NCERT MCQs | प्राचीन इतिहास | सिंधु घाटी सभ्यता

सिंधु घाटी सभ्यता

NCERT MCQs | प्राचीन इतिहास | सिंधु घाटी सभ्यता

NCERT MCQs | प्राचीन इतिहास | सिंधु घाटी सभ्यता

उद्भव एवं विस्तार

1. किस सभ्यता का उदय ताम्रपाषाणिक पृष्ठभूमि में भारतीय उपमहादेश के पश्चिमोत्तर भाग में हुआ था?
(a) कांस्ययुगीन हड़प्पा सभ्यता
(b) लौहयुगीन आर्य सभ्यता
(c) ताम्रपाषाणिक महापाषाण सभ्यता
(d) मेसोपोटामिया की सभ्यता
उत्तर - (a)
व्याख्या- कांस्ययुगीन हड़प्पा सभ्यता का उदय ताम्रपाषाणिक पृष्ठभूमि में भारतीय उपमहादेश के पश्चिमोत्तर भाग में हुआ था। हड़प्पा सभ्यता में सर्वप्रथम टिन तथा ताँबे को मिलाकर कांस्य का निर्माण किया गया था, इसलिए इसे कांस्ययुगीन सभ्यता कहा जाता है। ताम्रपाषाणिक पृष्ठभूमि में जितनी भी संस्कृतियों का विकास हुआ था, इनमें हड़प्पा संस्कृति कहीं अधिक विकसित थी ।
ताम्रपाषणिक पृष्ठभूमि का अर्थ उस युग से है, जब पत्थर और ताँबे का प्रयोग बहुतायत में होने लगा। ताम्रपाषाण अवस्था हड़प्पा की कांस्युगीन संस्कृति से पहले की है।
2. दयाराम साहनी द्वारा वर्ष 1921 में खोजी गई सिंधु घाटी सभ्यता का नाम हड़प्पा सभ्यता पड़ा,क्योंकि
(a) सर्वप्रथम इसकी खोज पाकिस्तान स्थित हड़प्पा नामक स्थल पर हुई थी ।
(b) सर्वप्रथम इसकी खोज पंजाब प्रांत में स्थित सिंधु नदी के तट पर हुई थी।
(c) इसका संबंध प्राक्-हड़प्पीय संस्कृति से था।
(d) इसका संबंध झुकर संस्कृति से था।
उत्तर - (a)
व्याख्या- दयाराम साहनी द्वारा वर्ष 1921 में खोजी गई सिंधु घाटी सभ्यता का नाम हड़प्पा सभ्यता पड़ा। इस प्राचीन सभ्यता का विस्तार सिंधु घाटी से अलग क्षेत्रों में होने के कारण एक विशिष्ट पहचान के लिए इस सभ्यता का नामकरण हड़प्पा सभ्यता किया गया।
3. सिंधु घाटी सभ्यता के विस्तार से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए 
1. उत्तर में इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर के मांडा तक था।
2. दक्षिण में इसका विस्तार नर्मदा के मुहाने तक था।
3. पश्चिम में इसका विस्तार बलूचिस्तान के मकरान तक था।
4. पूर्व में इसका विस्तार गंगा घाटी तक था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1, 2 और 4 
(b) 1, 2 और 3
(c) 2, 3 और 4
(d) केवल 4
उत्तर - (b)
व्याख्या- सिंधु घाटी सभ्यता के विस्तार के संबंध में कथन (1), (2) और (3) सत्य हैं ।
सिंधु घाटी सभ्यता का विस्तार उत्तर में मांडा (जम्मू एवं कश्मीर) से लेकर दक्षिण में नर्मदा के मुहाने तक और पश्चिम में बलूचिस्तान के मकरान समुद्र तट से लेकर उत्तर-पूर्व में मेरठ तक था । यह संपूर्ण क्षेत्र त्रिभुज के आकार का है तथा इसका पूरा क्षेत्रफल लगभग 1299600 वर्ग किलोमीटर है।
कथन (4) असत्य है, क्योंकि सिंधु घाटी सभ्यता का पूर्व में विस्तार गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आलमगीरपुर (मेरठ) तक था।
4. हड़प्पा स्थल गणेश्वर, जो राजस्थान में स्थित ताँबा आपूर्ति केंद्र था, का उत्खनन किसके निर्देशन में किया गया था?
(a) एच. डी. सांकलिया 
(b) ए. एन. घोष
(c) बी. एन. मिश्रा
(d) आर. सी. अग्रवाल
उत्तर - (d)
व्याख्या- गणेश्वर सभ्यता का उत्खनन आर.सी. अग्रवाल द्वारा वर्ष 1977 में करवाया गया था। गणेश्वर से उत्खनन में ताम्र युगीन उपकरण भी प्राप्त हुए। यह कांतली नदी के किनारे स्थित है। इसे हड़प्पाई स्थलों को ताँवा आपूर्ति केंद्र के रूप में जाना जाता था। यह सभ्यता राजस्थान में विकसित हुई थी, इसको 'पुरातत्व का पुष्कर' भी कहा जाता है। यहाँ से ताँबे का बाण एवं मछली पकड़ने का काँटा प्राप्त हुआ है। साथ ही यहाँ से काले एवं नीले रंग से अलंकृत मृपात्र मिले हैं

