NCERT MCQs | मध्यकालीन इतिहास | मुगल साम्राज्य
1. मुगल बादशाह बनने से पूर्व बाबर 14 वर्ष की अल्पायु में कहाँ का शासक बना था ?
(a) फरगना
(b) उज्बेक
(c) काबुल
(d) खुरासान
उत्तर - (a)
व्याख्या- मुगल बादशाह बनने से पूर्व बाबर 14 वर्ष की अल्पायु में 1494 ई. में ट्रांस-आक्सियाना के फरगना नामक एक छोटे से राज्य का शासक बना। बाबर ने 1507 ई. में बादशाह की उपाधि धारण की और पद - पादशाही की स्थापना की, जिसमें शासक को बादशाह कहा जाता है।
2. इनमें से किसने बाबर को 'सर-ए-पुल' के युद्ध में पराजित किया?
(a) अब्दुल्लाह खाँ उज्बेक
(b) शैबानी खाँ
(c) उबैदुल्लाह खाँ
(d) जानी बेग
उत्तर - (b)
व्याख्या- शैबानी खाँ ने बाबर को 'सर-ए-पुल' के युद्ध में पराजित किया तथा समरकंद पर अधिकार कर लिया। शीघ्र ही उसने अन्य तैमूरी राज्यों को भी जीत लिया, जिससे विवश होकर बाबर को काबुल की ओर बढ़ना पड़ा और इसी क्रम में उसने 1504 ई. में काबुल को जीता।
3. बाबर के समकालीन सफावी लोगों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. सफावी राजवंश ने ईरान पर अपना वर्चस्व स्थापित किया था।
2. सफावी लोग हजरत मुहम्मद को अपना पूर्वज मानते थे।
3. सफावी सुन्नी संप्रदाय के पक्षधर थे।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है /हैं?
(a) 1 और 2
(b) 1 और 3
(c) 2 और 3
(d) केवल 2
उत्तर - (a)
व्याख्या- बाबर के समकालीन सफावी लोगों के संबंध में कथन (1) और (2) सत्य हैं। सफावी नामक एक नए राजवंश ने ईरान पर अपना शासन स्थापित किया। ये लोग हजरत मुहम्मद को अपना पूर्वज मानते थे। अत: उनका धर्म इस्लाम था। इन्होंने उस क्षेत्र के आस-पास के क्षेत्रों में भी वर्चस्व स्थापित करने का प्रयास किया।
कथन (3) असत्य है, क्योंकि सफावी लोग सुन्नी के नहीं, बल्कि शिया संप्रदाय के पक्षधर (हिमायती) थे तथा शिया संप्रदाय को नहीं मानने वालों पर अत्याचार करते थे।
4. निम्नलिखित में किस स्थान पर 1510 ई. में ईरान के शाह इस्माइल ने शैबानी खाँ की हत्या की थी ?
(a) पंजाब के निकट
(b) मेरू के निकट
(c) हेरात के निकट
(d) बोलूगा नदी के निकट
उत्तर - (b)
व्याख्या- 1510 ई. में मेरू के निकट एक घमासान युद्ध में ईरान के शासक शाह इस्माइल ने समरकंद के शासक शैबानी खाँ को पराजित कर उसकी हत्या कर दी थी ।
शैबानी खाँ की हत्या के बाद बाबर ने ईरानी फौजों की सहायता से समरकंद पर अधिकार कर लिया, परंतु शीघ्र ही उजबेकों ने बाबर को समरकंद से बाहर कर दिया। इस प्रकार बाबर को एक बार फिर काबुल लौटना पड़ा।
5. बाबर के भारत पर आक्रमण करने के पीछे क्या कारण था ?
(a) वह स्वयं को भारत के क्षेत्रों का वाजिब हकदार समझता था।
(b) उसने सुन रखा था कि भारत सोने-चाँदी का देश है।
(c) वह तैमूर के भारत आक्रमण से प्रभावित था।
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर - (d)
व्याख्या- बाबर द्वारा भारत पर आक्रमण करने के कुछ प्रमुख कारणों में भारत की समृद्धि, स्वयं को भारतीय क्षेत्रों का वाजिब अधिकारी समझना, भारत की सोने-चाँदी के देश के रूप में ख्याति, तैमूर द्वारा भारत आक्रमण में प्राप्त अत्यधिक धन तथा इसके साथ-साथ उत्तर-पश्चिम भारत की राजनीतिक स्थिति आदि शामिल थे।
6. बाबर के समकालीन दौलत खाँ लोदी के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. वह पंजाब का अफगानी सूबेदार था।
2. उसने बाबर को खुश करने के लिए अपने पुत्र को उसके दरबार में भेजा था।
3. दौलत खाँ ने बाबर के दूत को दिल्ली में रोक लिया था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है / हैं?
(a) 1 और 3
(b) 2 और 3
(c) केवल 1
(d) केवल 2
उत्तर - (c)
व्याख्या- बाबर के समकालीन दौलत खाँ लोदी के संबंध में कथन (1) सत्य है, क्योंकि भारत का शासक इब्राहिम लोदी तथा पंजाब का अफगानी सूबेदार दौलत खाँ लोदी था।
कथन (2) और (3) असत्य हैं, क्योंकि दौलत खाँ लोदी ने बाबर को नहीं, बल्कि इब्राहिम लोदी को खुश करने के लिए अपने पुत्र को दिल्ली के दरबार में भेजा था, जिसका लाभ उठाकर उसने अपने क्षेत्रों में वृद्धि की।
1518-19 ई. में जब बाबर ने 'भिरा के दुर्ग' को जीता, तो उसने इब्राहिम लोदी तथा दौलत खाँ लोदी को पत्र भेजकर तुर्कों के क्षेत्रों को वापस करने को कहा, परंतु दौलत खाँ ने बाबर के दूत को लाहौर में ही रोक लिया था।
7. भारत में बाबर की आरंभिक विजयों का सही क्रम निम्नलिखित में से कौन-सा था ?
(a) स्यालकोट-लाहौर - काबुल
(b) काबुल - स्यालकोट-लाहौर
(c) लाहौर - स्यालकोट- काबुल
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर - (b)
व्याख्या- भारत में बाबर की आरंभिक विजयों का सही क्रम इस प्रकार हैकाबुल, स्यालकोट तथा लाहौर।
बाबर ने काबुल को 1504 ई. में ही जीत लिया था, जबकि उसने स्यालकोट तथा लाहौर पर अधिकार 1520-21 ई. में किया।
जब बाबर काबुल लौटा तो दौलत खाँ ने बाबर के प्रतिनिधियों को भिरा से निकाल दिया, जिससे नाराज होकर बाबर ने 1520-21 ई. में सिंधु नदी पार करके भिरा, स्यालकोट तथा लाहौर को जीत लिया।
8. निम्नलिखित में से किसके नेतृत्व में एक दूतमंडल बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए निमंत्रण देने गया था?
(a) सिकंदर लोदी
(b) दिलावर खाँ लोदी
(c) राणा सांगा
(d) इब्राहिम लोदी
उत्तर - (b)
व्याख्या- दौलत खाँ लोदी ने अपने पुत्र दिलावर खाँ लोदी के नेतृत्व में बाबर के पास भारत पर आक्रमण करने के लिए एक दूतमंडल भेजा था, जिसमें उसने भारत के सुल्तान इब्राहिम खाँ लोदी को अपदस्थ करने का सुझाव दिया था।
9. पानीपत का प्रथम युद्ध किसके मध्य हुआ था ?
(a) हेमू और मुगल
(b) हुमायूँ और शेरखान
(c) हेमू और मुगल
(d) बाबर और इब्राहिम लोदी
उत्तर - (d)
व्याख्या- पानीपत का प्रथम युद्ध 20 अप्रैल, 1526 को बाबर तथा इब्राहिम लोदी के बीच हुआ, जिसमें बाबर विजयी हुआ, इस युद्ध में दिल्ली सल्तनत का अंतिम सुल्तान युद्ध क्षेत्र में मारा गया। तत्पश्चात् बाबर ने स्वयं को बादशाह घोषित किया तथा भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना की।
10. बाबर ने निम्नलिखित में से किन तोपचियों का प्रयोग पानीपत के प्रथम युद्ध में किया था?
(a) उस्ताद अली
(b) मुस्तफा
(c) 'a' और 'b' दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर - (c)
व्याख्या- बाबर ने 'उस्ताद अली' तथा 'मुस्तफा' दो तोपचियों का प्रयोग पानीपत के प्रथम युद्ध में किया था। इस युद्ध में बारूद तथा उस्मानिया पद्धति (युक्ति) का प्रयोग किया गया। यह युक्ति बाबर ने उस्मानिया के शासक से सीखी थी, जिसने ईरान के शाह इस्माइल के विरुद्ध इसका प्रयोग किया था।
11. निम्नलिखित में से किस शासक ने अपने रोजनामचे में दर्ज किया है 'अब हमें काबुल की गरीबी नहीं चाहिए । "
(a) दौलत खाँ लोदी
(b) इस्माइल शाह
(c) बाबर
(d) इब्राहिम लोदी
उत्तर - (c)
व्याख्या- बाबर ने अपने रोजनामचे में यह लिखा है कि "अब हमें काबुल की गरीबी नहीं चाहिए” अर्थात् अब बाबर भारत जैसे समृद्ध क्षेत्र (देश) को मात्र लूट पाट करके छोड़ना नहीं चाहता था, वह यहाँ रहकर शासन करना चाहता था।
12. पानीपत के प्रथम युद्ध के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. इस युद्ध के पश्चात् बाबर ने दिल्ली और आगरा पर नियंत्रण कर लिया।
2. बाबर ने भारत के लोगों को 'बला की मुखालफत' दिखाने वाला घोषित किया।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - (c)
व्याख्या- पानीपत के प्रथम युद्ध के संदर्भ में दिए गए दोनों कथन सत्य हैं। पानीपत के युद्ध में विजयी होने के पश्चात् बाबर आगे बढ़ा तथा उसे दिल्ली एवं आगरा तक के क्षेत्रों को अपने अधिकार में ले लिया। बाबर ने यह लिखा है कि "जब उसकी सेना गाँवों में पहुँचती थी, तो भारत के लोगों ने 'बला की मुखालफत' दिखाई अर्थात् उन्हें तैमूर की लूटपाट की घटना याद आ जाती थी और ये गाँव छोड़कर भाग जाते थे।"
13. खानवा के युद्ध के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. यह युद्ध बाबर और राणा सांगा के बीच हुआ था।
2. राणा सांगा ने मुगल क्षेत्र 'बयाणा' पर अधिकार कर लिया था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है /हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - (c)
व्याख्या- खानवा के युद्ध के संबंध में दिए गए सभी कथन सत्य हैं। खाना का युद्ध 1527 ई. में मेवाड़ के राणा सांगा तथा बाबर के बीच हुआ था। मुगलों के भारत में प्रवेश के प्रयत्न को कमजोर करने के लिए राणा सांगा ने 'ख्याति' और 'बयाणा' जैसे सीमावर्ती मुगल क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया, ताकि बाबर को रोक सके।
14. राणा सांगा का प्रभाव मालवा से 'पिलिया खार' तक फैला हुआ था इनमें 'पिलिया खार' क्या था?
(a) सीमावर्ती प्रदेश
(b) एक नदी
(c) एक पहाड़
(d) एक मरुस्थलीय क्षेत्र
उत्तर - (b)
व्याख्या- 'पिलिया खार' एक नदी थी। राणा सांगा ने गुजरात तथा मालवा की संयुक्त सेना को 1519 ई. में गणरौण की लड़ाई में पराजित किया। गुजरात तथा मालवा की संयुक्त सेना का नेतृत्व गुजरात के शासक महमूद खिलजी ने किया। इस युद्ध में जीत के बाद राणा सांगा का प्रभाव मालवा से लेकर आगरा के पास बहने वाली नदी पिलिया खार तक स्थापित हो गया।
15. खानवा के युद्ध के संबंध में कौन-सा कथन असत्य है?
(a) बाबर ने स्वयं को सच्चा मुसलमान घोषित किया।
(b) उसने संपूर्ण राज्य में शराब की खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी।
(c) बाबर ने इस युद्ध में राणा सांगा की हत्या कर दी।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (c)
व्याख्या- खानवा के युद्ध के संबंध में कथन (c) असत्य है। खानवा के युद्ध में राणा सांगा और उसकी सेना पराजित हुई, किंतु राणा सांगा बचकर भाग गया न कि बाबर ने उसकी हत्या कर दी थी। राणा सांगा बचकर भागने के बाद बाबर से पुनः संघर्ष करना चाहता था, परंतु उसे उसके अपने ही सरदारों ने जहर देकर मार दिया, क्योंकि वे राणा के मंसूबों को खतरनाक और आत्मघाती मानते थे।
16. खानवा की लड़ाई के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. बाबर ने आगरा से पूर्व की ओर ग्वालियर, धौलपुर किले को जीत लिया।
2. उसने अलवर के एक बड़े भाग को इब्राहिम लोदी से छीनकर अपने राज्य में मिला लिया।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - (a)
व्याख्या- खानवा की लड़ाई के संबंध में कथन (1) सत्य है। खानवा के युद्ध में विजयी होने के बाद दिल्ली-आगरा क्षेत्र में बाबर की स्थिति मजबूत हो गई। उसने ग्वालियर तथा धौलपुर के किलों को भी जीत लिया। खानवा युद्ध जीतने के बाद बाबर ने 'गाजी' की उपाधि धारण की।
कथन (2) असत्य है, क्योंकि बाबर ने अलवर के एक बड़े भाग को इब्राहिम लोदी से नहीं, बल्कि हसन खाँ मेवाती से छीनकर अपने राज्य में मिला लिया था।
17. चंदेरी का युद्ध किन दो शासकों के बीच हुआ था?
(a) बाबर और मेदिनी राय
(b) हसन खाँ मेवाती और बाबर
(c) मेदिनी राय और इब्राहिम लोदी
(d) बाबर और शेर खाँ
उत्तर - (a)
व्याख्या- चंदेरी का युद्ध (1528 ई.) बाबर तथा मेदिनी राय के बीच हुआ, जिसमें बाबर विजयी हुआ था। चंदेरी, मालवा क्षेत्र में स्थित था, इसका शासक मेदिनी राय था। इस युद्ध में बाबर ने 'जिहाद' का नारा दिया था और इस युद्ध में मेदिनी राय की हार के बाद राजपूत स्त्रियों ने जौहर व्रत किया था।
18. बाबर के समय में अफगानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. अफगान बाबर से पराजित हो गए, लेकिन मुगल शासन को मन स्वीकार नहीं कर पाए थे।
2. पूर्वी उत्तर प्रदेश में अफगानों का प्रभुत्व स्थापित था।
3. अफगानों के पास लोकप्रिय नेता नहीं था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (d)
व्याख्या- बाबर के समय में अफगानों के संबंध में दिए गए सभी कथन सत्य हैं। घाघरा युद्ध में (1529 ई.) अफगानों ने बाबर की अधीनता तो स्वीकार कर ली थी, किंतु ये स्वतंत्र शासन के लिए प्रयासरत थे। उस समय पूर्वी उत्तर प्रदेश, अफगानों के प्रभाव में था। इसी क्रम में अफगान मुगलों के कुछ क्षेत्रों पर अधिकार करके कन्नौज तक पहुँच गए। अफगान सरदारों की सहायता बंगाल का शासक एवं इब्राहिम लोदी का दामाद नुसरत शाह कर रहा था, लेकिन अफगानों की सबसे बड़ी कमजोरी उनके पास कोई लोकप्रिय एवं सक्षम नेता का न होना था।
19. बाबर के व्यक्तिगत जीवन के संबंध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) उसकी मृत्यु 1530 ई. में हुई थी ।
(b) वह उर्दू भाषा का उच्चकोटि का विद्वान् था।
(c) वह प्राकृतिक सौंदर्य से बहुत प्रभावित था।
(d) वह पोलो खेलने का शौकीन था।
उत्तर - (b)
व्याख्या- बाबर के व्यक्तिगत जीवन के संबंध में कथन (b) सत्य नहीं है, क्योंकि बाबर ऊर्दू का नहीं, बल्कि तुर्की भाषा का उच्चकोटि का विद्वान् था। बाबर, भारत में मुगल साम्राज्य का संस्थापक था, इसका जन्म मध्य एशिया ( उज्बेकिस्तान) में 14 फरवरी, 1483 ई. को हुआ था तथा इसकी मृत्यु काबुल जाते समय रास्ते में ही 1530 ई. में हो गई ।
यह प्राकृतिक सौंदर्य का प्रेमी था तथा इसने चारबाग बागवानी परंपरा की नींव रखी। बाबर पोलो खेलने का शौकीन था।
20. बाबर ने अपनी आत्मकथा 'तुजुक-ए-बाबरी' की रचना निम्नलिखित में से किस भाषा में की थी ?
(a) फारसी
(b) अरबी
(c) तुर्की
(d) उर्दू
उत्तर - (c)
व्याख्या- बाबर ने अपनी आत्मकथा 'तुजुक-ए-बाबरी' की रचना मातृभाषा तुर्की में (चगताई में) की थी। बाबर अपने काल के प्रसिद्ध कवियों और कलाकारों के संपर्क में रहता था। इस रचना में उसने अपने बचपन से लेकर भारत विजय तक का वर्णन किया है । 'तुजुक - ए - बाबरी' को 'बाबरनामा' भी कहा जाता है।
1. हुमायूँ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. 1530 ई. में वह 30 वर्ष की आयु में शासक बना था।
2. उसे साम्राज्य को सभी भाइयों में बाँट देने की तैमूरी प्रथा का सामना करना पड़ा था।
3. बाबर हुमायूँ को अपने भाइयों से सख्ती से पेश आने का परामर्श दिया था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन असत्य है/हैं?
(a) केवल 2
(b) 1 और 3
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (b)
व्याख्या- हुमायूँ के संबंध में कथन (1) और (3) असत्य हैं। हुमायूँ, बाबर की मृत्यु के बाद दिसंबर, 1530 में गद्दी पर बैठा, उस समय उसकी आयु 30 वर्ष नहीं, बल्कि 23 वर्ष थीं। हुमायूँ का पूरा नाम नासिरुद्दीन मुहम्मद हुमायूँ था। इसका जन्म 1508 ई. में काबुल में हुआ था।
बाबर ने अपने पुत्र हुमायूँ को अपने भाइयों से सख्ती से नहीं, बल्कि प्यार से पेश आने का परामर्श दिया था।
2. जब हुमायूँ आगरा में गद्दी पर बैठा उस समय कौन-सा क्षेत्र उसके अंतर्गत था ?
