NCERT MCQs | आधुनिक भारत का इतिहास एवं भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन | उत्तर मुगल (18वीं सदी) तथा प्रांतीय शक्तियों का उदय

उत्तर मुगल (18वीं सदी) तथा प्रांतीय शक्तियों का उदय

NCERT MCQs | आधुनिक भारत का इतिहास एवं भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन | उत्तर मुगल (18वीं सदी) तथा प्रांतीय शक्तियों का उदय

NCERT MCQs | आधुनिक भारत का इतिहास एवं भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन | उत्तर मुगल (18वीं सदी) तथा प्रांतीय शक्तियों का उदय

उत्तरवर्ती मुगल

1. औरंगजेब की मृत्यु के बाद कौन मुगल बादशाह बना था ?
(a) बहादुरशाह प्रथम
(b) जहाँदारशाह 
(c) मुहम्मदशाह
(d) अकबर द्वितीय 
उत्तर - (a)
व्याख्या- औरंगजेब की मृत्यु के पश्चात् बहादुरशाह प्रथम बादशाह बना। 1707 ई. में औरंगजेब की मृत्यु के पश्चात् ग़द्दी को लेकर उसके बेटों के मध्य हुए उत्तराधिकार के युद्ध में पैंसठ वर्षीय बहादुरशाह की विजय हुई। वह विद्वान्, आत्मगौरव से परिपूर्ण और योग्य था।
2. मुगल शासक बहादुरशाह के संबंध में कौन-सा कथन सत्य है?
(a) उसने समझौते तथा मेल-मिलाप की नीति अपनाई तथा औरंगजेब द्वारा अपनाई गई संकीर्णतावादी नीतियों में से कुछ को बदल दिया।
(b) इसके शासनकाल में मंदिरों को नष्ट नहीं किया गया।
(c) 'a' और 'b' दोनों
(d) उसने मराठा सरदारों के प्रति गहरे मेल-मिलाप की नीति अपनाई तथा उन्हें दक्कन की सरदेशमुखी तथा चौथ वसूलने का अधिकार दे दिया।
उत्तर - (c)
व्याख्या- मुगल शासक बहादुरशाह के संबंध में कथन (a) और (b) सत्य हैं। मुगल शासक बहादुरशाह ने शासन की बागडोर संभालते ही मेल-मिलाप और समझौते की नीति अपनाई और साथ ही उसने औरंगजेब की संकीर्णतापूर्ण नीतियों को भी बदल दिया। उसने हिंदू सरदारों और राजाओं के प्रति सहिष्णु व्यवहार को अपनाया। उसने पूर्व के शासक औरंगजेब की भाँति मंदिरों को नष्ट नहीं किया।
उसने मराठों के साथ ऊपरी मेल-मिलाप की नीति को अपनाते हुए दक्कन की सरदेशमुखी वसूलने का अधिकार तो मराठों को दिया, परंतु चौथ का अधिकार नहीं दिया।
3. निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है?
(a) बहादुरशाह की मृत्यु के बाद हुए गृहयुद्ध में उसका एक कम काबिल बेटा जहाँदारशाह विजयी हुआ।
(b) जहाँदारशाह को अपने समय के सबसे शक्तिशाली सामंत जुल्फिकार खाँ का समर्थन प्राप्त था।
(c) जहाँदारशाह के शासनकाल में जजिया को पुनः प्रारंभ कर दिया गया।
(d) जहाँदारशाह के काल में आमेर के राजा जयसिंह को मिर्जा राजा सवाई की पदवी दी गई और गुजरात का सूबेदार नियुक्त किया गया।
उत्तर - (c)
व्याख्या- दिए गए कथनों में से कथन (c) असत्य है, क्योंकि जहाँदारशाह के शासनकाल में जजिया कर को समाप्त कर दिया गया न कि उसे प्रारंभ किया गया।
बहादुरशाह की मृत्यु के पश्चात् उसका कम काबिल बेटा जहाँदारशाह, जुल्फिकार खाँ की सहायता से गृहयुद्ध में विजयी रहा है और सत्ता पर कब्जा किया। जुल्फिकार खाँ को वजीर नियुक्त किया गया, वस्तुतः शासन की बागडोर वास्तविक रूप से उसी के हाथों में थी। अपनी स्थिति को मजबूत रखने हेतु जुल्फिकार खाँ ने राजपूतों तथा मराठों के साथ अपनी स्थिति को सुदृढ़ता प्रदान की। इसी क्रम में आमेर के राजा जयसिंह को मिर्जा राजा सवाई की पदवी दी गई और उन्हें मालवा का सूबेदार नियुक्त कर दिया गया।
4. मुगलकाल में इजारेदार कौन थे ?
(a) भूमि की माप करने वाले
(b) लगान तय करने वाले 
(c) कृषि भूमि का निर्धारण करने वाले
(d) लगान के ठेकेदार
उत्तर - (d)
व्याख्या- मुगलकाल में इजारेदार लगान के ठेकेदारों को कहा जाता था। जहाँदारशाह के वजीर जुल्फिकार खाँ ने इजारा व्यवस्था को प्रारंभ किया था, जो टोडरमल की भू-राजस्व व्यवस्था के समान थी। इसके अंतर्गत इजारेदार और बिचौलिये से लगान वसूल कर सरकार को एक निश्चित राशि देने हेतु करारनामा किया गया, लेकिन इजारेदारों के मनमाने लगान वसूलने से किसानों का उत्पीड़न बढ़ा।
5. चिनकिलिच खाँ के संदर्भ में निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1. वह 1722 ई. में मुगल शासक का वजीर बना।
2. उसने प्रशासनिक सुधार के लिए प्रयत्न किया।
3. वह जनवरी, 1723 में वजीर का पद छोड़कर दक्कन चला गया।
