राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग
मंडल मुकदमें के निर्णय (1992) में, सर्वोच्च न्यायालय ने केन्द्र सरकार को पिछड़े वर्गों की सूची में शामिल होने योग्य (underinclusion), सूची में शामिल नहीं होने योग्य होने के बावजूद शामिल, तथा सूची से बाहर, असामिवष्ट होने संबंधी नागरिकों की शिकायतों की जांच के लिए एक स्थाई वैधानिक निकाय की स्थापना के लिए निदेशित किया। उसी अनुसार राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) की स्थापना 1993 में की गई।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग
आयोग की स्थापना
आयोग के कार्य
- सामाजिक-शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की संवैधानिक एवं वैधानिक सुरक्षा से सम्बन्धित सभी मामलों के अनुसंधान एवं अनुश्रवण तथा उनके कार्य संचालन का मूल्यांकन;
- सामाजिक-शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के अधिकारों की वंचना तथा सुरक्षा से सम्बन्धित शिकायतों की जांच और अनुसंधान करना;
- केन्द्र अथवा किसी राज्य में सामाजिक-शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के सामाजिक-आर्थिक विकास में भागीदारी तथा इसके लिए सलाह देना, साथ ही उनके विकास सम्बन्धी प्रगति का मूल्यांकन करना;
- इन सुरक्षा उपायों पर एक प्रतिवेदन भारत के राष्ट्रपति को प्रत्येक वर्ष, अथवा जब भी वह उचित समझे, सौंपना;
- सामाजिक - शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की सुरक्षा, कल्याण, तथा सामाजिक-आर्थिक विकास के उपायों को प्रभावी रूप से लागू करने के विषय में केन्द्र अथवा राज्य को अनुशंसाएं देना;
- सामाजिक - शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की सुरक्षा, कल्याण तथा विकास एवं उन्नति के लिए अन्य कार्य संपादित करना जिनके लिए राष्ट्रपति निर्दिष्ट करें।
आयोग का प्रतिवेदन
आयोग की शक्तियां
- भारत के किसी भूभाग से किसी भी व्यक्ति को आयोग के समक्ष बुलाने एवं उसकी उपस्थिति सुनिश्चित कराने एवं शपथ कराकर उससे पूछताछ करना;
- किसी भी दस्तावेज की खोज और प्रस्तुतीकरण की मांग करना;
- शपथ-पत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना;
- किसी भी न्यायालय या कार्यालय से किसी भी सार्वजनिक अभिलेख की मांग करना;
- गवाहों और दस्तावेजों के परीक्षण के लिए सम्मन जारी करना, तथा
- कोई अन्य मामला, जिसका विनिश्चय राष्ट्रपति करे।
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