केंद्रीय सतर्कता आयोग
केंद्रीय सतर्कता आयोग केंद्र सरकार में भ्रष्टाचार रोकने के लिए एक प्रमुख संस्था है। सन् 1964 में केंद्र सरकार द्वारा पारित एक प्रस्ताव के अंतर्गत इसका गठन हुआ था। भ्रष्टाचार को रोकने पर बनाई गई संथानम समिति (1962-64) की सिफारिश पर इसका गठन हुआ था।'

केंद्रीय सतर्कता आयोग
स्थापना
संरचना
- यदि वह दिवालिया घोषित हो, अथवा
- यदि वह नैतिक चरित्रहीनता के आधार पर किसी अपराध में दोषी (केंद्र सरकार की निगाह में) पाया गया हो, अथवा
- यदि वह अपने कार्यकाल में अपने कार्यक्षेत्र से बाहर से किसी प्रकार के लाभ के पद को ग्रहण करता है, अथवा
- यदि वह मानसिक अथवा शारीरिक कारणों से कार्य करने में असमर्थ हो ( राष्ट्रपति अनुसार) अथवा
- यदि वह कोई आर्थिक या इस प्रकार के अन्य लाभ प्राप्त करता हो, जिससे कि आयोग के कार्य में वह पूर्वाग्रह युक्त हो ।
मगठन
- सरकारी संगठनों के निर्माण कार्यों का सतर्कता दृष्टिकोण से तकनीकी अंकेक्षण
- निर्माण कार्यों से संबंधित शिकायतों के विशिष्ट मामलों का अनुसंधान
- सी.बी.आई. को उसके ऐसे अनुसंधानों में मदद करना जो तकनीकी मामलों से संबंधित हैं तथा दिल्ली स्थित संपत्तियों के मूल्यांकन से संबंधित हैं, तथा
- सी.बी.सी तथा मुख्य सतर्कता अधिकारियों को तकनीकी मामलों से जुड़े सतर्कता विषयों पर सलाह/सहायता प्रदान करना।
कार्य
- केंद्र सरकार के निर्देश पर ऐसे किसी विषय की जांच करना जिसमें केंद्र सरकार या इसके प्राधिकरण के किसी कर्मचारी द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत कोई अपराध किया गया हो।
- निम्नलिखित श्रेणियों से संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध किसी भी शिकायत की जांच करना, जिसमें उस भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत किसी अपराध का आरोप हो:
- भारत सरकार के ग्रुप 'ए' के कर्मचारी एवं अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी; तथा
- केन्द्र सरकार के प्राधिकरणों के निर्दिष्ट स्तर के अधिकारी।
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत अपराधों की जांच से संबंधित दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (CBI) के कामकाज की देखरेख करना।
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत अपराधों की जांच से संबंधित दिल्ला विशेष पुलिस स्थापन (CBI) को निर्देश देना।
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के अंतर्गत किए गए अपराध की विशेष दिल्ली पुलिस बल द्वारा की गई जांच की समीक्षा करना।
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के अंतर्गत मुकदमा चलाने हेतु संबंधित प्राधिकरणों को दिए गए लंबित प्रार्थना पत्रों की समीक्षा करना।
- केंद्र सरकार और इसके प्राधिकरणों को ऐसे किसी मामले में सलाह देना।
- केंद्र सरकार के मंत्रालयों व प्राधिकरणों के सतर्कता प्रशासन पर नजर रखना।
- लोकहित उद्घाटन तथा सूचक की सुरक्षा से संबंधित संकल्प के अन्तर्गत प्राप्त शिकायतों की जांच करना तथा आयुक्त कार्रवाई की अनुशंसा करना।