नगर योजना

1. हड़प्पाई नगरों की विशेषताओं में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन एक शामिल नहीं था? 
(a) नगरों के घर सामान्यतः दो या तीन मंजिल के होते थे।
(b) घर के आँगन के चारों ओर कमरे बनाए जाते थे।
(c) घरों में एक अलग स्नानघर होता था।
(d) कुछ घरों में कुएँ होते थे।
उत्तर - (a)
व्याख्या- दिए गए कथनों में से कथन (a) हड़प्पाई नगरों की विशेषताओं में शामिल नहीं था, क्योंकि हड़प्पाई नगरों में घर सामान्यतः दो या तीन मंजिला नहीं, बल्कि एक या दो मंजिला होते थे। घर के आँगन के चारों ओर कमरे बनाए जाते थे। अधिकांश घरों में एक अलग स्नानघर होता था और कुछ घरों में कुएँ भी होते थे। कई नगरों में मकानों के बाहर नाले ढके हुए होते थे। इन्हें सावधानी से सीधी लाइन में बनाया जाता था। हर नाली में हल्की ढलान होती थी ताकि पानी आसानी से बह सके।
2. हड़प्पा सभ्यता स्थलों में निर्मित सड़कों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. मुख्य सड़क करीब दस मीटर चौड़ी होती थी।
2. सड़कों के दोनों ओर मकान बनाए जाते थे।
3. मकानों की नालियाँ सड़कों की नाली से मिली होती थी।
4. मुख्य सड़क को जनपथ कहा जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 2 
(b) 1, 2 और 3
(c) 2, 3 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4
उत्तर - (b)
व्याख्या- हड़प्पा सभ्यता स्थलों में निर्मित सड़कों के संबंध में कथन (1), (2) और (3) सत्य हैं।
हड़प्पा सभ्यता में सड़कें चौड़ी होती थीं। मुख्य सड़क करीब दस मीटर चौड़ी थी, जो आधुनिक नगरों की बड़ी-बड़ी सड़कों के बराबर है। सड़क के दोनों ओर मकान बनाए जाते थे। मकान ईंटों के बने होते थे और उनकी दीवारें मोटी तथा मजबूत होती थीं। दीवारों पर पलस्तर और रंग किया जाता था। मकानों की नालियाँ, सड़कों की नालियों से मिलती होती थीं।
कथन (4) असत्य है, क्योंकि मुख्य सड़क को जनपथ नहीं, बल्कि राजपथ कहा जाता था।
3. हड़प्पाई नगरीय योजना का सबसे महत्त्वपूर्ण स्थल विशाल स्नानागार था। इसके संबंध में कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) यह मोहनजोदड़ो तथा धौलावीरा में स्थित है।
(b) यह ईंटों के स्थापत्य का सुंदर उदाहरण है।
(c) स्नानागार में जल की आपूर्ति कुएँ से होती थी।
(d) विशाल स्नानागार धर्मानुष्ठान संबंधी स्नान के लिए बना था।
उत्तर - (a)
व्याख्या- दिए गए कथनों में से कथन (a) सत्य नहीं है, क्योंकि मोहनजोदड़ो एक मात्र हड़प्पाई स्थल है, जहाँ विशाल स्नानागार के प्रमाण मिले हैं।
विशाल स्नानागार ईंटों के स्थापत्य का सुंदर उदाहरण है। यह 11.88 मी लंबा, 7.01 मी चौड़ा और 2.43 मी गहरा है। दोनों सिरों पर तल तक सीढ़ियाँ बनी हुई थीं। बगल में कपड़े बदलने के लिए कमरे थे। स्नानागार का फर्श पक्की ईंटों का बना है। पास के कमरे में बड़ा-सा कुआँ है। इससे पानी निकालकर हौज में डाला जाता था। यह विशाल स्नानागार धर्मानुष्ठान संबंधी स्नान के लिए बनाया गया था।
4. निम्नलिखित में से कौन-सा प्राचीन नगर अपने उन्नत जल संचयन और प्रबंधन प्रणाली के लिए सुप्रसिद्ध है, जहाँ बाँधों की श्रृंखला का निर्माण किया गया था और संबद्ध जलाशयों में नहर के माध्यम से जल को प्रवाहित किया जाता था?
(a) धौलावीरा 
(b) कालीबंगा
(c) राखीगढ़ी
(d) रोपड़
उत्तर - (a)
व्याख्या- गुजरात के कच्छ जिले के भचाऊ में स्थित धौलावीरा एक ऐसा स्थल है, जो अपने उन्नत जल संचयन और प्रबंधन प्रणाली के लिए प्रसिद्ध था। धौलावीरा में जलाशयों का प्रयोग कृषि के लिए जल संचय हेतु किया गया था। बाँधों की श्रृंखला का निर्माण कर संबद्ध जलाशयों में नहर के माध्यम प्रवाहित किया जाता था। इसकी खोज आर. एस. बिष्ट ने वर्ष 1990-91 में की थी। यह हड़प्पा सभ्यता का चौथा विशालतम नगर है। जल
4. मोहनजोदड़ो की सबसे बड़ी इमारत अन्नागार, अनाज रखने का 3 कोठार था, इसके संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. यह 45.71 मी लंबा तथा 15.23 मी चौड़ा था।
2. इसका तलक्षेत्र लगभग 838.1025 वर्ग मीटर था।
3. मोहनजोदड़ो के अतिरिक्त हड़प्पा से भी कोठार के साक्ष्य मिले हैं।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 2 
(b) 2 और 3
(c) 1, 2 और 3
(d) केवल 3
उत्तर - (c)
व्याख्या- दिए गए सभी कथन सत्य हैं। मोहनजोदड़ो की सबसे बड़ी इमारत कोठार की लंबाई 45.71 मी तथा चौड़ाई 15.23 मी है। इसका तलक्षेत्र लगभग 838.1025 वर्ग मीटर है। हड़प्पा के कोठारों के दक्षिण में खुला फर्श है और उस पर दो कतारों में ईंट के वृत्ताकार चबूतरे बने हुए हैं।
ध्यातव्य है कि इनका उपयोग फसल की निराई के कार्य के लिए होता था, क्योंकि फर्श की दरारों में गेहूँ और जौ के दाने मिले हैं। ये अन्न कोठार नदी के किनारे बनाए गए थे। नदियों के सहारे सुदूर क्षेत्रों से अनाज को लाकर इनमें एकत्रित किया जाता था।
मोहनजोदड़ो के अतिरिक्त हड़प्पा से भी कोठार के साक्ष्य मिले हैं।
5. हड़प्पा सभ्यता के समकालीन किस सभ्यता के भवनों में धूप में सुखाई गई ईंटों का ही प्रयोग हुआ था ? 
(a) मेसोपोटामिया की सभ्यता 
(b) मिस्र की सभ्यता
(c) बेबीलोन की सभ्यता
(d) चीन की सभ्यता
उत्तर - (b)
व्याख्या- हड़प्पा सभ्यता के समकालीन मिस्र की सभ्यता के भवनों में धूप में सुखाई गई ईंटों का प्रयोग हुआ है। इसके विपरीत हड़प्पा सभ्यता में आग में पकाई हुई पक्की ईंटों का प्रयोग होता था। इसका प्रमाण मोहनजोदड़ो तथा हड़प्पा मिलता है।
मिस्र की सभ्यता का विकास नील नदी के किनारे हुआ था। यहाँ नील नदी के आस पास की मिट्टी से साँचे में ढालकर ईंटों को बनाया जाता था। इन ईंटों को आग में पकाने के बजाय धूप में सुखाकर प्रयोग में लाया जाता था। इन ईंटों से मकानों का निर्माण किया जाता था।