(a) काबुल
(b) कंधार
(c) बदख्शाँ
(d) ये सभी
उत्तर - (d)
व्याख्या- जब हुमायूँ 23 वर्ष की अवस्था में 1530 ई. में आगरा की गद्दी बदख्शाँ पर बैठा, उस समय इसके अधिकार क्षेत्र में काबुल, कंधार (कंदहार), आदि थे।
3. निम्न नामों में से उसे चिह्नित कीजिए, जो हुमायूँ के भाइयों में से किसी का नाम नहीं था
(a) कमरान
(b) उस्मान
(c) अस्करी
(d) हिंदाल
उत्तर - (b)
व्याख्या- हुमायूँ के भाइयों में कमरान, अस्करी तथा हिंदाल शामिल थे। हुमायूँ बाबर का सबसे बड़ा पुत्र था। हुमायूँ ने अपने भाई कमरान को काबुल और कंधार का शासन (राज्य) दे दिया। कमरान इन गरीब क्षेत्रों से संतुष्ट नहीं था और उसने लाहौर एवं मुल्तान पर अधिकर कर लिया। हुमायूँ गृहयुद्ध नहीं चाहता था, अत: उसने मान्यता दे दी और कमरान ने भी हुमायूँ की प्रभुता को स्वीकार कर लिया।
4. हुमायूँ के शुरुआती युद्धों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. उसने 1532 ई. में दौराह में अफगान सेना को पराजित किया था।
2. उसने पूर्वी उत्तर प्रदेश के जौनपुर पर अधिकार कर लिया था।
3. गुजरात का शासक बहादुरशाह उसका प्रतिद्वंद्वी था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (d)
व्याख्या- हुमायूँ शुरुआती युद्धों के संबंध में दिए गए सभी कथन सत्य हैं। हुमायूँ जब शासक बना तो उसके सामने अफगानों की बढ़ती हुई शक्ति तथा गुजरात का शासक बहादुरशाह था। हुमायूँ ने अफगानों को अधिक गंभीर खतरा समझा और 1532 ई. में दौराह नामक स्थान पर अफगान सेना को पराजित किया। इस सफलता के साथ ही हुमायूँ ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में जौनपुर तक को अपने अधिकार में ले लिया।
5. हुमायूँ ने 'चुनार के दुर्ग' पर प्रथम बार आक्रमण कब किया था?
(a) 1532 ई.
(b) 1531 ई.
(c) 1533 ई.
(d) 1536 ई.
उत्तर - (a)
व्याख्या- हुमायूँ ने 'चुनार के दुर्ग' पर प्रथम बार आक्रमण 1532 ई. में किया था। हुमायूँ ने अफगानों को पराजित कर पूर्वी उत्तर प्रदेश के जौनपुर तक अधिकार करने के बाद चुनार पर घेरा डाला।
चुनार का सशक्त दुर्ग आगरा और पूर्व के बीच थल मार्ग एवं नदी मार्ग को नियंत्रित करता था। इसे पूर्वी भारत के 'प्रवेश द्वार' के रूप में भी जाना जाता था। ध्यातव्य है कि यह क्षेत्र अफगान सरदार शेरशाह के अधिकार क्षेत्र में था। हुमायूँ ने चार महीने की घेराबंदी के बाद शेरशाह से समझौता किया और चुनार के किले पर शेरशाह (शेर खाँ) का अधिकार मान लिया।
6. निम्नलिखित में किस किले को बहादुरशाह से बचाने के लिए राणा सांगा की विधवा रानी ने हुमायूँ को राखी भेजी थी?
(a) मेवाड़ का किला
(b) रणथंभौर का किला
(c) चित्तौड़ का किला
(d) मालवा का किला
उत्तर - (c)
व्याख्या- चित्तौड़ का किला, बहादुरशाह से बचाने के लिए राणा सांगा की विधवा ने हुमायूँ को राखी भेजी थी। चित्तौड़ के किले पर बहादुरशाह ने घेरा डाला और उसने राजपूतों की शक्ति को छिन्न-भिन्न कर दिया, जिसे देखकर रानी कर्णावती ( राणा सांगा की विधवा) ने हुमायूँ को राखी भेजकर सहायता माँगी थी।
7. हुमायूँ ने अपने शासनकाल में किस स्थान पर 'दीनपनाह' नामक नगर को बसाया था?
(a) दिल्ली
(b) आगरा
(c) काबुल
(d) कंधार
उत्तर - (a)
व्याख्या- हुमायूँ ने अपने शासनकाल में दिल्ली में 'दीनपनाह' नामक नगर बसाया था, इसका शासन अफगानिस्तान, पाकिस्तान से लेकर उत्तर भारत के हिस्सों में रहा। अपने इस नए नगर दीनपनाह में हुमायूँ अनेक उत्सवों व भोज के कार्यक्रम करता था।
1. शेरशाह के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) वह बिहार का निर्विवाद स्वामी था।
(b) वह एक तुर्क सरदार था।
(c) वह मुगलों के प्रति वफादारी का दिखावा करता था।
(d) उसकी सेना में 1200 हाथी शामिल थे।
उत्तर - (b)
व्याख्या- शेरशाह के संबंध में कथन (b) सत्य नहीं है, क्योंकि शेरशाह तुर्क नहीं, बल्कि एक अफगान सरदार था। शेरशाह ने बिहार में अपनी स्थिति सुदृढ़ करते हुए अफगानियों को एकत्र किया।
यह मुगलों के प्रति वफादारी का दिखावा करता रहा, परंतु वह अपनी योजना व्यवस्थित ढंग से तैयार कर रहा था। शेरशाह को गुजरात शासक बहादुरशाह से काफी आर्थिक सहायता मिली थी। इन संसाधनों के बल पर इसने एक विशाल सेना का निर्माण किया, जिसमें 1200 हाथी भी शामिल थे।
2. शेरशाह की सेना के किस तोपची ने चुनार के घेरे में हुमायूँ को छः माह तक उलझाए रखा था ?
(a) मुहम्मद खाँ
(b) रूसी खाँ
(c) तीरगी बेग
(d) सफी खाँ
उत्तर - (b)
व्याख्या- शेरशाह की सेना में से 'रूसी खाँ' तोपची ने चुनार के घेरे में हुमायूँ को छः माह तक उलझाए रखा था। जब शेरशाह को पराजित करने के लिए हुमायूँ ने 1538 ई. में चुनारगढ़ के किले पर आक्रमण किया, तब अफगानों ने वीरतापूर्वक इस किले की रक्षा की।
3. चौसा के युद्ध के संबंध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) यह हुमायूँ और शेरशाह के मध्य हुआ था।
(b) चौसा बिहार के बक्सर के पास स्थित था।
(c) यह युद्ध सोन नदी के किनारे हुआ था।
(d) इसमें हुमायूँ पराजित हुआ था।
उत्तर - (c)
व्याख्या- चौसा के युद्ध के संबंध में कथन (c) सत्य नहीं हैं, क्योंकि चौसा का युद्ध सोन नदी के किनारे नहीं, बल्कि कर्मनाशा नदी के किनारे हुआ था। हुमायूँ एवं शेरशाह के बीच कर्मनाशा नदी के किनारे निर्णायक चौसा का युद्ध 29 जून, 1539 को लड़ा गया, जिसमें हुमायूँ की पराजय हुई। हुमायूँ अपने घोड़े सहित नदी में कूद गया और एक भिश्ती (सैनिकों को पानी पिलाने वाला) अतगा खाँ की सहायता से उसने अपनी जान बचाई। इस विजय के फलस्वरूप शेरशाह ने अपना नाम बदलकर 'शेर खाँ' से 'शेरशाह' किया और अपने नाम का खुतबा पढ़वाया।
4. हुमायूँ और शेरशाह के बीच कन्नौज का युद्ध कब हुआ था?
(a) मार्च, 1539 में
(b) मई, 1540 में
(c) जुलाई, 1541 में
(d) दिसंबर, 1540 में
उत्तर - (b)
व्याख्या- हुमायूँ और शेरशाह के बीच कन्नौज का युद्ध मई, 1540 में बिलग्राम में हुआ था, परंतु इस युद्ध में हुमायूँ को शेरशाह से पुनः पराजय का सामना करना पड़ा तथा हिंदुस्तान पर शेरशाह का अधिकार हो गया।
कन्नौज के युद्ध की पराजय के कारण ही हुमायूँ ने 1553 ई. तक हिंदुस्तान से बाहर निर्वासित जीवन व्यतीत किया।
5. कन्नौज के युद्ध में हुमायूँ के किन भाइयों ने शेरशाह का मुकाबला बहादुरी से किया था?
(a) हिंदाल
(b) अस्करी
(c) 'a' और 'b' दोनों
(d) कमरान
उत्तर - (c)
व्याख्या- कन्नौज के युद्ध में हुमायूँ के दोनों भाई हिंदाल एवं अस्करी ने शेरशाह का मुकाबला बहादुरी से किया, इस युद्ध में शेरशाह ने हुमायूँ को पुनः पराजित किया।
6. शेरशाह के विरुद्ध हुमायूँ की विफलता का मुख्य कारण क्या था?
(a) वह अफगानों की शक्ति का सही अंदाजा नहीं लगा पाया।
(b) उसके भाइयों ने उसका साथ नहीं दिया।
(c) शेरशाह को ईरान के शाह का समर्थन प्राप्त था।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (a)
व्याख्या- शेरशाह के विरुद्ध हुमायूँ की विफलता का मुख्य कारण यह था कि वह अफगानों की सैन्य शक्ति का अंदाजा सही से नहीं लगा पाया, वह अफगानों को अपनी सैन्य शक्ति के आगे कमजोर समझ रहा था।
हुमायूँ के संबंध में इतिहास में कहा जाता है कि वह बहुत ही विद्वान् व्यक्ति था तथा सैन्य मामलों एवं सैन्य दृष्टि से काफी कुशल व्यक्ति था, परंतु युद्ध का नेतृत्व करना, अपने साम्राज्य को कैसे स्थायी बनाना, इन सब विषयों में हुमायूँ कमजोर था।
7. सूर साम्राज्य के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. शेरशाह ने 67 वर्ष की आयु में सूर साम्राज्य की स्थापना की।
2. सूर साम्राज्य की स्थापना 1540 ई. में हुई थी।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - (c)
व्याख्या- सूर साम्राज्य के संबंध में दिए गए दोनों कथन सत्य हैं। शेरशाह ने 1540 ई. में 67 वर्ष की आयु में सूर साम्राज्य की स्थापना की। इसका जन्म 1486 ई. में 'हिसार फिरोजा' या 'नारनोल' नामक स्थान पर हुआ। शेरशाह के पिता का नाम हसन खाँ एवं दादा का नाम इब्राहिम सूर था, शेरशाह के बचपन का नाम फरीद था।
8. शेरशाह ने किस सुल्तान की मृत्यु के बाद से उत्तर भारत में स्थापित सबसे बड़े साम्राज्य पर शासन किया?
(a) मुहम्मद बिन तुगलक
(b) फिरोजशाह तुगलक
(c) मुबारक खिलजी
(d) नासिरुद्दीन महमूद
उत्तर - (c)
व्याख्या- शेरशाह ने बिन मुहम्मद तुगलक की मृत्यु के बाद से उत्तर भारत में स्थापित सबसे बड़े साम्राज्य पर शासन किया। शेरशाह का साम्राज्य बंगाल से लेकर सिंधु नदी तक (कश्मीर को छोड़कर) विस्तृत था तथा पश्चिम में मालवा एवं पूर्ण राजस्थान पर इसका अधिकार था।
9. शेरशाह द्वारा स्थापित साम्राज्य में निम्नलिखित में से कौन-सा क्षेत्र शामिल नहीं था?
(a) बंगाल
(b) सिंघ प्रदेश
(c) कश्मीर
(d) बिहार
उत्तर - (c)
व्याख्या- शोरशाह द्वारा स्थापित साम्राज्य में कश्मीर का क्षेत्र शामिल नहीं था। 1524 ई. में शेरशाह ने महमूद लोदी की और से मुगलों के विरुद्ध बावरा के युद्ध में भाग लिया तथा नुसरतशाह को पराजित कर 'हजरत-ए-आला' की उपाधि धारण की। इसने अपने विजय अभियान की शुरुआत सर्वप्रथम 1541 ई. में 'गक्खर प्रदेश' को जीतकर की। इसके पश्चात् 1541 ई. में 'बंगाल विद्रोह' को दबाया तथा 1542 ई. में मालवा व रणथंभौर पर विजय प्राप्त की एवं 1545 ई. में बुंदेलखंड को जीतकर पूरे उत्तर भारत में अपनी प्रभुसत्ता स्थापित की।
10. शेरशाह के समकालीन किस राजपूत शासक ने पश्चिमी तथा उत्तरी राजपूताना पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया था?
(a) राजा मालदेव
(b) राजा विक्रमजीत
(c) राजा मानसिंह
(d) राजा जयसिंह
उत्तर - (a)
व्याख्या- शेरशाह के समकालीन राजा मालदेव ने पश्चिमी एवं उत्तरी राजपूताना पर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया था। यह शेरशाह व हुमायूँ के संघर्ष के दौरान अपने राज्य का विस्तार करने लगा था। 1544 ई. में शेरशाह ने कूटनीति का सहारा लेकर मारवाड़ की राजधानी जोधपुर पर अधिकार कर लिया तथा वहाँ के शासक मालदेव को पराजित किया।
11. राजपूत और अफगान सेना के मध्य युद्ध अजमेर और जोधपुर के बीच किस स्थान पर हुआ था?
(a) सामेल
(b) सिरोही
(c) सिरसा
(d) सिकंदरा
उत्तर - (a)
व्याख्या- राजपूत एवं अफगान सेना के मध्य 1544 ई. में युद्ध अजमेर एवं जोधपुर के बीच सामेल नामक स्थान पर हुआ था। इस युद्ध में शेरशाह ने जाली पत्रों की कूटनीति के माध्यम से मारवाड़ के शासक मालदेव की सेना में फूट डाल दी, जिसके परिणामस्वरूप राजपूत थोड़े से सैनिकों के साथ लड़े और पराजित हुए।
12. शेरशाह सूरी का आखिरी अभियान कौन-सा था, जिसमें तोप से घायल हो जाने के कारण उसकी मृत्यु हो गई थी?
(a) सामेल के अभियान में
(b) चुनार के अभियान में
(c) कालिंजर के अभियान में
(d) मेवाड़ के अभियान में
उत्तर - (c)
व्याख्या- 1545 ई. में शेरशाह सूरी ने कालिंजर पर अपना अंतिम आक्रमण किया, जिसका शासक कीरत सिंह था। इस अभियान के दौरान जब वह 'उक्का' नामक आग्नेयास्त्र (Firearms) चला रहा था, तो उसी दौरान तोप फट गई, जिसमें शेरशाह घायल हो गया। तत्पश्चात् किले पर अधिकार हो जाने की खबर सुनने के बाद (1545 ई.) में उसकी मृत्यु हो गई।
13. इस्लाम शाह के संबंध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) वह शेरशाह का उत्तराधिकारी था।
(b) उसने 1556 ई. तक शासन किया।
(c) वह योग्य शासक एवं सेनापति था।
(d) वह अफगानों के बीच कवाइली झगड़ों को निपटाने में उलझा रहा।
उत्तर - (b)
व्याख्या- इस्लाम शाह के संबंध में कथन (b) सत्य नहीं है, क्योंकि इस्लाम शाह ने 1556 ई. तक नहीं, बल्कि 1553 ई. तक शासन किया था।
शेरशाह का उत्तराधिकारी उसका दूसरा पुत्र जलाल खाँ था। 1545 ई. में जलाल खाँ, इस्लाम शाह के नाम से सूर साम्राज्य की गद्दी पर बैठा। यह एक योग्य शासक एवं सेनापति था, उसने अपनी राजधानी आगरा से ग्वालियर स्थानांतरित की।
उसने संपूर्ण इक्ता भूमि को खालिसा भूमि में परिवर्तित कर दिया तथा वह महत्त्वपूर्ण अधिकारियों का वेतन राजकीय खजाने से देने लगा।
14. हुमायूँ ने किस वर्ष सूर साम्राज्य का विघटन कर पुनः मुगल सत्ता की स्थापना की थी?
(a) 1553 ई. में
(b) 1554 ई. में
(c) 1555 ई. में
(d) 1556 ई. में
उत्तर - (c)
व्याख्या- हुमायूँ ने 1555 ई. में सूर साम्राज्य का विघटन कर पुनः मुगल सत्ता की स्थापना की थी। मुगलों एवं अफगानों के मध्य सरहिंद नामक स्थान पर युद्ध हुआ, इस युद्ध में अफगान पराजित हुए तथा हुमायूँ ने आगरा एवं दिल्ली पर फिर से अधिकार स्थापित कर लिया। इस्लाम शाह की कम आयु में मृत्यु हो जाने के कारण इसके उत्तराधिकारियों में गृहयुद्ध छिड़ गया, जिस कारण हुमायूँ को भारत में अपना खोया हुआ साम्राज्य वापस पाने का अवसर मिल गया।
15. शेरशाह द्वारा किए गए सुधारों में निम्नलिखित में से कौन-सा शामिल नहीं था?
(a) डाकुओं और लूटेरों से वह सख्ती से पेश आया।
(b) कर न अदा करने वाले जमींदारों पर कड़ाई की।
(c) साम्राज्य में शांति व्यवस्था की पुनर्स्थापना की।
(d) उसने जजिया कर को लागू किया।
उत्तर - (d)
व्याख्या- शेरशाह द्वारा किए गए सुधारों में कथन (d) सत्य नहीं है, क्योंकि शेरशाह ने अपने शासनकाल में कभी भी जजिया कर नहीं लगाया था। शेरशाह ने अपने साम्राज्य के एक छोर से दूसरे छोर तक शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई प्रशासनिक, आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक कार्य किए। इसने लुटेरों एवं डाकुओं पर अंकुश लगाया तथा उनसे सख्ती से पेश आया। शेरशाह ने भू-राजस्व अदा न करने अथवा सरदार का आदेश ने मानने वाले जमींदारों के साथ बहुत कड़ाई से कार्य लिया।
शेरशाह के प्रशासन की विशेषता उसका अत्यधिक केंद्रीकृत होना था। शेरशाह स्वयं प्रशासन की धुरी था तथा वह स्वयं ही सभी महत्त्वपूर्ण कार्य करता था।
16. निम्नलिखित में से कौन शेरशाह सूरी का दरबारी इतिहासकार था?
