झारखण्ड में खनिज संसाधन

झारखण्ड में खनिज संसाधन
> झारखण्ड खनिज संसाधन की दृष्टि से भारत का अग्रणी राज्य है। 
> झारखण्ड को 'भारत का रूर' कहा जाता है ।
> देश के कुल खनिज का लगभग 40% * खनिज झारखण्ड राज्य में पाया जाता है। 
> विभिन्न खनिजों के भंडार की दृष्टि से झारखण्ड का देश में स्थान इस प्रकार है
> पहला स्थान – कोयला, ( कोयला उत्पादन की दृष्टि से तीसरा स्थान ), प्राइम कोकिंग कोल, मध्यम कोकिंग कोल, पन्ना (Emerald), रॉक फास्फेट
> दूसरा स्थान – तांबा, निकेल, लौह अयस्क, एंडेलुसाइट, कोबाल्ट, सेमी-कोकिंग कोल, एपेटाइट 
> तीसरा स्थान –ग्रेनाइट, बेंटोनाइट, गैर-कोकिंग कोल
> चौथा स्थान – फायरक्ले, एस्बेस्टस, कायनाइट, बॉक्साइट, क्रोमाइट, ग्रेफाइट ( ग्रेफाइट उत्पादन की दृष्टि से प्रथम स्थान)
> पाँचवा स्थान – वर्मीकुलाइट
> छठा स्थान – चाइनाक्ले, अभ्रक, क्वार्ट्ज
> सातवां स्थान – फेल्सपार, क्वाट्जाईट, गारनेट
(Source - Indian Mineral Yearbook 2018 & 2019 published by Indian Bureau of Mines)
> झारखण्ड आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 के अनुसार झारखण्ड राज्य का तांबा भंडार की दृष्टि से देश में तीसरा तथा बॉक्साइट भंडार की दृष्टि से सातवां स्थान है।
> वित्तीय वर्ष 2020-21 में राज्य में कुल 2296.96 करोड़ रूपये मूल्य के खनिज संसाधनों का उत्पादन किया गया है। रॉयल्टी प्राप्ति के मामले में झारखण्ड के जिलों में धनबाद, पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) तथा चतरा का स्थान क्रमश: पहला, दूसरा व तीसरा है।
> इंडियन मिनरल बुक के अनुसार चकमक पत्थर (Flint Stone) का एकमात्र उत्पादक राज्य झारखण्ड है। 
> झारखण्ड के आर्थिक सर्वेक्षण 2020-21 के अनुसार भारत में कोकिंग कोयला, यूरेनियम तथा पाइराइट का एकमात्र उत्पादक राज्य झारखण्ड है ।
> झारखण्ड आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 के अनुसार राज्य कुल 373 बड़े खदान हैं। इनमें सर्वाधिक खदान धनबाद (109 खदान) तथा इसके बाद पश्चिमी सिंहभूम ( 78 खदान) हैं।
झारखण्ड में धात्विक खनिज
(A) लौह धात्विक खनिज
1. लौह अयस्क
> सिंहभूम क्षेत्र लौह अयस्क की प्राप्ति का प्रमुख केन्द्र है जिसका विस्तार उड़ीसा के मयूरभंज एवं क्योंझर तक है। 
> यह विश्व का सर्वाधिक लौह भंडार वाला क्षेत्र है।
> देश के कुल लौह अयस्क भंडार का लगभग 26% झारखण्ड राज्य में निक्षेपित है।
> झारखण्ड में सर्वाधिक हेमाटाइट लौह अयस्क वाला जिला पश्चिमी सिंहभूम है।
> देश में हेमेटाइट लौह अयस्क के भंडार की दृष्टि से झारखण्ड का दूसरा स्थान है।
> यहाँ नोवामुण्डी की खान एशिया में लौह अयस्क की सबसे बड़ी खान है।
> पश्चिमी सिंहभूम का चिरिया * नामक स्थान भी लौह अयस्क के भंडार की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। लौह अयस्क भंडार की दृष्टि से यह भारत का सबसे बड़ा निक्षेप है। 
> यहाँ से हेमेटाइट वर्ग का लौह अयस्क उत्पादित किया जाता है । जिसमें 60% से 68% तक लोहे का अंश होता है।