प्रमुख स्थल

1. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, रोपड़ तथा कालीबंगा सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थल हैं।
2. हड़प्पा के लोगों ने सड़कों तथा नालियों के जाल के साथ नियोजित शहरों का विकास किया।
3. हड़प्पा के लोगों को धातुओं के उपयोग का सही पता नहीं था।
उपर्युक्त में से कौन-से/सा कथन सत्य हैं/ है ?
(a) 1 और 2
(b) 1 और 3
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (a)
व्याख्या- दिए गए कथनों में कथन (1) और (2) सत्य हैं। मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, रोपड़ तथा कालीबंगा सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थल हैं। मोहनजोदड़ो तथा हड़प्पा वर्तमान में पाकिस्तान में अवस्थित हैं, जबकि रोपड़ (पंजाब) और कालीबंगा (राजस्थान) में स्थित है।
हड़प्पा की सड़कों तथा नालियों का निर्माण जाल (ग्रिड) की भाँति किया गया था, जो किसी नियोजित शहर के विकास के लिए महत्त्वपूर्ण है।
कथन (3) असत्य है, क्योंकि हड़प्पा के लोगों को विभिन्न धातुओं, धातुकर्म तथा धातुओं के उपयोग का पूरा ज्ञान था। वह सोने, चाँदी, ताँबा इत्यादि से परिचित थे। ताँबे के साथ टिन के मिश्रण से कांस्य निर्माण की भी उन्हें जानकारी थी।
2. मोहनजोदड़ो के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. इसका अर्थ मृतकों का टीला होता है।
2. यह पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित है।
3. गोदीबाड़ा, मोहनजोदड़ो की सबसे बड़ी विशेषता है।
4. मोहनजोदड़ो के निचले नगर में आवासीय भवनों के साक्ष्य मिलते हैं।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है /हैं?
(a) 1, 2 और 3 
(b) 1, 2, 3 और 4
(c) 1, 2 और 4
(d) केवल 4
उत्तर - (c)
व्याख्या- मोहनजोदड़ो के संबंध में कथन (1), (2), (4) सत्य हैं। सिंधी भाषा में मोहनजोदड़ो शब्द का अर्थ- मृतकों का टीला होता है। मोहनजोदड़ो पाकिस्तान के सिंध प्रांत में सिंधु नदी के दाएँ तट पर अवस्थित है। इस विशाल नगरीय संरचना के निम्न नगरों में आवासीय भवनों के अवशेष प्राप्त हुए हैं। कथन (3) असत्य है, क्योंकि गोदीबाड़ा (आधुनिक बंदरगाह) मोहनजोदड़ो में नहीं बल्कि, लोथल में स्थित था।
3. मोहनजोदड़ो की नालियों के संबंध में किसने कहा था कि "निश्चित रूप से यह अब तक खोजी गई सर्वथा संपूर्ण प्राचीन प्रणाली है?"
(a) मार्टिमर व्हीलर 
(b) आर. एल. ऐंटिन
(c) अर्नेस्ट मैके 
(d) दयाराम साहनी
उत्तर - (c)
व्याख्या- मोहनजोदड़ो की नालियों के संबंध में अनेंस्ट मैके ने कहा था कि “निश्चित रूप से यह अब तक खोजी गई सर्वथा संपूर्ण प्राचीन प्रणाली है।” ये नालियाँ सड़क के किनारे बनीं हुई थीं। इन पर मैनहॉल बना होता था, जिसके माध्यम से नालों की सफाई होती थी। घरों से निकलने वाली नालियाँ मुख्य सड़क पर बनी नालियों में मिलती थीं।
4. प्रत्येक घर में ईंटों से बना अपना एक स्नानघर होता था, जिसकी नालियाँ दीवार के माध्यम से सड़क की नालियों से जुड़ी थीं। कुछ घरों में दूसरे तल या छत पर जाने हेतु बनाई गई सीढ़ियों के अवशेष मिले हैं। कई आवासों में कुएँ थे, जो अधिकांशतः एक ऐसे कक्ष में बनाए गए थे जिसमें बाहर से आया जा सकता था और जिनका प्रयोग संभवतः राहगीरों द्वारा किया जाता था। यह किस नगर की संरचना का विशिष्ट विवरण प्रस्तुत करता है ?
(a) मोहनजोदड़ो
(b) लोथल
(c) रोपड़
(d) कोटदीजी
उत्तर - (a)
व्याख्या- प्रश्न में वर्णित विवरण का संबंध मोहनजोदड़ो से है। मोहनजोदड़ो का आवासीय विस्तार अन्य हड़प्पा स्थलों से विशिष्ट है। यहाँ आवासों का निर्माण एक विशिष्ट संरचना के अंतर्गत किया गया था, जिसमें घरों में स्नानघर तथा कुओं का निर्माण, इसकी विशिष्टता है।
5. धौलावीरा की वह अद्वितीय विशेषता कौन-सी है, जो अन्य किसी भी हड़प्पाई स्थल से नहीं मिलती ?
(a) नगर का त्रिस्तरीय विभाजन
(b) नगर का एकल स्वरूप
(c) नगर का द्विस्तरीय विभाजन
(d) उन्नत जल निकासी प्रणाली
उत्तर - (a)
व्याख्या- धौलावीरा का त्रिस्तरीय विभाजन इसकी अद्वितीय विशेषता है। त्रिस्तरीय विभाजन अन्य किसी भी हड़प्पा स्थल से नहीं मिलता। अन्य हड़प्पाकालीन नगर दो भागों (1) किला या नगर दुर्ग और (2) निचले नगर में विभाजित थे। किंतु इनसे भिन्न धौलावीरा तीन प्रमुख भागों में विभाजित था, जिनमें से दो भाग आयताकार किलेबंदी से पूरी तरह सुरक्षित थे, जबकि तीसरा भाग खुला हुआ था।
6. कालीबंगा के अतिरिक्त वह दूसरा हड़प्पाई स्थल कौन-सा है, जहाँ से दो सांस्कृतिक अवस्थाओं के साक्ष्य मिलते हैं?
(a) धौलावीरा 
(b) मोहनजोदड़ो
(c) बनावली
(d) चान्हूदड़ो
उत्तर - (c)
व्याख्या- कालीबंगा के अतिरिक्त बनावली वह दूसरा स्थल है, जहाँ से दो सांस्कृतिक अवस्थाओं के साक्ष्य मिलते हैं। पहली संस्कृति प्राक् हड़प्पा (हड़प्पा-पूर्व) तथा दूसरी संस्कृति हड़प्पाकालीन है। हरियाणा के हिसार जिले में स्थित इस पुरास्थल की खोज आर. एस. बिष्ट ने वर्ष 1973 में की थी। यहाँ से सिंधुकालीन मिट्टी के उत्कृष्ट बर्तन, सेलखड़ी की अनेक मुहरें और सिंधुकालीन विशिष्ट लिपि से युक्त मिट्टी की पकाई गई कुछ मुहरें मिली हैं। बनावली में जल निकासी प्रणाली, जो सिंधु सभ्यता की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता थी, का अभाव था।
7. हड़प्पाई स्थलों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. शोर्तुघई सुदूर अफगानिस्तान में स्थित था।
2. शोर्तुघई लाल रंग के लाजवर्द पत्थरों के लिए प्रसिद्ध था।
3. लोथल कार्नीलियन के लिए प्रसिद्ध था।
4. खेतड़ी अंचल राजस्थान में स्थित था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन असत्य है/हैं?
(a) केवल 1 
(b) केवल 2
(c) केवल 3
(d) 3 और 4 दोनों
उत्तर - (b)
व्याख्या- हड़प्पाई स्थलों के संबंध में कथन (2) असत्य है, क्योंकि शोर्तुघई लाल रंग के लाजवर्द पत्थरों के लिए नहीं वरन् नीले रंग के लाजव (लाजवर्दमणि) के लिए प्रसिद्ध था। इसका आयात हड़प्पावासी सुदूर अफगानिस्तान में स्थित शोर्तुघई से करते थे। यह हड़प्पा सभ्यता का एक व्यापारिक केंद्र था। यहाँ स्थित 'सर-ए-संग' की खानों से लाजवर्दमणि प्राप्त की जाती थी। इसके अतिरिक्त यहाँ से टिन तथा सोना भी प्राप्त किया जाता था।