4. उसका जाना मुगल साम्राज्य से निष्ठा और सद्गुणों के पलायन का प्रतीक था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1, 2 और 4
(d) ये सभी
उत्तर - (c)
व्याख्या- चिनकिलिच खाँ के संदर्भ में कथन (1), (2) और (4) सत्य हैं ।
चिनकिलिच खाँ हैदराबाद रियासत का संस्थापक था। वह मुगल बादशाह मुहम्मदशाह का एक योग्य वजीर था, वह 1722 ई. में वजीर बना।
उसने पद संभालते ही प्रशासन में सुधार हेतु महत्त्वपूर्ण प्रयास किए। मुगल साम्राज्य का वास्तविक बिखराव चिनकिलिच खाँ, जिसे निजाम-उल-मुल्क के रूप में भी जाना जाता है, के पश्चात् ही प्रारंभ हुआ। चिनकिलिच खाँ के दक्कन जाने की प्रक्रिया को मुगल साम्राज्य से निष्ठा और सद्गुणों के पलायन का प्रतीक माना जाता है।
कथन (3) असत्य है, क्योंकि चिनकिलिच खाँ जनवरी, 1723 में नहीं, बल्कि अक्टूबर, 1724 में वजीर का पद छोड़कर दक्कन चला गया।
6. किस मुगल बादशाह के शासनकाल में नादिरशाह ने भारत पर आक्रमण किया था?
(a) अहमदशाह 
(b) आलमगीर द्वितीय
(c) मुहम्मदशाह
(d) रफी-उद्-दरजात
उत्तर - (c)
व्याख्या- मुहम्मदशाह के शासनकाल (1719-48 ई.) में नादिरशाह ने 1739 ई. में भारत पर आक्रमण किया था । नादिरशाह का भारत पर आक्रमण करने का प्राथमिक उद्देश्य भारत से अपार धन लूटना था। नादिरशाह फारस (ईरान) का निवासी था। एक अनुमान के अनुसार नादिरशाह ने भारत से कुल 70 करोड़ मूल्य की वस्तुएँ लूटी थीं ।
7. निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1. करनाल के युद्ध में मुहम्मदशाह को नादिरशाह से हार का सामना करना पड़ा।
2. नादिरशाह ने दिल्ली पर अधिकार करके यहाँ के नागरिकों के साथ सद्व्यवहार प्रदर्शित किया।
3. दिल्ली से वापस जाते समय वह प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा तथा शाहजहाँ का रत्नजड़ित मयूर सिंहासन (तख्तेताउस) भी लूट ले गया।
4. उसने मुहम्मदशाह को सिंधु नदी के पूर्व के साम्राज्य के क्षेत्रों को उसे देने के लिए बाध्य किया।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है /हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 3 और 4
उत्तर - (c)
व्याख्या- दिए गए कथनों में से कथन (1) और (3) सत्य हैं।
करनाल का युद्ध (13 फरवरी, 1739) नादिरशाह और मुगल शासक मुहम्मदशाह के बीच हुआ था। फूट, अयोग्य नेतृत्व, आपसी द्वेष तथा परस्पर अविश्वास ने इस युद्ध में मुगल फौज को शिकस्त दी और मुहम्मदशाह को बंदी बना लिया। इस प्रकार नादिरशाह दिल्ली की ओर बढ़ा।
नादिरशाह ने दिल्ली पर आक्रमण कर अपार धन लूटा तथा बहुत से कत्लेआम किए और दिल्ली से वापस जाते समय प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा और रत्नजड़ित मयूर सिंहासन (तख्ते ताउस) भी अपने साथ ले गया।
कथन (2) और (4) असत्य हैं, क्योंकि नादिरशाह ने दिल्ली पर आक्रमण कर अपने कुछ सैनिकों की का बदला लेने के लिए नागरिकों के साथ हुत बुरा व्यवहार किया। दिल्ली से वापस जाते समय मुहम्मदशाह को सिंधु नदी के पश्चिम साम्राज्य के क्षेत्रों को उसे (नादिरशाह) देने के लिए बाध्य किया था न कि पूर्वी साम्राज्य के क्षेत्रों को ।
8. मुगल साम्राज्य के पतन के परिणाम के संबंध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है? 
(a) इसके परिणामस्वरूप अंग्रेजों के लिए भारत पर नियंत्रण का मार्ग प्रशस्त हुआ।
(b) मुगलों के पतन के पश्चात् अन्य भारतीय क्षेत्रीय शक्तियों ने मुगलों की विरासत का दावा किया तथा इन शक्तियों ने मिलकर अंग्रेजों के लिए एक नई चुनौती पेश की।
(c) मुगलों के पतन के पश्चात् कोई ऐसी शक्ति नहीं बची थी, जो अंग्रेजों को कठिन चुनौती दे सके।
(d) मुगल साम्राज्य के पतन ने शताब्दियों पुराने सामाजिक-आर्थिक ढाँचे के स्थान पर एक औपनिवेशिक ढाँचा स्थापित कर दिया।
उत्तर - (b)
व्याख्या- मुगल साम्राज्य के पतन के परिणाम के संबंध में कथन (b) सत्य नहीं है, क्योंकि मुगल साम्राज्य के पतन के पश्चात् भारतीय शक्तियों में से किसी भी क्षेत्रीय शक्ति ने मुगलों की विरासत का दावा नहीं किया, जिसके परिणामस्वरूप अंग्रेजों को भारत में सत्ता स्थापित करने हेतु किसी भी महत्त्वपूर्ण चुनौती का सामना नहीं करना पड़ा।

