झारखण्ड की कृषि

झारखण्ड की कृषि
> झारखण्ड की कुल भूमि के मात्र 23%।भाग पर कृषि कार्य किया जाता है।
> आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 के अनुसार राज्य के कुल सकल मूल्य वृद्धि में कृषि व संबद्ध क्षेत्र का योगदान लगभग 13% है, जबकि राज्य के कुल श्रमबल का 43% रोजगार हेतु इस क्षेत्र पर निर्भर है। 
> वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार झारखण्ड में 38 लाख हेक्टेयर भूमि पर कृषि कार्य संभव है जो कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 47.69% है।
> झारखण्ड में मुख्यतः तीन फसलों- धान, गेहूँ तथा मक्का की खेती की जाती है । धान झारखण्ड की सर्वप्रमुख फसल है तथा मक्का यहाँ की दूसरी प्रमुख फसल है।
> सिंचाई के साधनों की कमी के कारण यहाँ की कृषि वर्षा पर आधारित है। राज्य में शुद्ध बोये गये कृषि क्षेत्र के मात्र 15% पर ही सिंचाई सुविधा उपलब्ध है।
> राज्य में सिंचाई का सर्वप्रमुख स्रोत कुआँ है ।
> झारखण्ड में कृषि की उन्नत तकनीकों का वृहद् प्रयोग संभव नहीं हो पाया है। इसका प्रमुख कारण उबड़-खाबड़ खेत, जोतों का छोटा आकार एवं बंजर जमीन है।
> राज्य में लगभग 17.38% परती भूमि पायी जाती है।
> राज्य में जोतों का औसत आकार प्रति व्यक्ति मात्र 1.17 हेक्टेयर है।
> राज्य में कुल बोये गये क्षेत्र के 78% हिस्से पर खरीफ फसल की खेती की जाती है।
> झारखण्ड राज्य के 17 जिले राष्ट्रीय बागवानी मिशन से आच्छादित हैं।
> झारखण्ड में जूट की ही भांति रेशेदार फसल के रूप में मेस्टा का उत्पादन किया जाता है। 
> राज्य के हजारीबाग जिले में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (ICAR), नई दिल्ली द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IIAR) की स्थापना प्रस्तावित है।
> खरीफ फसल
> मानसून के आगमन के समय अर्थात् जून-जुलाई में इन फसलों की बुआई की जाती है तथा मानसून की समाप्ति पर अर्थात् सितम्बर-अक्टूबर में इनकी कटाई की जाती है।
> प्रमुख खरीफ फसल धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, मूंग, मूंगफली, गन्ना आदि हैं।
> खरीफ फसल को झारखण्ड में दो फसलों में बांटा जाता है - भदई तथा अगहनी ।
> भदई फसल वैशाख जेठ (मई-जून) में बोयी जाती है तथा इसे भादो (अगस्त-सितंबर) में काट लिया जाता है। 
> अगहनी फसल की बुआई जेठ-आषाढ़ (जून) में की जाती है तथा अगहन (दिसम्बर) में इसकी कटाई कर ली जाती है।
> झारखण्ड की कुल कृषिगत भूमि में से लगभग 78% भाग पर खरीफ फसलों की कृषि की जाती है। 
> झारखण्ड आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 के अनुसार राज्य में वर्ष 2019-20 की तुलना में 2020-21 में खरीफ फसल के उत्पादन में 4,60,000 टन वृद्धि का अनुमान है। 2018-19 की तुलना में 2019-20 में खरीफ फसल के उत्पादन में वृद्धि (7,71,000 टन) दर्ज की गयी है।
