भारत में सामाजिक - धार्मिक सुधार आन्दोलन

भारत में सामाजिक - धार्मिक सुधार आन्दोलन

भारत में सामाजिक - धार्मिक सुधार आन्दोलन

> भारत में सुधार आन्दोलन के उदय के क्या कारण थे ? समीक्षा कीजिए.
उन्नीसवीं सदी में भारत में जो सुधार आन्दोलन चले उसके निम्नलिखित प्रमुख कारण थे -
1. भारत में अंग्रेजों के आने के बाद यहाँ के निवासियों का सम्पर्क पश्चिमी सभ्यता से प्रत्यक्ष रूप से हुआ, जिसके कारण यहाँ भी पाश्चात्य संस्कृति के तत्व प्रवेश कर गए. भारत में अंग्रेजी शिक्षा के प्रसार से मध्यम वर्ग के लोग यूरोप की उदारवादी विचारधारा से परिचित हुए और अब उनके विश्वास तर्कों में बदल गए, जिससे अनेक सुधारवादी आन्दोलन प्रारम्भ हुए.
2. भारत में अंग्रेजों के साथ-साथ ईसाई पादरियों का भी आगमन हुआ, जिन्होंने यहाँ ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार का कार्य प्रारम्भ किया. इसके साथ ही उन्होंने भारत में प्रचलित धर्मों की आलोचना करनी भी प्रारम्भ की. फलतः भारतीय धर्म-सुधारकों ने उनके विरोध में सुधार कार्य करना प्रारम्भ किया.
3. भारत में इस काल में अनेक धर्म-सुधारकों; जैसेदयानन्द सरस्वती, विवेकानन्द, राजा राममोहन राय आदि का प्रादुर्भाव हुआ, जिन्होंने भारत के प्राचीन विचारों की नए युग के सन्दर्भ में विवेचना कर उनके औचित्य को सिद्ध कर दिया. इससे लोगों में उत्साह एवं नवीन जागृति का संचार हुआ.
4. 1784 ई. में बंगाल में विलियम जोन्स ने एशियाटिक सोसायटी की स्थापना की, जिसमें भारत के प्राचीन ग्रन्थों पर काम कर उसे यूरोपीय विद्वानों द्वारा मान्यता दिलवाई. विलकिन्सन ने अभिलेखों को पढ़कर उसे यूरोपियों के समक्ष रखकर उन्हें भारतीय विचारों से अवगत कराया.
5. अंग्रेजों के आगमन से भारत में समाचार पत्रों का विकास हुआ, जिससे लोग एक-दूसरे के विचारों के सम्पर्क में आए. इसके साथ ही यातायात के साधन; जैसे – रेल, डाक, तार आदि के विकास में भी इससे अत्यधिक मदद मिली.
6. यह काल नवजागरण का काल था, जिसके कारण भारत के सामाजिक एवं धार्मिक जीवन पर प्रभाव पड़ा. इस जागरण से भारत की रूढ़ियों, परम्पराओं एवं अन्धविश्वासों पर गहरा प्रभाव पड़ा. ब्रह्म समाज, आर्य समाज, प्रार्थना समाज, रामकृष्ण मिशन, थियोसोफिकल सोसायटी आदि ने धर्म-सुधार एवं समाज-सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया जाति व्यवस्था, छुआछूत का विरोध प्रारम्भ हो गया. सती प्रथा, बाल-विवाह, बाल-हत्या, मूर्ति-पूजा तथा हिंसात्मक यज्ञों की कटु आलोचना होने लगी.
इन सभी कारणों ने मिलकर इस प्रकार के सुधार आन्दोलन का सूत्रपात किया.
> समाज सुधारक, धर्म-सुधारक तथा शिक्षाशास्त्री के रूप में राजा राममोहन राय का मूल्यांकन कीजिए? 
राजा राममोहन राय भारतीय पुनर्जागरण के अग्रदूत और धार्मिक सुधार आन्दोलन के प्रवर्तक थे. उनका जन्म 1774 ई. में बंगाल के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. इन्होंने 1805 ई. में ईस्ट इण्डिया कम्पनी में नौकरी कर ली. 1814 ई. में नौकरी छोड़ने के बाद इसी वर्ष इन्होंने आत्मीय सभा का गठन किया और 1828 ई. में ब्रह्म समाज की स्थापना की. 1831 ई. में ये इंगलैण्ड गए और वहीं 1833 ई. में इनका देहान्त हो गया.