आर्थिक, सामाजिक तथा धार्मिक जीवन

1. हड़प्पा सभ्यता के संदर्भ में निम्नलिखित में कौन-सा कथन असत्य है? 
(a) यहाँ के लोगों ने सर्वप्रथम कपास का उत्पादन किया था।
(b) हड़प्पाई लोगों को लोहे का ज्ञान था।
(c) इस सभ्यता के लोग तिल और सरसों का उत्पादन करते थे।
(d) हड़प्पा सभ्यता को कांस्ययुगीन सभ्यता भी कहा जाता है ।
उत्तर - (b)
व्याख्या- हड़प्पा सभ्यता के संदर्भ में कथन (b) असत्य है, क्योंकि हड़प्पा सभ्यता के लोगों को लोहे का ज्ञान नहीं था।
भारत में लोहे का ज्ञान उत्तर वैदिक काल (1000 ई. पू.- 800 ई.पू.) के लोगों को हुआ। हड़प्पा सभ्यता के लोग ताँबा, टिन, कांस्य, सोना आदि से परिचित थे। वे टिन तथा ताँबे को मिलाकर कांस्य का निर्माण करते थे। यही कारण है कि सिंधु घाटी सभ्यता को कांस्ययुगीन सभ्यता भी कहा जाता है।
2. हड़प्पा सभ्यता की कृषि प्रौद्योगिकी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. खेत जोतने के लिए लोहे के हल का प्रयोग होता था।
2. हल को बैलों के द्वारा चलाया जाता था।
3. कालीबंगा में जुते हुए खेत का साक्ष्य प्राप्त हुआ है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य नहीं है/हैं?
(a) केवल 1 
(b) 1 और 2
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (a)
व्याख्या- हड़प्पा सभ्यता की कृषि प्रौद्योगिकी के संदर्भ में कथन (1) सत्य नहीं है, क्योंकि खेत जोतने के लिए लोहे के हल का नहीं, बल्कि मिट्टी के हल का प्रयोग होता था। मिट्टी से बने हल के प्रतिरूपों की प्राप्ति बनावली से हुई है।
मुहरों पर वृषभ का रेखांकन तथा प्राप्त मृणमूर्तियों से ज्ञात होता है कि हड़प्पा निवासी खेत जोतने के लिए बैलों का प्रयोग करते थे। पुरातत्त्वविदों को कालीबंगा (राजस्थान) से जुते हुए खेत के साक्ष्य मिले हैं, जो हड़प्पा के आरंभिक स्तर से संबद्ध है।
3. मेसोपोटामिया से प्राप्त लेखों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए 
1. यहाँ के लेखों से दिलमुन, मगान तथ मेलुहा के आपसी संपर्कों की जानकारी मिलती है।
2. मेलुहा की पहचान हड़प्पा क्षेत्र से की गई है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) केवल 1
(b) 1 और 2
(c) 2 और 3
(d) केवल 2
उत्तर - (b)
व्याख्या- मेसोपोटामिया से प्राप्त लेखों के संदर्भ में दोनों कथन सत्य हैं। मेसोपोटामिया की सभ्यता सिंधु घाटी सभ्यता के समकालीन थी। यहाँ से प्राप्त तीसरी सहस्राब्दि ई.पू. के लेखों में दिलमुन, मगान तथा मेलुहा (संभवत: हड़प्पाई क्षेत्र) आपसी संपर्कों का विवरण मिलता है। मेलुहा की पहचान हड़प्पा सभ्यता के क्षेत्र से की गई है। इस स्थल से बाह्य व्यापार फारस की खाड़ी, मेसोपोटामिया, अफगानिस्तान एवं तुर्कमेनिस्तान से होता था।
4. निम्नलिखित में किस स्थान से मिली गोलाकार 'फारस की खाड़ी' प्रकार की मुहर पर हड़प्पाई चित्र अंकित मिले हैं?
(a) बहरीन
(b) ओमान
(c) बेबीलोनिया
(d) मेसोपोटामिया
उत्तर - (a)
व्याख्या- बहरीन से मिली गोलाकार 'फारस की खाड़ी' प्रकार की मुहर पर कभी-कभी हड़प्पाई चित्र अंकित मिलते हैं। बहरीन को मेसोपोटामियाई लेखों में दिलमुन कहा गया है।
दिलमुन के स्थानीय बाँट हड़प्पाई मानक का अनुसरण करते हुए प्रतीत होते हैं। इससे प्रमाणित होता है कि हड़प्पा का बहरीन के साथ व्यापारिक संबंध था।
'फारस की खाड़ी' प्रकार की मुहर का तात्पर्य ऐसी मुहर से है, जिसमें फारस की खाड़ी को चित्र के रूप में अंकित किया जाता था।
5. हड़प्पाई बाँटों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(a) बाँट का निर्माण सामान्यतः चर्ट नामक पत्थर से होता था।
(b) बाँट निशानरहित तथा घनाकार होते थे।
(c) इन बाँट का निचला मानदंड दशमलव प्रणाली पर आधारित था।
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर - (c)
व्याख्या- हड़प्पाई बाँटों के संबंध में कथन (c) सत्य नहीं है, क्योंकि हड़प्पाई बाँटों का ऊपरी मानदंड दशमलव प्रणाली पर आधारित था। हड़प्पा काल में विनिमय बाँटों की एक सूक्ष्म या परिशुद्ध प्रणाली द्वारा नियंत्रित था। ये बाँट सामान्यत: चर्ट पत्थर के बने होते थे तथा सामान्यतः ये किसी भी तरह के निशान रहित घनाकार होते थे। इन बाँटों के निचले मानदंड द्विआधारी ( 1, 2, 4, 8, 16, 32 इत्यादि गुणज में) थे, जबकि ऊपरी मानदंड दशमलव प्रणाली का अनुसरण करते थे।
6. हड़प्पा सभ्यता के अंतर्गत होने वाले व्यापार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए 
