NCERT MCQs | मध्यकालीन इतिहास | मराठा राज्य और संघ
1. मराठों के उदय के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. अहमदनगर और बीजापुर की सेनाओं में मराठे उच्च पद पर आसीन थे।
2. दक्कनी राज्यों तथा मुगलों दोनों ने मराठों का समर्थन प्राप्त करने की कोशिश की।
3. राजपूतों की भाँति मराठों का एक सुप्रतिष्ठित राज्य था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) 1 और 3
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (a)
व्याख्या- मराठों के उदय के संबंध में दिए गए कथनों में से कथन (1) और (2) सत्य हैं। दक्षिण भारत के दो प्रमुख राज्य अहमदनगर और बीजापुर की में मराठे उच्च पर आसीन थे, वे अपनी वीरता के लिए जाने जाते थे। यही कारण था कि यहाँ के शासकों ने मराठों को अपनी सेना में प्रतिष्ठित पद दिए। मराठों की शक्ति को देखते हुए मुगल शासक भी उन्हें अपने पक्ष करना चाहते थे। मुगल शासकों ने दक्षिण भारत में अपना प्रभुत्व जमाने के लिए मराठों का समर्थन प्राप्त करने की कोशिश की।
कथन (3) असत्य है, क्योंकि राजपूतों की भाँति मराठों का कोई प्रतिष्ठित राज्य नहीं था, बल्कि मराठा साम्राज्य को व्यवस्थित करने का श्रेय शाहजी भोंसले एवं शिवाजी को जाता था।
2. मुगल काल के उत्तरार्द्ध में मोरे, घोटगे तथा निंबलकर किस रूप में प्रतिष्ठित थे?
(a) मराठा सत्ताधारी परिवार
(b) मुगल सेना में उच्च सेनाधिकारी
(c) निजाम के सहयोगी
(d) मराठा राजकीय सेवा में लगे कर्मचारी
उत्तर - (a)
व्याख्या- मुगल काल के उत्तरार्द्ध में मोरे, घोटगे तथा निंबलकर मराठा सत्ताधारी परिवार से संबंधित थे। ये काफी प्रभावशाली मराठा थे, जिनके हाथों में स्थानीय सत्ता थी, परंतु इनकी शक्तियाँ विकेंद्रित थीं।
ये मुख्यत: अहमदनगर एवं बीजापुर शासकों को सैन्य सहायता प्रदान करते थे, कालांतर में मराठा शक्तियाँ एकजुट होने लगी थीं। मुगल स्वयं भी प्रभावशाली मराठों की सहायता से दक्षिण भारत में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते थे, परंतु मुगलों का मराठों के साथ संघर्ष हुआ।
3. शाहजी भोंसले के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा स नहीं है?
(a) शाहजी ने अहमदाबाद में अपनी राजनीतिक स्थिति को सुदृढ़ किया।
(b) 1636 ई. में उन्हें अपने प्रभुत्व वाले प्रदेश छोड़ने पड़े थे।
(c) वे कुछ दिन बीजापुर की सेवा में रहे।
(d) उन्होंने बेंगलूर (बंगलुरु) में अर्द्ध स्वतंत्र राज्य स्थापित किया था।
उत्तर - (a)
व्याख्या- शाहजी भोंसले के संबंध में दिए गए कथनों में से कथन (a ) सत्य नहीं है, क्योंकि शाहजी पहले ऐसे प्रभावशाली मराठा थे, जिन्होंने अहमदाबाद में नहीं, बल्कि अहमदनगर में अपनी स्थिति मजबूत की। वे पहले ऐसे मराठा थे, जिन्होंने मराठा शक्तियों को एक करना प्रारंभ किया। कालांतर में उनके पुत्र शिवाजी ने इसी कार्य को आगे बढ़ाया। उन्होंने मुगलों के विरुद्ध अहमदनगर की ओर से चुनौती दी, परंतु एक संधि के अनुसार शाहजी को उन्हें अपने प्रभुत्व वाले प्रदेश छोड़ने पड़े थे, इसके बाद वे बीजापुर की सेवा में लग गए। तत्पश्चात् में शाहजी भोंसले कर्नाटक की ओर चले गए, वहाँ उन्होंने राजनीतिक अस्थिरता का लाभ उठाकर बेंगलूर ( बंगलुरु) में एक अर्द्ध स्वतंत्र राज्य स्थापित किया था।
1. शिवाजी के संबंध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) उनकी माता का नाम जीजाबाई था।
(b) उन्होंने 1637 ई. में राजगढ़, कोंडाना तथा तोरण को जीत लिया था।
(c) 18 वर्ष की आयु में उन्होंने सैन्य अभियान प्रारंभ कर दिया था।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (b)
व्याख्या- शिवाजी के संबंध में कथन (b) सत्य नहीं है, क्योंकि शिवाजी ने मात्र 18 वर्ष की आयु में 1645 ई. से 1647 ई. के मध्य पूना के समीपवर्ती राजगढ़, कोंडाना तथा तोरण के पहाड़ी किलों को जीतकर अपने पराक्रम का परिचय दिया था।
2. शिवाजी के साम्राज्य विस्तार में किस संरक्षक / अभिभावक की मुख्य भूमिका थी?