- केन्द्र सरकार केन्द्रीय सेवाओं तथा अखिल भारतीय सेवाओं से संबंधित सतर्कता एवं अनुशासनिक मामलों में नियम विनियम बनाने के लिए सी. वी.सी से सलाह लेगी।
- केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (CVC) इसके अध्यक्ष होते हैं और दो निगरानी आयुक्त, साथ में गृह मंत्रालय के सचिवगण, कार्मिक तथा प्रशिक्षण विभाग के सचिवगण तथा वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के सचिवगण चयन समितियों के सदस्य होते हैं। इनकी अनुशंसा के आधार पर केंद्र सरकार प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक को नियुक्त करती है। फिर समिति इन निदेशक महोदय की राय से प्रवर्तन निदेशालय के उप-निदेशक से ऊपर के अधिकारियों की नियुक्ति करती है।
- केंद्रीय सतर्कता आयोग को मनी लॉन्ड्रिग प्रिवेंशन अधिनियम, 2002 (Prevention of Money Laundering Act, 2002), के तहत संदेहास्पद कार्यों या लेनदेन संबंधी सूचना को प्राप्त करने का विशेषाधिकार दिया गया है। 2013 के लोकपाल तथा लोकायुक्त एक्ट ने केन्द्रीय निगरानी आयोग एक्ट, 2003 में तथा दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 में संशोधन कर दिया तथा केंद्रीय सतर्कता आयोग के कार्यों में निम्नांकित बदलाव किये :
- केंद्रीय सतर्कता ब्यूरो में अभियोजन के निदेशक मंडल के तहत अभियोजन निदेशक को केंद्र सरकार केंद्रीय सतर्कता आयोग की अनुशंसा के आधार पर नियुक्त करेगी।
- केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (CVC) इसके अध्यक्ष होते है। दो सतर्कता आयुक्त साथ में गृह मंत्रालय के सचिवगण, कार्मिक तथा प्रशिक्षण विभाग के सचिवगण, चयन समितियों के सदस्य होते हैं। इन्हीं की अनुशंसा पर केंद्र सरकार केंद्रीय निगरानी ब्यूरो में पुलिस अधीक्षकों के पद पर अधिकारी नियुक्त करती है। केवल सीबीआई के निदेशक का चयन अलग तरीके से होता है।
- आयोग लोकपाल द्वारा समूह A, B, C तथा D के अधिकारियों के विरुद्ध भेजी गई शिकायतों की प्राथमिक जांच कराने की शक्ति रखता है, जिसके लिए आयोग जांच निदेशालय स्थापित करता है। इस प्रकार के मामलों की प्राथमिक जांच- व-पड़ताल की रिपोर्ट (समूह A और B के संबंध में) लोकपाल को भेजी जाती है। इसके अलावा, मैंडेट के अनुसार आयोग लोकपाल द्वारा भेजे गए मामलों की आगे की जांच करेगा। ये जांच ग्रुप C तथा D अधिकारियों के बारे में होंगी। जांच में दोषी पाए गए अधिकारों पर आगे की कार्रवाई के बारे में आयोग फैसला करेगा।
कार्यक्षेत्र
- अखिल भारतीय सेवा के वे सदस्य, जो संघ सरकार के मामलों से संबंधित हैं तथा केंद्र सरकार के ग्रुप ए के अधिकारी ।
- सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के स्केल पांच से ऊपर के अधिकारी।
- रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, नाबार्ड एवं सिडबी के ग्रेड डी और इससे ऊपर के अधिकारी।
- सरकारी क्षेत्र उपक्रमों के बोर्डों के मुख्य कार्यकारी और कार्यकारी अधिकारी तथा अनुसूची क और ख और ई-8 और ऊपर के अन्य अधिकारी।
- सरकारी क्षेत्र उपक्रमों के बोर्डों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और कार्यकारी तथा अनुसूची क और ख और ई-7 और ऊपर के अन्य अधिकारी।