1. यहाँ विदेशी तथा आंतरिक दोनों व्यापार होते थे।
2. व्यापार के लिए धातु की मुहरों का प्रयोग होता था।
3. यहाँ का व्यापार वस्तु-विनिमय प्रणाली पर आधारित था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) 1, 2 और 3
(c) 1 और 3
(d) केवल 3
उत्तर - (c)
व्याख्या- हड़प्पा सभ्यता के अंतर्गत होने वाले व्यापार के संदर्भ में कथन ( 1 ) और (3) सत्य हैं। वस्तुओं के आदान-प्रदान को वस्तु विनिमय प्रणाली कहा जाता है। यह हड़प्पा सभ्यता के व्यापार का मुख्य आधार था। हड़प्पा सभ्यता में होने वाले आंतरिक तथा बाह्य व्यापार दोनों में वस्तु विनिमय प्रणाली का उपयोग होता था।
कथन (2) असत्य है, क्योंकि हड़प्पा सभ्यता में व्यापार के लिए धातु का नहीं, बल्कि वस्तुओं के आदान-प्रदान का प्रयोग होता था।
7. हड़प्पाई संस्कृति में पशुपालन के संबंध में कौन-सा कथन सत्य है?
(a) हड़प्पाई लोग बैल, भैंस, बकरी और भेड़ पालते थे।
(b) घोड़े के अस्तित्व का संकेत धौलावीरा से मिला है।
(c) कालीबंगा से घोड़े की अस्थि का अवशेष मिला है।
(d) हड़प्पाई लोग कूबड वाले साँड को अप्रिय मानते थे।
उत्तर - (a)
व्याख्या- हड़प्पाई संस्कृति में पशुपालन के संबंध में कथन (a ) सत्य है । हड़प्पाई लोग बैल, भैंस, बकरी, भेड़ आदि पालते थे। गाय और घोड़े को पालतू बनाए जाने का साक्ष्य हड़प्पा सभ्यता में नहीं मिलता है। घोड़े के अस्तित्व का संकेत मोहनजोदड़ो तथा लोथल की एक मूर्तिका (टेराकोटा) से मिलता है, लेकिन इसे बाह्य आक्रमण का प्रतीक माना गया है। यहाँ ऐसी कोई मूर्ति नहीं मिली है जिस पर गाय की आकृति खुदी हो, कूबड़ वाला साँड इस संस्कृति में विशेष महत्त्व रखता था।
8. निम्नलिखित में से कौन-से क्षेत्र शंख निर्मित वस्तुओं के निर्माण के प्रमुख केंद्र के रूप में प्रचलित थे ? 
(a) मुंडिगाक तथा मालवाड
(b) रंगपुर तथा बनावली
(c) नागेश्वर तथा बालाकोट
(d) राखीगढ़ी तथा कालीबंगन
उत्तर - (c)
व्याख्या- नागेश्वर (गुजरात) तथा बालाकोट (पाकिस्तान) दो ऐसे स्थल थे, जो शंख से निर्मित होने वाली वस्तुओं के लिए प्रसिद्ध थे। ये दोनों समुद्र (नदी) के किनारे स्थित थे। ये शंख बनी वस्तुओं, जिनमें चूड़ियाँ, करछियाँ तथा पच्चीकारी की वस्तुएँ सम्मिलित हैं, के निर्माण के विशिष्ट केंद्र थे। यहाँ से बनी वस्तुओं को दूसरी बस्तियों तक ले जाया जाता था।
9. निम्नलिखित में से कौन-सा तथ्य सिंधु घाटी के निवासियों के सामुद्रिक व्यापार से संबंधित नहीं है 
(a) लोथल से एक गोदी या डॉकयार्ड की खोज
(b) एक मोहर पर जलयान का चित्र
(c) आयातित वस्तुओं की बहुतायत में उपस्थिति
(d) पश्चिमी एशियाई देशों के साथ हड़प्पाकालीन लोगों के वाणिज्यिक संबंध
उत्तर - (b)
व्याख्या- विकल्प (b) में दिया गया तथ्य सिंधु घाटी के निवासियों के सामुद्रिक व्यापार से संबंधित नहीं है। सिंधु घाटी सभ्यता में एक मोहर पर जलयान का चित्र मिलना सामुद्रिक व्यापार से संबंधित गतिविधियों का द्योतक नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि सिंधु घाटी सभ्यता के लोग आंतरिक आवागमन के लिए जलयान (नाव) का प्रयोग करते थे।
लोथल से प्राप्त गोदी या डॉकयार्ड (बंदरगाह) का साक्ष्य, पश्चिमी एशियाई देशों से संपर्क तथा आयातित वस्तुओं की बहुतायत में हड़प्पाई स्थलों पर उपस्थिति इस बात का द्योतक है कि सिंधु सभ्यता के लोगों का सामुद्रिक व्यापार से संबंध था।
10. लगभग 7000 वर्ष पूर्व भारतीय उपमहाद्वीप में कपास की खेती के साक्ष्य सर्वप्रथम किस स्थान से प्राप्त हुए हैं?
(a) चोलिस्तान
(b) गणेश्वर
(c) मेहरगढ़
(d) नागेश्वरम
उत्तर - (c)
व्याख्या- भारतीय उपमहाद्वीप के मेहरगढ़ नामक स्थल से लगभग 7000 वर्ष पूर्व के कपास की खेती के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। मेहरगढ़ पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है। मेहरगढ़ पुरातात्त्विक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण स्थान है। यहाँ नवपाषाण युग के बहुत से अवशेष प्राप्त हुए हैं। यह विश्व के उन स्थानों में से एक है जहाँ प्राचीनतम कृषि एवं पशुपालन से संबंधित साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। इन अवशेषों से पता चलता है कि यहाँ के लोग कपास, गेहूँ एवं जौ की खेती करते थे तथा भेड़, बकरी एवं अन्य जानवर पालते थे।
11. हड़प्पा सभ्यता में शवाधान से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए 
1. यहाँ शवाधान के अंतर्गत मृतकों को गर्तों में दफनाया जाता था।