(a) खफी खाँ
(b) अब्बास खाँ सरवानी
(c) फैजी
(d) मुबारक अली
उत्तर - (b)
व्याख्या- अब्बास खाँ सरबानी/सरवानी सूर वंश के संस्थापक शेरशाह का दरबारी इतिहासकार था, इसने 'तवारिख-ए-शेरशाही' नामक प्रसिद्ध ऐतिहासिक ग्रंथ की रचना की। इस ग्रंथ में शेरशाह के राजस्थान अभियान का वर्णन तथा उसकी साम्राज्यवादी एवं प्रशासनिक नीतियों का समावेश किया गया है। इस ग्रंथ में मेवाड़ के शासक उदय सिंह तथा मारवाड़ के शासक मालदेव का शेरशाह से संबंधों का विवरण प्राप्त होता है।
17. शेरशाह ने अपने शासनकाल में 'ग्रांड ट्रंक रोड' को चालू करवाया यह सड़क कहाँ से कहाँ तक जाती थी?
(a) सिंधु नदी से बंगाल के सोना गाँव तक
(b) काबुल से बंगाल के वर्धमान तक
(c) दिल्ली से बंगाल तक
(d) आगरा से मुर्शीदाबाद तक
उत्तर - (a)
व्याख्या- शेरशाह ने पश्चिम में सिंधु नदी से लेकर बंगाल में सोना गाँव तक पहुँचने वाली पुरानी सड़क जिसे 'ग्रांड ट्रंक रोड' कहा जाता है, का पुनः निर्माण करवाया था। इसने आगरा से जोधपुर एवं चित्तौड़ तक एक सड़क का निर्माण करवाया था, जो गुजरात के बंदरगाह से जुड़ी हुई थी। इस सड़क के अतिरिक्त शेरशाह ने मुल्तान से पश्चिम एवं मध्य एशिया जाने वाले यात्रियों के लिए भी सड़क का निर्माण करवाया था।
18. शेरशाह सूरी द्वारा स्थापित सरायों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
1. उसने यात्रियों की सुविधा के लिए सड़क पर 8 किलोमीटर की दूरी पर सरायों का निर्माण कराया।
2. सरायों में हिंदुओं और मुसलमानों के रहने के लिए अलग-अलग स्थानों की व्यवस्था की गई थी।
3. हिंदू यात्रियों को बिस्तर और भोजन देने तथा उनके घोड़ों को दाना देने के काम की व्यवस्था करने के लिए ब्राह्मणों को नियुक्त किया गया था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 3
(b) 2 और 3
(c) 1, 2 और 3
(d) केवल 3
उत्तर - (c)
व्याख्या- शेरशाह सूरी द्वारा स्थापित सरायों के संबंध में दिए गए सभी कथन सत्य हैं। शेरशाह ने यात्रियों की सुविधा हेतु सड़कों के किनारे छायादार वृक्ष लगवाए तथा प्रति चार मील की दूरी अर्थात् दो-दो कोस (लगभग 8 किमी) की दूरी पर सड़क के किनारे सराय की स्थापना करवाई। सड़कों के किनारे लगभग 1700 सरायों का निर्माण किया गया था।
प्रत्येक सराय में हिंदू एवं मुसलमानों के विश्राम, भोजन एवं सुख-सुविधा के अलग-अलग प्रबंध थे। सरायों का प्रबंध इमाम 'मुअनिज' नामक अधिकारी करते थे। हिंदू यात्रियों को बिस्तर और भोजन देने तथा उनके घोड़ों को दाना देने के कार्य की व्यवस्था करने के लिए ब्राह्मणों को नियुक्त किया गया था।
19. यह सिद्धांत किसने प्रस्तुत किया था कि "यदि तुम्हारे क्षेत्र में किसी व्यापारी की मृत्यु हो जाए, तो उसके माल पर हाथ डालना विश्वासघात है। "
(a) शेरशाह
(b) शेख निजामी
(c) अब्बास सरबानी
(d) इस्माइल खाँ
उत्तर - (b)
व्याख्या- शेरशाह ने लोगों को शेख निजामी के इस सिद्धांत को ध्यान रखने का निर्देश दिया कि “यदि तुम्हारे क्षेत्र में किसी व्यापारी की मृत्यु हो जाए, तो उसके माल पर हाथ डालना विश्वासघात है।" शेरशाह के शासनकाल में किसी व्यापारी की मृत्यु हो जाने पर लोगों को उसके माल को लावारिस मानकर हथिया लेने की सख्त मनाही थी। शेरशाह ने स्पष्ट रूप से यह घोषणा कर दी थी कि यदि किसी व्यापारी की क्षति होगी, तो उसका उत्तरदायित्व स्थानीय मुकद्दमों एवं जमींदारों की होगी।
20. शेरशाह सूरी ने निम्नलिखित में किसका सिक्का नहीं चलवाया था ?
(a) चाँदी
(b) सोना
(c) ताँबा
(d) चमड़ा
उत्तर - (d)
व्याख्या- शेरशाह सूरी ने चमड़े के सिक्के नहीं चलवाए थे। शेरशाह ने मानक सिक्कों का विकास किया, जो सोने, चाँदी एवं ताँबे के बने होते थे। शेरशाह ने 167 ग्रेन के सोने के सिक्के जारी किए, जो 'अशर्फी' के नाम से जाने जाते थे। उसने 180 ग्रेन के चाँदी के सिक्के जिसमें 175 ग्रेन शुद्ध चाँदी थी जारी किए, ये सिक्के 'रुपये' के नाम से जाने जाते थे।
21. शेरशाह की प्रशासनिक व्यवस्था के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. कई गाँवों को मिलाकर परगना बनता था।
2. परगना शिकदार के जिम्मे होता था।
3. अमिल सैन्य अस्तबल की देख-रेख करता था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है /हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) केवल 2
उत्तर - (a)
व्याख्या- शेरशाह की प्रशासनिक व्यवस्था के संबंध में कथन (1) और (2) सत्य हैं। शेरशाह ने सल्तनत काल से प्रचलित प्रशासनिक व्यवस्थाओं में कोई बदलाव नहीं किया था तथा सल्तनत काल से चली आ रही परंपराओं को स्थापित रखा। कई गाँवों को मिलाकर एक परगने का निर्माण होता था। परगने की जिम्मेदारी शिकदार नामक अधिकारी के पास होती थी, जो शांति व्यवस्था का ध्यान रखता था।
कथन (3) सत्य नहीं है, क्योंकि अमिल नामक अधिकारी का संबंध सैन्य अस्तबल से नहीं, बल्कि भू-राजस्व प्रशासन से था।
22. शेरशाह के प्रशासन में 'शिकदार-ए-शिकदारान' किसका उच्च अधिकारी था ?
(a) परगना
(b) सरकार
(c) जिला
(d) गाँव
उत्तर - (b)
व्याख्या- शेरशाह के प्रशासन में 'शिकदार - ए - शिकदारान' का पद उच्च था, जोकि सरकार का उच्च अधिकारी होता था। ध्यातव्य है कि सरकार में दो प्रकार के अधिकारी नियुक्त किए जाते थे शिकदार-ए-शिकदारान एवं मुंसिफ-ए-मुंसिफान, मुंसिफान भू-राजस्व प्रशासन से संबंधित था।
23. शेरशाह के प्रशासन के संबंध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है ?
(a) मुंसिफ भू-राजस्व की वसूली करता था।
(b) सरकार को मिलाकर सुधार बनता था।
(c) कबायिली सरदारों की प्रशासन में भूमिका नगण्य थी।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (c)
व्याख्या- शेरशाह के प्रशासन के संबंध में कथन (c) सत्य नहीं है।
शेरशाह के काल में बंगाल जैसे कुछ क्षेत्रों में वास्तविक शक्ति कबायिली सरदारों के हाथों में रहती थी एवं सूबेदार का उस पर बहुत कम नियंत्रण रहता था। शेरशाह प्रशासनिक व्यवस्था की स्वयं निगरानी करता था, वह सुबह से लेकर देर रात तक राजकार्य में लगा रहता था तथा राज्य की जनता की स्थिति जानने के लिए राज्य का दौरा करता रहता था।
24. शेरशाह द्वारा स्थापित 'भू-राजस्व प्रणाली' के संवर्द्धन में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. उसने दरों की सूची 'रे' का प्रचलन करवाया।
2. राज्य का हिस्सा उपज का 1/4 था।
3. जमीन को उत्तम, मध्यम और निम्न में बाँटा गया था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है /हैं?
(a) 1 और 2
(b) 1 और 3
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (b)
व्याख्या- शेरशाह द्वारा स्थापित 'भू-राजस्व प्रणाली' के संबंध में कथन (1) और (3) सत्य हैं। जमीन को उत्तम, मध्यम एवं निम्न अर्थात् इन तीन वर्गों में बाँटा गया था। इसके अतिरिक्त शेरशाह ने दरों की एक सूची तैयार की थी, जिसे 'रे' कहा जाता था।
कथन (2) सत्य नहीं है, क्योंकि शेरशाह की भू-राजस्व प्रणाली के अंतर्गत राज्य का हिस्सा उपज का एक-तिहाई (1/3) होता था। किसानों को यह हिस्सा नकद अदायगी के रूप में राज्य को देने की छूट थी। फिर भी सरकार नकद अदायगी को सर्वाधिक प्राथमिकता देती थी।
25. शेरशाह के प्रशासन में बोई गई जमीन के क्षेत्रफल, फसल की किस्में और देय लगान को जिसमें दर्ज किया जाता था, उसे क्या नाम दिया गया ?
(a) पट्टा
(b) कबूलियत
(c) मल्फियत
(d) लंक बटाई
उत्तर - (a)
व्याख्या- शेरशाह के प्रशासन में बोई गई जमीन के क्षेत्रफल, लगाई गई फसलों की किस्में एवं प्रत्येक किसान द्वारा देय लगान को एक कागज पर दर्ज किया जाता था, जिसे 'पट्टा' कहते थे । प्रत्येक किसान को पट्टा दिया जाता था और उससे कबूलियत लिखवाई जाती थी। पट्टे में जमीन के स्वामी का नाम इत्यादि स्पष्ट किया जाता था। कबूलियत में यह बात स्पष्ट की जाती थी कि संबंधित किसानों को कितना राजस्व प्रदान करना है।
26. शेरशाह के सैन्य प्रशासन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. उसने कबायिली सरदारों के अधीन कबायिलियों की फौज खड़ी करने के चलन का त्याग किया।
2. उसने सिपाहियों की सीधी भरती का सिलसिला शुरू किया।
3. प्रत्येक सिपाही का पूरा व्यक्तिगत वर्णन दर्ज रहता था, जिसे 'चेहरा' कहते थे।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (d)
व्याख्या- शेरशाह के सैन्य प्रशासन के संबंध में दिए गए सभी कथन सत्य हैं । शेरशाह ने अपने विस्तृत साम्राज्य को संभालने के लिए एक शक्तिशाली सेना खड़ी की, उसने आवश्यकता होने पर कबायली सरदारों के अधीन कबायिलियों की फौज खड़ी करने के चलन का त्याग कर दिया। इसके बदले में उसने सिपाहियों को सीधे शामिल करना शुरू कर दिया, जिसके लिए प्रत्येक रंगरूट के चरित्र की जाँच की जाती थी। प्रत्येक सिपाही का पूरा व्यक्तिगत वर्णन दर्ज रहता था, जिसे 'चेहरा' कहते थे ।
27. घोड़ों को दागने की 'दाग-प्रणाली' शेरशाह ने किस सुल्तान से उधार ली थी ?
(a) गयासुद्दीन बलबन
(b) अलाउददीन खिलजी
(c) मोहम्मद बिन तुगलक
(d) फिरोजशाह तुगलक
उत्तर - (b)
व्याख्या- घोड़ों को दागने की 'दाग प्रणाली' शेरशाह ने दिल्ली सल्तनत के खिलजी वंश के शासक अलाउद्दीन खिलजी से उधार ली थी।
सर्वप्रथम अलाउद्दीन खिलजी ने इस प्रणाली को अपनाया था। सेना को शक्तिशाली एवं संगठनात्मक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से घोड़े पर शाही निशान का दाग लगाया जाता था, ताकि कोई उसके बदले घटिया दर्जे के घोड़े का उपयोग न कर सके।
28. शेरशाह की सेना के संबंध में कौन-सा कथन असत्य है ?
(a) उसकी सेना में 1,50,0000 घुड़सवार थे।
(b) उसकी सेना में पैदल सैनिकों की संख्या 25,000 थी।
(c) सैनिक तोड़ेदार बंदूकों या धनुषों से सज्जित होते थे।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (d)
व्याख्या- शेरशाह की सेना के संबंध में दिए गए सभी कथन सत्य हैं। शेरशाह की विशेष सेना में 1,50,0000 घुड़सवार और 25,000 पैदल सैनिक बताए जाते हैं। ये लोग तोड़ेदार बंदूक एवं धनुष से सज्जित होते थे। इसके अतिरिक्त उसमें 5000 हाथी और तोपों का एक दस्ता भी था। शेरशाह ने अपने साम्राज्य में सैन्य छावनियाँ भी स्थापित कीं।
29. मध्यकालीन भारत के किस शासक ने कहा था कि "न्याय धार्मिक कृत्यों में से सबसे श्रेष्ठ है और इसका अनुमोदन काफिर तथा मुसलमान दोनों करते हैं?"
(a) हुमायूँ
(b) शेरशाह
(c) इस्लाम शाह
(d) बहादुरशाह
उत्तर - (b)
व्याख्या- मध्यकालीन भारत के शासक शेरशाह ने कहा था कि "न्याय धार्मिक कार्यों में सबसे श्रेष्ठ है और इसका अनुमोदन काफिर और मुसलमान दोनों करते हैं।” न्याय व्यवस्था पर शेरशाह का विशेष ध्यान था । वह किसी भी अत्याचारी को चाहे वह कितना भी बड़ा सरदार क्यों न हो या उसके अपने कबीले का व्यक्ति अथवा उसका रिश्तेदार हो, माफ नहीं करता था। न्याय के लिए काजी की नियुक्ति की गई थी।
इसके अतिरिक्त फौजदारी और दीवानी दोनों प्रकार के मामलों को निपटारा स्थानीय तौर पर पंचायत और जमींदार किया करते थे।
30. मध्यकालीन किस शासक ने इस्लामी कानूनों की एक संहि ने करवाई थी?
(a) शेरशाह सूरी
(b) इस्लाम शाह
(c) इस्माइल खाँ
(d) मोहम्मद शाह
उत्तर - (b)
व्याख्या- मध्यकालीन शासक इस्लाम शाह ने इस्लामी कानूनों की एक संहिता तैयार करवाई थी । इस्लाम शाह शेरशाह का उत्तराधिकारी एवं उसका पुत्र था, न्याय के क्षेत्र में उसका यह कदम महत्त्वपूर्ण माना जाता है। उसके शासनकाल में अमीरों के विशेषाधिकारों पर भी अंकुश लगा दिया गया, परंतु इस्लाम शाह के निधन के पश्चात् उसके द्वारा बनाई गई संहिता भी समाप्त हो गई।
31. शेरशाह के काल की घटनाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
1. शेरशाह ने आगरा में पुराना किला और उसके अंदर एक मस्जिद का निर्माण करवाया था।
2. उसके शासनकाल में मलिक मुहम्मद जायसी ने फारसी में पद्मावत की रचना की थी।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) केवल 3
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - (d)
व्याख्या- शेरशाह के काल से संबंधित घटनाओं के संदर्भ में दिए गए कथनों में से कोई भी कथन सत्य नहीं है ।
शेरशाह ने दिल्ली में यमुना के किनारे पुराना किला और उसके अंदर एक मस्जिद का निर्माण करवाया था। इसके अतिरिक्त इसके शासनकाल में मलिक मुहम्मद जायसी ने हिंदी में पद्मावत की रचना की, जिसे एक प्रसिद्ध काव्य-ग्रंथ माना जाता था।
1. निम्नलिखित में से किस स्थान पर अकबर को हुमायूँ की मृत्यु की सूचना मिलने पर राजगद्दी पर बैठाया गया था?
(a) काबूल
(b) लाहौर
(c) सरहिंद
(d) कलानौर
उत्तर - (d)
व्याख्या- 1556 ई. में हुमायूँ की मृत्यु के बाद अकबर को पंजाब के कलानौर के समीप गद्दी पर बैठाया गया था, उस समय अकबर की आयु 14 वर्ष थी। अकबर ने बैरम खाँ के संरक्षण में मुगल वंश की बागडोर संभाली थी।
2. अकबर के समकालीन हेमचंद्र विक्रमादित्य या हेमू के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए |
1. हेमू ने अपना जीवन इस्लामशाह के अधीन एक बाजार अधीक्षक के रूप में आरंभ किया था।
2. वह बाईस लड़ाइयाँ लड़ चुका था और उनमें से किसी में भी उसे हार का सामना नहीं करना पड़ा था।
3. इस्लाम शाह ने हेमू को 'विक्रमादित्य' की उपाधि दी थी।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन असत्य है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) 1 और 3
(c) 2 और 3
(d) केवल 3
उत्तर - (d)
व्याख्या- अकबर के समकालीन हेमू के संबंध में केवल कथन (3) असत्य है, क्योंकि हेमू को 'विक्रमादित्य' की उपाधि इस्लामशाह ने नहीं, बल्कि आदिलशाह ने दी थी। इसे मध्यकाल में भारत का अंतिम हिंदू शासक माना जाता है। यह शेरशाह सूरी का योग्य दीवान, कोषाध्यक्ष और सेनानायक था।
3. अकबर के संरक्षक तथा हुमायूँ के विश्वस्त अधिकारी बैरम खाँ ने कौन-सी उपाधि धारण की थी ?