> झारखण्ड आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 के अनुसार वर्ष 2020-21 में कुल 1938.1 हजार हेक्टेयर क्षेत्र पर खरीफ फसलों की कृषि का अनुमान है तथा कृषि उत्पादकता 2539 किग्रा प्रति हेक्टयर का अनुमान है। 2019-20 में 1623.5 हजार हेक्टेयर क्षेत्र पर खरीफ फसलों की कृषि की गयी थी तथा कृषि उत्पादकता 2539 किग्रा प्रति हेक्टयेर रही है।
> राज्य में खरीफ फसल के कुल क्षेत्रफल (1938 हजार हेक्टयेर) के 84.7 प्रतिशत क्षेत्र पर धान तथा 14 प्रतिशत क्षेत्र पर मक्के की खेती की जाती है।
> वर्ष 2017-18 में धान का उत्पादन 5132 हजार टन हुआ था जो 2018-19 में कम होकर 2894 हजार टन रह गया (44% की कमी)। 2020-21 में इसके 3976 हजार टन रहने का अनुमान है।
> वर्ष 2017-18 में मक्का का उत्पादन 597 हजार टन हुआ था जो 2018-19 में कम होकर 455 हजार टन रह गया (24% की कमी) । 2020-21 में इसके 593 हजार टन रहने का अनुमान है। 
> रबी फसल
> रबी फसल को ठंडे मौसम की फसल या वैशाखी फसल भी कहा जाता है।
> रबी फसल अक्टूबर-नवंबर में बोयी जाती है तथा मार्च में काट ली जाती है।
> गेहूँ, जौ, चना, तिलहन आदि प्रमुख रबी फसलें हैं।
> झारखण्ड की कुल बोये गये क्षेत्र के लगभग 16% भाग पर रबी फसल की खेती की जाती है।
> राज्य का अधिकांश क्षेत्र पठारी होने के कारण गेहूँ तथा जौ की कृषि बारी भूमि या सिंचाई साधनों से युक्त क्षेत्रों में ही की जाती है।
> आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 के अनुसार वर्ष 2019-20 में 222.4 हजार हेक्टयेर क्षेत्र पर रबी फसल की कृषि की गयी तथा 455.4 हजार टन उत्पादन दर्ज किया गया। इस दौरान रबी फसल की उत्पादकता 2048 किग्रा प्रति हेक्टेयर रही।
> राज्य में कुल रबी फसलों की कृषि योग्य भूमि में से लगभग 90% क्षेत्र पर गेहूँ व चना की खेती की जाती है।
> जायद फसल
> राज्य के कुल कृषिगत भूमि के मात्र 0.17% भाग पर ही जायद फसल की खेती की जाती है।
> झारखण्ड में खाद्य सुरक्षा
> झारखण्ड आर्थिक समीक्षा 2020-21 के अनुसार, राज्य की कुल भंडारण क्षमता 5.51 लाख मीट्रिक टन है, जबकि शीत भंडारण गृह (कोल्ड स्टोरेज) की भंडारण क्षमता 2 लाख मीट्रिक टन है।
> झारखण्ड आर्थिक समीक्षा 2020-21 के अनुसार, राज्य में खाद्यान्न के भंडारण हेतु कुल डिपो/गोदाम की संख्या 256 है, जिसमें सर्वाधिक गोदाम राँची (21) तथा पश्चिमी सिंहभूम (18) में है।
> राज्य में सर्वाधिक पीडीएस डीलर राँची जिला में तथा सबसे कम लोहरदगा जिला में हैं। 
> राज्य सरकार के खाद्य, जन वितरण तथा उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा पीडीएस प्रणाली से जुड़े सूचनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने हेतु 'आहार' नामक ऑनलाईन पोर्टल शुरू किया गया है। इस पोर्टल के द्वारा उपभोक्ताओं को पीडीएस डीलर, खाद्यान्न का स्टॉक तथा खाद्य सुरक्षा से जुड़े विभिन्न जानकारियाँ उपलब्ध होंगी। 
> राज्य में बच्चों तथा माताओं को पोषण सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से वर्ष 2019-20 व 2020-21 में 'पोषण अभियान' का संचालन किया गया।
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