प्रांतीय शक्तियों का उदय

1. 18वीं सदी के दौरान मुगल साम्राज्य और उनकी राजनीतिक व्यवस्था के खंडहर पर किन शक्तियों का उदय हुआ?
(a) बंगाल 
(b) मराठा
(c) मैसूर
(d) ये सभी
उत्तर - (d)
व्याख्या- 18वीं सदी के दौरान मुगल साम्राज्य और उसकी राजनीतिक व्यवस्था के खंडहर पर बड़ी संख्या में स्वतंत्र और अर्द्धस्वतंत्र शक्तियों का उद्भव हुआ, जिसमें बंगाल, अवध, हैदराबाद, मैसूर और मराठा आदि शक्तियाँ प्रमुख थीं।
2. निम्न में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) अवध तथा हैदराबाद राज्य उत्तराधिकार वाले राज्य थे। मुगल साम्राज्य के कमजोर होने से प्रांतीय गवर्नरों के स्वतंत्र होने का दावा करने से इन राज्यों का जन्म हुआ था।
(b) मराठा, अफगान, जाट तथा पंजाब जैसे राज्यों का जन्म मुगल शासन के विरुद्ध स्थानीय सरदारों, जमींदारों तथा किसानों के विद्रोह के कारण हुआ था।
(c) इन शक्तियों के अतिरिक्त दक्षिण-पश्चिम तथा दक्षिण-पूर्व के समुद्री किनारों के क्षेत्र थे, जहाँ मुगलों का प्रत्यक्ष प्रभाव था।
(d) इन सभी क्षेत्रीय शक्तियों ने मुगल प्रशासन के तौर-तरीकों और उसकी पद्धति को अपनाया।
उत्तर - (c)
व्याख्या- दिए गए कथनों में से कथन (c) सत्य नहीं है। मुगल साम्राज्य के पतन के पश्चात् कुछ उत्तराधिकार वाले राज्य तथा कुछ ऐसे राज्य जिनका जन्म किसान, जमींदार आदि के विद्रोह के कारण हुआ, अस्तित्व में आए इन सभी के अतिरिक्त एक तीसरा क्षेत्र भी था, जिसमें दक्षिण-पश्चिम तथा दक्षिण-पूर्व के समुद्री किनारों के क्षेत्र तथा उत्तर-पूर्वी भारत के क्षेत्र शामिल थे, इन क्षेत्रों पर किसी भी रूप में मुगल प्रभाव स्थापित नहीं हो पाया था।

हैदराबाद

1. निम्नलिखित में से कौन हैदराबाद के स्वतंत्र राज्य का संस्थापक था?
(a) कमरुद्दीन खाँ
(b) मोहम्मद अमीन खाँ
(c) असद खाँ
(d) चिनकिलिच खाँ
उत्तर - (d)
व्याख्या- हैदराबाद के स्वतंत्र राज्य का संस्थापक निजाम-उल-मुल्क आसफजाह था, जिसे चिनकिलिच खाँ के नाम से भी जाना जाता था। इसने 1724 ई. में हैदराबाद राज्य की स्थापना की थी। औरंगजेब के पश्चात् के नवाबों में उसका महत्त्वपूर्ण स्थान था। सैयद बंधुओं को मुगल सत्ता से निष्कासित करने में उसकी भूमिका महत्त्वपूर्ण थी।

बंगाल

1. बंगाल के नवाबों का सही कालक्रम कौन-सा है ?
(a) मुर्शिदकुली खाँ-शुजाउद्दीन - सरफराज खाँ - अलीवर्दी खाँ
(b) शुजाउद्दीन-सरफराज खाँ - अलीवर्दी खाँ- मुर्शीदकुली खाँ
(c) सरफराज खाँ-अलीवर्दी खाँ - मुर्शिदकुली खाँ - शुजाउद्दीन
(d) अलीवर्दी खाँ - मुर्शिदकुली खाँ - शुजाउद्दीन - सरफराज खाँ
उत्तर - (a)
व्याख्या- बंगाल के नवाबों का सही कालक्रम इस प्रकार है
मुर्शिदकुली खाँ → शुजाउद्दीन → सरफराज खाँ → अलीवर्दी खाँ 
बंगाल में स्वतंत्र सत्ता की स्थापना का श्रेय मुर्शिदकुली खाँ और अलीवर्दी खाँ को जाता है। मुर्शिदकुली खाँ को 1717 ई. में बंगाल का सूबेदार बनाया गया जिसके पश्चात् उसने स्वयं को केंद्रीय सत्ता से मुक्त कर लिया था। 1727 ई. में मुर्शिदकुली खाँ की मृत्यु के पश्चात् बंगाल के अन्य नवाबों का क्रम निम्नवत् है शुजाउद्दीन- 1727-1739 ई., सरफराज खाँ - 1739-1740 ई., अलीवर्दी खाँ - 1740-1756 ई. था,
2. निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है?
(a) मुर्शिदकुली खाँ, औरंगजेब के शासनकाल में  बंगाल का दीवान था।
(b) फर्रुखसियर ने मुर्शिदकुली खाँ को बंगाल का सूबेदार बना दिया।
(c) मुर्शिदकुली खाँ ने मध्य बंगाल में मुर्शिदाबाद को अपनी राजधानी बनाया।
(d) मुर्शिदकुली खाँ और उत्तराधिकारी नवाबों ने बंगाल, बिहार और उड़ीसा पर स्वतंत्र शासकों की भाँति व्यवहार किया और मुगल बादशाह को राजस्व देने से मना कर दिया।
उत्तर - (d)
व्याख्या- दिए गए कथनों में कथन (d) असत्य है, क्योंकि मुर्शिदकुली खाँ और उसके उत्तराधिकारी नवाबों ने बंगाल, बिहार और उड़ीसा पर स्वतंत्र शासकों की भाँति शासन किया, यद्यपि वे मुगल बादशाह को नियमित रूप से राजस्व भी भेजते रहे।
मुर्शिदकुली खाँ, औरंगजेब के शासनकाल में बंगाल का दीवान था, उसके पश्चात् फर्रूखसियर ने उसे बंगाल का सूबेदार नियुक्त कर दिया और मुर्शिदकुली खाँ ने मध्य बंगाल में मुर्शिदाबाद को अपनी राजधानी बनाया।
3. निम्न कथनों पर विचार कीजिए 
1. मुर्शिदकुली खाँ ने भू-राजस्व बंदोबस्त के द्वारा जागीर भूमि के एक बड़े भाग को खालसा भूमि बना दिया।
2. उसने ठेके पर भू-राजस्व वसूल करने की इजारा व्यवस्था को समाप्त कर दिया।
3. उसने गरीब किसानों, खेतिहरों आदि की सहायता के लिए तकाबी ऋण प्रदान किए।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 2 
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) ये सभी
उत्तर - (c)
व्याख्या- दिए गए कथनों में से कथन (1) और (3) सत्य हैं ।
मुर्शिदकुली खाँ ने स्वतंत्र शासक के रूप में बंगाल के प्रशासन को मितव्ययी बनाया। उसने बंगाल के वित्तीय मामलों का प्रबंध नए सिरे से किया। साथ ही नए भू-राजस्व बंदोबस्त के द्वारा जागीर भूमि के एक बड़े भाग को खालसा भूमि में बदल दिया।
मुर्शिदकुली खाँ ने स्थानीय जमींदारों और सौदागर, साहूकारों बीच से राजस्व वसूलने वाले किसान और सौदागर साहूकार भर्ती किए और साथ ही गरीब खेतिहरों का कष्ट दूर करने तथा उन्हें समय पर भू-राजस्व देने में समर्थवान बनाने हेतु तकाबी ऋण भी प्रदान किए।
कथन (2) असत्य है, क्योंकि मुर्शिदकुली खाँ ने ठेके पर भू-राजस्व वसूल करने की 'इजारा व्यवस्था' को आरंभ किया था।
4. निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1. बंगाल के नवाबों ने कंपनी के नौकरों को देश के कानून का पालन करने तथा अन्य व्यापारियों के बराबर सीमा शुल्क देने को बाध्य किया।
2. अलीवर्दी खाँ ने अंग्रेजों को कलकत्ता और चंद्रनगर के अपने कारखानों की किलेबंदी करने की स्वीकृति दी ।
3. अंग्रेजी कंपनी की सैन्य धमकी के बावजूद भी बंगाल के नवाब कंपनी को अपनी सत्ता के लिए कोई खतरा नहीं मानते थे।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन असत्य है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) केवल 2 
(c) केवल 3
(d) ये सभी
उत्तर - (b)
व्याख्या- दिए गए कथनों में से कथन ( 2 ) असत्य है, क्योंकि बंगाल के नवाब अलीवर्दी खाँ ने अंग्रेजों और फ्रांसीसियों को कलकत्ता और चंद्रनगर के अपने कारखानों की किलेबंदी करने की स्वीकृति नहीं दी थी।
अलीवर्दी खाँ का मानना था कि व्यापार का प्रसार जनता और सरकार के लिए लाभदायक है, इसलिए उन्होंने भारतीय और विदेशी व्यापारियों को बढ़ावा दिया। इन्होंने अपने शासनकाल में भूमि सुधारों को भी बढ़ावा दिया था।