(a) 'सर-ए-जानदार'
(b) 'खान-ए-खानन'
(c) नियाबत - ए - खुदाई
(d) जिल्ले-इलाही
उत्तर - (b)
व्याख्या- अकबर के संरक्षक तथा हुमायूँ के विश्वस्त अधिकारी बैरम खाँ ने ‘खान-ए-खानान' की उपाधि धारण की थी। बैरम खाँ के नेतृत्व में मुगल सेना सुसंगठित होने लगी थी। एक संरक्षक एवं कुशल अभिभावक के रूप में बैरम खाँ प्रतिकूल परिस्थितियों में मुगल साम्राज्य को मजबूत बनाने व अफगानी शक्तियों को पराजित करने में सफल रहा।
4. पानीपत के द्वितीय युद्ध के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
1. यह युद्ध अकबर और हेमू के मध्य हुआ था।
2. हेमू राजपूत सेना का नेतृत्व कर रहा था।
3. मुगल सेना का नेतृत्व बैरम खाँ ने किया था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) 1 और 3
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (b)
व्याख्या- पानीपत के द्वितीय युद्ध के संबंध में दिए गए कथनों में से कथन (1) और (3) सत्य हैं। पानीपत का द्वितीय युद्ध 1556 ई. में अकबर और हेमू के मध्य लड़ा गया था। इस युद्ध में मुगल सेना का नेतृत्व अकबर का संरक्षक बैरम खाँ कर रहा था। इस युद्ध में अकबर विजयी हुआ था।
कथन (2) असत्य है, क्योंकि हेमू राजपूत सेना का नहीं, बल्कि अफगानी सेना का नेतृत्व कर रहा था।
5. बैरम खाँ के संबंध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) अकबर ने उसे 'मक्का' जाने का विकल्प दिया था।
(b) एक अफगान सरदार ने अहमदाबाद में उसकी हत्या कर दी थी।
(c) अकबर ने उसकी पत्नी से विवाह कर लिया था।
(d) वह एक सुन्नी सरदार था।
उत्तर - (d)
व्याख्या- वैरम खाँ के संबंध में दिए गए कथनों में से कथन (d) सत्य नहीं है, क्योंकि वैरम खाँ एक शिया सरदार था, यही कारण था कि अकबर के दरबार में उसकी उपेक्षा की जाने लगी। उस पर आरोप लगा कि वह शिया लोगों पर अधिक मेहरवान रहता था, जिस कारण अकबर ने उसे सत्ता से दूर रहने की अनुमति दी और उसे 'मक्का' जाने का विकल्प दिया था।
वैरम खाँ की मृत्यु के बाद अकबर ने उसकी विधवा सलीमा बेगम से विवाह कर लिया था।
6, अकबर ने माहम अनगा के पुत्र आदम खाँ को किस आक्रमण का नेतृत्व प्रदान किया था?
(a) गुजरात
(b) राजस्थान
(c) मालवा
(d) दिल्ली
उत्तर - (c)
व्याख्या- अकबर ने माहम अनगा के पुत्र आदम खाँ को मालवा पर आक्रमण का नेतृत्व प्रदान किया था। आदम खाँ ने 1561 ई. में मालवा पर आक्रमण किया, उस समय मालवा का शासक बाजबहादुर था, जो पराजित हुआ।
7. अकबर के समकालीन बाजबहादुर के संबंध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) वह मालवा का शासक था।
(b) उसके विभिन्न गुणों में उसकी संगीत प्रवीणता और काव्य पटुता भी शामिल थी।
(c) रूपमती के साथ बाजबहादुर की प्रेम कथाएँ लोकविदित हैं।
(d) उसके शासनकाल में उज्जैन संगीत का एक विख्यात केंद्र था।
उत्तर - (d)
व्याख्या- अकबर के समकालीन बाजबहादुर के संबंध में दिए गए कथनों में से कथन (d) सत्य नहीं है। बाजबहादुर मालवा का शासक था, उसके शासनकाल में उज्जैन नहीं, बल्कि मांडू संगीत का एक विख्यात केंद्र था। के विभिन्न गुणों में उसकी संगीत प्रवीणता और काव्य पटुता भी बाजबहादुर शामिल थी। बाजबहादुर की अपनी पत्नी एवं प्रेयसी रूपमती के साथ प्रेम कथाएँ लोकविदित मानी जाती हैं।
8. अकबर के साथ युद्ध करने वाली रानी दुर्गावती कहाँ की शासिका (रिजेंट) थीं?
(a) गढ़ मंडला
(b) मांडू
(c) असीरगढ़
(d) रामगढ़
उत्तर - (a)
व्याख्या- अकबर के साथ युद्ध करने वाली रानी दुर्गावती गढ़ मंडला की शासिका थीं। 1564 ई. में अकबर ने अपने सैन्य अधिकारी आसफ खाँ को गढ़ मंडला राज्य पर आक्रमण कर उसे जीतने के लिए भेजा। गढ़ मंडला का शासक वीरनारायण अल्पवयस्क था, जिसकी संरक्षिका उसकी माँ दुर्गावती थी।
9. राजपूतों में प्रसिद्ध योद्धा जयमल और फत्ता का संबंध किस राज्य से था?
(a) चित्तौड़
(b) मेवाड़
(c) जोधपुर
(d) मालवा
उत्तर - (a)
व्याख्या- राजपूतों के प्रसिद्ध योद्धा जयमल और फत्ता का संबंध चित्तौड़ राज्य से था। चित्तौड़ के तत्कालीन शासक राणा उदयसिंह ने चित्तौड़ के किले की सुरक्षा की जिम्मेदारी इन दोनों को ही सौंप रखी थी। इन दोनों योद्धाओं ने किले की रक्षा में सक्रिय योगदान दिया।
10. अकबर द्वारा जीते गए राजपूत राज्यों का सही क्रम कौन-सा है ?
(a) चित्तौड़- रणथंभौर - बीकानेर-जैसलमेर
(b) रणथंभौर-चित्तौड़ - बीकानेर-जैसलमेर
(c) बीकानेर - जैसलमेर-चित्तौड़- रणथंभौर
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (a)
व्याख्या- अकबर द्वारा जीते गए राजपूत राज्यों का सही क्रम है- चित्तौड़ (1567 ई.), रणथंभौर (1569 ई.), बीकानेर (1570 ई.) तथा जैसलमेर (1570 ई.)।
मेवाड़ को छोड़कर अधिकतर राजपूत शासकों ने अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली थी। सबसे पहले उसने चित्तौड़ पर विजय प्राप्त की, उस समय चित्तौड़ का किला सबसे शक्तिशाली माना जाता था। चित्तौड़ विजय के बाद रणथंभौर पर विजय प्राप्त की गई। तत्पश्चात् बीकानेर व जैसलमेर के राजपूत शासकों ने भी अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली।
11. अकबर की गुजरात विजय के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सत्य नहीं है ?
(a) उसने 1572 ई. में अहमदाबाद पर अधिकार कर लिया।
(b) कांबे नामक स्थान पर उसने पहली बार समुद्र देखा था।
(c) उसके समय में पुर्तगालियों ने समुद्र पर वर्चस्व स्थापित कर लिया था।
(d) गुजरात अभियान में मिर्जाओं ने उसका साथ दिया था।
उत्तर - (d)
व्याख्या- अकबर की गुजरात विजय के संबंध में दिए गए कथनों में से कथन (d) सत्य नहीं है।
गुजरात अभियान में मिर्जाओं ने अकबर का साथ नहीं दिया था, बल्कि अकबर ने इनके विरुद्ध भी सैन्य कार्रवाई करके भरूच, बड़ौदा और सूरत पर अधिकार कर लिया। अपने गुजरात विजय अभियान के दौरान अकबर ने 1572 ई. में अहमदाबाद पर अधिकार कर लिया। गुजरात के कांबे नामक स्थान पर ही अकबर ने पहली बार समुद्र देखा था। उस समय गुजरात के समुद्री तटों पर पुर्तगालियों का वर्चस्व था और इसी समय पुर्तगालियों की एक व्यापार मंडली ने अकबर से भेंट की थी।
12. बिहार के किस शासक को पराजित कर अकबर ने उत्तर भारत के अंतिम अफगान राज्य को समाप्त कर दिया?
(a) तुगरिल खान
(b) दाऊद खाँ
(c) बुगरा खाँ
(d) इस्लाम शाह
उत्तर - (b)
व्याख्या- 1576 ई. में बिहार के शासक दाऊद खाँ को पराजित कर अकबर ने उत्तर भारत के अंतिम अफगान राज्य को समाप्त कर दिया था। इस विजय के बाद ही अकबर के साम्राज्य विस्तार का प्रथम चरण समाप्त हो गया। इससे पूर्व बिहार में मुगलों की स्थिति बेहद कमजोर थी, परंतु इस सैन्य अभियान के बाद बिहार से अफगान शासन का अंत हो गया।
13. निम्नलिखित में किस व्यक्ति ने बिहार तथा बंगाल में मुगल सेना का नेतृत्व किया था?
(a) मुनीम खाँ
(b) बैरम खाँ
(c) मानसिंह
(d) तिरगी बेग
उत्तर - (a)
व्याख्या- 'खान-ए-खाना' मुनीम खाँ ने बिहार एवं बंगाल में मुगल सेना का नेतृत्व किया। अकबर, मुनीम खाँ पर नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपकर स्वयं आगरा लौट गया। मुनीम खाँ एक अनुभवी सेनापति एवं योद्धा था, जिसने बंगाल एवं बिहार पर आक्रमण कर वहाँ के अफगानी शासक को परास्त किया। दाऊद खाँ एक प्रभावशाली अफगानी शासक था, परंतु मुनीम खाँ के पराक्रम के समक्ष उसे पराजय का सामना करना पड़ा।
1. किस राजपूत शासक ने अपनी पुत्री हरखा बाई का विवाह अकबर से किया था ?
(a) राजा भारमल
(b) राजा टोडरमल
(c) राजा मानसिंह
(d) राजा जयसिंह
उत्तर - (a)
व्याख्या- आमेर के राजपूत शासक राजा भारमल ने अपनी छोटी बेटी हरा बाई का विवाह अकबर से किया था। राजा भारमल पहला ऐसा राजपूत शासक था, जिसने प्रारंभ में ही अकबर के साथ सौहार्द्रपूर्ण संबंध स्थापित किए। ऐसा करके भारमल मुगलों के साथ मित्रवत् संबंध बनाए रखना चाहता था। इसके बदले में भारमल को एक बड़ा सरदार बना दिया गया, साथ ही उसका बेटा भगवान दास 5 हजार दर्जे वाला मनसबदार बन गया।
2. अकबर के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. अकबर ने अपनी हिंदू पत्नियों को पूर्ण धार्मिक स्वतंत्रता दी।
2. मानसिंह को 7 हजारी मनसब का दर्जा दिया।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - (c)
व्याख्या- अकबर के संबंध में दिए गए दोनों कथन (1) और (2) सत्य हैं । अकबर ने अपनी हिंदू पत्नियों को पूर्ण धार्मिक स्वतंत्रता दी, साथ ही उनके माता-पिताओं और सगे-संबंधियों को सरदारों की जमात में सम्मानजनक स्थान दिया। उसने मानसिंह को 7 हजारी मनसब का दर्जा दिया।
3. 1672 ई. में जब अकबर गुजरात अभियान में गया, तो उसने आगरा की जिम्मेदारी किस राजपूत शासक को सौंपी थी?
(a) भगवान दास
(b) भारमल
(c) बीरबल
(d) मानसिंह
उत्तर - (b)
व्याख्या- 1672 ई. में जब अकबर गुजरात अभियान में गया, तो आगरा की जिम्मेदारी अपने ससुर भारमल को सौंप दी थी। आमेर का शासक भारमल अकबर का सबसे विश्वसनीय सरदार माना जाता था।
4. निम्नलिखित में किन राजपूत राजाओं के साथ अकबर का कोई वैवाहिक संबंध नहीं था?
(a) रणथंभौर के हाड़ाओं के साथ
(b) आमेर के राजपूतों के साथ
(c) चित्तौड़ के राजपूतों के साथ
(d) जोधपुर के राजपूतों के साथ
उत्तर - (a)
व्याख्या- रणथंभौर के 'हाड़ा राजपूत' राजाओं ने अकबर के साथ किसी भी प्रकार का वैवाहिक संबंध स्थापित नहीं किया था, किंतु फिर भी अकबर उनका बहुत सम्मान करता था। अकबर ने हाड़ा राजा राव सुरजन हाड़ा को 2 हजार का मनसब प्रदान किया था तथा उसे गढ़ कटंगा राज्य की जिम्मेदारी भी दी थी।
5. निम्नलिखित में से कौन एकमात्र राजपूत राज्य था, जो मुगल प्रभुता स्वीकार न करने पर कायम रहा ?
(a) मेवाड़
(b) जैसलमेर
(c) बीकानेर
(d) आमेर
उत्तर - (a)
व्याख्या- मेवाड़ एकमात्र राजपूत राज्य था, जो मुगल प्रभुता स्वीकार न करने पर कायम रहा। चित्तौड़ विजय अभियान के बाद अधिकतर राजपूत शासकों ने अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली, परंतु मेवाड़ के राजपूत शासकों ने अधीनता स्वीकार नहीं की थी। 1572 ई. में राणा उदयसिंह का पुत्र राणा प्रताप गद्दी पर बैठा। अकबर चाहता था कि राणा प्रताप उसकी अधीनता स्वीकार कर ले, इसके लिए अनेक दूत भेजे गए, परंतु राणा ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। राणा प्रताप को मनाने के लिए मानसिंह को भी भेजा गया, परंतु राणा प्रताप ने मानसिंह को अपमानित कर वापिस भेज दिया था।
6. हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की सेना के सेनापति कौन थे?
(a) अनर सिंह
(b) मानसिंह
(c) हकीम खाँ
(d) शक्ति सिंह
उत्तर - (c)
व्याख्या- हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की सेना का सेनापति हकीम खाँ था वह एक अफगान सरदार था। 1576 ई. में राणा प्रताप एवं अकबर की सेना वे मध्य हल्दीघाटी का युद्ध लड़ा गया था, इस युद्ध में मुगलों की सेना का नेतृत्व नसिंह कर रहा था।
7. हल्दीघाटी के युद्ध के समय राणा की राजधानी कहाँ थी?
(a) अजमेर
(b) कुंभलगढ़
(c) हल्दीघाटी
(d) चित्तौड़
उत्तर - (b)
व्याख्या- हल्दीघाटी के युद्ध के समय राणा प्रताप की राजधानी कुंभलगढ़ थी। इसी के रास्ते में हल्दीघाटी नामक स्थान पर ऐतिहासिक युद्ध लड़ा गया था। इस युद्ध में राणा प्रताप को पराजय का सामना करना पड़ा।
8. राणा प्रताप के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा सत्य नहीं है?
(a) डूंगरपुर, बाँसवाड़ा तथा सिरोही राज्य राणा के मित्र थे।
(b) भील राजाओं ने राणा की व्यक्तिगत मदद की थी ।
(c) राणा ने डूंगरपुर के निकट 'चांबड़' में एक नई राजधानी स्थापित की।
(d) 1580 ई. में राणा की मृत्यु हो गई थी।
उत्तर - (d)
व्याख्या- राणा प्रताप के संबंध में दिए गए कथनों में कथन (d) सत्य नहीं है, क्योंकि राणा प्रताप की मृत्यु 1580 ई. में नहीं, बल्कि 51 वर्ष की अवस्था में 1597 ई. में हुई थी। राणा प्रताप उदयपुर मेवाड़ में सिसोदिया राजवंश के राजा थे।
9. किस शासक ने अपनी पुत्री जगत गोसाईं या जोधाबाई का विवाह अकबर के ज्येष्ठ पुत्र सलीम से कर दिया ?
(a) राजा चंद्रसेन
(b) राय सिंह बीकानेरी
(c) उदयसिंह
(d) अमरसिंह
उत्तर - (c)
व्याख्या- जोधपुर के प्रशासक चंद्रसेन के बड़े भाई उदयसिंह ने अपनी पुत्री जगत गोसाईं या जोधाबाई का विवाह अकबर के ज्येष्ठ पुत्र सलीम से कर दिया। पहली बार विवाह, हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ था।
अकबर का साम्राज्य विस्तार
1. अकबर के शासनकाल में सबसे गंभीर विद्रोह निम्नलिखित में से किस स्थान पर हुआ था?
(a) बंगाल
(b) बिहार
(c) 'a' और 'b' दोनों
(d) अजमेर
उत्तर - (c)
व्याख्या- अकबर के शासनकाल में सबसे गंभीर विद्रोह बंगाल और बिहार में हुआ था। इस विद्रोह का मुख्य कारण जागीरदारों के घोड़ों को दागने की प्रणाली और उनकी आमदनी का कड़ा लेखा-जोखा था। इस विद्रोह के साथ कुछ उलेमा भी अकबर के उदारवादी विचारों से सहमत नहीं थे। काबुल के शासक और अकबर के एक भाई मिर्जा हकीम ने भी इस विद्रोह को प्रोत्साहित किया।
2. अकबर के साम्राज्य विस्तार के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. उसने राजा टोडरमल के नेतृत्व में एक सेना बंगाल और बिहार भेजी थी।
2. मिर्जा हकीम के विरुद्ध राजा मानसिंह को भेजा था ।
3. अकबर ने 1580 ई. में काबुल पर आक्रमण किया था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन असत्य है / हैं?
(a) 1 और 2
(b) 1 और 3
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (c)
व्याख्या- अकबर के साम्राज्य विस्तार के संबंध में दिए गए कथनों में से कथन (3) असत्य है, क्योंकि अकबर ने 1580 ई. नहीं, बल्कि 1581 ई. में काबुल पर आक्रमण किया था, जिसका नेतृत्व अकबर तथा मानसिंह ने किया था।
3. अकबर के प्रिय पात्र और सेनापति बीरबल की हत्या किस युद्ध में हुई थी?