> झारखण्ड में उपलब्ध कुल लौह अयस्क का 99% हेमेटाइट वर्ग का लौह अयस्क
> राज्य में मैग्नेटाइट लौह अयस्क के भंडार पूर्वी सिंहभूम, पलामू, गुमला, हजारीबाग तथा लातेहार जिले में हैं। 
2. क्रोमाइट
> झारखण्ड में क्रीमाइट का संकेन्द्रण मुख्यतः सिंहभूम क्षेत्र के जोजोहातु में है।
> राज्य में लगभग 7,36,000 टन क्रोमाइट का भंडार मौजूद है।
> इसका उपयोग स्टेनलेस स्टील बनाने के साथ-साथ विभिन्न रासायनिक उद्योगों में भी किया जाता है।
3. मैंगनीज
> झारखण्ड में मैंगनीज अयस्क का संकेन्द्रण मुख्यतः सिंहभूम क्षेत्र में है। 
> राज्य में लगभग 13.7 मिलियन टन मैंगनीज का भंडार उपलब्ध है।
> मैंगनीज का प्रयोग इस्पात बनाने, सुखी बैटरी व रसायन उद्योग में होता है
> यह धारवाड़ चट्टानों से प्राप्त होता है।
4. जस्ता
> यह संथाल परगना, हजारीबाग, पलामू, राँची एवं सिंहभूम जिले में पाया जाता है। 
5. टिन
> यह आग्नेय चट्टानों में उपलब्ध कैसिटराइट नामक कच्चे धातु से प्राप्त होता है।
> झारखण्ड के हजारीबाग, राँची, सिंहभूम, संथाल परगना तथा पलामू में यह पाया जाता है।
6. सोना
> राज्य के सिंहभूम क्षेत्र की चट्टानों में सोना अल्प मात्रा में पाया जाता है।
> झारखण्ड में इसका उत्पादन मुख्यतः हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड द्वारा किया जाता है।
> पूर्वी सिंहभूम के कुंदेर-कोचा नामक स्थान पर मनमोहन मिनरल इंडस्ट्रीज प्रा. लिमिटेड नामक कंपनी द्वारा भी सोने का उत्पादन किया जा रहा है।
> इंडियन मिनरल इयरबुक (2018-19) के अनुसार कर्नाटक के बाद देश में सोने का सर्वाधिक उत्पादन झारखण्ड राज्य में होता है।
> झारखण्ड की नदियों (स्वर्णरेखा व सोन नदी) के रेत में भी सोने का अंश पाया जाता है, लेकिन रेत से इसके उत्पादन की लागत अत्यधिक होने के कारण इसका उत्पादन नहीं किया जाता है।
(B) अलौह धात्विक खनिज
1. तांबा
> तांबा के उत्पादन की दृष्टि से झारखण्ड भारत का अग्रणी राज्य है।
> देश के कुल तांबा भंडार का 18.5% झारखण्ड राज्य में निक्षेपित है।
> झारखण्ड में पूर्वी सिंहभूम के मोसाबनी, धोबनी, सुरदा, केन्दडीह, राखा, छापरी - सिद्धेश्वर एवं घाटशिला  तांबा उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र हैं।
> मोसाबनी तांबा खदान की शुरूआत इंडियन कॉपर कॉरपोरेशन लिमिटेड (ब्रिटिश कंपनी) द्वारा 1928 में की गयी थी।
> वर्तमान समय में सुरदा खदान का संचालन भारत संसाधन लिमिटेड (पर्थ, ऑस्ट्रेलिया की कंपनी) द्वारा किया जाता है। 
> राज्य के पूर्वी सिंहभूम जिले में घाटशिला नामक स्थान पर हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड द्वारा तांबा अयस्क का उत्पादन किया जाता है जबकि इसे गलाने का कार्य इंडियन कॉपर कॉम्पलेक्स द्वारा किया जाता है।
> इसके अतिरिक्त राज्य के हजारीबाग जिले में भी तांबा की उपलब्धता के प्रमाण मिले हैं।
> तांबा का उपयोग बिजली के उपकरणों, धातु मिश्रण आदि में किया जाता है।
2. बॉक्साइट