अवध

1. अवध के स्वायत्त राज्य का संस्थापक कौन था?
(a) आसफउद्दौला
(b) सआदत खाँ 
(c) शुजाउद्दौला
(d) सफदरजंग 
उत्तर - (b)
व्याख्या- अवध के स्वायत्त राज्य का संस्थापक सआदत खाँ बुरहान-उल-मुल्क था। उसे 1722 ई. में अवध का सूबेदार बनाया गया था। वह एक अत्यंत निडर, कर्मठ, दृढ़ प्रतिज्ञ और कुशल व्यक्ति था। उसकी • नियुक्ति के समय कई प्रांतीय जमींदारों ने उसके प्रति तल्खी बरती, लेकिन उसने सबके प्रति अनुशासनात्मक व्यवहार अपनाया।
2. निम्न में कौन-सा कथन असत्य है?
(a) सआदत खाँ ने 1725 ई. में नया राजस्व बंदोबस्त (रेवेंयू सेटेलमेंट) किया।
(b) सफदरजंग ने न्याय की उचित व्यवस्था की तथा हिंदुओं और मुसलमानों के बीच निष्पक्षता की नीति अपनाई।
(c) सफदरजंग के शासनकाल में लखनऊ कला एवं साहित्य के संरक्षण की दृष्टि से दिल्ली का प्रतिद्वंद्वी हो गया।
(d) सफदरजंग के काल में सरकार के सबसे बड़े पद पर एक हिंदू महाराजा नवाब राय आसीन था।
उत्तर - (a)
व्याख्या- दिए गए कथनों में से कथन (a) असत्य है, क्योंकि सआदत खाँ ने 1725 ई. में नहीं, बल्कि 1723 ई. में नया राजस्व बंदोबस्त (रेवेंयू सेटेलमेंट) लागू किया। इसके अनुसार वह उचित भू-लगान लगाकर तथा बड़े जमींदारों के अत्याचारों से बचाकर किसानों की स्थिति को सुव्यवस्थित और बेहतर बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता था।