2. 1980 के दशक में बनावली से मिले एक शवाधान में सूक्ष्म मनकों से बना एक आभूषण प्राप्त हुआ था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 
(d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर - (a)
व्याख्या- हड़प्पा सभ्यता में शवाधान के संबंध में कथन (1) सत्य है।
हड़प्पा सभ्यता में शवाधान के अंतर्गत मृतकों को गर्तौ (गढ्डों) में दफनाए जाने का साक्ष्य मिला है। यह आंशिक समाधिकरण के अंतर्गत आता था। इस प्रक्रिया में शव को पशु-पक्षियों को खाने के लिए खुले में छोड़ दिया जाता था। उनके खाने के बाद बचे शेष भाग को गर्तों में दफना दिया जाता था।
कथन (2) असत्य है, क्योंकि 1980 के दशक के मध्य में बनावली से नहीं, बल्कि हड़प्पा से मिले एक शवाधान में सूक्ष्म मनकों से बना एक आभूषण मिला है।
12. फेयॉन्स के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. फेयॉन्स के छोटे पात्र कीमती माने जाते थे |
2. फेयॉन्स के पात्र सुगंधित द्रव्यों के पात्रों के रूप में प्रयोग होते थे।
3. फेयॉन्स के पात्र सभी स्थलों से प्राप्त हुए हैं।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) केवल 1
(d) केवल 3
उत्तर - (a)
व्याख्या- फेयॉन्स के संबंध में कथन (1) और (2) सत्य हैं ।
फेयॉन्स के छोटे पात्र संभवतः कीमती माने जाते थे, क्योंकि इन्हें बनाना कठिन था। विलासिता संबंधी वस्तु में फेयॉन्स के पात्र का प्रयोग सुगंधित द्रव्यों के पात्रों के रूप में किया जाता था।
कथन (3) असत्य है, क्योंकि फेयॉन्स के पात्र सभी स्थलों से प्राप्त न होकर अधिकांशतः मोहनजोदड़ो और हड़प्पा से मिले हैं।
13. हड़प्पा संस्कृति के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है? 
(a) यहाँ का समाज मातृसत्तात्मक था।
(b) यूनीकॉर्न सबसे महत्त्वपूर्ण पशु था।
(c) राखीगढ़ी में मंदिर का साक्ष्य प्राप्त हुआ है।
(d) मोहनजोदड़ो से पुजारी की मूर्ति मिली है।
उत्तर - (c)
व्याख्या- हड़प्पा संस्कृति के संदर्भ में कथन (c) असत्य है, क्योंकि किसी भी हड़प्पाई स्थल से मंदिर का साक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ। भारतीय संस्कृति में मंदिर बनाने का प्रथम प्रमाण गुप्त काल से मिलता है। पुरास्थलों से प्राप्त मिट्टी की मूर्तियों, पत्थर की छोटी मूर्तियों, मुहरों आदि पर चित्रित चिह्नों से यह परिलक्षित होता है कि हड़प्पा में धार्मिक विचारधारा मातृदेवी, पशुपतिनाथ, योनि, लिंग, वृक्ष आदि की पूजा की जाती थी। धार्मिक दृष्टिकोण का आधार इहलौकिक तथा व्यावहारिक अधिक था।
14. हड़प्पा सभ्यता में प्रचलित परिधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. स्त्रियाँ छोटा घाघरा पहनती थीं, जो कमरबंद से कसा रहता था।
2. वस्त्र सूती एवं ऊनी दोनों तरह के पहने जाते थे।
3. आभूषणों का प्रयोग केवल महिलाएँ करती थीं।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) 1 और 3
(b) 1 और 2
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (b)
व्याख्या- हड़प्पा सभ्यता में प्रचलित परिधानों के संबंध में कथन (1) और (2) सत्य हैं। हड़प्पा सभ्यता के लोग सूत कातकर वस्त्रों का निर्माण करते थे। ये वस्त्र ऊनी तथा सूती दोनों प्रकार के होते थे। महिलाएँ छोटा घाघरा पहनती थीं, जो कमरबंद से कसा रहता था। वे अपने बालों को भाँति-भाँति से गूंथती और कँघों से सजाती थीं।
कथन (3) असत्य है, क्योंकि हड़प्पा सभ्यता में आभूषणों का प्रयोग पुरुष एवं महिलाएँ दोनों करते थे। आभूषण क्वार्ट्ज और सीप के बने होते थे। अमीर वर्ग के लोग सोने और चाँदी के बने आभूषण पहनते थे।
15. सिंधु घाटी के पुरुष देवता के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए 
1. उसके सिर पर तीन सींग हैं।
2. वह पद्मासन की मुद्रा में बैठा है।
3. मुहर पर चित्रित देवता को पशुपति महादेव बताया गया है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) केवल 1
(b) 1 और 2 
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (d)
व्याख्या- सिंधु घाटी के पुरुष देवता के संबंध में दिए गए सभी कथन सत्य हैं। हड़प्पा सभ्यता में एक पुरुष देवता का साक्ष्य मिला है। उसके सिर पर तीन सींग हैं। वह एक योगी की ध्यान मुद्रा में एक टाँग पर दूसरी टाँग डाले बैठा (पद्मासन लगाए) दिखाया गया है। उसके चारों ओर एक हाथी, एक बाघ और एक गैंडा है। आसन के नीचे एक भैंसा है और पाँवों के समीप दो हिरण हैं। मुहरों पर चित्रित देवता की आकृति को पशुपति महादेव बताया गया है।