(a) दादा कोंडदेव
(b) दादा भीमदेव
(c) रामानुज पुलस्कर
(d) दादा बीसलदेव
उत्तर - (a)
व्याख्या शिवाजी के साम्राज्य विस्तार में उनके संरक्षक एवं अभिभावक दादा कोंडदेव की भूमिका महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। कोंडदेव के नेतृत्व में उन्होंने कई सैन्य अभियान भी जीते। राजगढ़, कोंडाना तथा तोरण के पहाड़ी किलों को जीतने के बाद 1647 ई. में ही दादा कोंडदेव का निधन हो गया। कोंडदेव के निधन के बाद शिवाजी ने समस्त कार्य भार स्वयं संभाला।
3. शिवाजी के विजय अभियानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. 1647 ई. में उन्होंने अपने पिता की जागीर पूर्ण रूप से अपने नियंत्रण में ले ली।
2. शिवाजी की विजय का वास्तविक दौर 1666 ई. में प्रारंभ हुआ।
3. उन्होंने जवाली राज्य को जीतकर मराठा साम्राज्य में मिलाया था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है / हैं?
(a) 1 और 2 3
(b) 1 और 3
(c) 1, 2 और
(d) केवल 3
उत्तर - (c)
व्याख्या- शिवाजी के विजय अभियानों के संबंध में दिए गए सभी कथन सत्य हैं। 1647 ई. में शिवाजी ने अपने संरक्षक एवं अभिभावक से अपने पिता की जागीर पूर्ण रूप से अपने नियंत्रण में ले ली थी एवं स्वयं को 'मुख्तार' भी घोषित कर दिया।
शिवाजी की विजय का वास्तविक दौर 1656 ई. में प्रारंभ हुआ था। सर्वप्रथम उन्होंने मराठा सरदार चंद्र राव मोरे से जवाली का राज्य जीत लिया। शिवाजी ने जवाली राज्य व वहाँ के खजाने प्राप्त करने के लिए छल प्रपंच का सहारा लिया। जवाली विजय अभियान के बाद शिवाजी जवाली क्षेत्र के निर्विवाद स्वामी बन गए। इस विजय अभियान से शिवाजी को व्यापक सफलता मिली, क्योंकि इसके तत्पश्चात् सतारा व कोंकण क्षेत्र तक पहुँचना सरल हो गया था।
4. शिवाजी के काल की विभिन्न घटनाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. मुगलों ने 1667 ई. में बीजापुर पर आक्रमण किया, जिससे शिवाजी बीजापुर के प्रतिशोध से बच गए।
2. शिवाजी ने 1666 ई. में मुगल क्षेत्र में प्रवेश कर अपना खजाना भरा था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - (a)
व्याख्या- शिवाजी के काल की विभिन्न घटनाओं के संबंध में केवल कथन (1) सत्य है। 1667 ई. में बीजापुर शासकों पर मुगल सैनिकों ने आक्रमण कर दिया, इस संघर्ष में बीजापुर के शासक इतने उलझ गए कि शिवाजी, स्वयं बीजापुर के शासकों के प्रतिशोध से बच गए।
कथन (2) असत्य है, क्योंकि शिवाजी ने 1665 ई. में नहीं, बल्कि 1657 ई. में मुगल क्षेत्र में प्रवेश किया था।
5. वह कौन सेनानायक था, जिसे बीजापुर के सुल्तान ने 1659 ई. में शिवाजी को दबाने के लिए भेजा था ?
