अनुसूचित जनजातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की तरह राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग भी एक संवैधानिक निकाय है। इसका गठन संविधान के अनुच्छेद 338-क के द्वारा किया गया है।

अनुसूचित जनजातियों के लिए राष्ट्रीय आयोग
अनुसूचित जनजातियों के लिए पृथक् आयोग
आयोग के कार्य
- अनुसूचित जनजातियों के लिए इस संविधान या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि या सरकार के किसी आदेश के अधीन उपबंधित रक्षोपायों से संबंधित सभी विषयों का अन्वेषण करे और उन पर निगरानी रखे तथा ऐसे रक्षोपायों के कार्यकरण का मूल्यांकन करे;
- अनुसूचित जनजातियों को उनके अधिकारों और रक्षोपायों से वंचित करने के सम्बन्ध में विनिर्दिष्ट शिकायतों की जांच करे:
- अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक आर्थिक विकास की योजना प्रक्रिया में भाग ले और उन पर सलाह दे तथा संघ और किसी राज्य के अधीन उनके विकास की प्रगति का मूल्यांकन करे;
- उन रक्षोपायों के कार्यकरण के बारे में प्रतिवर्ष और ऐसे अन्य समयों पर जो आयोग ठीक समझे, राष्ट्रपति को रिपोर्ट प्रस्तुत करे;
- ऐसी रिपोर्टों में उन उपायों के बारे में, जो उन रक्षोपायों के प्रभावपूर्ण कार्यान्वयन के लिए संघ या किसी राज्य द्वारा किए जाने चाहिए तथा अनुसूचित जनजातियों के संरक्षण, कल्याण और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए अन्य उपायों के बारे में सिफारिश करे, और;
- अनुसूचित जनजातियों के संरक्षण, कल्याण और विकास तथा उन्नयन के संबंध में ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करे जो राष्ट्रपति, संसद, द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए, नियम द्वारा विनिर्दिष्ट करे।
आयोग के अन्य कार्य
- वन क्षेत्र में रह रही अनुसूचित जनजातियों को लघु वनोपज पर स्वामित्व का अधिकार देने संबंधी उपाय |
- कानून के अनुसार जनजातीय समुदायों के खनिज तथा जल संसाधनों आदि पर अधिकार को सुरक्षित रखने संबंधी उपाय।
- जनजातियों के विकास तथा उनके लिए अधिक वहनीय आजीविका रणनीतियों पर काम करने संबंधी उपाय।
- विकास परियोजनाओं द्वारा विस्थापित जनजातीय समूहों के लिए सहायता एवं पुनर्वास उपायों की प्रभावकारिता बढ़ाने संबंधी उपाय |
- जनजातीय लोगों का भूमि से बिलगाव रोकने के उपाय तथा उन लोगों का प्रभावी पुनर्वासन करना जो पहले ही भूमि से विलग हो चुके हैं।
- जनजातीय समुदायों की वन सुरक्षा तथा सामाजिक वानिकी में अधिकतम सहयोग एवं संलग्नता प्राप्त करने संबंधी उपाय।
- पेसा अधिनियम, 1996 का पूर्ण कार्यान्वयन सुनिश्चित करने संबंधी उपाय |
- जनजातियों द्वारा झूम खेती के प्रचलन को कम करने तथा अंततः समाप्त करने संबंधी उपाय, जिसके कारण उनके लगातार अशक्तीकरण के साथ भूमि तथा पर्यावरण का अपरदन होता है।
आयोग का प्रतिवेदन
आयोग की शक्तियां
- भारत के किसी भी भाग से किसी व्यक्ति को समन करना और हाजिर कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना;
- किसी दस्तावेज को प्रकट और पेश करने की अपेक्षा करना;
- शपथ-पत्रों पर साक्ष्य ग्रहण करना;
- किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रति की अध्यपेक्षा करना;
- साक्षियों और दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना;
- कोई अन्य विषय, जो राष्ट्रपति, नियम द्वारा अवधारित करे।
- Telegram ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here
- Facebook पर फॉलो करे – Click Here
- Facebook ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here
- Google News ज्वाइन करे – Click Here