(a) बलुचिस्तान
(b) सिंध
(c) कंधार
(d) बिहार
उत्तर - (a)
व्याख्या- अकबर के प्रिय पात्र और सेनापति बीरबल की हत्या बलुचिस्तान के युद्ध के दौरान हुई थी। 1586 ई. बीरबल को बलुचिस्तान में पख्तुन युसुफजाई कबीलों के विद्रोह को दबाने के लिए भेजा गया था। बीरबल के साथ जैन खान कोका भी अकबर की सेना में शामिल था।
जैन खान कोका ने धोखे के साथ बीरबल को अफगानिस्तान की धूसर पहाड़ियों में भेज दिया, जहाँ ईष्यालु सैनिकों ने उसकी हत्या कर दी।
1. अकबर के सुधारों के संबंध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) उसने जजिया कर को समाप्त कर दिया।
(b) उसने तीर्थयात्रा कर को पुनर्जीवित किया।
(c) उसने इबादतखाना की स्थापना की।
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर - (b)
व्याख्या- अकबर के सुधारों के संबंध में कथन (b) सत्य नहीं है, क्योंकि 91. इबादतखाना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए अकबर ने तीर्थयात्रा कर को पुनर्जीवित नहीं, बल्कि इसे 1563 ई. में पूरी तरह समाप्त कर दिया था। (Chap-13, Class-XI, Old NCERT) स्थापना आगरा में 1576 ई. में हुई थी।
उसने 1562 ई. में गैर-मुसलमानों से वसूला जाने वाला धार्मिक कर, जजिया को भी समाप्त कर दिया। उसने इबादतखाना की स्थापना की, जिसमें सभी धर्म के लोगों को विशेष स्थान दिया गया। उसने धार्मिक अनुष्ठान संबंधित मामलों में कभी हस्तक्षेप नहीं किया।
2. अबुल फजल ने किसे 'फर - ए - ईजादी' कहकर संबोधित किया है?
(a) सच्चे बादशाह को
(b) दैवी ज्ञान को
(c) फारसी साहित्य को
(d) तैमूरी राजस्व को
उत्तर - (b)
व्याख्या- अबुल फजल ने दैवी ज्ञान को 'फर - ए - ईजादी' कहकर संबोधित किया। अबुल फजल के अनुसार सच्चे बादशाह का पद बहुत जिम्मेदारी का पद माना जाता है, जो दैवी ज्ञान (फर्र - ए - ईजादी) पर निर्भर करता है, इसलिए अल्लाह और सच्चे बादशाह के मध्य कोई बाधा खड़ी नहीं कर सकता है।
3. अकबर द्वारा अपनाई गई 'सुलह-ए-कुल' की नीति का शाब्दिक अर्थ क्या होता है ?
(a) सबका मालिक एक है ।
(b) सबके लिए सलामती की नीति ।
(c) सबका धर्म एक-सा है।
(d) सर्व सम्मान की नीति।
उत्तर - (b)
व्याख्या- अकबर द्वारा अपनाई गई 'सुलह-ए-कुल' की नीति का शाब्दिक अर्थ- सबके लिए सलामती की नीति होता है। अकबर की यह नीति उसके उदारवादी विचारों को प्रतिबिंबित करती है। आरंभ में अकबर भले ही एक कट्टर मुसलमान था, परंतु कालांतर में उसके विचार बदल गए थे । वह ईश्वर के चिंतन में लगा रहता था, सभी धर्मों को सम्मान देने लगा था। इसी उद्देश्य से उसने सुलह-ए-कुल की नीति को अपनाया।
4. अकबर ने अपने दरबार में उदार विचारों वाले मेधावी व्यक्तियों का एक समूह एकत्रित किया था। निम्नलिखित में से कौन इनमें शामिल नहीं था ?
(a) अबुल फजल
(b) फैजी
(c) महेशदास
(d) बैरम खान
उत्तर - (d)
व्याख्या- अकबर ने अपने दरबार में उदार विचारों वाले मेधावी व्यक्तियों का एक समूह एकत्रित किया था, जिसमें बैरम खान शामिल नहीं था। मेधावी व्यक्तियों के समूह में अबुल फंजल, फैजी महेशदास, मुल्ला दो प्याजा, मानसिंह, अब्दुल रहीम खानखाना शामिल थे। बैरम खान अकबर का संरक्षक था।
5. अकबर ने किस अधिकारी को 'मदद-ए-मआश' के वितरण में भ्रष्टाचार का दोषी पाए जाने पर सजा दी थी ?
(a) अब्दुन्नबी खाँ
(b) फैजी
(c) अबुल फजल
(d) मुल्ला- दो - प्याजा
उत्तर - (a)
व्याख्या- 1575 ई. में अकबर ने अब्दुन्नबी खाँ को 'मदद-ए-मआश' ( जमीन के वितरण के मामले में) भ्रष्टाचार और अत्याचार का दोषी पाया गया था, उसने अन्य भ्रष्ट तरीके से काफी संपत्ति जमा कर ली थी। वह एक धर्मांध व्यक्ति था, उसने शिक्षाओं तथा मथुरा के ब्राह्मणों को धार्मिक विश्वास के कारण जिस कारण उसे अधिकारी पद से हटा दिया गया था। मृत्युदंड दिया था,
6. अकबर के 'मजहर' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. इसकी घोषणा 1579 ई. में हुई थी।
2. इसे 'समरथ की अमोघत्व का आदेश' कहा गया।
3. यह साम्राज्य की धार्मिक परिस्थितियों को स्थिरता प्रदान करने में सहायक सिद्ध हुआ।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) 1 और 3
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (d)
व्याख्या- अकबर के 'मजहर' के संबंध में दिए गए सभी कथन सत्य हैं। अकबर ने मजहर की घोषाणा 1579 ई. में की थी, इसे 'समरथ की अमोघत्व का आदेश' कहा गया। मजहर के माध्यम से साम्राज्य की धार्मिक परिस्थितियों को स्थिरता प्रदान करने में काफी सहायता मिली थी ।
7. अकबर के सामाजिक सुधारों के संबंध में कौन-सा कथन सत्य है?
(a) उसने सती प्रथा समाप्त कर दी ।
(b) विधवा विवाह को कानूनी समर्थन दिया।
(c) विवाह की आयु को बढ़ाकर लड़कियों के मामले में 14 वर्ष तथा लड़कों के लिए 16 वर्ष कर दिया
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर - (d)
व्याख्या- अकबर के सामाजिक सुधारों के संबंध में दिए गए सभी कथन सत्य हैं।
अकबर ने समाज में प्रचलित सती प्रथा पर रोक लगा दी। उसने विधवा विवाह को भी मान्यता दी, ताकि सती होने की आवश्यकता ही न पड़े। अकबर ने विवाह की आयु को बढ़ाकर लड़कियों के लिए 14 वर्ष तथा लड़कों के लिए 16 वर्ष कर दिया था।
1. जहाँगीर के संबंध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) वह अकबर का ज्येष्ठ पुत्र था।
(b) उसके बचपन का नाम सलीम था।
(c) उसके भाई खुसरो ने जहाँगीर के विरुद्ध विद्रोह किया था।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (c)
व्याख्या- जहाँगीर के संबंध में कथन (c) सत्य नहीं है, क्योंकि खुसरो जहाँगीर का भाई नहीं, बल्कि पुत्र था।
अकबर का उत्तराधिकारी जहाँगीर 1605 ई. में मुगल शासक बना, उसके सत्ताहीन होने के कुछ ही समय बाद लगभंग 1606 ई में उसके ज्येष्ठ पुत्र खुसरो ने अपने ही पिता जहाँगीर के विरुद्ध सत्ता प्राप्ति के लिए विद्रोह प्रारंभ कर दिया। खुसरो और जहाँगीर की सेना के मध्य जालंधर के भैरवाल मैदान में युद्ध हुआ, जिसमें खुसरो की पराजय के उपरांत उसे पकड़कर जेल में डाल दिया गया।
2. जहाँगीर द्वारा साम्राज्य विस्तार के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. जहाँगीर ने मेवाड़ के साथ चार दशकों से चले आ रहे संघर्ष को समाप्त कर दिया।
2. जहाँगीर ने मानसिंह को बंगाल का सूबेदार बनाकर भेजा था।
3. जहाँगीर ने इस्लाम खाँ को 1600 ई. में बंगाल की जिम्मेदारी सौंपी थी।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (d)
व्याख्या- जहाँगीर द्वारा साम्राज्य विस्तार के संबंध में दिए गए सभी कथन सत्य हैं। जहाँगीर का शासनकाल 1605 ई. से 1627 ई. तक रहा। जहाँगीर का काल मुगल साम्राज्य में चित्रकला का 'स्वर्णिम काल' माना जाता है, हालाँकि जहाँगीर ने इस दौरान अपने सैन्य अभियान से मुगल सत्ता का विस्तार भी किया, जिनमें मेवाड़ की विजय महत्त्वपूर्ण थी, क्योंकि यह मुगलों के लिए पिछले चार दशकों से इसकी विजय हेतु प्रयास व संघर्ष किए जा रहे थे।
मेवाड़ विजय, जहाँगीर की एक प्रमुख सैन्य उपलब्धि मानी जाती है। बंगाल के क्षेत्र में कई अफगान सरदार मुगलों के लिए संकट बन गए थे, जिनमें मूसा खाँ, बारह भुइयाँ खाँ आदि महत्त्वपूर्ण थे। इन्होंने बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों; जैसे- ढाका, सोनारगाँव पर अधिकार कर लिया था, जिसके कारण जहाँगीर ने मानसिंह को बंगाल का सूबेदार बनाकर भेजा, किंतु स्थिति नियंत्रण में नहीं आई तत्पश्चात् जहाँगीर ने 1600 ई. में इस्लाम खाँ को वहाँ का सूबेदार बनाकर भेजा, जिसने इन सभी क्षेत्रों पर पुनः अधिकार स्थापित किया।
3. नूरजहाँ के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) जहाँगीर ने 1611 ई. में नूरजहाँ से निकाह किया था।
(b) पूर्व में वह शेर अफगान नामक ईरानी की पत्नी थी ।
(c) उसके पिता इतमाद्दुदौला मुगल दीवान थे।
(d) उसके भाई आसफ खाँ को मीर बक्शी बनाया गया था।
उत्तर - (d)
व्याख्या- नूरजहाँ के संबंध में कथन (d) सत्य नहीं है, क्योंकि आसफ खाँ को 'मीर बक्शी' (सैन्य विभाग) नहीं, बल्कि 'खान-ए- सामा' बनाया गया था। नूरजहाँ का वास्तविक नाम मेहरुन्निसा था तथा इसके पिता इतमाद्द्दौला, मुगलों के दीवान थे। इसके प्रथम पति का नाम शेर अफगान था, जिसकी मृत्यु के बाद नूरजहाँ का विवाह 1611 ई. में जहाँगीर से हुआ।
4. खुर्रम के विद्रोह को समाप्त करने के लिए जहाँगीर ने किसे भेजा था?
(a) आसफ खाँ को
(b) महावत खाँ को
(c) मलिक अंबर को
(d) इतमादुदौला को
उत्तर - (b)
व्याख्या- खुर्रम द्वारा अपने ही पिता जहाँगीर के विरुद्ध प्रारंभ किए गए विद्रोह को समाप्त करने के लिए जहाँगीर ने महावत खाँ को भेजा था, जिसने खुर्रम को पराजित किया। अंतत: 1626 ई. में विद्रोह समाप्त हुआ और पिता-पुत्र में समझौता हो गया।
1. शाहजहाँ के संबंध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) शाहजहाँ का शासनकाल 1628-58 ई. तक था।
(b) वह जहाँगीर का ज्येष्ठ पुत्र था।
(c) उसने कंधार अभियान किया था।
(d) उपर्युक्त में से कोई अभियान नहीं
उत्तर - (b)
व्याख्या- शाहजहाँ के संबंध में कथन (b) सत्य नहीं है, क्योंकि शाहजहाँ, जहाँगीर का पुत्र था, परंतु जहाँगीर का ज्येष्ठ पुत्र शाहजहाँ न होकर खुसरो था। शाहजहाँ का शासनकाल (1628-58 ई.) परिवर्तनों और हलचलों का काल था। शाहजहाँ ने उत्तराधिकार के लिए विद्रोह किया और उसमें सफल रहा तथा मुगल वंश की सत्ता प्राप्त की।
2. शाहजहाँ के शासनकाल की महत्त्वपूर्ण घटनाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. बुखारा और बल्ख पर नजर मुहम्मद ने अधिकार कर लिया था।
2. अब्दुल अजीज ने जहाँगीर के विरुद्ध विद्रोह कर दिया।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - (a)
व्याख्या- शाहजहाँ के शासनकाल में घटित होने वाली घटनाओं के संबंध में कथन (1) सत्य है।
आर्थिक और सामरिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण कंधार के क्षेत्र की विजय के उपरांत शाहजहाँ ने बुखारा और बल्ख अभियान को 1646 ई. में संचालित किया। बुखारा और बल्ख का क्षेत्र नजर मुहम्मद के अधिकार में था, लेकिन नजर मुहम्मद के पुत्र अब्दुल अजीज ने अपने ही पिता के विरुद्ध विद्रोह कर दिया और इसमें उसने जहाँगीर से सहायता की माँग की थी। जहाँगीर ने उसकी सहायता कर बुखारा और बल्ख के क्षेत्र पर अधिकार स्थापित किया।
3. शाहजहाँ ने मुगलों के 'वतन' को जीतने की इच्छा प्रकट की। यह 'वतन' कौन-सा था ?
(a) समरकंद और फरगना
(b) काबुल और बल्ख
(c) कंधार और बलुचिस्तान
(d) खुरासान और कंधार
उत्तर - (a)
व्याख्या- शाहजहाँ द्वारा मुगलों के 'वतन' समरकंद और फरगना को जीतने की इच्छा से प्रेरित था, क्योंकि मुगल दरबार में इसकी चर्चा अकसर होती रहती थी। साथ ही शाहजहाँ का उद्देश्य यह भी था कि इन क्षेत्रों में कोई मित्र शासक हो, जो काबुल की सीमा से लगे क्षेत्रों में अफगानी कबीलों को नियंत्रण में रखे ।
1. शाहजहाँ के पश्चात् हुए उत्तराधिकार के युद्ध में कौन विजयी रहा ?
(a) दाराशिकोह
(b) औरंगजेब
(c) शूजा
(d) सुलेमान
उत्तर - (b)
व्याख्या- शाहजहाँ के पश्चात् हुए उत्तराधिकार के युद्ध में औरंगजेब विजयी रहा था। शाहजहाँ के बीमार पड़ने और मृत्यु की अफवाह के उपरांत उसके पुत्रों दाराशिकोह और औरंगजेब के मध्य तीन उत्तराधिकार के युद्ध हुए थे, जिसमें औरंगजेब ने अपनी कूटनीति एवं सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करते हुए दाराशिकोह को धरमट के युद्ध ( 15 अप्रैल 1658) पराजित किया था।
2. सामूगढ़ का युद्ध किनके बीच में संपन्न हुआ था?
(a) दाराशिकोह और औरंगजेब
(b) सुलेमान शिकोह और शूजा
(c) औरंगजेब और शूजा
(d) दाराशिकोह और सुलेमान
उत्तर - (a)
व्याख्या- सामूगढ़ का युद्ध दूसरा उत्तराधिकार का युद्ध था, जोकि 29 मई, 1658 को औरंगजेब और दाराशिकोह के मध्य हुआ था। इस युद्ध में भी दाराशिकोह की हार हुई। में
उत्तराधिकार के युद्ध का मुख्य कारण मुगल सत्ता को प्राप्त करना था। शाहजहाँ अपने बड़े पुत्र दाराशिकोह को गद्दी देना चाहता था, परंतु औरंगजेब को यह मंजूर नहीं था, अतः उसने शाहजहाँ को आगरा के किले में कैद कर दिया और दाराशिकोह से युद्ध किया।
3. औरंगजेब के संबंध में निम्नलिखित कथनों में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) उसने शहजादा मुअज्जम को 12 वर्षों तक जेल में कैद रखा।
(b) उसका व्यक्तिगत जीवन बहुत साधारण था।
(c) उसकी ख्याति एक धार्मिक उदारवादी बादशाह के रूप में थी।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (c)
व्याख्या- औरंगजेब के संबंध में कथन (c) सत्य नहीं है, क्योंकि औरंगजेब की ख्याति एक धार्मिक उदारवादी बादशाह के रूप में न होकर एक कट्टरतावादी शासक के रूप में थी। उसके धार्मिक विचार रूढ़िवादी थे। वह दार्शनिक रहस्यवाद में रुचि नहीं रखता था। उसने अपने साम्राज्य में मुस्लिम कानून (शरिया) को मजबूती से लागू किया, इसके लिए उसने मुहतसिब को नियुक्त किया, जिसका कार्य लोगों को शरिया कानून के अनुसार चलने के लिए निर्देशित करना होता था। इसने हिंदुओं पर जजिया कर पुन: लगा दिया था।
4. औरंगजेब के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. उसने कश्मीर से लेकर जिंजी तथा हिंदूकुश से लेकर चटगाँव तक साम्राज्य का विस्तार किया।
2. उसे 'जिंदा पीर' के नाम से जाना जाता है।
3. उसने अपने शासन में 'हनीफ' कानून को अपनाया था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) 1 और 3
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (d)
व्याख्या- औरंगजेब के संबंध में दिए गए सभी कथन सत्य हैं।
औरंगजेब लगभग 50 वर्षों (1658-1707 ई.) तक मुगल सत्ता पर काबिज रहा, इसके शासनकाल में मुगल साम्राज्य का सर्वाधिक विस्तार हुआ। इसके शासनकाल में मुगल साम्राज्य अपनी पराकाष्ठा पर पहुँच गया, जो उत्तर में कश्मीर से दक्षिण में जिंजी तक तथा पश्चिम में हिंदूकुश से पूर्व में चटगाँव तक फैला हुआ था।
यह औरंगजेब को सशक्त और कर्मठ शासक के रूप में प्रस्तुत करता है, परंतु वह धार्मिक दृष्टिकोण से कट्टरतावादी था। हिंदुओं के विरुद्ध अनेक धार्मिक अत्याचार और मुस्लिम आस्था का अत्यधिक समर्थन करने के कारण उसे 'जिंदा पीर' कहा जाता था। साथ ही उसने शासन व्यवस्था में मुस्लिम कानून की 'हनीफ' कानून की व्याख्या को अपनाया, जिसका पालन भारत में पारंपरिक रूप से किया जा रहा था।
5. औरंगजेब के काल में जारी किए जाने वाले धर्मनिरपेक्ष फरमान को क्या कहा जाता था?