(a) मीर जुमला
(b) अफजल खाँ
(c) इब्राहिम हुसैन
(d) अलताफ खाँ
उत्तर - (b)
व्याख्या- बीजापुर के सुल्तान ने 1659 ई. में सरदार अफजल खाँ को शिवाजी को दबाने के लिए भेजा था। अफजल खाँ ने शिवाजी को व्यक्तिगत मुलाकात के लिए निमंत्रण भेजा, साथ ही यह वादा किया कि वह बीजापुर के सुल्तान से माफी भी दिलवा देगा। शिवाजी अफजल खाँ की चालाकी समझते थे, उन्होंने मिलने की बात स्वीकार कर ली। अफजल खाँ ने गले लगने के बहाने, शिवाजी पर आक्रमण कर दिया, किंतु शिवाजी ने साहसिक ढंग से अपना बचाव करते हुए, 1669 ई. में अफजल खाँ की हत्या कर दी।
6. किस वर्ष मराठा सेना ने पऩहाला' के मजबूत किले पर अधिकार कर लिया था ?
(a) 1655 ई.
(b) 1656 ई.
(c) 1659 ई.
(d) 1660 ई.
उत्तर - (c)
व्याख्या- 1659 ई. में बीजापुर के सरदार अफजल खाँ की हत्या के पश्चात् शिवाजी के सैनिकों का मनोबल काफी बढ़ गया। इस विजय के बाद शिवाजी के सैनिकों ने अफजल खाँ के हथियारों एवं तोपखाने को अपने अधिकार में ले लिया। इसी विजय से उत्साहित होकर मराठों ने 'पनहाला' जैसे मजबूत किले पर अधिकार कर लिया, साथ ही दक्षिणी कोंकण एवं कोल्हापुर तक मराठों का प्रभुत्व स्थापित हो गया।
7. शिवाजी के पराक्रम के संबंध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) जनता उन्हें अलौकिक शक्तियों का श्रेय देने लगी थी।
(b) मराठा क्षेत्र के लोग भारी संख्या में सेना में शामिल होने लगे।
(c) अहमदनगर के तुर्क सैनिक शिवाजी की सेना में शामिल हो गए।
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर - (c)
व्याख्या- शिवाजी के पराक्रम के संबंध में कथन (c) सत्य नहीं है, क्योंकि अहमदनगर के तुर्क सैनिक शिवाजी की सेना में शामिल नहीं हुए। शिवाजी की बढ़ती लोकप्रियता के कारण मराठा क्षेत्र के लोग उनकी सेना में शामिल होने लगे। यहाँ तक कि भाड़े पर बीजापुरी सेना में कार्य करने वाले अफगानी सैनिक भी, शिवाजी की सेना में शामिल होने लगे और जनता शिवाजी को अलौकिक शक्तियों का श्रेय देने लगी थी।
8. शिवाजी मुगलों की कैद से भागने के समय कौन-से नगर में कैद थे?
(a) ग्वालियर
(b) आगरा
(c) दिल्ली
(d) कानपुर
उत्तर - (b)
व्याख्या- शिवाजी मुगलों की कैद से भागने के समय आगरा में कैद थे। शिवाजी तथा औरंगजेब के मध्य समझौते की प्रक्रिया के अंतर्गत जयसिंह ने शिवाजी को आगरा आने का निमंत्रण भेजा। मुगल दरबार में शिवाजी द्वारा साम्राज्य की सेवा में प्रवेश करने से मना करने पर उन्हें बंदी बनाया गया था। 1666 ई. में शिवाजी, कैद से भाग गए और नए तरीके से मराठा साम्राज्य को व्यवस्थित किया।
9. 'पुरंदर की संधि' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. यह आमेर के राजा जयसिंह और शिवाजी के बीच हुई थी ।
2. राजा जयसिंह मुगल प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रहे थे ।
3. यह संधि 1668 ई. में हुई थी ।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) केवल 3
(b) 1 और 2
(c) 1, 2 और 3
(d) 1 और 3
उत्तर - (b)
व्याख्या- 'पुरंदर की संधि' के संबंध में कथन (1) और (2) सत्य हैं। पुरंदर की संधि आमेर के शासक एवं औरंगजेब के विश्वासपात्र राजा जयसिंह एवं शिवाजी के मध्य 1665 ई. में हुई थी। राजा जयसिंह मुगल प्रतिनिधि के रूप में कार्य कर रहे थे। उसे पूरी प्रशासनिक और सैनिक स्वायत्तता प्रदान की गई थी, उसका सीधा संबंध मुगल सम्राट से था।
10. जयसिंह ने किसे पत्र लिखकर यह कहा था कि “शिवा को वृत्त के बिंदु की तरह हम चारों ओर से घेर लेंगे )"
(a) शाहजहाँ को
(b) औरंगजेब को
(c) दाराशिकोह को
(d) शाइस्ता खाँ
उत्तर - (b)
व्याख्या- पुरंदर की संधि के बाद, शिवाजी के संदर्भ में आमेर के शासक जयसिंह ने औरंगजेब को पत्र लिखकर कहा था कि “शिवा को वृत्त के बिंदु की तरह हम चारों ओर से घेर लेंगे।” दक्षिण भारत में मुगलों की पैठ को मजबूत बनाने के लिए यह आवश्यक था कि शिवाजी को मुगलों के प्रति विश्वासपात्र बनाया जा सके। औरंगजेब बीजापुर की शक्ति कुचलने के बाद शिवाजी को भी कमजोर करना चाहता था, ताकि दक्षिण भारत में मुगलों के समक्ष कोई चुनौती प्रस्तुत करने वाला न हो।
11. शिवाजी द्वारा सूरत को दूसरी बार कब लूटा गया ?
