झारखण्ड की भाषाएँ

झारखण्ड की भाषाएँ
आदिवासी / जनजातीय भाषा
> भाषा
> संथाली
> संबंधित जनजाति
> संथाली जनजाति
> महत्वपूर्ण बातें
> संथाली अपनी भाषा को होड़ रोड़ अर्थात् होड़ लोगों की बोली कहते हैं। 
> संथाली भाषा के दो रूप हैं- शुद्ध संथाली एवं मिश्रित संथाली ।
> 92 वें संविधान संशोधन, 2003 द्वारा भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में संथाली भाषा को शामिल किया गया है। 
> आठवीं अनुसूची में शामिल की जानेवाली यह झारखण्ड की एकमात्र क्षेत्रीय भाषा है।
> संथाली भाषा के लिए पंडित रघुनाथ मुर्मू द्वारा सन् 1941 में ओलचिकी लिपि का आविष्कार किया गया है।
> डोमन साहू समीर को संथाली साहित्य का भारतेन्दु कहा जाता है (प्रमुख रचना संताली प्रवेशिक,1951) I
> इस भाषा का संबंध ऑस्ट्रो एशियाटिक (मुण्डारी) भाषा परिवार से है।
> भाषा
> मुण्डारी
> संबंधित जनजाति
> मुण्डा जनजाति
> महत्वपूर्ण बातें
> इस भाषा के चार रूप पाये जाते हैं
» हसद मुण्डारी - खूँटी व मुरहू के आसपास के क्षेत्र में प्रचलित
» तमड़िया मुण्डारी – तमाड़ व आसपास के क्षेत्र में प्रचलित
» केर मुण्डारी - राँची व आसपास के क्षेत्र में प्रचलित
» नगुरी मुण्डारी - नागपुरी भाषा मिश्रित मुण्डारी
> इस भाषा का संबंध ऑस्ट्रो एशियाटिक (मुण्डारी) भाषा परिवार से है ।
> भाषा
> हो
> संबंधित जनजाति 
> हो
> महत्वपूर्ण बातें
> इस भाषा की अपनी शब्दावली एवं उच्चारण पद्धति है।
> 'लोका बोदरा' नामक व्यक्ति ने हो भाषा हेतु 'बारङचित्ति' नामक लिपि का विकास किया गया है ।
> भाषा 
> खड़िया
> संबंधित जनजाति 
> खड़िया
> महत्वपूर्ण बातें 
> इस भाषा का संबंध ऑस्ट्रो एशियाटिक (मुण्डारी) भाषा परिवार से है। 
> भाषा
> कुडुख/उराँव
> संबंधित जनजाति 
> उराँव
> महत्वपूर्ण बातें 
> झारखण्ड के क्षेत्रीय भाषाओं के संदर्भ में इस भाषा का सर्वाधिक लिखित साहित्य मिलता है। 
> इस भाषा का संबंध द्रविड़ भाषा परिवार से है। 
> भाषा 
> माल्टा / मालतो
> संबंधित जनजाति 
 > सैरिया पहाड़िया, माल पहाड़िया, गोंड 
> महत्वपूर्ण बातें 
> यह कुडुख भाषा का ही एक रूप है।
> इस भाषा का संबंध द्रविड़ भाषा परिवार से है।
> भाषा 
> असुरी
> संबंधित जनजाति 
> असुर
> महत्वपूर्ण बातें 
> यह भाषा लगभग विलुप्तप्राय * है और इसे बोलने वालों की संख्या कुछ हजार है।
> सदानी भाषा 
> भाषा
> खोरठा
> महत्वपूर्ण बातें
> इसका संबंध खरोष्ठी लिपि से है।
> यह भारोपीय (भारतीय - यूरोपीय) भाषा परिवार से संबंधित है।
> यह मागधी प्राकृत से विकसित एक भाषा है।
> यह हजारीबाग, गिरिडीह, धनबाद, संथाल परगना, राँची व पलामू में बोली जाती है।
> खोरठा साहित्य में अधिकांशतः राजा-रजवाड़ों आदि की कथाएँ मिलती हैं। 
> भाषा
> पंचपरगनिया
> महत्वपूर्ण बातें
> यह भाषा पंचपरगना क्षेत्र ( तमाड़, बुण्डू, सोनहातू एवं सिल्ली) में बोली जाती है।
> यह भारोपीय (भारतीय यूरोपीय) भाषा परिवार से संबंधित है।
> इस भाषा में क्षेत्र एवं परिवेश के प्रति सजगता एवं वैष्णव भक्ति का चित्रण मिलता है।
> भाषा
> कुरमाली / करमाली
> महत्वपूर्ण बातें
> यह मूलतः कुरमी जाति की भाषा है।
> यह भारोपीय (भारतीय यूरोपीय) भाषा परिवार से संबंधित है।
> यह राँची, हजारीबाग, गिरिडीह, धनबाद, सिंहभूम एवं सथाल परगना में बोली जाती है।
> भाषा 
> नागपुरी
> महत्वपूर्ण बातें 
> इस भाषा का विकास मागधी प्राकृत भाषा से हुआ है।
> यह झारखण्ड की प्रमुख संपर्क भाषा है। 
> यह भाषा सादरी एवं गंवारी के नाम से भी जानी जाती है। 
> यह नागवंशी राजाओं की मातृभाषा थी। 
> नागपुरी के प्रथम ज्ञात कवि बेनीराम महथा ( रचना-नागवंशावली) हैं। 
> अन्य प्रमुख भाषाएँ
> भाषा
> भोजपुरी
> महत्वपूर्ण बातें
> झारखण्ड में प्रचलित भोजपुरी दो वर्गों में विभाजित है 
» आदर्श भोजपुरी - यह मुख्यतः पलामू व उसके आसपास के क्षेत्र में बोली जाती है।
» नगपुरिया, सदरी व सदानी भोजपुरी - यह छोटानागपुर व गैर-आदिवासी क्षेत्रों में बोली जाती है।
> भाषा
> मगही
> महत्वपूर्ण बातें
> डॉ जार्ज ग्रियर्सन (भाषा वैज्ञानिक) द्वारा प्रचलित मगही दो वर्गों में विभाजित किया गया है –
» आदर्श मगही - यह मुख्यत: हजारीबाग व पूर्वी पलामू क्षेत्र में बोली जाती है।
» पूर्वी मगही यह राँची, रामगढ़, हजारीबाग आदि क्षेत्रों में बोली जाती है।
> भाषा
> अंगिका
> महत्वपूर्ण बातें
> इसे मैथिली का ही एक रूप माना जाता है।
> यह मुख्य रूप से संथाल परगना क्षेत्र में बोली जाती है।
> छठी शताब्दी में रचित ललित विस्तार नामक ग्रंथ की रचना अंगिका भाषा में की गयी थी।
> भाषा
> जिप्सी
> महत्वपूर्ण बातें
> यह झारखण्ड के सीमित क्षेत्र में मुख्यतः नट, मलाट व गुलगुलिया जातियों द्वारा बोली जाती है।
> झारखण्ड की क्षेत्रीय भाषाओं का विभाजन
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