मेडलीव ने कही-कही अपने ही नियम को तोड़ डाला यानि अधिक परमाणु द्रव्व्यमान वाले तत्व के पहले रख दिया गया ।
उदा०—Ar (39.94) को K (39.10) से पहले रखा गया है। टेल्युरियम (Te-127.5) को आयोडीन (I-126.93) से पहले रखा गया है।
- मेंडलीव ने अपने आवर्त्त सारणी में तत्व के समस्थनिक के लिए कोई जगह नहीं छोड़ा है।
- आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का स्थान विवादित है । हाइड्रोजन का गुण IA के क्षार धातु से मिलता है जिससे हाइड्रोजन को IA में रखा गया है परन्तु हाइड्रोजन का गुण VIIA के हैलोजन से भी मिलता है अतः हाइड्रोजन VII A में भी होनी चाहिए।
- मेंडलीव ने कुछ समान गुण वाले तत्व (जैसे- Cu, Hg : Ba, Pb) को अलग अलग वर्ग में रखा है जबकि कुछ असमान गुण वाले तत्व को एक ही वर्ग में रखा गया।
- 5. मेंडलीव ने आठवें वर्ग में तीन-तीन तत्व एक साथ रखा है जिससे आवर्त्त सारणी अनियमित हो जाता है।
- 1911 में मोसले ने इस बात को साबित किया की परमाणु संख्या ही तत्व के मौलिक गुण है न कि परमाणु द्रव्यमान और इस आधार पर नये आवर्त्त नियम का प्रतिपादन किया जिसे आधुनिक आवर्त्त नियम कहते हैं।
- आधुनिक आवर्त्त नियम- तत्व के भौतिक एवं रसायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांक के आवर्त्त फलन होते हैं, या तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु संख्या में सजाया जाए तो सुनिश्चित अंतराल के बाद नये गुण वाले तत्व आते हैं।
- तत्व के परमाणु द्रव्यमान के स्थान पर परमाणु संख्या को आवर्त सारणी का आधार मान लेने पर मेंडलीव के आवर्त सारणी का अधिकांश त्रुटि स्वतः समाप्त हो जाती है।
- आधुनिक आवर्त सारणी में कुल 7 आवर्त्त हैं जिन्हें 1 से 7 नाम दिया गया है।
- प्रथम आवर्त्त में H तथा He दो तत्व हैं।
- दूसरे आवर्त्त में Li (3) से लेकर Ne (10) तक कुल 8 तत्व हैं।
- तीसरे आवर्त्त में सोडियम (Na-11 ) से लेकर ऑर्गन (Ar-18) तक कुल 8 तत्व हैं।
- चौथे आवर्त्त में पोटाशियम ( K - 19 ) से लेकर Kr (क्रिप्टॉन - 36 ) तक कुल 18 तत्व है ।
- पाँचवे आवर्त्त में रूबी डियम (Rb-37) से लेकर जेनॉन (Xe - 54 ) तक कुल 18 तत्व हैं।
- छठे आवर्त्त में सीजियम ( Cs-55) से लेकर रेडॉन ( Rn - 86 ) तक कुल 32 तत्व है ।
- सातवें आवर्त में फ्रैंसियम (Fr-87) से प्रारंभ होता है इससे अभी 25 तत्व है। यह आवर्त्त सभी अधूरा है।
- पहला तथा दूसरा आवर्त्त Short Periods कहलाता है। जबकि चार तथा उसके बाद के आवर्त्त Long Periods कहते हैं।
- आधुनिक आवर्त्त सारणी में कुल 18 वर्ग हैं जिसे 1 से 18 नाम दिया गया है।
- वर्ग 1 के तत्व को क्षार - धातु (alkali metals) कहते हैं।
- वर्ग 2 के तत्व को क्षारीय मृदा धातु (alkaline earth metals) कहते हैं।
- वर्ग 3 से वर्ग 12 तक के तत्व को (Transition elements) (संक्रमण तत्व) कहते हैं ।
- वर्ग 17 के तत्व nobel gases कहते हैं ।
- आवर्त सारणी के नीचे दो कतारों में लैंथेनाइड्स तथा ऐक्टीनाइड्स है। ये वर्ग -3 के सदस्य है।
- लैंथेनाइड्स के अंतर्गत परमाणु संख्या 57 (La) से लेकर परमाणु संख्या 71 (Lu) तक के तत्व हैं।
- ऐक्टीनाइड्स में परमाणु संख्या 89 (AC) से लेकर परमाणु संख्या 103 (Lr) तक के तत्व हैं।
- आधुनिक आवर्त्त सारणी में तत्व को धातु और अधातु को टेढ़े-मेढ़े लाईन द्वारा पूर्णतः अलग कर दिया गया है। आवर्त सारणी के बायीं तरफ धातु तथा दॉयी तरफ अधातु है । टेढ़े-मेढ़े लाइन के पास जो तत्व है वे उपधातु कहलाते हैं।
- आवर्त सारणी के उपधातु- बोरॉन, सिलिकन, जर्मेनियम, आर्सेनिक, ऐंटीमनी, टेल्युरियम, पोलोनियम ।
- आवर्त सारण को चार Blocks S, p, d तथा f में बाँटा गया है ।
- S- block के तत्व - वर्ग 1 तथा वर्ग 2
- p- block के तत्व - वर्ग 13 तथा वर्ग 18
- d- block के तत्व - वर्ग 3 तथा वर्ग 12
- f - block के तत्व - लैंथेनाइड्स तथा ऐक्टीनाड्स
- यूरेनियम से पहले मात्र दो तत्व - Tc (टेक्नेसियम - 43 ) तथा Pm (प्रोमेथियम - 61) प्रकृतिक नहीं है बाकि सभी तत्व प्रकृति में पाये जाते हैं।
- वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर तत्वों के गुणों में क्रमिक रूप से परिवर्तन होता है।
- एक वर्ग में स्थित सभी तत्व का बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होता है यानि एक वर्ग में उपस्थित सभी परमाणु में संयोजी इलेक्ट्रॉन समान होते हैं ।
उदा० - वर्ग-1 के सभी तत्व के संयोजी इलेक्ट्रॉन 1 है तथा वर्ग-17 के सभी तत्व में 7 संयोजी इलेक्ट्रॉन है ।
- किसी वर्ग के सभी तत्वों की संयोजकता समान होती है।
उदा० - वर्ग-1 के तत्व की संयोजकता 1 है तथा वर्ग-2 की तत्वों की संयोजकता 2 है।
- वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर परमाणु का आकार बढ़ते जाता है क्योंकि प्रत्येक तत्व के बाद वाले तत्व में इलेक्ट्रॉन का एक नया शेल बनता है।
- आवर्त्त सारणी में वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर आयनन ऊर्जा का मान घटते जाता है तथा विद्युत धनात्मक गुण बढ़ते जाता है।
- आयनन ऊर्जा- किसी गैसीय परमाणु में सबसे कमजोर बल से बँधे इलेक्ट्रॉन को निष्कासित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा आयनन ऊर्जा कहलाती हैं।
- वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर तत्वों के धातुई गुण बढ़ते जाता है ।
- वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर तत्वों की विद्युत ऋणात्मकता घटती जाती है।
उदा० - वर्ग-17 में फ्लोरीन सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक है तथा आयोडीन सबसे कम ।
- विद्युत ऋणात्मकता - सहसंयोजक बंधन से जुड़े इलेक्ट्रॉन युग्म को अपनी ओर आकर्षित करने की परमाणु की क्षमता को उसकी विद्युत ऋणात्मकता कहते हैं ।
- वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर धातुओं की क्रियशीलता बढ़ती है तथा अधातु की क्रियशीलता घटती जाती है।
उदा०- 1. वर्ग -1 के तत्वों की क्रियाशीलताLi < Na < K < Rn < Cs < Fr2. वर्ग -17 के तत्वों की क्रियाशीलताF > Cl > Br > I
- आवर्त्त में बॉये से दॉये जाने पर संयोजी इलेक्ट्रॉन की संख्या क्रमशः 1 से 8 तक बढ़ती है। प्रथम आवर्त्त में यह वृद्धि सिर्फ 1 से 2 तक होती है।
- एक ही आवर्त्त में तत्वों की संयोजकता भिन्न-भिन्न होती है।
- किसी आवर्त्त में बॉये से दॉये जाने पर तत्वों के परमाणु के आकार घटे जाते हैं ।
- आवर्त्त में बॉये से दाँये जाने पर तत्वों के धातुई गुण घटते जाते हैं ।
- आवर्त्त में बॉये से दाँये जाने पर तत्वों की आयनन ऊर्जा क्रमशः बढ़ती जाती है तथा तत्वों की विद्युत ऋणात्मकता का गुण बढ़ते जाते हैं ।
- आवर्त सारणी में बॉये से दॉये जाने पर तत्वों के ऑक्साइड की प्रकृति क्षारीय से अम्लीय हो जाता है।
- अभी तक ज्ञात कुल तत्व - 114
- प्रकृति में प्राप्त तत्वों की संख्या - 88
- कृत्रिम तत्व की संख्या - 21
- धता तत्व की संख्या- 87
- अधातु की संख्या - 22
- पृथ्वी पर सबसे अधिक पाया जाने वाला तत्व- ऑक्सीजन (46.3%)
- पृथ्वी पर पाये जाने वाली सबसे अधिक मात्रा धातु तत्व- ऐलुमिनियम
- सबसे हल्का तत्व- हाइड्रोजन
- सबसे भारी तत्व - ऑस्मियम (Os)
- सबसे हल्का धातु तत्व - लीथियम
- द्रव अवस्था में पाये जाने वाला तत्व - मरकरी (Hg)
- द्रव अवस्था में पाये जाने वाला अधातु तत्व- ब्रोमीन
- अधातु जो विद्युत का चालक है- ग्रेफाइट
- विद्युत का सबसे अच्छा सुचालक तत्व - चाँदि (Ag)
- सबसे अधिक अघातवर्धनीय तत्व - सोना
- सबसे अधिक क्रियाशील अधातु तत्व - फ्लोरीन
- सबसे अधिक क्रियाशील धातु तत्व - सीजियम (Cs)
- तत्व जिसकी विद्युत ऋणात्मकता का मान सबसे अधिक है - फ्लोरीन ।
- सबसे प्रबल ऑक्सीकारक - फ्लोरीन ।
- जलीय विलयन में सबसे प्रबल अवकारक- लीथियम ।
अभ्यास प्रश्न
- Telegram ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here
- Facebook पर फॉलो करे – Click Here
- Facebook ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here
- Google News ज्वाइन करे – Click Here