(a) 1670 ई.
(b) 1675 ई.
(c) 1665 ई.
(d) 1666 ई.
उत्तर - (a)
व्याख्या- शिवाजी द्वारा सूरत को दूसरी बार 1670 ई. में लूटा गया था।
पुरंदर की संधि की विफलता के कारण शिवाजी ने मराठों की शक्ति को एक बार फिर पुनर्जीवित करने की कोशिश की। पुरंदर की संधि के कारण हुई आर्थिक क्षति की भरपाई करने के उद्देश्य से शिवाजी ने सूरत पर आक्रमण किया और उसे लूट लिया। ध्यातव्य है कि शिवाजी ने 1664 ई. में पहली बार सूरत को लूटा था।
12. शिवाजी के राजतिलक से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
1. शिवाजी ने 1674 ई. में रायगढ़ में विधिवत् राजमुकुट धारण किया।
2. राजतिलक का संस्कार पुरोहित गंगाभट्ट ने करवाया था।
3. राजतिलक समारोह में पुरोहित द्वारा शिवाजी को उच्च वर्गीय ब्राह्मण शासक घोषित किया गया।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) केवल 2
उत्तर - (a)
व्याख्या- शिवाजी के राजतिलक से संबंधित कथनों में से कथन (1) और (2) सत्य हैं ।
1674 ई. में शिवाजी ने रायगढ़ में विधिवत राजमुकुट धारण किया। प्रारंभ में शिवाजी पूना के एक जागीरदार थे, परंतु अपनी वीरता एवं पराक्रम का परिचय देते हुए शिवाजी ने मराठा साम्राज्य की नींव रखी।
कथन (3) असत्य है, क्योंकि राजतिलक समारोह संपादित कराने वाले पुरोहित गंगाभट्ट ने विधिवत यह घोषणा की थी कि शिवाजी उच्च वर्गीय क्षत्रिय हैं, और यह भी कहा कि शिवाजी अब एक स्वतंत्र शासक है।
13. शिवाजी ने निम्नलिखित में से कौन-सी उपाधि धारण की थी ?
