NCERT EXAMPLAR SOLUTION | CLASS 10TH | SCIENCE (विज्ञान) | The Human Eye and the Colourful World मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार
The Human Eye and the Colourful World मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार

NCERT EXAMPLAR SOLUTION | CLASS 10TH | SCIENCE (विज्ञान) | The Human Eye and the Colourful World मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार
ANSWERS
DISCUSSION
- निकट दृष्टि दोष को दूर करने के लिए अवतल दर्पण का उपयोग किया जाता है।
- अवतल दर्पण का Focus (f) →(ve) होगा तथा Power (P) → (ve) होगा।
- लेंस बनाने के लिए प्लास्टिक, कांच, पानी, का प्रयोग किया जाता है।
- उत्तल लेंस की क्षमता P = + ve में लिया जाता है।
- मानव नेत्र में प्रयुक्त लेंस उत्तल लेंस होता है।
- दूर-दृष्टि दोष या दूर-दर्शिता दृष्टि की अपवर्त्तन दोष है।
- नेत्रों में यह दोष उत्पन्न होने के कारण चक्षुलेंस (नेत्रलेंस) का अपर्याप्त समंजन के कारण प्रकाश की समान्तर किरण- पुंज आँख द्वारा अपवर्त्तन के बाद रेटिना पर न बनाकर उसके पीछे प्रतिबिंबित होना।
- चुकी हम जानते हैं-
- परंतु हमें 3rd रंग नीला करना है तो प्रिप्म को उल्टा करेंगे-
- अतः उत्तर (ii) होगा।
- बैंगनी वर्ण का विक्षेपण - सबसे अधिक होगा।
- लाल रंग का विक्षेपण - सबसे कम होगा।
- वर्ण विक्षेपण का किसी पारदर्शी पदार्थ में भिन्न-भिन्न रंगों के प्रकाश के भिन्न-भिन्न वेग होने के कारण होता है।
- सूर्य की सप्तरंगी किरणों में अद्भुत रोगनाशक शक्ति है, सुबह तथा शाम के समय सूर्य की किरण जिनमें औषधिय गुणों का अपार भंडार है, अनेक रोग उत्पादक कीटाणुओं का नाश करता है।
- टीबी के कीटाणु उबलते पानी से जल्दी नहीं मरते बल्कि वे सूर्य के तेज प्रकाश से शीघ्र नष्ट हो जाते है।
- Vitamin D का संश्लेषण – सूर्य के प्रकाश से ही संभव होता है।
- सूर्य की पहली किरण का नाम अरनिमा है।
- इन्द्रधनुष एक प्राकृतिक घटना है जो आकाश में प्रेक्षक को संकेंद्रीय अर्द्धचापों के रूप में तथा सात रंगो की पट्रियों में दिखाई देता है।
- इंद्रधनुष बनने में पानी की छोटी-छोटी बूँदों परादर्शी प्रिज्म का कार्य करती है।
- यह दो प्रकार का होता है-
(i) प्राथमिक इंद्रधनुष – लाल ↑ (up)(ii) द्वितीयक इंद्रधनुष – बैंगनी 1 (up )यह कम चमकीला होता है।
- इंद्रधुनष का पहला रंग - लाल
- अंतिम रंग - बैंगनी होता है।
- यह अर्द्धवृत्ताकार रूप में दिखाई देता है।
- इसकी खोज 1660 ई० में न्यूटन ने किया। जिसमें सूर्य का प्रकाश और प्रिज्म का प्रयोग किया तथा प्रदर्शित किया की सूर्य किरण (सफेद प्रकाश ) - सात दृश्यमान रंगों से बना है।
- तारे स्वयं प्रकाशित उष्ण वाति की द्रव्यमात्रा से भरपूर विशाल, खगोलीय पिंड है। इनका निजी गुरुत्वाकर्षण इनके द्रव्य को संघटित रखता है।
- पृथ्वी के समीप का तारा सूर्य है।
- क्रांतिमान मापन का अर्थ तारे के प्रकाश की तीव्रता का मापन से है।
- तारों में उर्जा का स्त्रोत-नाभिकीय संलयन है, जो Hydrogen का Helium में परिवर्त्तन होता रहता है।
- सूर्य बैगनी रंग की तुलना में नीली प्रकाश तरंगों की उच्च सांद्रता का उत्सर्जन करता है, जिसके कारण आकाश नीला दिखता है।
- हमारी आँखों की संवेदनशीलता बैंगनी के बजाए नीला रंग के प्रति संवेदनशीलता अधिक होने के कारण भी ऐसा होता है।
- वास्तव में आकाश का रंग काला है एवं अंतरिक्ष में यह काला ही दिखाई पड़ता है, क्योंकि अंतरिक्ष में प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं हो पाता।
- अंतरिक्ष में और पृथ्वी पर कृत्रिम रूप से विभिन्न स्रोतों द्वारा सफेद प्रकाश का उत्पादन किया जाता है।
Ex : सूर्य, तारे इत्यादि
- कृत्रिम रूप से सफेद रोशनी उत्पादक- सफेद L.E.D, फ्लोरोसेंट लाइट, बल्ब
- श्वेत प्रकाश का प्रिज्म से गुजरने पर सात रंगो में विभक्त होता जिसे वर्ण-विक्षेपण कहते हैं।