(a) जवाबीत
(b) हनीफ
(c) शरीयत
(d) फबाजील
उत्तर - (a)
व्याख्या- औरंगजेब द्वारा जारी किए जाने वाले धर्मनिरपेक्ष फरमान को 'जवाबीत' कहा जाता था। जवाबीत-ए-आलमगिरि नामक एक कृति में औरंगजेब के ऐसे फरमानों को संकलित किया गया है।
6. औरंगजेब की धार्मिक नीति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. उसने अपने शासनकाल में सिक्कों पर कलमा की खुदाई करने का निषेध कर दिया।
2. उसने नौरोज के त्यौहार की मनाही कर दी।
3. सभी सूबों में मुहतसिब की नियुक्ति पर पाबंदी लगा दी।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (a)
व्याख्या- औरंगजेब की धार्मिक नीति के संबंध में कथन (1) और (2) सत्य हैं ।
औरंगजेब एक रूढ़िवादी मुस्लिम शासक था। उसकी धार्मिक नीति एकपक्षीय थी। उसने अपने शासनकाल के आरंभ में ही सिक्कों पर कलमा की खुदाई बंद करवा दी। उसका मानना था कि सिक्कों पर किसी के पैर रखने या एक-हाथ से दूसरे हाथ में पहुँचने के क्रम में नापाक हो जाए तो यह कलमा का अपमान होगा और यह अधर्म होगा।
उसने ईरानी जरथुस्ती के पर्व नौरोज पर पाबंदी लगा दी, जो इसके अन्य धर्म के प्रति उपेक्षा को दर्शाता है।
कथन (3) असत्य है, क्योंकि उसने सूबों में मुहतसिब नियुक्त किए, जिसका कार्य यह था कि वह लोगों को शरा ( धार्मिक कानून) के अनुसार जीवन व्यतीत करने को निर्देशित करे ।
7. औरंगजेब निम्नलिखित में से कौन-सा वाद्ययंत्र बजाने में निपुण माना जाता था?
(a) सरोद
(b) सितार
(c) वीणा
(d) नगाड़ा
उत्तर - (c)
व्याख्या- औरंगजेब को वीणा बजाने में निपुण माना जाता था। औरंगजेब ने अपने शासनकाल के दौरान ऐसे कई कदम उठाए, जिन्हें शुद्धतावादी कहा गया, परंतु इसके पीछे वस्तुत: आर्थिक और सामाजिक उद्देश्य थे।
8. औरंगजेब के शासनकाल में तोड़े गए मथुरा के केवशराय मंदिर में का निर्माण किसने करवाया था ?
(a) वीरसिंह बुंदेला
(b) राजा भारमल
(c) शाह शूजा
(d) दाराशिकोह
उत्तर - (a)
व्याख्या- मथुरा के केशवराय मंदिर का निर्माण जहाँगीर के शासनकाल में वीरसिंह देव बुंदेला द्वारा करवाया गया था, जिसे 1669 ई. में औरंगजेब द्वारा तुड़वा दिया गया और इसके स्थान पर मस्जिद का निर्माण करवाया गया। इसके अतिरिक्त औरंगजेब ने बनारस के विश्वनाथ मंदिर को भी तुड़वा दिया था।
9. औरंगजेब की धार्मिक नीति का वर्णन करने वाली पुस्तक 'मआसिर-ए-आलमगिरि' की रचना किसने की थी ?
(a) खफी खाँ
(b) अब्बास खाँ सरबानी
(c) मुस्तैद खाँ
(d) बर्नियर
उत्तर - (c)
व्याख्या- औरंगजेब की धार्मिक नीति का वर्णन करने वाली पुस्तक 'मआसिर-ए-आलमगिरि' की रचना मुस्तैद खाँ ने की थी। इसमें औरंगजेब द्वारा मंदिर तोड़ने का हुक्म व तोड़े जाने वाले मंदिरों तथा हिंदुओं के प्रति अपनाए जाने वाले धर्मांध निर्णयों का वर्णन मिलता है।
10. औरंगजेब की धार्मिक-सामाजिक नीतियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. उसने जजिया कर को पुनः लागू किया था।
2. उसने 'अबवाव' नामक एक नया शुल्क अनिवार्य कर दिया था।
3. हिंदू जजिया कर को भेदभाव का द्योतक मानते थे।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) 1 और 3
(c) 1, 2 और 3
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर - (b)
व्याख्या- औरंगजेब की धार्मिक सामाजिक नीतियों के संबंध में कथन ( 1 ) और (3) सत्य हैं ।
औरंगजेब दूसरे धर्म के अनुयायियों के प्रति धर्मांध व्यवहार अपनाता था, जिसका परिचय उसके द्वारा मंदिरों के प्रति व्यवहार तथा पुनः जजिया कर लगाए जाने से लगाया जा सकता है। अकबर ने जजिया कर को समाप्त कर दिया था, परंतु औरंगजेब ने पुनः इसे 1679 ई. में लागू कर दिया।
शरिया के अनुसार, मुस्लिम राज्य में गैर-मुसलमानों को जजिया कर अदा करना अनिवार्य था, जिसका पालन औरंगजेब ने किया और इसे लागू किया। जजिया कर को हिंदू भेदभाव का द्योतक मानते थे । इतिहासकारों के अनुसार, यह कोई आर्थिक दबाव नहीं था, बल्कि हिंदुओं को इस्लाम कबूल करने पर मजबूर करने का प्रयास था।
कथन (2) असत्य है, क्योंकि औरंगजेब ने 'अबवाव' नामक शुल्क को अनिवार्य नहीं किया था और न ही इसका प्रावधान शरियत में था।
मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था
1. मुगलकालीन भू-राजस्व के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. अकबर ने वार्षिक राजस्व निर्धारण की प्रणाली फिर से आरंभ की।
2. कानूनगो नामक अधिकारी वास्तविक खेती की स्थिति की जानकारी बादशाह को भेजता था।
3. अकबर के काल में पूरे उत्तर भारत में 'करोरी' नाम से जानने वाले अमले भर्ती किए गए।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1, 2 और 3
(d) 1 और 3
उत्तर - (c)
व्याख्या- मुगलकालीन भू-राजस्व के संबंध में सभी कथन सत्य हैं।
गुजरात विजय (1571 ई.) के पश्चात् अकबर ने प्रशासनिक समस्याओं का समाधान करते हुए वार्षिक राजस्वं निर्धारण की प्रणाली को फिर से शुरू किया, जो हुमायूँ के समय बंद हो गई थी।
कानूनगो (अधिकारी) ने लोगों को, जो जमीन के वंशानुगत जोतदार और साथ ही स्थानीय परिस्थितियों से भली-भाँति अवगत थे, आदेश दिया गया था कि वे वास्तविक उपज, खेती की स्थिति, स्थानीय कीमतों आदि के विषय में जानकारी भेजे।
अकबर ने 1573 ई. में उत्तर भारत में 'करोरी' नाम से जानने वाले अमले भर्ती किए। उनमें से प्रत्येक को एक करोड़ 'दाम' वसूल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
2. 'दहसाला' पद्धति के संबंध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) इसे हुमायूँ ने प्रारंभ किया था।
(b) इस प्रणाली के अनुसार पिछले दस साल का हिसाब लगाया जाता था।
(c) औसत उपज का एक तिहाई भाग राज्य का हिस्सा तय किया गया।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (a)
व्याख्या- 'दहसाला' पद्धति के संबंध में कथन (a) सत्य नहीं है, क्योंकि दहसाला पद्धति की शुरुआत हुमायूँ ने नहीं, बल्कि अकबर ने प्रारंभ की थी। कानूनगो नामक अधिकारी से प्राप्त जानकारी के आधार पर दहसाला (दससाला) की शुरुआत 1580 ई. में हुई थी। इस प्रणाली के अंतर्गत पिछले दस (दह) साल के दौरान अलग-अलग फसलों की औसत उपजों और उनकी औसत कीमतों का हिसाब लगाया गया । औसत उपज का एक तिहाई भाग राज्य का हिस्सा तय किया गया, लेकिन राजस्व की माँग नकद के रूप में सामने रखी गई।
3. 'दहसाला प्रणाली' का परिष्कृत रूप निम्नलिखित में से किस रूप में सामने आया?
(a) जब्ती प्रणाली
(b) 'मन' प्रणाली
(c) गल्ला प्रणाली
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर - (a)
व्याख्या- जब्ती प्रणाली पूर्व से चलती आ रही 'दहसाला प्रणाली' का परिष्कृत रूप था।
मुगलकाल में यदि सूखे, बाढ़ आदि के कारण फसलें नष्ट हो जाती थीं, तो किसान को भू-राजस्व में छूट दी जाती थी। पैमाइश की इस प्रणाली और इस पर आधारित राजस्व निर्धारण को 'जब्ती' कहा जाता था। अकबर ने इस प्रणाली को लाहौर से इलाहाबाद तक और मालवा तथा गुजरात में लागू किया।
4. 'गल्ला - बख्शी' प्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. इसे बँटाई प्रणाली के नाम से भी जाना जाता है।
2. इस प्रणाली में उपज निर्धारित अनुपात में किसानों और राज्य में नहीं बाँटी जाती थी।
3. इस प्रणाली को बहुत न्यायपूर्ण माना जाता था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 3
(b) 1 और 2
(c) 1, 2 और 3
(d) केवल 2
उत्तर - (a)
व्याख्या- 'गल्ला- बख्शी' प्रणाली के संबंध में कथन (1) और (3) सत्य हैं । अकबर के शासनकाल में राजस्व निर्धारण की प्रणालियों का प्रयोग किया जाता था तथा सबसे पुरानी प्रणाली का नाम 'बँटाई' या 'गल्ला - बक्शी' था ।
इस प्रणाली को बहुत न्यायपूर्ण माना जाता था, लेकिन इसके लिए फसल की कटनी के समय या उसके पकते समय ईमानदार सरकारी आमलों की पूरी एक फौज की मौजूदगी की आवश्यकता रहती थी।
कथन (2) असत्य है, क्योंकि इस प्रणाली में उपज निर्धारित अनुपात में किसानों और राज्यों के मध्य बाँट दी जाती थी। फसल बोने के बाद या काटकर बोझा बाँधने के बाद अथवा जब खेत में खड़ी होती थी, उसी समय बाँट ली जाती थी।
5. मुगल काल में नसक' का प्रचलन किस रूप में था ?
(a) भू-राजस्व के रूप में
(b) सैन्य प्रशासन के रूप में
(c) राजकीय पोशाक के रूप में
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर - (a)
व्याख्या- मुगलकाल में 'नसक' का प्रचलन भू-राजस्व के रूप में था। यह प्रणाली मुगलकालीन शासक अकबर के समय प्रचलन में थी। इसे मध्यकालीन विद्वानों द्वारा 'ककूत' या 'आकलन' भी कहा जाता था। यह प्रणाली किसानों द्वारा अतीत में अदा किए जाने वाले राजस्व के आधार पर उसकी मौजूदा देनदारी के बारे में लगाया गया आकलन होता था।
6. मुगलकालीन भू-राजस्व प्रशासन के संबंध में कौन-सा कथन असत्य है?
(a) जिस जमीन पर लगभग प्रत्येक साल खेती की जाती थी उसे 'पोलज' कहा जाता था।
(b) जब उसमें खेती नहीं की जाती थी, तो उसे 'परती' कहते थे।
(c) जो जमीन लगातार दो तीन साल परती रहती थी, उसे 'चाचर' कहा जाता था।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (d)
व्याख्या- मुगलकालीन भू-राजस्व प्रशासन के संबंध में दिए गए कथनों में से कोई भी कथन असत्य नहीं है ।
मुगलकालीन कुछ क्षेत्रों में राजस्व निर्धारण की कुछ दूसरी पद्धतियाँ भी प्रचलन में थीं। भू-राजस्व के निर्धारण हेतु कृषि में स्थायित्व या निरंतरता का भी ध्यान रखा जाता था। जिस भूमि पर प्रत्येक वर्ष कृषि की जाती थी, वह 'पोलज' (उपजाऊ भूमि) कहलाती थी।
जब उस भूमि पर कृषि नहीं की जाती थी, तो वह 'परती' कहलाती थी। जो जमीन लगातार दो-तीन वर्षों तक परती रहती थी, उसे 'चाचर' कहा जाता था और तीन वर्ष से अधिक समय तक परती रहने वाली भूमि बंजर कहलाती थी। इस प्रकार, कृषि में भूमि का वर्गीकरण पोलज, परती, चाचर और बंजर में किया गया था।
7. 'मनसबदारी' पद्धति की शुरुआत निम्नलिखित में से किस मुगल बादशाह ने की थी ?
(a) हुमायूँ
(b) अकबर
(c) जहाँगीर
(d) औरंगजेब
उत्तर - (b)
व्याख्या- 'मनसबदारी' पद्धति की शुरुआत 1567 ई. में मुगल बादशाह में अकबर ने की थी। इस पद्धति के अंतर्गत सरदारों को, जो मनसब प्रदान किए जाते थे, वे 10,50 तथा 100 के गुणनफल के रूप में होते थे (अधिकतम 5000 ) । इस प्रकार, कुल 66 श्रेणियों को मनसबदारी पद्धति के अंतर्गत दर्शाया गया है, किंतु अबुल फजल ने 33 श्रेणियों का ही वर्णन किया है।
5000 से अधिक का मनसब शाही परिवार के सदस्यों को ही प्रदान किया जाता था, यद्यपि इस काल के दौरान अजीज कोका और मानसिंह को 7000 के मनसब दिए गए थे।
8. अकबर कालीन स्थानीय प्रशासन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. स्थानीय शासन के संगठन में अकबर ने कोई परिवर्तन नहीं किया।
2. सरकार के मुख्य अधिकारी फौजदार और अमलगुजार होते थे ।
3. फौजदार शांति व्यवस्था के लिए जिम्मेदार होता था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है /हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1, 2 और 3
(d) केवल 2
उत्तर - (c)
व्याख्या- अकबर कालीन स्थानीय प्रशासन के संबंध में दिए गए सभी कथन सत्य हैं ।
अकबर ने स्थानीय प्रशासन के संगठन में किसी भी प्रकार का कोई परिवर्तन नहीं किया। यह व्यवस्था पूर्ववत् परगने और सरकार के रूप कायम रही। अकबर कालीन स्थानीय प्रशासन में सरकार का मुख्य अधिकारी फौजदार और अमलगुजार होता था।
अकबरकालीन सरकारों के मुख्य अधिकारी अपने-अपने कार्यों को संभालते थे, जिनमें फौजदार शांति व्यवस्था के कार्यों को संभालता था, जबकि अमलगुजार का कार्य भू-राजस्व निर्धारित करना तथा उसे वसूल करना था।
9. मुगलकालीन प्रशासन के संबंध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) अकबर की केंद्रीय शासन प्रणाली सल्तनत कालीन प्रशासन पर आधारित थी।
(b) मुगल प्रशासन न्याय विभाग एक पृथक् विभाग रहा था ।
(c) अकबर ने वकील के पद को समाप्त कर दिया।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (c)
व्याख्या- मुगलकालीन प्रशासन के संबंध में कथन (c) सत्य नहीं है, क्योंकि अकबर के शासनकाल में सर्वशक्तिमान वजीर की अवधारणा को समाप्त कर दिया गया था न कि वकील के पद को, क्योंकि अकबर का संरक्षक बैरम खाँ वकील के रूप में वजीर की सत्ता का उपभोग करता रहा। अकबर ने केंद्रीय तथा प्रांतीय सरकारों के संगठन पर विशेष ध्यान दिया। उसकी केंद्रीय शासन प्रणाली दिल्ली सल्तनत के काल में विकसित शासन - संरचना पर आधारित थी, लेकिन विभिन्न विभागों के कार्यों को सावधानी के साथ पुनर्गठित किया गया और राज्य कार्यों के संचालन हेतु नियम बनाए गए थे। मुगलकाल में न्याय विभाग एक पृथक् विभाग था।
10. मुगल प्रशासन में कौन-सा अधिकारी राजा और प्रशासन के बीच की मुख्य कड़ी था?
(a) किरोरी
(b) अमलगुजार
(c) वजीर
(d) मीर बख्शी
उत्तर - (c)
व्याख्या- मुगल प्रशासन के अंतर्गत 'वजीर' नामक अधिकारी राजा और प्रशासन के बीच की मुख्य कड़ी था। इससे पूर्व के काल में मध्य एशियाई और तैमूरी परंपरा में वजीर के पद का प्रावधान था, जिसके अधीन विभिन्न विभागों के प्रधान कार्य करते थे। मुगल काल में सम्राट की सहायता हेतु अनेक मंत्री होते थे, जिनमें वजीर सर्वोच्च पद था। वह सभी विभागों की देखभाल करता था व अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति में अपना परामर्श देता था।
11. 'मीर बख्शी' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. यह सैनिक विभाग का प्रधान होता था।
2. इस पद पर केवल प्रमुख सरदारों को ही नियुक्त किया जाता था।
3. साम्राज्य की खुफिया और सूचना एजेंसियों का प्रधान मीर बख्शी होता था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 3
(b) 1 और 2
(c) 1, 2 और 3
(d) केवल 2
उत्तर - (c)
व्याख्या- 'मीर बख्शी' के संबंध में सभी कथन सत्य हैं। मुगल काल में सैन्य विभाग का सर्वोच्च अधिकारी 'मीर बख्शी' कहलाता था। इस पद का विकास अकबर के काल में प्रारंभ हुआ था। मुगलकालीन सरदारों के संगठन का प्रधान दीवान नहीं, बल्कि मीर बख्शी माना जाता था। इसलिए इस पद पर केवल प्रमुख सरदारों को ही नियुक्त किया जाता था। मनसबों पर नियुक्ति अथवा पदोन्नति के लिए की जाने वाली सिफारिश मीर बख्शी ही करता था।
मुगलकालीन खुफिया विभाग का प्रमुख 'बरीद' था और सूचना विभाग का प्रमुख 'वाकियानवीस' था, जो मुगल साम्राज्य के सभी हिस्सों में तैनात किए जाते थे। इन सभी विभागों का प्रधान भी मीर बख्शी होता था।
12. अकबर के शासनकाल के बारह सूबे में निम्नलिखित में से कौन-सा एक सूबा सम्मिलित नहीं था ?