> झारखण्ड में उच्च कोटि का बॉक्साइट पाया जाता है जिसमें 52% से 55% तक एलुमिनियम होता है। 
> यह राज्य के लोहरदगा, गुमला, लातेहार, गोड्डा तथा साहेबगंज जिले में पाया जाता है।
> बॉक्साइट से एलुमिनियम निकाला जाता है।
> झारखण्ड के लोहरदगा, गुमला एवं लातेहार जिले में हिण्डालको इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा बॉक्साइट का खनन किया जाता है।
> झारखण्ड के मुरी नामक स्थान पर बॉक्साइट को गलाने का संयंत्र है। 
3. टंगस्टन
> इसका उपयोग विजली के उपकरण बनाने तथा लौह धातु के निर्माण में किया जाता है।
> टंगस्टन का उत्पादन कालामाटी (पूर्वी सिंहभूम) में किया जाता है। इसके अलावा यह हजारीबाग जिले में भी पाया जाता है।
झारखण्ड में अधात्विक खनिज
1. अभ्रक (Mica)
> झारखण्ड राज्य में प्रचुर मात्रा में अभ्रक की उपलब्धता है।
> कोडरमा  जिला का झूमरी तिलैया अभ्रक का प्रमुख क्षेत्र है। इसके अतिरिक्त राज्य के गिरिडीह व हजारीबाग में भी इसका उत्पादन होता है।
> कोडरमा को 'भारत की अभ्रक राजधानी' कहा जाता है। 
> झारखण्ड में उच्च कोटि का सफेद अभ्रक पाया जाता है जिसे 'रूबी अभ्रक' के कारण इसकी वैश्विक स्तर पर अधिक मांग है। 
> झारखण्ड में उत्पादित कुल अभ्रक का 90% भाग निर्यात कर दिया जाता है।
> अभ्रक का उपयोग बिजली के उपकरण, औषधि, सजावट उपकरण, अग्निरोधक सामग्री आदि के निर्माण में किया जाता है।
2. कायनाइट
> झारखण्ड में कायनाइट का सबसे बड़ा भण्डार पूर्वी सिंहभूम के लिप्साबुरू क्षेत्र में है। इसके अतिरिक्त पश्चिमी सिंहभूम व सरायकेला-खरसावां जिले में भी कायनाइट की उपलब्धता है।
> सिंहभूम के राजखरसावां (सरायकेला-खरसावाँ) के निकट इसका उत्पादन भारतीय तांबा निगम द्वारा किया जाता है।
> यह ताप सहन करने वाला खनिज है। इसका उपयोग ताप निरोधक ईट बनाने के साथ - साथ चीनी मिट्टी के बर्तनों के निर्माण में भी होता है। 
3. ग्रेफाइट
> यह पलामू में सर्वाधिक पाया जाता है। इसके अतिरिक्त लातेहार व गढ़वा में भी ग्रेफाइट पाया जाता है। 
> यह कार्बन का एक रूप है जिसे काला सीसा भी कहा जाता है।
> इसका उपयोग उच्च तापसह्य उद्योगों (Refractory Industry ) में किया जाता है।
4. चूना पत्थर
> यह हजारीबाग, राँची, सिंहभूम, पलामू, बोकारो, धनबाद, गढ़वा, गिरिडीह, गोड्डा, लातेहार, पूर्वी सिंहभूम व पश्चिमी सिंहभूम में पाया जाता है।
> इसका उपयोग सीमेंट बनाने के साथ-साथ लौह-इस्पात उद्योग में भी किया जाता है।
5. डोलोमाइट
> पलामू जिला के डाल्टनगंज (मेदिनीनगर) व गढ़वा में डोलोमाइट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
> इसका उपयोग कागज, सीसा, लौह इस्पात, सीमेंट आदि उद्योगों में होता है।
6. एस्बेस्टस
> यह एक रेशेदार खनिज है, जो धारवाड़ क्रम की चट्टानों में पाया जाता है।
> यह पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम व सरायकेला-खरसावां जिले में पाया जाता है ।
> यह छत बनाने के काम में प्रयुक्त होता है।
7. बैंटोनाइट