मैसूर

1. हैदर अली के संबंध में निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1. हैदर अली का जन्म 1721 ई. में हुआ था।
2. उसने 1755 ई. में डिंडीगुल में फ्रांसीसी विशेषज्ञों की सहायता से एक आधुनिक शस्त्रागार का निर्माण किया।
3. उसने 1761 ई. में खानदेवराव को सत्ता से हटाकर मैसूर की सत्ता पर अधिकार कर लिया।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) केवल 1
(b) 1 और 2
(c) 1, 2 और 3
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (c)
व्याख्या- हैदर अली के संबंध में सभी कथन सत्य हैं। हैदर अली का जन्म 1721 ई. में हुआ था। दक्षिण भारत में हैदराबाद के समीप हैदर अली के अधीन मैसूर नामक एक महत्त्वपूर्ण सत्ता के केंद्र का विकास हुआ।
उसने मैसूर में एक साधारण सैन्य अधिकारी के रूप में अपने जीवन की शुरुआत की और 1755 ई. में उसने डिंडीगुल में आधुनिक शस्त्रागार की स्थापना भी की।
18वीं सदी के प्रारंभ में खानदेवराव ने मैसूर की सत्ता को अपने हाथ में ले लिया था, लेकिन 1761 ई. में हैदर अली ने खानदेवराव को सत्ता से हटाकर स्वयं को मैसूर का शासक घोषित कर दिया।
2. 'टीपू सुल्तान' के संबंध में निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1. उसने एक नए कैलेंडर को लागू किया।
2. उसने श्रीरंगपट्टम में 'स्वतंत्रता वृक्ष' लगाया।
3. उसने जागीर प्रथा को बढ़ावा दिया।
4. वह पैदावार का एक-चौथाई हिस्सा भू-राजस्व के रूप में लेता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन असत्य है / हैं ?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 3 और 4
(d) 1, 2 और 3 
उत्तर - (c)
व्याख्या- 'टीपू सुल्तान' के संबंध में कथन (3) और (4) असत्य हैं। टीपू सुल्तान हैदर अली का पुत्र व मैसूर की सत्ता का उत्तराधिकारी था, उसने जागीर देने की प्रथा को समाप्त कर राजकीय आय बढ़ाने के प्रयास किए।
टीपू सुल्तान ने पोलिगारों की पैतृक संपत्ति को कम करने तथा राज्य और किसानों के बीच मध्यस्थों को समाप्त करने का प्रयास किया। वह पैदावार का एक-चौथाई नहीं, बल्कि एक-तिहाई हिस्सा भू-राजस्व के रूप में लेता था। वह भू-राजस्व में छूट देने का पक्षधर था।
कथन (1) और (2) सत्य हैं। टीपू सुल्तान ने एक नए कैलेंडर को लागू किया, जिसे 'इलाही कैलेंडर' कहा गया। उसने श्रीरंगपट्टम में 'स्वतंत्रता वृक्ष' भी लगवाया। यह वृक्ष फ्रांस और मैसूर के मैत्री के प्रतीक स्वरूप लगाया गया था।
3. निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1. विदेशी व्यापार के विकास हेतु फ्रांस, तुर्की, ईरान और पीगू में अपने राजदूत को भेजा।
2. चीन के साथ व्यापारिक संबंध कायम किए।
3. बंदरगाह वाले नगरों में व्यापारिक संस्थाएँ स्थापित करके रूस तथा अरब के साथ व्यापार बढ़ाने का प्रयत्न किया।
उपर्युक्त कथन किस शासक से संबंधित है/हैं?
(a) हैदर अली
(b) टीपू सुल्तान
(c) अलीवर्दी खाँ
(d) सवाई जयसिंह
उत्तर - (b)
व्याख्या- उपर्युक्त कथन मैसूर के शासक टीपू सुल्तान से संबंधित हैं। टीपू सुल्तान आधुनिक व्यापार और उद्योग के महत्त्व को समझता था और वह इसके पक्ष में भी था।
वास्तव में, वह तत्कालीन भारतीय शासकों में एकमात्र ऐसा शासक था, जो आर्थिक शक्ति के महत्त्व को सैनिक शक्ति की नींव मानता था। उसने विदेशी व्यापार के विकास हेतु विभिन्न देशों; जैसे-फ्रांस, तुर्की, ईरान और पीगू में अपने दूत भेजे थे। चीन के साथ भी उसने व्यापार को बढ़ावा दिया और अपने बंदरगाह नगरों में व्यापारिक संस्थाएँ भी स्थापित की, ताकि रूस और अरब देशों के साथ व्यापार को बढ़ाया जा सके।

केरल

1. निम्न में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
(a) मार्तंड वर्मा – उरैयूर 
(b) सवाई जयसिंह - आमेर
(c) दोस्त अली – कर्नाटक
(d) सूरजमल – जाट राज्य
उत्तर - (a)
व्याख्या- दिए गए युग्मों में से युग्म (a) सही सुमेलित नहीं है।
मार्तंड वर्मा का संबंध त्रावणकोर राज्य से था। इस राज्य को 1729 ई. के बाद अठारहवीं सदी के एक अग्रणी राजा मार्तंड वर्मा के नेतृत्व में प्रमुखता मिली। में अठारहवीं सदी के प्रारंभ में ये केवल चार प्रमुख राज्यों में सामंत और राजाओं के नेतृत्व में बँटे थे, जिसमें कालीकट, चिरक्कल, कोचीन और त्रावणकोर शामिल थे।
2. मार्तंड वर्मा के संबंध में निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1. उसने यूरोपीय अफसरों की सहायता से पश्चिमी मॉडल के आधार पर एक शक्तिशाली फौज का गठन किया।
2. उसने क्विलोन और इलायादाम को जीत लिया और डचों को पराजित कर केरल में उनकी सत्ता समाप्त कर दी।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं? :
(a) केवल 1
(b) 1 और 2
(c) केवल 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - (b)
व्याख्या- मार्तंड वर्मा के संबंध में दोनों कथन सत्य हैं। राजा मार्तंड वर्मा ने अपने राज्य को नई गति प्रदान करने हेतु यूरोपीय अफसरों की मदद से पश्चिमी मॉडल के आधार पर एक शक्तिशाली फौज को संगठित किया और उसे आधुनिक हथियारों से सुसज्जित किया। उसने एक आधुनिक शस्त्रागार का भी निर्माण किया तथा उसने अपनी इस नई संगठित फौज का प्रयोग अपनी शक्ति और क्षेत्र विस्तार हेतु किया।
मार्तंड वर्मा ने सर्वप्रथम शासक बनने के पश्चात् सामंतों पर अपना आधिपत्य स्थापित किया और साथ ही क्विलोन और इलायादाम को जीत लिया तथा डचों को पराजित कर केरल में उनकी राजनीतिक सत्ता को भी समाप्त कर दिया।

राजपूत राज्य

1. 18वीं सदी के सर्वश्रेष्ठ राजपूत शासक सवाई जयसिंह के संबंध में निम्न कथनों पर विचार कीजिए 
1. वह एक विख्यात राजनेता, कानून निर्माता, सुधारक तथा विज्ञान प्रेमी था।
2. उसने नेपियर की रचना का संस्कृत में अनुवाद कराया था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है /हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - (d)
व्याख्या- 18वीं सदी के सर्वश्रेष्ठ राजपूत शासक सवाई जयसिंह के संबंध में दोनों कथन सत्य हैं। अठारहवीं सदी में सबसे श्रेष्ठ राजपूत शासक सवाई जयसिंह था, वह एक कुशल कानून निर्माता, सुधारक और विज्ञान प्रेमी था। उसने युक्लिड की रेखागणित के तत्त्व' तथा त्रिकोणमिति की बहुत सारी कृतियों और लघुगणकों को बनाने और उसके उपयोग संबंधी नेपियर की रचना का संस्कृत में अनुवाद कराया।
2. 1773 ई. में 'जिज मुहम्मदशाही' पुस्तक, जो नक्षत्रों संबंधी ज्ञान से संबंधित है, के लेखक हैं
(a) जसवंत सिंह
(b) राजा भारमल 
(c) सवाई जयसिंह
(d) महाराणा अमर सिंह 
उत्तर - (c)
व्याख्या- 'जिज मुहम्मदशाही' पुस्तक की रचना 1773 ई. में जयपुर के शासक सवाई जयसिंह ने की। 'जिज मुहम्मदशाही' खगोल विज्ञान संबंधी पर्यवेक्षण तथा सारणियों का सेट तैयार करने वाली पुस्तक है ।