(a) मराठा शिरोमणि
(b) हिंदू शिरोमणि
(c) हैंदव धर्मोद्धारक
(d) हिंदू हितैषी
उत्तर - (c)
व्याख्या- शिवाजी ने 'हैंदव धर्मोद्धारक' की उपाधि धारण की थी। यह उपाधि उन्होंने बीजापुरी अधिकारियों से जिंजी और बेल्लूर जीतने के उपरांत धारण की थी, लेकिन इन्होंने इस उपाधि के विपरीत इस क्षेत्र में निवास करने वाली हिंदू आबादी को भी लूटा था।
14. निम्नलिखित में किस अभियान से लौटने के कुछ ही दिन बाद 1680 ई. में शिवाजी की मृत्यु हो गई थी ? (
(a) कर्नाटक अभियान
(b) गोलकुंडा अभियान
(c) आगरा अभियान
(d) अहमदनगर अभियान
उत्तर - (a)
व्याख्या- कर्नाटक अभियान से लौटने के कुछ दिन बाद ही 1680 ई. में शिवाजी की मृत्यु हो गई। कर्नाटक अभियान शिवाजी की आखिरी बड़ी सैन्य कार्रवाई मानी जाती है।
जिंजी का क्षेत्र उन्होंने अपने पुत्र राम को दे दिया, परंतु मुगलों के साथ निरंतर संघर्ष के कारण शिवाजी को अनेक परेशानियों से होकर गुजरना पड़ा।
1. शिवाजी के प्रशासन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. शिवाजी की शासन प्रणाली दक्कनी राज्यों से उधार ली गई थी।
2. प्रशासन में आठ मंत्रियों के समूह को अष्टप्रधान कहा जाता था।
3. अष्टप्रधान का स्वरूप मंत्रिपरिषद् वाला था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 3
(b) 2 और 3
(c) 1 और 2
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (c)
व्याख्या- शिवाजी के प्रशासन से संबंधित दिए गए कथनों में से कथन (1) और (2) सत्य हैं ।
शिवाजी की प्रशासनिक व्यवस्था का ढाँचा दक्कनी राज्यों से मिलता-जुलता था। यह विशेषत: अहमदनगर एवं बीजापुर के प्रशासनिक ढाँचे पर आधारित था। मराठा शासन व्यवस्था में 8 मंत्री नियुक्त किए गए, जिन्हें सामूहिक रूप में 'अष्टप्रधान' कहा गया है तथापि इसका स्वरूप मंत्रिपरिषद् वाला नहीं था, क्योंकि प्रत्येक मंत्री सीधे राजा के प्रति उत्तरदायी था। इनका कार्य राजा को परामर्श देना मात्र था, इसे किसी भी अर्थ में मंत्रिमंडल नहीं कहा जा सकता था।
2. शिवाजी प्रशासन में सेना के लिए जिम्मेदार अधिकारी को क्या कहा जाता था?
(a) सर-ए-जानदार
(b) सर-ए-नौबत
(c) सर - ए - निशां
(d) सर-ए-पागा
उत्तर - (b)
व्याख्या- शिवाजी के प्रशासन में सेना के लिए जिम्मेदार अधिकारी को 'सर-ए-नौबत' कहा जाता था। इसे पेशवा के समान अधिक सम्मानजनक माना जाता था। सेनापति (सर-ए-नौबत) का पद अक्सर मराठा सरदारों को ही दिया जाता था, यह संपूर्ण घुड़सवार सेना का की प्रधान होता था।
3. मराठा प्रशासन के अधिकारियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. न्यायाधीश और पंडितराव क्रमश: न्याय व्यवस्था और पारमार्थिक दोनों के लिए जिम्मेदार थे।
2. किसी स्त्री या नर्तकी को सेना के साथ ले जाने की अनुमति थी।
3. स्थायी सेना में तीस से चालीस हजार घुड़सवार शामिल थे।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन असत्य है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) केवल 2
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (b)
व्याख्या- मराठा प्रशासन के अधिकारियों के संबंध में कथन (2) असत्य है, क्योंकि सेना में कड़ा अनुशासन वरता जाता था और किसी स्त्री या नर्तकी को सेना के साथ ले जाने की अनुमति नहीं थी। मराठा सैनिकों में स्थायी सेना (पगा) में तीस से चालीस हजार घुड़सवार सैनिक होते थे।
4. निम्नलिखित में से किसने 1679 ई. में शिवाजी के प्रशासन में नए सिरे से राजस्व का निर्धारण किया था ?
(a) मलिक अंबर
(b) अन्नाजी दत्तो
(c) राजा टोडरमल
(d) अन्ना मजूमदार
उत्तर - (b)
व्याख्या- 1679 ई. में शिवाजी के प्रशासन में नए सिरे से राजस्व का निर्धारण अन्नाजी दत्तो ने किया। शिवाजी ने इस मामले में मलिक अंबर की व्यवस्था का अनुकरण किया। शिवाजी ने देशमुखी या जमींदारी प्रथा समाप्त नहीं की थी, लेकिन उन्होंने अपने अधिकारियों को मोकासा या जागीरें नहीं दीं।
5. मराठा प्रशासन के संबंध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) मोकासा एक प्रकार की जागीर थी।
(b) स्थायी सेना को सिलहदार कहा जाता था।
(c) मवाली एक प्रकार के सुरक्षा कर्मचारी थे।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर - (b)
व्याख्या- मराठा प्रशासन के संबंध में कथन (b) सत्य नहीं है, क्योंकि मराठा प्रशासन में अस्थायी सेना को 'सिलहदार' कहा जाता था। इस श्रेणी के सैनिकों को अपने घोड़े व अन्य खर्चे स्वयं उठाने पड़ते थे, इन्हें केवल युद्ध के समय लड़ाई भत्ता मिलता था।
1. राजा शाहू का पेशवा कौन था? जिसने पेशवा आधिपत्य को स्थापित किया?