कला एवं शिल्प

1. हड़प्पा सभ्यता के शिल्प उत्पादन में मनकों के निर्माण में प्रयुक्त होने वाला कार्नीलियन कैसा होता था ? 
(a) सुंदर लाल रंग का 
(b) सुंदर काला रंग का
(c) सुंदर हरे रंग का
(d) सुंदर पीले रंग का
उत्तर - (a)
व्याख्या- हड़प्पा सभ्यता के शिल्प उत्पादन में मनकों के निर्माण में प्रयोग होने वाला कार्नीलियन सुंदर लाल रंग का होता था। कार्नीलियन एक प्रकार का पत्थर होता था। इसका प्रयोग मुख्य रूप से मनके बनाने के लिए किया जाता था। इस काल में मनके बनाने के लिए कार्नीलियन के अतिरिक्त जैस्पर, स्फटिक, क्वार्ट्ज, सेलखड़ी, शंख, पकी मिट्टी आदि का भी प्रयोग होता था। कुछ मनके दो या दो से अधिक पत्थरों को आपस में जोड़कर बनाए जाते थे।
2. हड़प्पा सभ्यता की लिपि के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. हड़प्पाई लिपि का सबसे पुराना नमूना वर्ष 1853 में मिला था।
2. संपूर्ण हड़प्पाई लिपि वर्ष 1923 में प्रकाश में आ गई थी।
3. हड़प्पाई लिपि पूरी तरह से सुमेरी भाषा से प्रेरित है।
4. यह एक भावचित्रात्मक लिपि है। 
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है /हैं?
(a) 1, 2 और 4 
(b) 2, 3 और 4
(c) 2 और 4
(d) 1 और 4
उत्तर - (a) 
व्याख्या- हड़प्पा सभ्यता की लिपि के संबंध में कथन (1), (2) और (4) सत्य हैं। हड़प्पाई सभ्यता के निवासियों ने लेखन-कला का आविष्कार किया था। यद्यपि हड़प्पाई लिपि का सबसे पुराना नमूना वर्ष 1853 में मिला था और वर्ष 1923 तक पूरी लिपि प्रकाश में आ गई थी, किंतु वह अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी है। यह एक भावचित्रात्मक लिपि है। इस लिपि में कुल मिलाकर 250 से 400 तक चित्राक्षर (पिक्टोग्राफ) हैं और चित्र के रूप में लिखा हर अक्षर किसी ध्वनि, भाव या वस्तु का सूचक है।
कथन (3) असत्य है, क्योंकि हड़प्पाई लिपि पूरी तरह से सुमेरी भाषा से प्रेरित नहीं है। कुछ लोग सुमेरियाई भाषा से संबंध जोड़ते हैं, परंतु इसका संतोषप्रद परिणाम नहीं निकला।
3. हड़प्पा संस्कृति के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है? 
(a) काँसे की नर्तकी हड़प्पा मूर्तिकला का सर्वश्रेष्ठ नमूना है।
(b) काँसे की नर्तकी की वस्त्र सज्जा उत्कृष्ट है।
(c) कुछ प्रतिमाएँ प्रस्तर की बनी होती थीं।
(d) सेलखड़ी की एक मूर्ति के बाएँ कंधे तथा दाएँ हाथ के नीचे अलंकृत वस्त्र है।
उत्तर - (b)
व्याख्या- हड़प्पा संस्कृति के संबंध में कथन (b) असत्य है, क्योंकि हड़प्पा सभ्यता में मोहनजोदड़ो से, जो काँसे की मूर्ति मिली है उस पर वस्त्र सज्जा नहीं है, बल्कि पूरी मूर्ति गले में पड़े हार के अतिरिक्त नग्न अवस्था में है। काँसे की यह मूर्ति मूर्तिकला का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। इसे नृत्य की अवस्था में बनाया गया है।
4. हड़प्पाई मृद्भांड के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए 
1. हड़प्पाई लोग कुम्हार के चाक का उपयोग कर मृद्भांड बनाते थे।
2. हड़प्पाई मृद्भांडों पर वृत्त या वृक्ष की आकृतियाँ मिलती हैं।
3. किसी भी हड़प्पाई मृद्भांड पर मनुष्य की आकृति का साक्ष्य नहीं मिला है ।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है /हैं?
(a) 1 और 3 
(b) 1 और 2
(c) केवल 2
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (b)
व्याख्या- हड़प्पाई मृद्भांड के संबंध में कथन (1) और (2) सत्य हैं। हड़प्पाई लोग कुम्हार के चाक का उपयोग करके मृद्भांड निर्मित करते थे तथा इन लोगों के अनेक बर्तनों पर विभिन्न रंगों की चित्रकारी देखने को मिलती है। हड़प्पाई मृद्भांडों पर सामान्यतः वृत्त या वृक्ष की आकृतियाँ देखने को मिलती हैं। कथन (3) असत्य है, क्योंकि कुछ हड़प्पाई मृद्धांडों पर मनुष्य की आकृति भी दिखाई देती है। इसका साक्ष्य मोहनजोदड़ो से प्राप्त मृद्भांड पर देखने को मिलता है।

