जीवाणु / A Bacterium
अमीबा / An Amoeba
विषाणु / A Virus
शुक्राणु A Sperm
कोशिका के भीतर जल के अणुओं की सांद्रता उसके बाहर चारों ओर उपस्थित जल के अणुओं की सांद्रता से अधिक हो।
कोशिका के बाहर चारों ओर उपस्थित जल के अणुओं की सांद्रता कोशिका के भीतर जल के अणुओं की सांद्रता से अधिक हो ।
कोशिका के भीतर तथा उसके बाहर के जल के अणुओं की सांद्रता समान हो ।
जल के अणुओं की सांद्रता महत्व नहीं रखती
डी.एन.ए. से / / DNA
प्रोटीन से / Protein
डी.एन.ए. एवं प्रोटीन से / DNA and protein
आर.एन.ए. से / RNA
यह केंद्रक एवं कोशिकाद्रव्य के बीच प्रोटीन के लिए अभिगमन चैनल की तरह कार्य करता है।
यह कोशिकाद्रव्य के विभिन्न क्षेत्रों के बीच पदार्थों को पहुँचाता है।
यह ऊर्जा उत्पादन का स्थल हो सकती है।
यह कोशिका की कुछ जैव-रासायनिक क्रियाओं का स्थल हो सकती है।
अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर, जल के अणुओं का अधिक सांद्रता वाले क्षेत्र से निम्न सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर जाना।
विलायक अणुओं का अधिक सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर जाना।
पारगम्य झिल्ली से होकर विलायक अणुओं का अधिक सांद्रता से निम्न सांद्रता वाले विलयन की ओर जाना।
अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर विलेय अणुओं का निम्न सांद्रता वाले विलयन से अधिक सांद्रता वाले विलयन की ओर जाना।
अल्पपरासारी माध्यम में प्रद्रव्य झिल्ली का टूटना ( लयन)
अल्पपरासारी माध्यम में कोशिकाद्रव्य का सिकुड़ना
केंद्रकद्रव्य का सिकुड़ना
इनमें से कोई नहीं
माइटोकॉन्ड्रिया / Mitochondria
रसधानी / Vacuole
लाइसोसोम / Lysosome
लवक / Plastid
गॉल्जी उपकरण, लाइसोसोम के बनने में शामिल होता है।
केंद्रक, माइटोकॉन्ड्रिया एवं लवक में डी.एन.ए. होता है, इसलिए ये अपनी संरचनात्मक प्रोटीन बनाने में समर्थ है।
माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का पावर हाउस कहा जाता है क्योंकि इनमें ए.टी.पी. का उत्पादन होता है।
कोशिकाद्रव्य को प्रद्रव्य भी कहा जाता है।
गॉल्जी उपकरण
लाइसोसोम
चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका
रसधानी
रूक्ष अंतर्द्रव्यी जालिका
गॉल्जी उपकरण
कोशिका झिल्ली
माइटोकॉन्ड्रिया
इस काल में पर्चिंग पक्षी आरंभिक चित्रों में नहीं पाए जाते थे।
पर्चिंग अनाज पर जीने वाला प्रमुख पक्षी था।
भीमबेटका चित्रकला की आदिम प्रस्तुति को उद्घाटित करता है।
भीमबेटका वर्तमान में उत्तर प्रदेश में स्थित है।
लंघनाज
बीरभानपुर
आदमगढ़
चोपनी मांडो
इस युग के लोग पॉलिशदार पत्थर का प्रयोग करते थे ।
लोग काँस्य की कुल्हाड़ी का प्रयोग करते थे।
इस काल में सर्वप्रथम कृषि उत्पादन शुरू हुआ।
इस काल में ही मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए चाक का उपयोग शुरू हुआ।
वज्जि
कुंडग्राम
चिरांद
चंपा
बुर्जहोम
कोलडिहवा
चोपानी मांडो
मांडो
मेहरगढ़
बुर्जहोम
गुफकराल
कोटदीजी
आंवा में मिट्टी के बर्तन बनाना
चिकने पत्थर के औजार बनाना
पहिए का आविष्कार
उपर्युक्त सभी
इसे चाल्कोलिथिक कहा जाता है।
यह पत्थर और ताँबे के उपयोग की अवस्था है।
तकनीकी दृष्टि से ताम्रपाषाण अवस्था हड़प्पा की कांस्ययुगीन संस्कृति के बाद की है।
यहाँ के लोग ग्रामीण समुदाय बना कर रहते थे।
दक्षिण-पूर्वी राजस्थान
मध्य प्रदेश के पश्चिमी भाग
पश्चिमी महाराष्ट्र
ऊपरी गंगा यमुना दोआब
अहार
ताराडोर
महिषादल
खैराडीह
सारनाथ
बोधगया
कुशीनगर
पावापुरी
शंकराचार्य
पाणिनि
अश्वघोष
आर्यभट्ट
वल्लभी
उज्जैन
कौसांबी
वाराणसी
गृहस्थ
वानप्रस्थ
संन्यास
ब्रह्मचर्य
कलिंग युद्ध
चौसर युद्ध
दोनों
इनमें से कोई नहीं
बिंबिसार
चंद्रगुप्त मौर्य
अशोक
चाणक्य
संस्कृत
मगध
प्राकृत
हिन्दी
पटना
ओडिशा
केरल
बिहार
मदुरै
पाटलिपुत्र
पुहार
कावेरी पट्टनम्
फाह्यान
इत्सिंग
ह्वेनसांग
उपरोक्त सभी
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