(a) बिहार
(b) मालवा
(c) अजमेर
(d) मारवाड़
उत्तर - (d)
व्याख्या- अकबर के शासनकाल के बारह सूबों में मारवाड़ शामिल नहीं था। 1580 ई. में अकबर ने अपने साम्राज्य को 12 सूबों में बाँटा था, जिनमें शामिल हैं- बंगाल, बिहार, इलाहाबाद, अवध, आगरा, दिल्ली, लाहौर, मुल्तान, काबुल, अजमेर, मालवा और गुजरात । प्रत्येक सूबे में एक-एक सूबेदार, दीवान बख्शी, सदर, काजी और वाकियानवीस को नियुक्त किया गया था, जिससे संतुलन की स्थिति को सूबों में भी विकसित किया गया।
13. मुगल सेना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. अकबर के अधीन अपनी सैनिक टुकड़ी के खर्च के लिए मनसबदार को औसतन ₹240 प्रतिवर्ष प्रति सवार दिए जाते थे।
2. जहाँगीर के काल में इसे बढ़ाकर ₹300 कर दिया गया।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - (a)
व्याख्या मुगल सेना के संबंध में कथन (1) सत्य है।
अकबर द्वारा स्थापित प्रशासन तंत्र और राजस्व व्यवस्था को जहाँगीर और शाहजहाँ ने कुछ परिवर्तनों के साथ जारी रखा, परंतु मनसबदारी व्यवस्था में कुछ महत्त्वपूर्ण परिवर्तन किए गए। अकबर द्वारा अपनी सैनिक टुकड़ी के खर्च के लिए मनसबदार को औसत रूप से ₹240 प्रतिवर्ष प्रति सवार दिए जाते थे।
कथन (2) असत्य है, क्योंकि जहाँगीर के शासनकाल में मनसबदारों को दिए जाने वाले सैनिक टुकड़ी के खर्च में कमी की गई और यह ₹200 कर दिया गया न कि ₹3001
14. निम्नलिखित में से किस मुगल शासक ने 'दुआस्पाह-सी अस्पाह' प्रणाली की शुरुआत की थी?
(a) अकबर
(d) औरंगजेब
उत्तर - (b)
व्याख्या- मुगलकालीन मनसबदारी व्यवस्था के अंतर्गत जहाँगीर द्वारा 'दुआस्पाह-सी अस्पाह' प्रणाली प्रारंभ की गई थी, जिसके अंतर्गत कुछ विशेष सरदारों को 'जात' दर्जे में बिना किसी वृद्धि के अधिक सवार रखने की अनुमति दी गई थी।
इस प्रणाली का शाब्दिक अर्थ 'दो या तीन घोड़ों वाला सवार' होता है। व्यावहारिक रूप से इसका अर्थ यह था कि इस दर्जे के मनसबदार को उसके सवार दर्जे के अनुसार निर्धारित संख्या से दोगुनी संख्या में सवार रखने पड़ते थे और उसे उसी हिसाब से वेतन भी दिया जाता था।
15. जागीरों के आवंटन के लिए राजस्व विभाग को एक 'बही' रखनी पड़ती थी, उसे क्या कहा जाता था?
(a) जमा- दामी
(b) दस-मासा
(c) अस्पाह
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर - (a)
व्याख्या- जागीरों के आवंटन हेतु राजस्व विभाग द्वारा रखी जाने वाली 'बही' 'जमा- दामी' कहलाती थी। राजस्व विभाग द्वारा रखी जाने वाली बही में विभिन्न क्षेत्रों के जमा राजस्व दर्ज होते थे, लेकिन लेखा रुपयों में नहीं, बल्कि दामों (कम मूल्य का एक सिक्का) में दिखाया जाता था।
16. मुगल बादशाह जो फुटकर घुड़सवार रखते थे, उन्हें क्या कहा जाता था?
(a) वाहिनी
(b) अहदी
(c) पदाति
(d) बख्शी
उत्तर - (b)
व्याख्या- मुगल बादशाह जो फुटकर घुड़सवार रखते थे, उन्हें 'अहदी' कहा जाता था। मुगलकालीन घुड़सवार मुगल सेना की प्रमुख वाहिनी थे और मनसबदार अधिक-से-अधिक घुड़सवार रखने का प्रयास करते थे।
अहदियों को 'भद्र घुड़सवार' की संज्ञा दी गई है और उनके वेतन दूसरे घुड़सवारों से काफी अधिक संख्या में होते थे। वे विश्वास पात्र सैन्य दल के सदस्य होते थे और उनकी नियुक्ति स्वयं सम्राट करते थे।
17. मुगल सेना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. शाहंशाह के शाही अंगरक्षकों को 'वालाशाही' कहा जाता था।
2. पैदल सैनिकों को 'पियादगान' कहा जाता था।
3. गुलाम अहदी के पद पर नियुक्त हो सकता था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है /हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1, 2 और 3
(d) केवल 3
उत्तर - (c)
व्याख्या- मुगल सेना के संबंध में दिए गए सभी कथन सत्य हैं । मुगलकाल में अहदियों के अतिरिक्त सम्राट एक शाही अंगरक्षकों का दल भी रखते थे, जो राजमहल के सशस्त्र पहरेदार होते थे, इन्हें 'वालाशाही' कहा जाता था। वे घुड़सवार होते थे, लेकिन नगर दुर्ग और राजमहल में पैदल कार्य करते थे।
मुगलकाल के दौरान पैदल सैनिकों की संख्या अधिक थी। वे कई हिस्सों में बँटे हुए थे। उनमें से बहुत से लोग बंदूकची थे और वे तीन से सात रुपये मासिक वेतन पाते थे। इन्हें 'पियादगान' कहा जाता था।
मुगलकाल के पैदल सैनिकों में भारवाहक, हरकारे, नौकर, तलवारबाज, पहलवान और गुलाम शामिल थे। इन्हें सभी सुख सुविधाएँ शाही परिवार या सम्राट के द्वारा दी जाती थीं, कभी-कभी इन गुलामों अहंदी का पद भी दिया जा सकता था।
18. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन असत्य है?
(a) शाहजहाँ के पास 200000 घुड़सवार थे।
(b) औरंगजेब के पास 240000 घुड़सवार थे।
(c) शाहजहाँ के पास पैदल सैनिकों की संख्या 40000 थी।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (d)
व्याख्या- दिए गए कथनों में से कोई भी कथन असत्य नहीं है। मुगलकालीन सेना की संख्या का निर्धारण नहीं किया जा सकता है, लेकिन एक अनुमान के तौर पर यह ज्ञात है कि शाहजहाँ के अधीन 200000 घुड़सवार कार्य करते थे, जिनमें जिलों में और फौजदारों के साथ कार्य करने वाले घुड़सवार शामिल नहीं थे, लेकिन औरंगजेब के काल में यह संख्या 240000 हो गई। शाहजहाँ के अधीन कार्यरत पैदल सैनिकों की संख्या 40000 बताई गई है, जिनमें गैर-लड़ाका वर्ग शामिल नहीं थे। अनुमानत: औरंगजेब के अधीन भी शाहजहाँ के समकक्ष ही पैदल सैनिक कार्यरत् थे।
मुगलकालीन सामाजिक व्यवस्था
1. मुगलकालीन सामाजिक व्यवस्था में सरदार वर्ग के संबंध में कौन-सा कथन असत्य है?
(a) अधिकतर मुगल सरदारों का मूल निवास तूरान का क्षेत्र था।
(b) जहाँगीर के काल में अफगानों को सरदार वर्ग में शामिल किया जाने लगा।
(c) अकबर के काल में हिंदुओं को सरदार वर्ग में शामिल किया गया।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (d)
व्याख्या- दिए गए कथनों में से कोई भी कथन असत्य नहीं है। मुगलकालीन सामाजिक व्यवस्था में सरदार वर्ग मुख्यतः शासक वर्ग के थे। मुगल सरदारों को सामाजिक तथा आर्थिक दोनों ही दृष्टियों से विशेषाधिकार प्राप्त थे। इन आरंभिक मुगल सरदारों का निवास स्थान मुगलों के ही समान तूरान और उसके आस-पास के क्षेत्रों; जैसे-ताजकिस्तान, खुरासान व ईरान आदि में था।
बाबर और अकबर के काल में अफगान अमीरों का मुगलों के साथ संघर्ष निरंतर चलता रहा, लेकिन जहाँगीर के शासनकाल से ही अफगानों को भी सरदार वर्ग में स्थान दिया जाने लगा था।
अकबर के शासनकाल से हिंदुओं को भी सरदार वर्ग में नियमित रूप से शामिल किया जाने लगा और ऐसे सरदारों में सबसे अधिक संख्या राजपूतों की थी।
2. मुगलकालीन सामाजिक व्यवस्था में भारतीय मुसलमानों को क्या कहा जाता था?
(a) शरीफजादा
(b) शेखजादा
(c) काफिर
(d) मुतल्ला
उत्तर - (b)
व्याख्या- मुगलकालीन सामाजिक व्यवस्था में भारतीय मुसलमानों को ‘शेखजादा' कहा जाता था। इन्हें 'हिंदुस्तानी' उपनाम से भी जाना जाता है। जहाँगीर के शासनकाल में इन शेखजादा को शाही सेवा में शामिल किया जाने लगा था।
3. निम्नलिखित में से कौन मुगल सरदार वर्ग के महत्त्वपूर्ण हिंदू सरदारों में शामिल नहीं था?
(a) राजा टोडरमल
(b) राजा मानसिंह
(c) राजा महेशदास
(d) राजा रतन सिंह
उत्तर - (d)
व्याख्या- राजा रतन सिंह मुगल सरदार वर्ग के महत्त्वपूर्ण हिंदू सरदारों में शामिल नहीं था। अकबरकालीन राजपूतों में कछवाहों की प्रधानता थी | राजा मानसिंह और बीरबल अकबर के व्यक्तिगत मित्र थे। बीरबल को ही राजा महेशदास के नाम से भी जाना जाता है। भू-राजस्व व्यवस्था में राजा टोडरमल का प्रमुख स्थान था।
4. मुगलकालीन समाज में महिलाओं की भाँति पुरुषों द्वारा कान में कुंडल पहनने का प्रचलन किसने प्रारंभ करवाया?
(a) बाबर
(b) हुमायूँ
(c) जहाँगीर
(d) शाहजहाँ
उत्तर - (c)
व्याख्या- मुगलकालीन समाज में महिलाओं की भाँति पुरुषों द्वारा कान में कुंडल पहनने का प्रचलन जहाँगीर ने प्रारंभ करवाया था। इसके शासनकाल के दौरान आभूषण और हीरे-जवाहरात स्त्री-पुरुष दोनों पहनते थे। इस काल में आभूषणों को एक विशेष सीमा तक सुरक्षित संपत्ति माना जाता था।
5. मुगलकालीन समाज के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?
(a) जमींदार अपनी जमींदारी की सभी जमीन का 'स्वत्वाधिकारी' होता था।
(b) देशमुख, पारिल, नायक स्थानीय जमींदार के नाम थे ।
(c) सरदारों की तुलना में जमींदारों की आय सीमित थी।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (a)
व्याख्या- मुगलकालीन समाज के संबंध में कथन (a) असत्य है, क्योंकि मुगलकालीन समाज में जमींदार अपनी जमींदारी की सभी जमीन का 'स्वत्वाधिकारी' नहीं होता था। मुगलकालीन समाज में भूमि का व्यक्तिगत स्वामित्व भारत में दीर्घकाल से प्रचलित था। इसकी पुष्टि अबुल फजल तथा अन्य समकालीन लेखकों की कृतियों से स्पष्ट होती है। इस काल में भूमि का स्वत्वाधिकार मुख्य रूप से उत्तराधिकार पर निर्भर था।
6. मुगलकालीन सामाजिक व्यवस्था में मध्य वर्ग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. बर्नियर के अनुसार भारत में कोई 'मध्य वर्ग' नहीं था ।
2. मध्य वर्ग का अर्थ व्यापारी और दुकानदार था ।
3. मुगलकालीन मध्य वर्ग का जीवन स्तर अमीरों और गरीबों के मध्य में होता था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) केवल 3
(b) 1 और 2
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (d)
व्याख्या- मुगलकालीन सामाजिक व्यवस्था में मध्य वर्ग के संबंध में दिए गए सभी कथन सत्य हैं। मध्यकालीन भारत में 'मध्य वर्ग' के अस्तित्व को लेकर प्रसिद्ध विचारकों व लेखकों में स्पष्ट स्थिति का विवरण प्राप्त नहीं होता है। बर्नियर के अनुसार, भारत में मध्य वर्ग नहीं था, लेकिन उनका यह कथन तर्कसंगत प्राप्त नहीं होता।
मध्य वर्ग से तात्पर्य व्यापारियों और दुकानदारों से था। भारत में धनाढ्य व्यापारियों और वणिकों का एक बहुत बड़ा वर्ग था, जिनमें से कुछ तत्कालीन समय के समृद्ध व्यापारियों में से एक थे।
7. मुगलकालीन सामाजिक व्यवस्था के संबंध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) जमींदारों के ऊपर राजा होते थे।
(b) तुर्की लेखकों ने राजाओं को भी 'जमींदार' कहा है।
(c) जमींदारों, सरदारों और राजाओं की अपनी सशस्त्र सेनाएँ होती थीं।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (b)
व्याख्या- मुगलकालीन सामाजिक व्यवस्था के संबंध में कथन (b) सत्य नहीं है, क्योंकि मुगलकालीन सामाजिक व्यवस्था के अंतर्गत तुर्की लेखकों ने नहीं, बल्कि फारसी लेखकों ने राजाओं को 'जमींदार' कहा है।
मुगलकालीन व्यवस्था के अंतर्गत जमींदारों के ऊपर राजा होते थे, जिनका प्रभुत्व कभी छोटे तो कभी बड़े क्षेत्रों पर होता था और जिन्हें अलग-अलग सीमाओं तक आंतरिक स्वशासनाधिकार प्राप्त था । तत्कालीन समाज में जमींदारों, सरदारों और राजाओं की अपनी सशस्त्र सेनाएँ होती थीं और वे गढ़ियों (छोटे किले) में निवास करते थे।
8. पूर्व मध्यकाल में हिंदू राजाओं द्वारा किए गए भूमिदानों को क्या कहा जाता था?
(a) शासन
(b) जागीर
(c) वतन जागीर
(d) खिल्लत
उत्तर - (a)
व्याख्या- पूर्व मध्यकाल में हिंदू राजाओं द्वारा दिए गए भूमिदानों को 'शासन' कहा जाता था।
इस काल में विद्वानों, उलेमाओं आदि सहित अन्य पेशेवर लोगों को थोड़ी बहुत जमीन दान में दी जाती थी और ऐसी भूमियों के लिए मुगल शब्दावली में ‘मदद-ए-मआश’ और राजस्थान में शासन शब्द प्रयुक्त होता था। मुगल सम्राटों के अतिरिक्त छोटे शासक, जमींदार और सरदार भी ऐसे दान दिया करते थे।
मुगलकालीन आर्थिक व्यवस्था
1. मुगलकालीन कृषि के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. चावल, मोटे अनाज और दालें लोगों के मुख्य आहार थे।
2. बंगाल के तटवर्ती प्रदेशों में लोग खाने में मांस का प्रयोग करते थे।
3. नमक और शक्कर अधिक खर्चीले थे।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) केवल 1
(b) 1 और 3
(c) 1, 2 और 3
(d) 1 और 2
उत्तर - (b)
व्याख्या- मुगलकालीन कृषि के संबंध में कथन (1) और (3) सत्य हैं । मुगलकालीन ग्रामीण जीवन के अंतर्गत लोगों के मुख्य आहार में चावल, मोटे अनाज और विभिन्न प्रकार की दालें शामिल थीं, इन्हें 'पैलसर्ट' कहा जाता था। उत्तर भारत में गेहूँ या मोटे अनाज से बनी रोटियाँ, दाल तथा हरी सब्जियाँ लोगों का आम भोजन होता था। इस काल में नमक और शक्कर अधिक खर्चीले थे।
कथन (2) असत्य है, क्योंकि बंगाल में और तटवर्ती प्रदेशों में लोग मछली को भोजन के रूप में में ग्रहण करते थे न कि मांस को, जबकि मांस का सेवन दक्षिण तथा प्रायद्वीपीय प्रदेश के लोगों द्वारा किया जाता था।
2. मुगलकालीन हुंडियों के संबंध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) यक एक साख - पत्र होता था।
(b) इसका भुगतान किसी निश्चित समय के बाद छूट के साथ किया जाता था।
(c) हुंडी में बीमे की राशि शामिल नहीं होती थी।
(d) सर्राफ हुंडियों के कारोबार के विशेषज्ञ थे।
उत्तर - (c)
व्याख्या- मुगलकालीन हुंडियों के संबंध में कथन (c) सत्य नहीं है, क्योंकि मुगलकालीन आर्थिक गतिविधियों के अंतर्गत हुंडी का एक महत्त्वपूर्ण स्थान था, इन हुंडियों में बीमे की राशि शामिल होती थी। हुंडी एक साख-पत्र होती थी, जिसका भुगतान किसी निश्चित समय के बाद छूट के साथ किया जाता था। यह मुद्रा को देश के एक भाग से दूसरे भाग में ले जाने हेतु संचालित एक वित्तीय प्रणाली थी, जिससे वस्तुओं के संचालन में सहायता मिलती थी।
3. निम्नलिखित में किस शासक के काल में व्यापारियों की संपत्ति की रक्षा के लिए कई कानून बनाए गए थे?