राजा राममोहन राय बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे. उन्होंने जीवन के प्रत्येक पहलू को सूक्ष्म दृष्टि से देखा और वे समाज तथा धर्म रक के रूप में अत्यधिक प्रसिद्ध हुए. उनकी उपलब्धियों का मूल्यांकन निम्नलिखित है –
समाज-सुधारक – समाज सुधारक के रूप में राजाजी ने अनेक उल्लेखनीय कार्य किए. उन्होंने 1829 ई. में अपने प्रयासों से गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बैंटिक से मिलकर कानून बनवाकर सती प्रथा को गैर-कानूनी घोषित करवा दिया. इस प्रथा को मिटाने के कारण ही उन्हें 'भारतीय समाज-सुधार का अग्रदूत' माना जाता है. इसके अतिरिक्त उन्होंने जाति प्रथा, वर्ग-भेद, मूर्ति पूजा, पशुबलि आदि की भी निन्दा की तथा स्त्री तथा स्त्री शिक्षा एवं विधवा-विवाह का समर्थन किया.
धर्म-सुधारक— राजा राममोहन राय समाज-सुधारक के साथ-साथ धर्म-सुधारक भी थे. उन्होंने सभी धर्मों का अध्ययन किया और इसके बाद वह इस परिणाम पर पहुँचे कि, सभी धर्मों में अद्वैतवादी सिद्धान्तों का ही प्रचलन है. वे ईश्वर के एकत्व में विश्वास करते थे और मूर्ति-पूजा का विरोध करते थे. उन्होंने फारसी में 'एकेश्वरवाद के प्रति देन' नामक एक पुस्तक लिखी तथा एक ब्रह्म की उपासना पर जोर दिया.
शिक्षाशास्त्री – शिक्षा के क्षेत्र में भी राजाजी क्रान्तिकारी विचारों वाले व्यक्ति थे. प्राचीन भाषाओं के ज्ञाता होने के कारण वे इसके समर्थक होने के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा - प्रणाली तथा अंग्रेजी भाषा के समर्थक थे. जो लोग भारत में अंग्रेजी भाषा को शिक्षा का माध्यम बनाना चाहते थे, उन्हें उन्होंने अपना पूरा समर्थन दिया. उन्होंने कलकत्ता में एक हिन्दू कॉलेज की स्थापना में सहयोग दिया, जो अपने समय की सर्वाधिक आधुनिक संस्था थी.
इस प्रकार उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट होता है कि राजा राममोहन राय वास्तव में एक महान् सुधारक थे. इनके विषय में डॉ. नन्दलाल चटर्जी ने लिखा है कि वे "प्रतिक्रिया एवं प्रगति के बीच के बिन्दु" थे. राजाजी ने अपने समय के भारत के सभी पहलुओं पर अत्यधिक प्रभाव डाला.
> ब्रह्म समाज के प्रमुख सिद्धान्त
ब्रह्म-समाज के प्रमुख सिद्धान्त निम्नलिखित हैं –
1. ईश्वर एक है, वह सर्वशक्तिमान है, अजर और अमर है.
2. ईश्वर की सृष्टि में नस्ल, वर्ण, जाति आदि का कोई भेद-भाव नहीं है. ईश्वर की कृपा से मोक्ष सम्भव है. अतः सभी को ईश्वर की आराधना करनी चाहिए.
3. कर्म प्रधान है. मनुष्य कर्म के अनुसार ही फल पाता है.
4. बाल-विवाह, बहु-विवाह आदि प्रथाएँ गलत हैं और विधवा-विवाह उचित है.
5. मूर्ति पूजा एवं कर्मकाण्ड का त्याग कर देना चाहिए और परम ब्रह्म की उपासना करनी चाहिए.
राजा राममोहन राय के इस ब्रह्म समाज के सिद्धान्तों का प्रारम्भ में बंगाल में अत्यधिक विरोध हुआ, लेकिन लोगों में शिक्षा के प्रसार के कारण इन सिद्धान्तों की सत्यता का पता चला, जिससे अन्य लोग भी इस संगठन से जुड़ने लगे तथा कुरीतियों एवं अन्धविश्वासों का विरोध करने लगे.