जाट

1. भरतपुर के जाट राज्य का संस्थापक कौन था? 
(a) चूड़ामन 
(b) हीरामन
(c) राजमन 
(d) हरमन
उत्तर - (a)
व्याख्या- भरतपुर के जाट राज्य का संस्थापक चूड़ामन और बदन सिंह था। भरतपुर वर्तमान राजस्थान में स्थित है। जाट खेतिहरों की एक जाति थी, जो दिल्ली, आगरा और मथुरा के आस-पास के क्षेत्रों में रहती थी।
2. किस जाट शासक के नेतृत्व में जाट सत्ता अपनी उच्चतम गरिमा पर पहुँची? 
(a) बदन सिंह 
(b) चूड़ामन
(c) सूरजमल
(d) रामसिंह
उत्तर - (c)
व्याख्या- जाट शासक सूरजमल के नेतृत्व में जाट सत्ता अपनी उच्चतम गरिमा पर पहुँची। सूरजमल का शासनकाल 1756 ई. से 1763 ई. तक था । वह एक कुशल प्रशासक, योग्य सेनापति तथा कुशाग्र बुद्धि का राजनेता था। उसका अधिकार क्षेत्र पूर्व में गंगा से लेकर पश्चिम में आगरा के सूबे तक था तथा उत्तर में दिल्ली के सूबों से लेकर दक्षिण में चंबल तक फैला था। उसके राज्य में अन्य जिलों के अतिरिक्त प्रमुख रूप से आगरा, मथुरा, मेरठ व अलीगढ़ शामिल थे।

सिख

1. सिख धर्म के संबंध में निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1. सिख धर्म को गुरु नानक ने 15वीं शताब्दी में चलाया।
2. गुरु हरगोविंद ने सिखों को लड़ाकू समुदाय के रूप में स्थापित किया।
3. गुरु गोविंद सिंह की मृत्यु के बाद सिखों का नेतृत्व बाबा रामचंद्र ने किया था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन असत्य है/हैं?
(a) केवल 1
(b) 1 और 2
(c) केवल 3
(d) 2 और 3
उत्तर - (c)
व्याख्या- सिख धर्म के संबंध में कथन (3) असत्य है, क्योंकि सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह (1666-1708 ई.) के नेतृत्व में सिख एक राजनीतिक और सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित हुए।
गुरु गोविंद सिंह की मृत्यु के पश्चात् गुरु की परंपरा समाप्त हो गई और सिखों का नेतृत्व गुरु गोविंद सिंह के कृपापात्र बंदा सिंह ने किया था, जो इतिहास में बंदा बहादुर के नाम से प्रसिद्ध है।
कथन (1) और (2) सत्य हैं। सिख धर्म की स्थापना 15वीं शताब्दी में गुरु नानक ने की, गुरु हरगोविंद ने सिखों को लड़ाकू बनाने की ओर ध्यान दिया।
2. सिख गुरुओं का सही कालक्रम कौन-सा है ?
(a) गुरु नानक-गुरु अंगद - गुरु हरगोविंद - गुरु गोविंद सिंह
(b) गुरु नानक-गुरु हरगोविंद - गुरु अंगद - गुरु गोविंद सिंह
(c) गुरु नानक - गुरु गोविंद सिंह गुरु अंगद - गुरु हरगोविंद
(d) गुरु गोविंद सिंह-गुरु हरगोविंद - गुरु नानक - गुरु अंगद
उत्तर - (a)
व्याख्या- सिख गुरुओं का सही कालक्रम निम्नवत् है
गुरु नानक → गुरु अंगद → गुरु हरगोविंद → गुरु गोविंद सिंह 
  • गुरु नानक देव का जन्म 1469 ई. में ननकाना साहिब में हुआ था, जो वर्तमान पाकिस्तान में है। गुरु नानक देव सिख संप्रदाय प्रथम गुरु थे। इनका निधन 1539 ई. में करतारपुर साहिब (वर्तमान में पाकिस्तान) में हुआ था।
  • गुरु अंगद सिखों के दूसरे गुरु थे। इनका जन्म 1504 ई. में श्री मुक्तसर साहिब (पंजाब) में हुआ था। गुरु अंगद का निधन 1552 ई. में अमृतसर (पंजाब) में हुआ था।
  • गुरु हरगोविंद सिखों के छठे गुरु थे। इनका जन्म 1595 ई. में अमृतसर पंजाब में हुआ था। इनके पिता गुरु अर्जन देव को जहाँगीर द्वारा मृत्युदंड दिए जाने के बाद 11 वर्ष की आयु में उन्हें 'गुरु' बनाया गया। गुरु हरगोविंद सिंह का निधन 1644 ई. में किरतरपुर साहिब (वर्तमन में पंजाब) में हुआ था।
  • सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह का जन्म 1666 ई. पटना (बिहार) में हुआ था। इन्होंने 'खालसा पंथ' की स्थापना की थी। 1708 ई. में गुरु गोविंद सिंह का निधन नांदेड (महाराष्ट्र) में हुआ था।
3. सिखों के संदर्भ में निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1. गुरु गोविंद सिंह सिखों के 10वें एवं अंतिम गुरु थे।
2. गुरु गोविंद सिंह की मृत्यु के बाद सिखों को बंदा बहादुर के नाम से एक योग्य नेता मिला।
3. बंदा बहादुर के नेतृत्व में सिखों ने मुगलों का बहादुरी से सामना किया तथा लाहौर से दिल्ली तक के सारे क्षेत्रों पर अधिकार हो गया।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सत्य हैं ?
(a) 1 और 2 
(b) 1 और 3
(c) 2 और 3
(d) ये सभी
उत्तर - (d)
व्याख्या- सिखों के संदर्भ में दिए गए सभी कथन सत्य हैं।
सिखों के अंतिम व दसवें गुरु गोविंद सिंह थे। उनकी मृत्यु के पश्चात् बंदा बहादुर ने सिखों को नेतृत्व प्रदान किया। उसने सिख शक्ति को एकजुट करने के प्रयास किए तथा पंजाब के किसानों और नीची जातियों के लोगों को एकजुट कर मुगल सत्ता के विरुद्ध आठ वर्षों तक युद्ध किया। उसके नेतृत्व में लाहौर से दिल्ली तक के क्षेत्रों पर सिखों का अधिकार रहा। अंततः 1715 ई. में बंदा बहादुर को गिरफ्तार कर उसकी हत्या कर दी गई।
4. रणजीत सिंह के संबंध में निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1. इनका संबंध सुकरचकिया मिसल से था।
2. इन्होंने सतलुज के पश्चिम में सभी सिख प्रधानों को अपने अधीन कर पंजाब में अपना राज्य स्थापित किया।
3. भू-राजस्व का हिसाब 40% सकल उत्पादन के आधार पर लगाया।
4. रणजीत सिंह ने यूरोपीय प्रशिक्षकों की सहायता से एक शक्तिशाली एवं अनुशासित फौज तैयार की।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) केवल 2
(c) 1, 2 और 3
(d) 1, 2 और 4
उत्तर - (d)
व्याख्या- रणजीत सिंह के संबंध में कथन (1), (2) और (4) सत्य हैं। रणजीत सिंह के अधीन पंजाब ने प्रमुखता प्राप्त की थी। वह अठारहवीं सदी के अंत में सुकरचकिया मिसल के प्रधान थे। इन्होंने 1799 ई. में लाहौर और 1802 ई. में अमृतसर पर अधिकार कर लिया। में
इन्होंने सतलुज के पश्चिम के सभी सिख प्रधानों को अपने अधीन कर पंजाब पर अपना आधिपत्य स्थापित किया। तत्पश्चात् कश्मीर, पेशावर और मुल्तान को भी अपने अधिकार में ले लिया।
रणजीत सिंह द्वारा यूरोपीय प्रशिक्षकों की सहायता से एक अनुशासित फौज तैयार की गई, जिसमें सिखों के अतिरिक्त, गोरखा, बिहारी, उड़िया, पठान, गेगरा तथा पंजाबी मुसलमान सैनिक भी शामिल थे।
कथन (3) असत्य है, क्योंकि रणजीत सिंह ने भू-राजस्व का हिसाब 40% नहीं, बल्कि 50% सकंल उत्पादन के आधार पर लगाया, क्योंकि उन्होंने मुगलों द्वारा लागू की गई भू-राजस्व की व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं किया।

