झारखण्ड की सिंचाई प्रणाली सिंचाई

झारखण्ड की सिंचाई प्रणाली सिंचाई
> झारखण्ड राज्य में कुल फसली भूमि का 15% भाग सिंचित है। 
> राज्य के देवघर जिले में पुनासी जलाशय परियोजना पूर्ण हो चुका है। पुनासी मुख्य नहर की लंबाई 72 किलोमीटर है।
> राज्य में कुल सिंचित भूमि का 58% भाग सतही जल द्वारा और 42% भाग भूमिगत जल द्वारा सिंचित होता है। 
> सिंचाई की सर्वाधिक आवश्यकता वाले जिले – साहेबगंज, गोड्डा, दुमका, गुमला 
> सिंचाई की उच्च आवश्यकता वाले जिले – देवघर, लोहरदगा, राँची एवं पश्चिमी सिंहभूम
> सिंचाई की मध्यम आवश्यकता वाले जिले –  गढ़वा, पलामू, हजारीबाग, गिरिडीह
> सिंचाई की निम्न आवश्यकता वाले जिले –  चतरा, बोकारो, धनबाद एवं पूर्वी सिंहभूम 
> झारखण्ड में सिंचाई के साधन 
> कुआँ
> यह सिंचाई का परंपरागत साधन है तथा झारखण्ड के कुल सिंचित क्षेत्र में कुआँ का योगदान लगभग 30% है।
> कुओं द्वारा सर्वाधिक सिंचाई झारखण्ड के गुमला जिले में (कुल सिंचित भूमि के 87.2% भाग पर) होती है। 
> इसके बाद क्रमशः गिरिडीह, राँची, धनबाद, हजारीबाग, पूर्वी सिंहभूम व पश्चिमी सिंहभूम जिले का स्थान है।
> तालाब 
> यह सिंचाई का सबसे पुराना साधन है तथा झारखण्ड के कुल सिंचित क्षेत्र में तालाब का योगदान लगभग 19% है। 
> तालाब द्वारा सर्वाधिक सिंचाई झारखण्ड के देवघर जिले में (कुल सिंचित भूमि के 49.3% भाग पर) होती है। 
> इसके बाद क्रमशः धनबाद, साहेबगंज, दुमका व गोड्डा जिलों का स्थान है। 
> नहर  
> यह सिंचाई का आधुनिक साधन है तथा झारखण्ड के कुल सिंचित क्षेत्र में नहरों का योगदान लगभग 18% है। 
> झारखण्ड के सिंहभूम एवं सरायकेला-खरसावाँ क्षेत्र में नहरों द्वारा सर्वाधिक सिंचाई की जाती है । 
> नलकूप
> यह सिंचाई का आधुनिक साधन है तथा झारखण्ड के कुल सिंचित क्षेत्र में नलकूप का योगदान लगभग 8% है। 
> नलकूप द्वारा झारखण्ड के लोहरदगा जिले में (कुल सिंचित भूमि का 32.6% ) सर्वाधिक सिंचाई की जाती है।
> इसके बाद क्रमशः पलामू, हजारीबाग व गिरिडी जिलों का स्थान है। 
> पठारी संरचना होने के कारण राज्य में अधिकांश भाग में चट्टानी संरचना पायी जाती है व कारण भूमिगत जल का स्तर भी कम पाया जाता है, जिसके यहाँ नलकूप द्वारा सिंचाई की संभावनाएँ अत्यंत कम हैं।
> झारखण्ड में सिंचाई परियोजनाएँ
1. वृहद् सिंचाई परियोजना
> 10,000 हेक्टेयर क्षेत्र से अधिक सिंचाई व्यवस्था वाले परियोजना को वृहद् सिंचाई परियोजना कहते हैं।
2. मध्यम सिंचाई परियोजना
> 2,000 से 10,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की व्यवस्था वाले परियोजना को मध्यम सिंचाई परियोजना कहते हैं। 
> राज्य में 600 से अधिक मध्यम सिंचाई परियोजनाएँ संचालित हैं। 
3. लघु सिंचाई परियोजना
> 2,000 हेक्टेयर क्षेत्र से कम में सिंचाई की व्यवस्था वाले परियोजना को लघु सिंचाई परियोजना कहते हैं। 
> राज्य सरकार द्वारा 'पहाड़ी क्षेत्र उद्वह सिंचाई निगम लिमिटेड' के माध्यम से विभिन्न लघु सिंचाई परियोजनाएँ चलायी जा रही हैं।
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