(a) बालाजी विश्वनाथ
(b) बालाजी बाजीराव
(c) राजाराम
(d) बालाजी विशंभर
उत्तर - (a)
व्याख्या- राजा शाहू का पेशवा बालाजी विश्वनाथ था, जिसने पेशवा आधिपत्य स्थापित किया था। 18वीं सदी में मराठा साम्राज्य की स्थापना उन्हीं के नेतृत्व में हुई थी। बालाजी विश्वनाथ ने शाहू की सहायता से एक मजबूत मराठा साम्राज्य की नींव रखी, परंतु आंतरिक कलह और औरंगजेब के अधीन मुगलों के आक्रमण से मराठा साम्राज्य की स्थिति कमजोर होती चली गई। 1713 ई. में उन्होंने पेशवा की उपाधि धारण की। उन्होंने सैयद बंधुओं कहने पर मुगल सम्राट से जो संधि की थी, उसमें पेशवा ने अपना पूर्ण कौशल दिखाया था, जिसके माध्यम से उन्होंने मुगलों की राजनीति में हस्तक्षेप करने का अधिकार मराठों के लिए प्राप्त कर लिया था।
2. बालाजी विश्वनाथ के संबंध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) वह एक क्षत्रिय था।
(b) वह 1713 ई. में पेशवा बना था।
(c) उसने मुगल अधिकारियों के आपसी झगड़ों का लाभ उठाया।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (a)
व्याख्या बालाजी विश्वनाथ के संबंध में कथन (a) सत्य नहीं है, क्योंकि ये एक चितपावन ब्राह्मण परिवार से थे और अपनी प्रतिभा के बल पर वे 1713 ई. में मराठा साम्राज्य के 7वें पेशवा बने ।
3. बालाजी विश्वनाथ किस मुगल बादशाह की कब्र ( खुल्दाबाद) तक पैदल चलकर गया था?
(a) जहाँगीर
(b) शाहजहाँ
(c) औरंगजेब
(d) हुमायूँ
उत्तर - (c)
व्याख्या- मराठा पेशवा बालाजी विश्वनाथ मुगल बादशाह औरंगजेब की कब्र (खुल्दाबाद) तक पैदल चलकर गया था। बालाजी विश्वनाथ ने मुगलों के साथ 21 वर्ष तक संघर्ष किया, अंततः बालाजी ने मुगलों के साथ संधि कर मराठा साम्राज्य को स्थिर किया।
4. बाजीराव प्रथम के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. उसे शिवाजी के बाद गुरिल्ला युद्ध का सबसे बड़ा प्रतिपादक कहा गया।
2. जीवन भर उसने दक्कन में बुरहान-उल-मुल्क की शक्ति को नियंत्रित करने की कोशिश की।
3. बाजीराव ने 1733 ई. में जंजीरा के सिद्दियों के विरुद्ध एक अभियान किया था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 3
(b) 2 और 3
(c) 1, 2 और 3
(d) केवल 3
उत्तर - (a)
व्याख्या- बाजीराव प्रथम के संबंध में कथन (1) और (3) सत्य हैं ।
1720 ई. में बालाजी विश्वनाथ के निधन के बाद बाजीराव प्रथम मराठा साम्राज्य का पेशवा बना। बाजीराव प्रथम को शिवाजी के बाद गुरिल्ला युद्ध का सबसे बड़ा प्रतिपादक कहा गया, इसने 1737 ई. में दिल्ली पर आक्रमण किया। वह पहला पेशवा था, जिसने दिल्ली पर आक्रमण किया तथा 1733 ई. में जंजीरा के सिद्दियों के विरुद्ध अभियान किया।
कथन (2) असत्य है, क्योंकि बाजीराव प्रथम ने जीवन भर (1720-1740 ई. तक) मुगलों की शक्ति को नियंत्रित करने की कोशिश की। उसने आंग्रिया, पुर्तगालियों व अंग्रेजों को भी पराजित किया तथा पालखेड़ के युद्ध में उसने निजाम को भी पराजित कर दक्षिण भारत में अपनी स्थिति मजबूत कर ली।
5. बाजीराव प्रथम ने किस यूरोपीय शक्ति को 'सिलसिट' में पराजित किया था ?