- श्वेत प्रकाश सात रंगों से मिलकर बना होता है - VIBGYOR
- काला रंग दिखने का अर्थ सभी रंगो का अवशोषण होना।
- ब्लैक हॉल में तीव्र गुरुत्वाकर्षण के कारण प्रकश परावर्तित होकर वापस नहीं आ पाता जिसके कारण काला प्रतित होता है।
- लाल रंग का विक्षेपण (क्षय) कम होने के कारण यह लंबी दूरी तय करता है तथा दूर से दिखाई दे जाता है। और खतरे का सूचना (अलर्ट) का जल्दी पता लगता है और अपनी सुरक्षा होता है।
- लाल रंग का तरंग दैर्ध्य लगभग - 625nm-700nm होता।
- लाल रंग का वेग अधिक होता है लेकिन ऊर्जा कम होता है।
- बैंगनी रंग का वेग कम होता है लेकिन ऊर्जा अधिक होता है।
- लाल रंग खतरे के रंग में उपयोग होता है क्योंकि लाल बत्ती कोहरे बारिश और वायु कणों के माध्यम में सबसे लम्बी दूरी तय करने में सक्षम है।
- रंगों का राजा सुनेरो के वास्तु शास्त्र के अनुसार लाल रंग सभी रंग की अपेक्षा अधिक बलशाली माना गया है।
- चूंकि सूर्य के सभी सात रंगों में लाल रंग का प्रकीर्णन कम होता है इसलिए लाल रंग सूर्योदय के थोड़ा पहले ही तथा सूर्यास्त के थोड़ा बाद तक दिखाई देता रहता है।
-
- इस प्रकार प्रकीर्णित तीव्रता कम तरंग दैर्ध्य के लिए अधिकतम होती है।
- प्रकिर्णन का नियम रेले ने दिया।
- तरंगदैर्ध्य – बैगनी - 400nm
जामुनी - 425nmनीला - 470nmहरा - 550nmपीला - 600nmनारंगी - 630nmलाल - 665nm - 700nm
- लाल, हरे, नारंगी और पीले लंबे तरंग दैर्ध्य वाले नीले रंग की तुलना में पानी हरा अधिक दृढ़ता से अवशोषित होते है जिनकी लंबाई कम होती है।
- समुद्र का पानी कहीं-कहीं ऊपरी भाग पर हरा दिखाई पड़ता है क्योंकि उसमें शैवाल की मात्रा अधिक हो जाती है।
- समुद्र की अधिक गहराई में केवल लाल (रंग) शैवाल पाई जाती है।
- पानी बहुत सरल अणुओं ऑक्सीजन और हाइड्रोजन से बना है, जो बहुत अधिक ऊर्जा को अवशोषित करने में असमर्थ है।
- पानी की दो क्वांटम अवस्था की ऊर्जाओं के बीच अंतर बहुत कम है, इसलिए पूरक रंग उत्पन्न नहीं होता है, अतः पानी का कोई रंग नहीं होता।
- नेत्रपटल - यह आँख का पारदर्शी सामने का हिस्सा है जो परितारिका, पुतली और पूर्वकाल कक्ष को कवर करता है।
- दूक तंत्रिका - ऑप्टिकल तंत्रिका आँख को मस्तिष्क से जोड़ता है तथा दृक तंत्रिका उन आवेशों को वहन करती है जो दृष्टिपटल द्वारा बनते हैं।
- प्रकाश किरणे बाहरी सतह के माध्यम से आँख में प्रवेश करती है, आँख के सामने पारदर्शी संरचना स्वच्छ मण्डल कहलाती है।
- जब पेशियाँ शिथिल होती है तो अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी बढ़ जाती है और दूर रखी वस्तुएँ स्पष्ट दिखती है।
- नेत्र लेंस की फोकस - दूरी कम हो जाने पर निकट दृष्टि दोष होता है। तथा नेत्र लेंस की फोकस दूरी बढ़ जाने से दूर दृष्टि दोष होता है।
- आँख की फोकल लंबाई लगभग 17mm होती है।
- जिन लोगों को दो मीटर या 6.6 फीट की दूर के बाद चिजें धुंधली दिखती है उन्हें मायोपिया का शिकार माना जाता है।
- निकट की वस्तु को देखने के लिए न्यूनतम वस्तु को 25cm की न्यूनतम दूरी पर रखना चाहिए।
- नेत्र दोष तीन प्रकार के होते हैं-
(i) निकट दृष्टि दोष(ii) दूर दृष्टि दोष(iii) जरा-दृष्टि दोष
- निकट दृष्टि दोष को → मायोपिया कहा जाता है।
- दूर दृष्टि दोष को हाइपर मेट्रोपिया कहा जाता है।
- निकट दृष्टि दोष में अवतल लेंस का उपयोग कर सही किया जा सकता है।
- दूर दृष्टि दोष में उत्तल लेंस का उपयोग कर फोकस सही किया जाता है।
- Vitamin - A की कमी से रतौंधी की शिकायत होती है।
- नेत्र लेंस आँख में पारदर्शी बीच में उभरी संरचना होती है।
- यह दृष्टि पटल पर वस्तुओं को केंद्रित करने के लिए आवश्यक बेहतर समायोजन प्रदान करता है।
- Telegram ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here
- Facebook पर फॉलो करे – Click Here
- Facebook ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here
- Google News ज्वाइन करे – Click Here