(a) हुमायूँ
(b) शेरशाह सूरी
(c) इस्लाम सूरी
(d) अकबर
उत्तर - (b)
व्याख्या- शेरशाह सूरी के शासनकाल में सम्राटों द्वारा व्यापारियों की संपत्ति की रक्षा हेतु कई कानून बनाए गए। इसके पश्चात् जहाँगीर ने भी व्यापारियों की संपत्ति की रक्षा हेतु कानून बनाए।
उसके द्वारा बनाए गए कानून की एक धारा में यह लिखित है कि यदि किसी भी व्यापारी की मृत्यु हो जाए, तो उसकी संपत्ति उसके उत्तराधिकारी को सौंपी जाएगी और यदि उसका वारिस नहीं है, तो उसकी संपत्ति की रक्षा के लिए निरीक्षक और पहरेदार नियुक्त किए जाएँगे।
4. मुगलकाल के वाणिज्य व्यापार के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. मुगल शासक उच्च शुद्धता के चाँदी के सिक्के ढलवाते थे।
2. जब्ती प्रणाली के अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण नकदी तौर पर किया जाता था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है / हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - (c)
व्याख्या- मुगलकाल के वाणिज्य व्यापार के संबंध में दिए गए सभी कथन सत्य हैं ।
सत्रहवीं सदी में वाणिज्य व्यापार के विकास में मुगलकालीन शासन व्यवस्था का महत्त्वपूर्ण स्थान था। मुगल शासक उच्च शुद्धता के चाँदी के सिक्के ढलवाते थे तथा ये सिक्के भारत में और भारत से बाहर भी मानक मुद्रा के रूप में प्रचलित हुए, जिनसे व्यापार में सहायता मिलती थी ।
मुगलकालीन अर्थव्यवस्था के अंतर्गत जब्ती प्रणाली के अंतर्गत भू-राजस्व का निर्धारण नकदी तौर पर किया जाता था और उसकी नकद अदायगी भी अपेक्षित थी। इसके अंतर्गत किसान को भू-राजस्व निर्धारण के वैकल्पिक तरीकों का चुनाव करने की सुविधा प्रदान की जाती थी; जैसे-फसल का बँटवारा और राज्य के हिस्से को व्यापारियों के द्वारा गाँवों में ही बेच दिया जाता था।
मुगलकालीन कला एवं संस्कृति
1. मुगल स्थापत्य के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. मुगलों ने जलस्रोतों से युक्त सुनियोजित बगीचे लगवाए ।
2. बाबर ने आगरा और लाहौर में बगीचे लगवाए थे।
3. मुगलों के राजमहलों और प्रमोद-स्थलों में प्रवाहयुक्त जलस्रोतों की व्यवस्था होती थी।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (d)
व्याख्या- मुगल स्थापत्य के संबंध में दिए गए सभी कथन सत्य हैं।
मुगल काल के दौरान भारत में हुए सांस्कृतिक विकास के कारण मुगलकाल को गुप्तकाल के बाद भारत का दूसरा स्वर्णयुग कहा जाता है। मुगल स्थापत्य के अंतर्गत किले, राजमहलों, मस्जिदों, दरवाजों आदि का निर्माण करवाया गया। यह स्थापत्य इंडो-इस्लामिक शैली (भारतीय- तुर्की-ईरानी शैली का मिश्रण) से बनाई गई थी।
इन स्थापत्य स्थलों पर जलस्रोतों से युक्त चार बाग पद्धति से बगीचे लगाए जाते थे। साथ ही इन स्थलों पर प्रवाहयुक्त जलस्रोतों की व्यवस्था होती थी, बाबर बगीचों का शौकीन था अतः उसने आगरा एवं लाहौर में बगीचे लगवाए थे।
2. निम्नलिखित में से कौन मुगलों के द्वारा लगवाए गए बाग के उत्कृष्ट उदाहरण हैं?
(a) निशांत बाग
(b) शालीमार बाग
(c) पिंजोर बाग
(d) ये सभी
उत्तर - (d)
व्याख्या- मुगल शासकों द्वारा देश के अनेक भागों में बाग स्थापित किए गए। इनमें से कुछ प्रमुख हैं- कश्मीर का निशांत बाग, लाहौर का शालीमार बाग, पंजाब का पिंजोर बाग आदि। निशांत बाग का निर्माण आसिफ खाँ के द्वारा 1633 ई. में किया गया था, आसिफ खाँ नूरजहाँ का भाई था। शालीमार बाग शाहजहाँ के द्वारा बनवाया गया था और पिंजोर बाग 1760 ई. में पंजाब के मुगल सूबेदार फिदाई खान ने बनवाया था।
3. शेरशाह ने अपने जीवनकाल में अपना मकबरा निम्नलिखित में से कहाँ बनवाया था ?
(a) सासाराम (बिहार)
(b) पुराना किला (दिल्ली)
(c) लाल किला (आगरा)
(d) आराम बाग (लाहौर)
उत्तर - (a)
व्याख्या- शेरशाह का मकबरा बिहार के सासाराम में स्थित है। इसका निर्माण शेरशाह द्वारा 1545 ई. में जीवित रहते हुए करवाया गया था। यह इंडो-इस्लामिक वास्तुकला के अंतर्गत निर्मित किया गया है। इसका डिजाइन अलावाल खान द्वारा तैयार किया गया। यह लाल बलुआ पत्थर से बना है। यह एक झील के मध्य में स्थित है। इसे 'भारत का दूसरा ताजमहल' कहा जाता है।
4. अकबर द्वारा स्थापित स्थापत्य कला के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. उसने आगरा का किला बनवाया था।
2. आगरा का किला संगमरमर का बना हुआ है।
3. फतेहपुर सीकरी में एक राजमहल सह - किले का निर्माण अकबर ने करवाया था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है /हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (c)
व्याख्या- अकबर द्वारा स्थापित स्थापत्य कला के संबंध में कथन (1) और (3) सत्य हैं।
आगरा के किले का निर्माण अकबर द्वारा 1573 ई. में करवाया गया। यह किला 1638 ई. तक मुगल शासकों का मुख्य निवास स्थान होता था। वर्तमान में यह यूनेस्को विश्व विरासत सूची में शामिल है। आगरा से 36 किमी दूर फतेहपुर सीकरी नगर की स्थापना अकबर ने की थी। यहाँ अकबर ने एक राजमहल सह-किले का निर्माण करवाया।
कथन (2) असत्य है, क्योंकि आगरा का किला संगमरमर का नहीं, बल्कि लाल बलुआ पत्थर से बना है।
5. 'बुलंद दरवाजा' के संबंध में निम्नलिखित में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) यह फतेहपुर सीकरी में स्थित है।
(b) इसका निर्माण अकबर की गुजरात विजय के उपलक्ष्य में करवाया गया था।
(c) यह अर्द्धगुंबदीय शैली में बना हुआ है।
(d) यह तुर्की कला प्रभावित है।
उत्तर - (d)
व्याख्या- 'बुलंद दरवाजा' के संबंध में कथन (d) सत्य नहीं है, क्योंकि यह तुर्की कला से नहीं, बल्कि ईरानी शैली से प्रभावित है। मुगल बादशाह अकबर ने बुलंद दरवाजे का निर्माण 1575 ई. गुजरात विजय के उपलक्ष्य में करवाया था, क्योंकि बुलंद दरवाजे का अर्थ है, जीत का दरवाजा। यह विश्व का सबसे ऊँचा दरवाजा है। यह अर्द्धगुंबदीय शैली में बना है।
6. मुगल काल में दीवारों को अर्द्ध मूल्यवान पत्थरों से बनी फूल-पत्तियों की आकृतियों से सजाने का चलन क्या कहलाता था?
(a) मेहराब
(b) प्येत्रा-यूरा
(c) इंडो-इस्लामिक शैली
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर - (b)
व्याख्या- जहाँगीर के शासनकाल के अंतिम वर्षों में केवल संगमरमर की इमारतें बनाने और उसकी दीवारों पर अर्द्ध मूल्यवान पत्थरों से बनी फूल-पत्तियों की आकृतियों से सजाने का चलन प्रारंभ हुआ, जिसे प्येत्रा-यूरा कहते हैं। नूरजहाँ द्वारा निर्मित अपने पिता इतमादुउद्दौला के मकबरे (आगरा) में सर्वप्रथम प्येत्रा-यूरा का प्रयोग किया गया।
7. हुमायूँ के मकबरे के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) यह ताजमहल का पूर्वसूचक माना जाता है।
(b) दोहरे गुंबद का प्रयोग इसकी मुख्य विशेषता है।
(c) इसका निर्माण हुमायूँ के जीवनकाल में हुआ था।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (c)
व्याख्या- हुमायूँ के मकबरे के संबंध में कथन (c) सत्य नहीं है, क्योंकि हुमायूँ के मकबरे का निर्माण हुमायूँ की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी हाजी बेगम के द्वारा 1558 ई. में करवाया गया। इसका डिजाइन मिराक मिर्जा गयास ने तैयार किया था। यह लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है। इसे वर्ष 1993 में यूनेस्को के विश्व विरासत स्थल में शामिल किया गया।
8. शाहजहाँ के शासनकाल की स्थापत्य के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
1. इसके शासनकाल में मस्जिद निर्माण अपनी पराकाष्ठा पर पहुँच गया।
2. आगरा के किले की मोती मस्जिद लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है।
3. दिल्ली की जामा मस्जिद की मुख्य विशेषता विशालकाय दरवाजा तथा ऊँची पतली मीनारें हैं।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 3
(b) 2 और 3
(c) 1 और 2
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (a)
व्याख्या- शाहजहाँ के शासनकाल की स्थापत्य के संबंध में कथन ( 1 ) और (3) सत्य हैं ।
मुगल शासक शाहजहाँ का शासनकाल अपनी वास्तुकला के लिए जाना जाता है। इसके द्वारा ही आगरा में प्रसिद्ध ताजमहल का निर्माण करवाया गया। इसके शासनकाल में मस्जिदों का निर्माण अपनी पराकाष्ठा पर पहुँच गया था। दिल्ली की जामा मस्जिद का निर्माण शाहजहाँ ने 1656 ई. में करवाया था। यह लाल बलुआ पत्थर से बनी हुई है। इसका विशाल दरवाजा, ऊँची मीनार, गुंबदें इसके मुख्य आकर्षक हैं।
कथन (2) असत्य है, क्योंकि आगरा की मोती मस्जिद संगमरमर से बनी है।
9. मुगलों ने चित्रकारी में किन नए विषयों को समावेशित किया?
(a) दरबार की चित्रकारी
(b) शिकार की चित्रकारी
(c) युद्ध की चित्रकारी
(d) ये सभी
उत्तर - (d)
व्याख्या- मुगल चित्रकारी के विषयों के संबंध में दिए गए उपर्युक्त सभी विषयों को शामिल किया गया था। चित्रकला के क्षेत्र में मुगलों का योगदान विशिष्ट था, , उन्होंने चित्रकारी में अनेक नए विषयों; जैसे- दरबार, युद्ध तथा शिकार के दृश्यों को शामिल किया। उन्होंने चित्रकला में नए रंगों तथा नई शैलियों का प्रयोग आरंभ किया।
10. मुगल चित्रकारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. जसवंत और दसावन हुमायूँ के दरबार के दो प्रसिद्ध चित्रकार थे।
2. अब्दुस समद बाबर के दरबार को सुशोभित करता था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - (d)
व्याख्या- मुगल चित्रकारों के संबंध में दिए गए दोनों कथन असत्य हैं, क्योंकि जसवंत और दसावन अकबर के दरबार के प्रसिद्ध चित्रकार थे। अकबर द्वारा स्थापित चित्रकला हेतु कारखाने में देश के विभिन्न भागों से बहुत सारे चित्रकारों को शामिल किया गया था, जिससे हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्म के चित्रकारों को स्थान दिया गया।
अब्दुस समद हुमायूँ के दरबार का चित्रकार था, जिसे हुमायूँ ईरान से अपने साथ लाया था। इसका एक प्रसिद्ध चित्रकला संग्रह 'हमजानामा' है।
11. मुगलकला की चित्रकारी में निम्नलिखित में किन विषयों पर चित्र बनाए गए ?
(a) फारसी कथाओं के चित्र
(b) महाभारत के चित्र
(c) अकबरनामा के चित्र
(d) ये सभी
उत्तर - (d)
व्याख्या- मुगलकला की चित्रकारी में उपर्युक्त सभी विषयों पर चित्र बनाए गए। अकबर के द्वारा स्थापित कारखाने में नियुक्त चित्रकारों को विभिन्न विषयों पर चित्र बनाने का कार्य सौंपा गया। इन्हें फारसी कथाओं को चित्रित करने के अतिरिक्त महाभारत के फारसी अनुवाद, ऐतिहासिक रचना अकबरनामा व अन्य पुस्तकों को भी चित्रों से सजाने का कार्य सौंपा गया। इस प्रकार चित्रकारों के लिए भारतीय जीवन से जुड़े प्रसंग तथा प्राकृतिक दृश्यों का चित्रण चित्रकारी के प्रधान विषय बन गए।
12. मुगल चित्रकला के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. भारतीय रंगों का, जैसे मयूरी नीले का अधिक उपयोग किया जाने लगा।
2. फारसी शैली के सपाटपन का स्थान भारतीय कूँची की गोलाई ने ले लिया।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - (c)
व्याख्या- मुगल चित्रकला के संबंध में दिए गए दोनों कथन सत्य हैं।
अकबर द्वारा ईरान से आए चित्रकार 'मीर सईद अली' और 'अब्दुस समद के नेतृत्व में कारखाना स्थापित किया गया था, जिस कारण से चित्रकला पर प्रारंभ में फारसी प्रभाव अधिक था, परंतु बाद में जब अकबर ने भारतीय चित्रकारों को बड़ी संख्या में नियुक्त किया, तो चित्रकला पर फारसी प्रभाव लगभग समाप्त हो गया।
अब चित्रकला के लिए भारतीय रंगों (मयूरी, नीले रंग) तथा भारतीय सामानों का अधिक प्रयोग होने लगा। साथ ही अब फारसी शैली के सपाटपन के स्थान पर भारतीय कूँची की गोलाई का प्रयोग किया जाने लगा।
13. निम्नलिखित में से किस बादशाह के काल में मनुष्य की एकल आकृतियों और पशुओं की आकृतियों के चित्रण में विशेष प्रगति हुई?
(a) अकबर
(b) जहाँगीर
(c) शाहजहाँ
(d) औरंगजेब
उत्तर - (b)
व्याख्या- जहाँगीर के शासनकाल में शिकार, लड़ाई और दरबार के दृश्यों के अतिरिक्त मनुष्य की एकल आकृतियों और पशुओं के चित्रण में विशेष प्रगति हुई। मुगल शासक जहाँगीर के समय मुगल चित्रकला अपनी पराकाष्ठा पर पहुँची। इसके शासनकाल के प्रसिद्ध चित्रकार उस्ताद मंसूर और अबुल हसन थे।
14. मुगल दरबार की राजकीय भाषा निम्नलिखित में से कौन-सी थी ?
(a) तुर्की
(b) फारसी
(c) उर्दू
(d) हिंदवी
उत्तर - (b)
व्याख्या- मुगल दरबार की राजकीय भाषा फारसी थी। अकबर के शासनकाल में फारसी कविता और गद्य रचनाएँ अपने चरम पर पहुँचीं, इसके लिए अकबर ने फैजी के नेतृत्व में एक अनुवाद विभाग की स्थापना की, जहाँ प्रमुख भारतीय ग्रंथों का फारसी में अनुवाद किया जाता था।
15. मुगलकालीन लेखकों के संबंध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) उत्बी और नजीरी फारसी कवि थे।
(b) अलाउल ने बांग्ला में कविताएँ लिखीं।
(c) मलिक मुहम्मद जायसी ने हिंदी में पद्मावत लिखी।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (d)
व्याख्या- मुगलकालीन लेखकों के संबंध में दिए गए सभी कथन सत्य हैं। 'उत्बी तथा नजीरी' अकबर के दरबार के प्रमुख फारसी कवि थे। इनका जन्म फारस में हुआ था तथापि इन्होंने मुगल दरबार व साम्राज्य में फारसी के प्रसार में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।
अकबर के शासनकाल में स्थानीय भाषाओं में भी साहित्य की रचना हुई। उदाहरण के लिए अलाउल ने बांग्ला में कविताएँ लिखीं तथा सूफी संत मलिक मोहम्मद जायसी ने हिंदी में पद्मावत की रचना की, जिसमें अलाउद्दीन के चित्तौड़ पर आक्रमण का वर्णन मिलता है।
16. निम्नलिखित में से कौन-सा लेखक अकबर के समकालीन था?
(a) मलिक मुहम्मद जायसी
(b) गोस्वामी तुलसीदास
(c) अमरी खुसरो
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर - (b)
व्याख्या- मुगल शासक अकबर (1542-1605 ई.) के समकालीन लेखक गोस्वामी तुलसीदास (1532-1623 ई.) थे। गोस्वामी तुलसीदास राम भक्त थे, उन्होंने अवधी भाषा में 'रामचरितमानस' की रचना की।
17. मुगलकालीन संगीत के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. अकबर चित्तौड़ के प्रसिद्ध गायक तानसेन का संरक्षक था।
2. औरंगजेब ने अपने दरबार से गायन को बंद करवा दिया, लेकिन वाद्ययंत्रों के वादनों को नहीं।
3. मुहम्मद शाह के काल में संगीत का उत्थान हुआ।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) 1, 2 और 3
(d) 1 और 3
उत्तर - (b)
व्याख्या- मुगलकालीन संगीत के संबंध में कथन (2) और (3) सत्य हैं। मुगलकाल में संगीत की सर्वाधिक प्रगति अकबर के शासनकाल में हुई। जहाँगीर और शाहजहाँ ने भी इसमें अकबर का अनुकरण किया। हालाँकि रूढ़िवादी औरंगजेब ने अपने दरबार में गायन को बंद करवा दिया, जबकि वाद्ययंत्रों का वादन प्रचलित था। औरंगजेब स्वयं एक अच्छा वीणावादक था, हालाँकि औरंगजेब के शासनकाल का अंत होने के उपरांत मुहम्मद शाह के शासनकाल में दरबारी संगीत पुनर्जीवित हुआ।
कथन (1) असत्य है, क्योंकि अकबर ने ग्वालियर के प्रसिद्ध गायक तानसेन को संरक्षण प्रदान किया था।
18. भारतीय शास्त्रीय संगीत पर फारसी में सबसे अधिक पुस्तकों की रचना किसके शासनकाल में हुई थी ?
(a) जहाँगीर
(b) शाहजहाँ
(c) औरंगजेब
(d) बहादुरशाह जफ़र
उत्तर - (c)
व्याख्या- भारतीय शास्त्रीय संगीत पर फारसी में सबसे अधिक रचना औरंगजेब के ही शासनकाल में हुई। औरंगजेब के शासनकाल में फकीरूल्लाह ने ‘मान कुतुहल' का फारसी भाषा में अनुवाद 'राग दर्पण' के नाम से किया तथा इस पुस्तक को उसने औरंगजेब को समर्पित किया। मिर्जा रोशन जमीन ने अहोवल रचित 'संगीत परिजात' का अनुवाद फारसी में किया।
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