(a) अंग्रेज
(b) पुर्तगाली
(c) डच
(d) फ्रांसीसी
उत्तर - (b)
व्याख्या- बाजीराव प्रथम ने यूरोपीय शक्ति पुर्तगाली को 'सिलसिट' में पराजित किया। 1739 ई. में अपने अंतिम दिनों में बाजीराव प्रथम ने अपने भाई चिमन अप्पा को भेजकर पुर्तगालियों को पराजित किया, तत्पश्चात् मराठा एवं पुर्तगाली अधिकारियों को 'बसई की संधि' करनी पड़ी।
6. बालाजी बाजीराव के संबंध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) वह बाजीराव प्रथम का भाई था।
(b) उसे नाना साहब के नाम से जाना जाता था।
(c) वह 1740 ई. से 1761 ई. तक पेशवा रहा ।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (a)
व्याख्या- बालाजी बाजीराव के संबंध में कथन (a) सत्य नहीं है, क्योंकि बालाजी बाजीराव, बाजीराव प्रथम का भाई नहीं, बल्कि पुत्र था। उसे 'नाना साहब' के नाम से भी जाना जाता है। बालाजी बाजीराव 1740 ई. से जून 1761 ई. तक पेशवा रहा।
7. पानीपत का तीसरा युद्ध कब लड़ा गया?
(a) 14 जनवरी, 1760
(b) 5 जनवरी, 1761
(c) 14 जनवरी, 1761
(d) 5 नवंबर, 1556
उत्तर - (c)
व्याख्या- पानीपत का तीसरा युद्ध 14 जनवरी, 1761 को लड़ा गया। मुगलों की कमजोर सत्ता को देखते हुए अफगान अक्रांता अहमदशाह अब्दाली भारत पर नियंत्रण करना चाहता था। मराठा शक्ति ने अब्दाली की महत्त्वाकांक्षा पर रोक लगाने के लिए उसका सामना किया, इस युद्ध में मराठों की पराजय हुई।
8. पानीपत का तृतीय युद्ध किनके मध्य लड़ा गया था?
(a) पेशवा विश्वनाथ राव और अहमदशाह अब्दाली के मध्य
(b) पेशवा सदाशिव राव भाऊ तथा नादिरशाह के मध्य
(c) पेशवा बाजीराव प्रथम तथा अब्दाली के मध्य
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (a)
व्याख्या- पानीपत का तृतीय युद्ध मराठा पेशवा विश्वनाथ राव और अहमदशाह अब्दाली के मध्य हुआ था। इस युद्ध में मराठा सेनाओं के सेनापति सदाशिव राव भाऊ थे। युद्ध में इब्राहिम शाह गार्दी ने मराठों का साथ दिया था। मराठा और अफगानी शासकों के मध्य हुए इस युद्ध में अंततः अफगानी शासक विजयी हुए थे। इस युद्ध में सिंधिया शासक महादजी सिंधिया ने भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
9. पेशवा माधव राव निम्नलिखित में किन शक्तियों को पराजित करने में सफल नहीं हुआ ?
(a) निजाम
(b) हैदरअली
(c) मुगल
(d) रूहेला
उत्तर - (c)
व्याख्या- पेशवा माधव राव मुगल शक्तियों को पराजित करने में सफल नहीं हुआ। माधव राव प्रथम मराठा साम्राज्य के चौथे पूर्वाधिकार प्राप्त पेशवा थे। अल्पवयस्क होने के बावजूद माधव राव प्रथम की अद्भुत दूरदर्शिता एवं संगठन क्षमता के कारण पानीपत के तृतीय युद्ध में मराठों की खोई हुई शक्ति और प्रतिष्ठा की पुनर्प्राप्ति संभव हो पाई। माधव राव ने अपने शासनकाल के दौरान निजाम, मैसूर के शासक हैदर अली व रूहेला शासकों को पराजित कर मराठा शक्तियों का प्रदर्शन किया, परंतु मुगलों के साथ सौहार्द्रपूर्ण संबंध स्थापित किए। उसने मुगल शासक शाहआलम को दिल्ली की सत्ता प्राप्त करने में सहायता की।
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