> स्वामी दयानन्द और आर्य समाज
स्वामी दयानन्द का नाम भारत के समाज-सुधारकों में अग्रणी हैं. उन्हें ‘हिन्दू समाज का रक्षक' कहा जाता है. इन्होंने देशवासियों को स्वदेशी, स्वभाषा तथा स्वतन्त्रता का पाठ पढ़ाया. इस हेतु इन्होंने अपने प्रसिद्ध ग्रन्थ 'सत्यार्थ प्रकाश' की रचना हिन्दी भाषा में की दयानन्द ने जाति-भेद, छुआ-छूत, सती प्रथा, बहु-विवाह एवं हिंसायुक्त जीवन का घोर विरोध किया. उन्होंने 1875 ई. में बम्बई में आर्य समाज की स्थापना की तथा अपना प्रसिद्ध नारा 'वेदों की ओर लौटो' दिया.
> आर्य समाज के कार्य
आर्य समाज ने धार्मिक, सामाजिक, शिक्षा सम्बन्धी, राजनीतिक आदि अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किए.
आर्य समाज ने हिन्दू धर्म को एक नया स्वरूप प्रदान किया तथा इसने केवल वेदों को ही हिन्दू धर्म का आधारग्रन्थ माना. इन्होंने इस धर्म की उन समस्त बुराइयों को दूर करने का प्रयास किया, जिसके कारण इस धर्म का पतन हो रहा था. वह पुराणों द्वारा प्रतिपादित धर्म में विश्वास नहीं करते थे. मूर्ति-पूजा के कट्टर विरोधी एवं चरित्र एवं नैतिकता पर इनका अत्यधिक बल था.
आर्य समाज ने अस्पृश्यता, बाल-विवाह, जाति प्रथा का कड़ा विरोध किया. इसके लिए दयानन्द के नेतृत्व में 1908 ई. में दलित जातियों द्वारा एक आन्दोलन चलाया गया. आर्य समाज ने भारत में अनेक विधवा आश्रम तथा अनाथालयों की स्थापना की. इन्होंने 'शुद्धि आन्दोलन' के द्वारा अपना धर्म छोड़कर दूसरे धर्म को स्वीकार करने वाले लोगों को पुनः हिन्दू बनाया. इस प्रकार इस संस्था द्वारा हिन्दू धर्म को पतन के मार्ग से वापस लाया गया.
आर्य समाज ने शिक्षा में उल्लेखनीय योगदान किया है. इस संस्था के स्कूलों तथा कॉलेजों का आज पूरे देश में जाल फैला हुआ है. उस समय में लाला हंसराज ने लाहौर में 1886 ई. में डी. ए. वी. कॉलेज की स्थापना की. इसी प्रकार शिक्षा एवं अनुशासन के लिए हरिद्वार में स्थापित गुरुकुल काँगड़ी संस्थान अपने आप में अद्वितीय है.
इसके अतिरिक्त स्वामीजी ने देशवासियों के स्वाभिमान को जगाने के लिए यह नारा लगाया कि, भारत भारतीयों के परन्तु विदेशी लिए है, स्वदेशी शासन चाहे जैसा भी हो, शासन से सदैव ही अच्छा होता है. इस प्रकार स्वामीजी ने देशवासियों में आत्मसम्मान, देशप्रेम, स्वतन्त्रता आदि की भावनाएँ जाग्रत की तथा हिन्दू धर्म को कट्टर बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया.
> स्वामी विवेकानन्द और रामकृष्ण मिशन
भारतीय सामाजिक एवं धार्मिक पुनर्जागरण में स्वामी विवेकानन्द का स्थान अग्रणी है. इनके बचपन का नाम नरेन्द्र था तथा कलकत्ता विश्वविद्यालय से इन्होंने स्नातक तक शिक्षा ग्रहण की. उनके गुरु का नाम रामकृष्ण परमहंस था. उन्हीं के कहने पर विवेकानन्द ने 1892 ई. में विश्व धर्म सम्मेलन न्यूयॉर्क में भाग लेने के लिए गए तथा वहाँ से वापस आकर उन्होंने कलकत्ता के निकट बेल्लौर में 1896 ई. में 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की.