> यह एक एलुमीनियम सिलिकेट मिट्टी है, जिसका निर्माण ज्वालामुखी के राख से होता है। 
> इसे आम भाषा में मुल्तानी मिट्टी भी कहा जाता है। 
> इसका प्रयोग निर्माण तथा अभियांत्रिकी में किया जाता है।
> यह राज्य के साहेबगंज तथा पाकुड़ जिले में पाया जाता है।
8. ग्रेनाइट
> राँची के तुपुदाना के पास ग्रे-ग्रेनाइट की उपलब्धता है परंतु अभी तक इसका पर्याप्त खनन नहीं हो पाया है। 
> इसका प्रयोग भवन निर्माण के क्षेत्र में किया जाता है।
> झारखण्ड में ग्रेनाइट के उपलब्ध प्रकार - टाइगर - स्कीन, मयूराक्षी - ब्लू, सावन - रोज, इंग्लिश - टीक, ब्लैक ग्रेनाइट (ब्लैक चीता, ब्लैक जेब्रा ) ।
9. सोपस्टोन व क्वार्ट्ज
> यह झारखण्ड के संपूर्ण छोटानागपुर क्षेत्र के साथ-साथ कुछ अन्य जिलों में भी उपलब्ध है। 
झारखण्ड में ऊर्जा खनिज
1. कोयला
> झारखण्ड भारत में सर्वाधिक कोयला उत्पादक राज्य है। 
> झारखण्ड सरकार के विभागीय आँकड़ों के अनुसार देश का लगभग 27.37% कोयला झारखण्ड राज्य में पाया जाता है।
> इंडियन मिनरल इयरबुक (2019-20) के अनुसार झारखण्ड राज्य में देश के कुल कोयला उत्पादन का 18.5% उत्पादित किया गया है।
> इस रिपोर्ट के अनुसार कोयला के भंडार की दृष्टि से झारखण्ड का देश में प्रथम तथा उत्पादन की दृष्टि से छत्तीसगढ़ (22.2%) व उड़ीसा (19.8%) के बाद तीसरा स्थान है।
> इस रिपोर्ट के अनुसार झारखण्ड राज्य में कुल 132 कोयला खदान हैं जो देश में सर्वाधिक है। पूरे देश में कुल 476 कोयला खदान हैं।
> राज्य के कुल कोयला उत्पादन का लगभग 95% उत्पादन दामोदर घाटी कोयला क्षेत्र में होता है। 
> दामोदर घाटी कोयला क्षेत्र कोकिंग कोल का शत प्रतिशत उत्पादन करता है। विदित है कि देश के कोकिंग कोल का उत्पादन करने वाला झारखण्ड एकमात्र राज्य है।
> दामोदर घाटी क्षेत्र में कोयला की कुछ प्रमुख खदानें पिपरवार, सराधु तथा मगध, अशोक, संघमित्रा, अम्रपाली तथा चंद्रगुप्त की अवस्थिति बड़कागाँव (हजारीबाग) क्षेत्र में है। ये सभी क्षेत्र उत्तरी कर्णपुरा कोलफिल्ड एरिया के अंतर्गत आते हैं। 
> झारखण्ड में सर्वप्रथम कोयला खनन का काम दामोदर घाटी निगम क्षेत्र के अंतर्गत झरिया में आरंभ हुआ। 
> झरिया (धनबाद) में कोयला का प्रचुर भंडार है तथा यहाँ से कोयला का सर्वाधिक उत्पादन होता है। 
> झरिया पूरे झारखण्ड के कोयला उत्पादन का 60% कोयला उत्पादन करता है।
> झरिया क्षेत्र भारत किंग कोल लिमिटेड के अंतर्गत आता है।
> राउरकेला के इस्पात कारखाने को बोकारो से कोयले की आपूर्ति की जाती है।
> झारखण्ड में बिटुमिनस एवं एंथ्रेसाइट दोनों किस्मों का कोयला पाया जाता है। 
> बिटुमिनस कोयले में 78% से 86% तक कार्बन का अंश होता है जबकि एंथ्रेसाइट कोयले में 94% से 98% तक कार्बन का अंश होता है।
> झारखण्ड को खनिजों से प्राप्त कुल राजस्व का 75% हिस्सा केवल कोयले से प्राप्त होता है। 
> उत्पादन की दृष्टि से झारखण्ड का सबसे बड़ा कोयला की खान झरिया तथा क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा कोयले की खान कर्णपुरा है।