मराठा

1. शाहू और ताराबाई के मध्य हुए गृहयुद्ध ने एक नई व्यवस्था को जन्म दिया, वह व्यवस्था थी 
(a) पेशवा का पद
(b) मनसबदारी प्रथा का आरंभ
(c) सैन्य व्यवस्था में परिवर्तन 
(d) जजिया कर की वसूली
उत्तर - (a)
व्याख्या- शाहू और ताराबाई के मध्य हुए गृहयुद्ध के पश्चात् एक नई व्यवस्था का आरंभ हुआ, जो पेशवा का पद कहलाया, जिसका नेता राजा शाहू पेशवा बालाजी विश्वनाथ था। इस परिवर्तन के साथ इतिहास में पेशवा आधिपत्य का दूसरा काल आरंभ हुआ, जिसमें मराठा राज्य एक साम्राज्य के रूप में बदल गया।
2. निम्न कथनों पर विचार कीजिए 
1. बालाजी विश्वनाथ की मृत्यु के बाद उसका पुत्र बाजीराव प्रथम पेशवा बना।
2. बालाजी विश्वनाथ को शिवाजी के बाद गुरिल्ला युद्ध का सबसे बड़ा प्रतिपादक माना गया।
3. बाजीराव प्रथम ने निजामुलमुल्क को दक्कन प्रांतों की चौथ एवं सरदेशमुखी मराठों को देने के लिए बाध्य किया।
4. बाजीराव प्रथम ने पश्चिमी तट पर स्थित पुर्तगाली क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया था।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन असत्य हैं ?
(a) 1 और 2 
(b) 2 और 3
(c) 2 और 4
(d) 3 और 4
उत्तर - (c)
व्याख्या- दिए गए कथनों में से कथन (2) और (4) असत्य हैं, क्योंकि बालाजी विश्वनाथ को नहीं, बल्कि बाजीराव प्रथम को शिवाजी के पश्चात् गुरिल्ला युद्ध का सबसे बड़ा प्रतिपादक माना जाता है। बालाजी विश्वनाथ की मृत्यु 1720 ई. में हुई, जिसके पश्चात् उसका 20 वर्षीय पुत्र बाजीराव प्रथम पेशवा बना।
बाजीराव प्रथम पश्चिम तट से पुर्तगालियों के अधिकार को समाप्त करने में सफल नहीं हुआ फलस्वरूप पुर्तगालियों ने पश्चिमी तट क्षेत्र पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया। हालाँकि बाजीराव प्रथम ने सिलसिट और बसई (बसीन) पर अपना आधिपत्य स्थापित करने में सफलता प्राप्त कर ली थी।
3. पानीपत का तृतीय युद्ध कब हुआ था?
(a) 14 जनवरी, 1760
(b) 5 जनवरी, 1760
(c) 14 जनवरी, 1761
(d) 5 जनवरी, 1761
उत्तर - (c)
व्याख्या- पानीपत का तृतीय युद्ध 14 जनवरी, 1761 को मराठों और अफगानों के बीच लड़ा गया था। इस युद्ध में मराठों का नेतृत्व बालाजी बाजीराव (नाना साहब) के अल्पवयस्क पुत्र विश्वास राव तथा सेनापति सदाशिव राव भाऊ और अफगानों का नेतृत्व अहमदशाह अब्दाली ने किया था। इस युद्ध में मराठों की हार हुई फलस्वरूप मराठा शक्ति कमजोर हो गई।
4. पानीपत के युद्ध के परिणाम पर विचार कीजिए
1. पानीपत की पराजय से मराठों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची।
2. मराठों की पराजय ने कंपनी को बंगाल और दक्षिण भारत में अपनी सत्ता मजबूत करने का अवसर दिया।
3. युद्ध में पेशवा का बेटा विश्वास राव, सदाशिव राव भाऊ तथा बहुत से मराठा सरदार मारे गए।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) ये सभी
उत्तर - (d)
व्याख्या- दिए गए सभी कथन सत्य हैं। पानीपत के तृतीय युद्ध के निम्न परिणाम हुए
इस युद्ध में मराठों की पराजय ने मराठा शक्ति का ह्रास किया, जिसने मराठों की प्रतिष्ठा पर एक प्रश्नचिह्न लगा दिया। इस युद्ध में मराठों की पराजय के परिणामस्वरूप ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपनी सत्ता को मजबूत करते हुए बंगाल और दक्षिण भारत में कंपनी का विस्तार किया। इस युद्ध में मराठों की ओर से लड़ते हुए पेशवा बालाजी बाजीराव का अल्पवयस्क पुत्र विश्वास राव, सदाशिव राव भाऊ तथा असंख्य मराठा सैनिक मारे गए थे ।