स्वामी विवेकानन्द ने रामकृष्ण मिशन के माध्यम से मानवता की सेवा का लक्ष्य बनाया. उनका विश्वास था कि वह धर्म बेकार है, जो अपने अनुयायियों को सक्षम और प्रगतिशील न बना सके. इस हेतु उन्होंने हिन्दू धर्म में व्याप्त उस समय की जड़ता को दूर करने का प्रयास किया. इसके लिए उन्होंने सुझाव दिया कि उपनिषदों के श्रेष्ठ तत्वों और वेदान्त के विचारों और आदर्शों को प्रतिदिन के जीवन के व्यवहार में लाया जाए.
विवेकानन्द ने लोगों से राष्ट्र सेवा में जुटने का आह्वान किया. उन्हीं के शब्दों में, “तुम ईश्वर की खोज में कहाँ जाओगे? क्या सभी निर्धन, दुःखी और कमजोर इन्सान, ईश्वर नहीं हैं? पहले उन्हीं की पूजा क्यों नहीं करते? उन्हीं लोगों को ईश्वर मानो, उन्हीं के बारे में सोचो, उन्हीं के लिए काम करो. ईश्वर तुम्हें मार्ग दिखाएगा."
उन्होंने रामकृष्ण मिशन का प्रमुख लक्ष्य पश्चिम के स्वातन्त्र्य एवं जनतन्त्र के साथ पूरब के अध्यात्मवाद का संयोग करना बताया. उसने सर्व धर्म एकता पर विशेष बल दिया तथा दुःख से पीड़ित मानवता को सहायता देने के लिए इस संस्था द्वारा अब भी अनेक कार्य किए जा रहे हैं.
इस प्रकार उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट है कि भारत के धार्मिक एवं सामाजिक पुनजागरण में रामकृष्ण मिशन और इसके संस्थापक स्वामी विवेकानन्द का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. इन्होंने देशवासियों को आत्मविश्वास, आत्मशक्ति और स्वाभिमान का पाठ पढ़ाया.
> सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आन्दोलनों का महत्त्व
भारत में स्वतन्त्रता प्राप्ति में पृष्ठभूमि का निर्माण सामाजिक एवं धार्मिक पुनर्जागरण ने किया. सर्वप्रथम सुधारकों द्वारा धार्मिक क्षेत्र में सुधार कार्य किए गए. ब्रह्म समाज, आर्य समाज, थियोसोफिकल सोसायटी, प्रार्थना समाज, रामकृष्ण मिशन आदि संगठनों ने हिन्दू धर्म को नई दिशा प्रदान की हिन्दू धर्म की प्राचीन महत्ता को लोगों के सामने रखा और इसमें जो दोष आ गए थे, उन्हें दूर करने की कोशिश की. मैक्समूलर, सर विलियम जोन्स आदि महान् विद्वानों ने प्राचीन हिन्दू धर्म ग्रन्थों का अध्ययन और अंग्रेजी में अनुवाद किया तथा यूरोप के निवासियों का प्राचीन भारतीय संस्कृति से परिचय करवाया.
आर्य समाज, रामकृष्ण मिशन, थियोसोफिकल सोसायटी, प्रार्थना समाज आदि ने समाज-सुधार के क्षेत्र में अनेक उल्लेखनीय कार्य किया जाति प्रथा, छुआछूत, बाल-विवाह, पर्दा - प्रथा आदि दुर्गुणों के विरुद्ध आवाज उठाई तथा विधवाविवाह, स्त्री शिक्षा तथा अंग्रेजी शिक्षा पद्धति को अपनाने पर बल दिया. 
बंगाल की एशियाटिक सोसायटी आदि संस्थाओं ने भारतीय इतिहास को सर्वथा नवीन रूप दिया और अज्ञात तथ्यों का शोध करके लोगों के सम्मुख प्रस्तुत किया. इसका परिणाम यह हुआ कि धर्म, दर्शन तथा संस्कृति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध कार्य प्रारम्भ हुआ.
इस प्रकार उपर्युक्त विवेचन से स्पष्ट है कि 19वीं सदी के सामाजिक एवं धार्मिक पुनर्जागरण ने भारत में लोगों को भारतीयता का आभास कराकर उन्हें एक राष्ट्र का नागरिक बना दिया, जिससे कि भारत का राष्ट्रीय आन्दोलन संगठित रूप से चल सका.
हमसे जुड़ें, हमें फॉलो करे ..
  • Telegram ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here
  • Facebook पर फॉलो करे – Click Here
  • Facebook ग्रुप ज्वाइन करे – Click Here
  • Google News ज्वाइन करे – Click Here