> झारखण्ड में रूस की सहायता से संचालित कोयला परियोजना: – 
» झरिया से कुमारी ओ. सी. पी कोयला क्षेत्र तक का विकास
» झरिया से सीतानाला कोयला क्षेत्र तक का विकास
> झारखण्ड में विश्व बैंक की सहायता से संचालित कोयला परियोजना :
» झरिया कोकिंग कोयला परियोजना
» रजरप्पा परियोजना
» राजमहल परियोजना
» दामोदर परियोजना
» कतरास परियोजना
> झारखण्ड में कोयले के तीन प्रकार (कोकिंग, अर्द्ध कोकिंग तथा गैर-कोकिंग) पाया जाता है। 
> कोकिंग तथा अर्द्ध कोकिंग कोयले का प्रयोग उद्योगों में मुख्यतः धौंक भट्टी (Blast Furance ) में किया जाता है। जबकि गैर-कोकिंग कोयले का प्रयोग स्पन्ज लोहा, ताप शक्ति, रेलवे, सीमेंट, खाद, ईट भट्टी व घरेलू ईंधन आदि में किया जाता है।
> सेंट्रल कोलफिल्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) राज्य के बोकारो, गिरिडीह, रामगढ़, उत्तरी कर्णपुरा तथा दक्षिणी कर्णपुरा में कोयला खदानों का संचालन करता है।
> सीसीएल राज्य में बोकारो के कथरा व स्वांग तथा रामगढ़ के रजरप्पा व केदला में कोल वाशरी का भी संचालन करता है।
2. प्राइम कोकिंग कोल
> झारखण्ड राज्य देश में प्राइम कोकिंग कोल का एकमात्र उत्पादक है।
> झारखण्ड में प्राइम कोकिंग कोल का भंडार लगभग 5313 मिलियन टन है जो देश के कुल कोकिंग कोल का लगभग 100% है।
> इसके अलावा देश के कुल मध्यम कोकिंग कोल का 90%, सेमी कोकिंग कोल का 44% एवं गैर-कोकिंग कोल का 18.4% झारखण्ड राज्य में ही निक्षेपित है।
3. यूरेनियम
> यह एक आण्विक खनिज है।
> झारखण्ड के जादूगोड़ा धालभूमगढ़, बागजत, केरूआ डुमरी, नरवापहाड़ आदि क्षेत्रों में यह खनिज पाया जाता है।
> पूर्वी सिंहभूम के जादूगोड़ा में यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड (1967 में निगमित) द्वारा यूरेनियम की खुदाई की जा रही है।
> जादूगोड़ा के पश्चिम में स्थित तुरामडीह में भी यूरेनियम का खनन किया जाता है। 
> भारत में यूरेनियम का सर्वाधिक उत्पादन (लगभग शत-प्रतिशत) झारखण्ड राज्य में ही किया जाता है।
4. थोरियम
> यह एक आण्विक खनिज है।
> झारखण्ड के राँची पठार और धनबाद में इसका विस्तार है।
5. इल्मेनाइट
> यह एक आण्विक खनिज है।
> यह राँची में पाया जाता है।
> देश के कुल इल्मेनाइट का 0.12% झारखण्ड राज्य में उपलब्ध है। 
> इसका प्रयोग अंतरिक्ष यान तथा टाइटेनियम बनाने में होता है।
6. बोरिलियम
> यह बेरिल नामक खनिज प्रस्तर से प्राप्त होता है।
>>झारखण्ड के कोडरमा तथा गिरिडीह जिले में बोरिलियम पाया जाता है।
7. जिरकन
> इसकी प्राप्ति झारखण्ड में राँची तथा हजारीबाग जिले से होती है।
> झारखण्ड राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड
> राज्य सरकार द्वारा खनिज संसाधनों के विकास एवं उनके समुचित उपयोग के उद्देश्य से झारखण्ड राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड (JSMDC) का गठन किया गया है।
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