18वीं सदी के लोगों का सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक जीवन

1. निम्न में से कौन-सा कथन असत्य है?
(a) मुगलों के शासनकाल में एशिया तथा यूरोप के साथ बड़े पैमाने पर व्यापार होता था।
(b) भारत में चाय, चीनी, चीनी मिट्टी तथा रेशम का आयात अरब से होता था।
(c) सिंगापुर से टिन का आयात किया जाता था।
(d) भारत से कच्चा रेशम, रेशमी कपड़े, नील, शोरा अफीम, चावल, काली मिर्च तथा अन्य मसाले विदेशों को निर्यात किए जाते थे।
उत्तर - (b)
व्याख्या- दिए गए कथनों में से कथन (b) असत्य है, क्योंकि अठारहवीं सदी के दौरान भारत में चाय, चीनी, चीनी मिट्टी और रेशम का आयात चीन से होता था न कि अरब से। अरब से आयात होने वाली वस्तुओं में कहवा, सोना, दवाएँ और शहद शामिल था। इस काल के दौरान भारत कच्चा रेशम, और रेशमी कपड़े, लौहे का सामान, नील, शोरा, अफीम, चावल, गेहूँ, चीनी, काली मिर्च और अन्य मसाले, रत्न तथा औषधियों का निर्यात विभिन्न देशों में करता था।
2. निम्न कथनों पर विचार कीजिए
1. 18वीं सदी में भारत में शिक्षा परंपरागत थी तथा उसका पश्चिमी क्षेत्रों में हुए द्रुत परिवर्तनों से कोई संपर्क नहीं था।
2. हिंदुओं में उच्च शिक्षा फारसी माध्यम से होती थी।
3. यद्यपि प्राथमिक शिक्षा मुख्यतः ब्राह्मण राजपूत तथा वैश्य जैसी जातियों तक ही सीमित थी, किंतु छोटी जातियों के भी कई लोग बहुधा उसे प्राप्त कर लेते थे।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन असत्य है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 3
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर - (b)
व्याख्या- दिए गए कथनों में से कथन (2) असत्य हैं। अठारहवीं सदी के भारत में हिंदुओं में उच्च शिक्षा का माध्यम फारसी नहीं, बल्कि संस्कृत थी और मुख्यत: यह भाषा ब्राह्मणों तक ही सीमित थी। अठारहवीं सदी में तत्कालीन राजकीय भाषा होने के कारण फारसी भाषा हिंदुओं और मुसलमानों में समान रूप से लोकप्रिय थी।
3. निम्न में कौन-सा कथन सत्य है ?
1. 18वीं शताब्दी में जाति हिंदुओं के सामाजिक जीवन की मुख्य विशेषता थी।
2. जाति नियम कठोर नहीं थे।
कूट
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - (a)
व्याख्या- दिए गए कथनों में से कथन (1) सत्य है। 18वीं सदी के सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन के अंतर्गत जाति हिंदुओं के सामाजिक जीवन की मुख्य विशेषता थी। हिंदू धर्म चार वर्णों के अतिरिक्त अनेक जातियों में बँटा था। जातियों का स्वरूप अलग-अलग स्थानों पर भिन्न-भिन्न था।
कथन (2) असत्य है, क्योंकि 18वीं सदी में जाति नियम अत्यंत कठोर थे । ब्राह्मणों के नेतृत्व में उच्च जातियों ने सभी सामाजिक प्रतिष्ठा और विशेषाधिकार पर अपना एकाधिकार स्थापित कर रखा था।
4. निम्न में से कौन-सा कथन सत्य है ?
1. 18वीं सदी के दौरान सांस्कृतिक दृष्टि से भारत में दुर्बलता के लक्षण दिखाई देते हैं।
2. तत्कालीन सांस्कृतिक क्रियाकलापों का खर्च अधिकतर शाही दरबार शासक और सामंत तथा सरदार वहन करते थे, परंतु उनकी खराब आर्थिक स्थिति के कारण सांस्कृतिक कार्यों की धीरे-धीरे अवहेलना होने लगी।
कूट
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (c)
व्याख्या- दिए गए दोनों कथन सत्य हैं। अठारहवीं सदी अपनी पिछली सदियों से सांस्कृतिक निरंतरता को कायम रखने में अवश्य सफल रही, परंतु साथ ही भारतीय संस्कृति संपूर्ण रूप से परंपरावादी बनी रही अर्थात् इस सदी के दौरान सांस्कृतिक दृष्टि से भारत में दुर्बलता के लक्षण दृष्टिगोचर होते हैं।
18वीं सदी में तत्कालीन सांस्कृतिक क्रियाकलापों का खर्च अधिकतर शाही दरबार शासक और सामंत तथा सरदारों द्वारा वहन किया जाता था, लेकिन धीरे-धीरे उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय होती गई और सांस्कृतिक कार्यों की अवहेलना होने लगी। उस काल के दौरान अधिकतर उन सांस्कृतिक कार्यों में दुर्बलता के लक्षण दिखाई दिए, जो राजाओं और सामंतों के संरक्षण पर निर्भर थे।
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