सभ्यता का पतन

1. हड़प्पा सभ्यता के पतन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए 
1. हड़प्पा सभ्यता लगभग 2000 वर्षों तक जीवित रही।
2. 1500 ई. के आस-पास हड़प्पा सभ्यता का पतन हो गया।
3. पारिस्थितिकी परिवर्तन इस सभ्यता के पतन का मुख्य कारण था।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2 
(c) 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
उत्तर - (c)
व्याख्या- हड़प्पा सभ्यता के पतन के संबंध में कथन (2) और (3) सत्य हैं, परंतु 1 सत्य नहीं है, क्योंकि हड़प्पा सभ्यता 2000 वर्ष तक नहीं, अपितु 1000 वर्ष तक जीवित रही थी।
कार्बन डेटिंग पद्धति के अनुसार इसका काल 2350 ई. पू. से 1750 ई. पू. तक निर्धारित किया गया है। हड़प्पा सभ्यता बाद में उत्तर हड़प्पा संस्कृति में बदल गई। पुरातत्त्वविद् आरेल स्टाइन तथा ए.एन. घोष ने पर्यावरणीय परिस्थितियों तथा पारिस्थितिकी में बदलाव को हड़प्पा सभ्यता के पतन का सबसे बड़ा कारण माना।
2. हड़प्पा सभ्यता के पतन के लिए बाह्य व आर्यों के आक्रमण को किसने जिम्मेदार माना है?
(a) सर मार्टिमर व्हीलर
(b) आरेल स्टाइन 
(c) जॉन मार्शल
(d) के यू. आर. कनेडी 
उत्तर - (a)
व्याख्या- सर मार्टिमर व्हीलर ने हड़प्पा सभ्यता के पतन के लिए बाह्य व आर्यों के आक्रमण को जिम्मेदार माना है। मार्टिमर व्हीलर ने लिखा है- "ऋग्वेद में 'पुर' शब्द का उल्लेख है जिसका अर्थ है प्राचीर, किला या गढ़। आर्यों के युद्ध के देवता इंद्र को पुरंदर अर्थात् गढ़ ध्वंसक कहा गया है।" इसका अर्थ है कि आर्यों ने इंद्र के नेतृत्व में आक्रमण कर हड़प्पा सभ्यता के किलों को ध्वस्त कर दिया, जिसके कारण इस सभ्यता का पतन हो गया।
3. उत्तर हड़प्पा संस्कृति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
1. इसमें शैलीगत एकरूपता समाप्त हो गई।
2. हड़प्पाई शैली में भारी विविधता आ गई।
3. इस संस्कृति में पत्थर और ताँबे के औजारों का उपयोग होता था।
उपर्युक्त में कौन-सा/से कथन सत्य है / हैं?
(a) 1 और 2 
(b) केवल 3
(c) 1, 2 और 3
(d) 2 और 3
उत्तर - (c)
व्याख्या- उत्तर हड़प्पा संस्कृति के संबंध में दिए गए सभी कथन सत्य हैं।
उत्तर हड़प्पा संस्कृति का चरण लगभग 2000 से 1200 ई. पू. के बीच माना जाता है। इस चरण के आने से हड़प्पा कालीन सभ्यता का स्वतंत्र अस्तित्व धीरे-धीरे विलुप्त हो गया।
इस चरण की प्रमुख विशेषता थी कि शैलीगत एकरूपता समाप्त हो गई साथ ही हड़प्पाई शैली में भारी विविधता आ गई। इस संस्कृति में पत्थर और ताँबे के औजारों का उपयोग बढ़ा तथा कांस्य का उपयोग कम हो गया।
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