- साधारण बीमा कंपनियों के प्रबंधक एवं उनसे ऊपर के स्तर के अधिकारी ।
- जीवन बीमा निगम में वरिष्ठ डिविजनल प्रबंधक एवं उससे ऊपर के स्तर के अधिकारी।
- वे अधिकारी जो 8700/- प्रतिमाह का वेतन (संशोधन-पूर्व) पानेवाले हैं तथा केंद्र सरकार की महंगाई भत्ता दर से ऊपर के हैं, जो दर समय-समय पर संशोधित की जाती है, सोसायटियों तथा स्थानीय प्राधिकरणों में जो केंद्र सरकार के अधीन हों या उनसे नियंत्रित है।
कार्यप्रणाली
मंत्रालयों मे सतर्कता इकाइयां
- अपनी संस्था के कर्मचारियों द्वारा भ्रष्ट आचरण से संबंधित सूचना एकत्रित करना ।
- प्रतिवेदित सत्यापन योग्य आरोपों का अनुसंधान करना।
- अनुसंधान प्रतिवेदनों को संबंधित अनुशासन प्राधिकारी द्वारा विचारार्थ भेजने के पहले प्रसंस्करित करना ।
- जब कभी आवश्यक हो केन्द्रीय सतर्कता आयोग को सलाह के लिए मामले संदर्भित करना।
व्हिसल ब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट (2014)
- इस एक्ट ने व्हिसल ब्लोअर (whistle blowers) (जो भ्रष्टाचार की जानकारी देते हैं) की पहचान को गोपनीय रखने की एक विधि प्रस्तुत की है। जो व्यक्ति सरकार में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करते हैं या सरकारी सेवकों द्वारा अनियमितता का खुलासा करते हैं वे अब प्रताड़ित होने के भय से पूर्णत: मुक्त हैं।
- एक्ट ने एक ऐसी व्यवस्था स्थापित की है कि लोग भ्रष्टाचार की जानकारी दे सकें या सरकारी सेवको द्वारा विशेषाधिकारों का मनमाना दुरुपयोग होने पर यहां तक कि मंत्रियों द्वारा होने पर भी, उसको उजागर कर सकें।
- एक्ट के अनुसार एक व्यक्ति एक भ्रष्टाचार का जनहित में उजागर एक सक्षम प्राधिकरण के समक्ष कर सकता है। वह प्राधिकरण है-केंद्रीय निगरानी आयोग (CVC) अधिसूचना के द्वारा सरकार कोई निकाय गठित कर सकती है जो भ्रष्टाचार की शिकायतें दर्ज करें।
- एक्ट के अनुसार आयोग गलत या दुर्भावना से प्रेरित शिकायतें पाए जाने पर शिकायतकर्ता को दो साल की जेल का दंड दे सकता है। साथ ही, 30 हजार रुपये का जुमार्ना भी लगा सकता है।
- ऐक्ट कहता है कि हर भ्रष्टाचार उद्घाटन को विश्वसपूर्ण तरीके से करना चाहिए। जो व्यक्ति उद्घाटन करता है उसे निजी घोषणा करनी चाहिए कि वह आश्वस्त होकर ही घोषणा कर रहा है। उसके द्वारा दी गई सूचना प्रामाणिक तौर पर सही है।
- उद्घाटन लिखित रूप से या ई-मेल मेसेज द्वारा हो सकता है। पर वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप हो तथा उसमें पूरी बातें हो। साथ में पुष्टि हेतु कागजात या सामग्री भी होनी चाहिए।
- हालांकि यदि कोई उद्घाटन करने वाले के नामोल्लेख के बगैर हो यानी शिकायत कर्ता या सरकारी सेवक का नामोल्लेख न हो तो कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए या शिकायत कर्ता या सरकारी सेवक की पहचान प्राप्त न हो या सही न हो तो भी कोई कार्रवाई नहीं होगी।
- यह एक्ट सेना पर तथा प्रधानमंत्री की सुरक्षा में लगे विशेष सुरक्षा बल तथा पूर्व प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा में लगे बल पर लागू नहीं होता।
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